411 REFERENCE · Wikipedia
काठात
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
यह भारत की प्राचीन क्षत्रिय चौहान कुल की शाखा है। पृथ्वीराज चौहान के वंश मैं राव हरराज चौहान हुए जिन्हे काठा(कठोर वीर) की पदवी दी गई और इन्ही के वंशज काठात(काठा + अत) कहलाए । यह समुदाय 4 ज़िलो मे बहुतायत मे हे ये लोग सल्तनत काल में मुस्लिमों द्वारा महिलाओं और लड़कियों को अगवा व उठा लिया जाता था । जिससे तुर्कों से अपनी बहन बेटियों को बचाने के लिये हरराज जी चौहान(काठा जी) व गजराज जी चौहान(घोडा जी) ने सुल्तान से संधि की। हालाकि इस बात कोई भी ऐतिहासिक प्रामाणिक स्रोत प्राप्त नहीं होता हैं ।
ये तीनो मुख्यत: इस्लाम धर्म की सुन्नते हैं लेकिन ये लोग अपनी प्राचीन संस्कृति से इतना जुडे हुए हैं। यह शाखा अब हिन्दू और इस्लाम मैं ब हीट चुकी हैं परंतु इनके नाम व ये त्यौहार मनाते हैं जैसे होली, दिवाली, राखी के साथ साथ कुछ लोग मुस्लिमों का मुख्य त्यौहार ईद भी मनाते है । समाज मे एकता ज़रूरी है ओर इसी ताने बाने को बनाने के लिए हमेशा संघर्षरत रहते हैं ।
काफी विचार-विमर्श के बाद काठाजी के वंशजो ने अपने में ही चार भाग बना लिये, जो डांगोँ के नाम से जानी जाती हैं। डांग का अर्थ क्षेत्र से हैं। काठातो की डांगों में व अन्य डांगों यह अन्तर है कि काठातो की डांगे उस क्षेत्र के मूल पुरुष ठाकर हरराज जी के चार पुत्रों के नाम से है । कई काठात वंशज अब अपनी इच्छा से अपने आप को मुस्लिम बताते है। परंतु कुछ काठात उप शाखा के लोग अपनी मूल सनातन हिंदू संस्कृति को मानते हैं।हिंदू काठात चौहान शाखा का हिसा हैं ।