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411 समाचार
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पाबूजी

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पाबूजी Pabuji ka phad 03.JPG पाबूजी की फड़ में चित्रित पाबूजी ; राष्ट्रीय संग्रहालय, नयी दिल्ली में रखी एक फड़ चित्रकला राठौड़ वंश धाँधल जी कोलू देचू हिन्दू right|thumb|250px|पाबूजी मंदिर, कोलू पाबूजी राजस्थान के लोक-देवता हैं जिनकी पूजा राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों, गुजरात और सिंध (पाकिस्तान) तक होती है।Thapar Romila Somanatha: The Many Voices of a History 2005 Verso 978-1-84467-020-8 152 https://books.google.co.in/books?id=PnBMFaGMabYC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA152&dq=Pabuji&pg=PA152#v=onepage&q=Pabuji&f=false 8 दिसम्बर 2021 en इन्हें पशुओं के रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है और राजस्थान में ऊँटो के बीमार होने पर इनकी पूजा होती है। कथा प्रचलित वाचिक कथा के अनुसार पाबूजी राठौड़ का जन्म कोलूगढ़ के दुर्गपति के घर हुआ था। यह कथा देवल नामक एक चारणी के साथ शुरू होती है जो मारवाड़ के इलाके में गायें पालती और चराती थी। कथा में देवल को अद्वितीय सुंदरी और शक्ति का अवतार माना गया है। देवल के पास काले रंग की एक घोड़ी है जिसका नाम कालिमी (या केसर कालमी) है। जयाल के सामंत जींद राव को कालिमी घोड़ी पसंद आ जाती है वह उसे प्राप्त करने का प्रयास करता है। सुरक्षा के लिए देवल कोलूगढ़ के सामंत के यहाँ चली आती है जो उसे अपनी पुत्री की तरह शरण देते हैं साथ ही उसकी गायों की रक्षा करने का वचन भी देते हैं। यहाँ आकर देवल देवी पाबूजी को प्रेम करने लगती है और विवाह करना चाहती है। इसी दौरान जींद राव देवल की गायें हँका ले जाता है। देवल अपनी कालिमी घोड़ी पाबूजी को दे देती है और पाबूजी अपने आदमियों के साथ देवल की गायों को छुड़ाने जाते हैं। युद्ध में पाबूजी की मृत्यु हो जाती है।Heesterman J. C. Hoek Albert W. Van den Kolff Dirk H. A. Oort M. S. Ritual, State, and History in South Asia: Essays in Honour of J.C. Heesterman 1992 BRILL 978-90-04-09467-3 https://books.google.co.in/books?id=EtwtSZwyWpgC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA84&dq=Pabuji&pg=PA84#v=onepage&q=Pabuji&f=false 8 दिसम्बर 2021 enKothiyal Tanuja Nomadic Narratives: A History of Mobility and Identity in the Great Indian Desert 2016 Cambridge University Press 978-1-107-08031-7 232-234 https://books.google.co.in/books?id=be-7CwAAQBAJ&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA234&dq=Pabuji&pg=PA232#v=onepage&q=Pabuji&f=false 8 दिसम्बर 2021 en समकालीन संदर्भ पाबूजी की कथा का संकलन और इसे लिपिबद्ध करने का प्रयास जॉन डी. स्मिथ द्वारा दि एपिक ऑफ़ पाबूजी के नाम से किया गया। यह 1991 में कैंब्रिज युनिवर्सिटी प्रेस से प्रकाशित हुआ। इसका एक संक्षिप्त वर्शन वर्ष 2005 में छपा जो वर्तमान में प्राप्य है। उक्त कथा का एक विस्तृत विवेचन ए. हिल्टबेटल द्वारा किया गया है।Hiltebeitel Alf Rethinking India's Oral and Classical Epics: Draupadi among Rajputs, Muslims, and Dalits 2009 University of Chicago Press 978-0-226-34055-5 https://books.google.co.in/books?id=MMFdosx0PokC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA110&dq=Pabuji&pg=PA88#v=onepage&q=Pabuji&f=false 8 दिसम्बर 2021 en कोलू नामक गाँव, जिसे कोलू पाबूजी भी कहते हैं, वर्तमान फलौदी के पास है। हाल ही में राजस्थान सरकार ने कोलू फलौदी में पाबूजी के पैनोरमा की स्थापना की है।मुख्यमंत्री ने किया लोक देवता पाबूजी के पेनोरमा का लोकार्पण https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/jodhpur-news/news-chief-minister-launches-panorama-of-lok-devta-pabuji-news-hindi-1-336609-KKN.html 8 दिसम्बर 2021 ख़ास ख़बर 25 अगस्त 2018 hi सन्दर्भ इन्हें भी देखें पाबूजी की फड़ फड़ चित्रकला लोक देवता बाहरी कड़ियाँ The epic of Pābūjī (पाबूजी महाकाव्य) अथ वात पाबूजीरी लिख्यते In Praise of Death: History and Poetry in Medieval Marwar लोकदेवता पाबूजी पैनोरमा, कोलू, जोधपुर; राजस्थान सरकार की वेबसाइट पर। श्रेणी:राजस्थान के लोक देवता श्रेणी:राजस्थान की संस्कृति