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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कालीकानंद अवधूत

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कालीकानंद अवधूत Statue of Kalikananda Abadhuta at Uddharanpur 03.jpg दुलाल चंद्र मुखर्जी 2 नवंबर 1910 भवानीपुर, कलकत्ता, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत 13 अप्रैल 1978 चिनसुराह, पश्चिम बंगाल, भारत भारतीय लेखक मरुतीर्थ हिंगलाजउद्धारणपुरेर घाट दुलाल चंद्र मुखर्जी (2 नवंबर 1910—13 अप्रैल 1978), जिन्हें उनके उपनाम कालीकानंद अवधूत से जाना जाता है, एक भारतीय उपन्यासकार, संत और यात्री थे, जो बंगाली भाषा में लिखते थे। जीवनी अवधूत का जन्म बंगाल प्रेसीडेंसी के भवानीपुर, कलकत्ता (अब कोलकाता) में अनाथनाथ मुखर्जी के घर हुआ था। उनका असली नाम दुलाल चंद्र मुखर्जी था, लेकिन उन्होंने अपना उपनाम कालीकानंद अवधूत रख लिया।সংসার থেকে পালাতে গিয়ে অবধূত যেন বিশ্বসংসারের বাসিন্দা হয়ে গেলেন https://www.anandabazar.com/patrika/a-special-write-up-on-novelist-kalikananda-abadhut-1.1177263 28 August 2021 www.anandabazar.com bn अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद वे उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में संत बन गए। वे अपनी पुस्तक मरुतीर्थ हिंगलाज के लिए सबसे ज़्यादा लोकप्रिय थे, जो हिंगलाज की उनकी तीर्थयात्रा के वास्तविक जीवन के अनुभव पर आधारित है।Gupta Swarupa https://books.google.com/books?id=jjE9DwAAQBAJ&dq=Kalikananda+Abadhut&pg=PA351 Cultural Constellations, Place-Making and Ethnicity in Eastern India, c. 1850-1927 1 November 2017 BRILL 978-90-04-34976-6 en उनके यात्रा वृतांत पर आधारित फिल्म मरुतीर्थ हिंगलाज भी 1959 में रिलीज़ हुई थी।https://books.google.com/books?id=jjE9DwAAQBAJ&dq=kalikananda+abadhut+marutirtha&pg=PA351 Cultural Constellations, Place-Making and Ethnicity in Eastern India Swarupa Gupta November 2017 BRILL 9789004349766 19 April 2018http://www.kff.in/film.php?f=436 Marutirtha Hinglaj 19 April 2018 https://web.archive.org/web/20180409043826/http://www.kff.in/film.php?f=436 9 April 2018 dead उन्होंने उपनिषदों की पुस्तक का संपादन किया। उन्होंने एक और उपन्यास उद्धारणपुरेर घाट लिखने से पहले अनुभव इकट्ठा करने के लिए कुछ साल उद्धारणपुर, बर्दवान में बिताए।https://books.google.com/books?id=CukvAAAAIAAJ&q=Abadhut+Uddharanpur Indian Writing Today 1969 Nirmala Sadanand Publishers en अवधूत ने अपने निजी जीवन में तंत्र का भी अभ्यास किया।সম্পাদক সমীপেষু: মুক্ত কণ্ঠকে এত ভয়! https://www.anandabazar.com/editorial/letters-to-the-editor/state-machinery-always-feared-telugu-poet-varavara-rao-1.1184166 https://web.archive.org/web/20210308140028/https://www.anandabazar.com/editorial/letters-to-the-editor/state-machinery-always-feared-telugu-poet-varavara-rao-1.1184166 8 March 2021 11 June 2025 live उन्होंने चिनसुराह में रुद्रचंडी मठ की स्थापना की और अपनी मृत्यु तक वहीं अपना अंतिम जीवन व्यतीत किया।Prohor তাঁর সাহিত্যে মৃত্যু এক চরিত্র: সাহিত্য ও জীবনদর্শনে অবধূত - Prohor https://www.prohor.in/index.php/a-special-write-up-on-abadhut 11 June 2025 তাঁর সাহিত্যে মৃত্যু এক চরিত্র: সাহিত্য ও জীবনদর্শনে অবধূত - Prohor en 11 जून 2025 https://web.archive.org/web/20250611055712/https://www.prohor.in/index.php/a-special-write-up-on-abadhut dead thumb|कालीकानंद अवधूत की मूर्ति, चिनसुरा, हुगली में उनके घर के बगल में वे गुप्त रूप से क्रांतिकारी कार्यों से जुड़े थे। उन्होंने दो दशकों तक खुद को अलग-अलग जगहों पर छिपाए रखा। उन जगहों के नाम आज भी अज्ञात हैं। उन्होंने बांग्लादेश के फरीदपुर, भारत के बाहर बर्मा (अब म्यांमार), मध्य प्रदेश के उज्जैन में छिपकर कई जगहें बिताईं। वे उत्तर प्रदेश में काशी के कालीमंदिर के पुजारी भी थे और उन्होंने अपने जीवन के कई साल मुर्शिदाबाद के जाजन, बर्दवान के उद्धारणपुर घाट में भी बिताए। उन्होंने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगलाज माता मंदिर का भी दौरा किया। कृतियाँ बहुब्रीही बशीकरण देबरीगन हिंगलाजेर पारे उद्धारणपुरेर घाट कालीतीर्थ कालीघाट मरुतीर्थ हिंगलाज कौशिकी कनारा पियारी नीलकंठ हिमालय सच्चा दरबार सप्तस्वर पिनाकिनी टप्पा ठुंगरी सुभया भवतु सुमेरु कुमेरु स्वामीघातिनी कान पेते रोई मोन माने ना सुख शांति वालोबासा सन्दर्भ श्रेणी:कोलकाता के लेखक श्रेणी:1910 जन्म लोग श्रेणी:1978 मृत्यु लोग श्रेणी:20वीं सदी के बंगाली श्रेणी:बंगाली भाषा के उपन्यासकार श्रेणी:20वीं सदी के भारतीय पुरुष लेखक श्रेणी:भारतीय उपन्यासकार