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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अकाली फूला सिंह

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अकाली फूला सिंह निहंग (जन्म फूला सिंह ; 1 जनवरी 1761 - 14 मार्च 1823) एक अकाली निहंग सिख नेता थे। वह 19वीं शताब्दी की शुरुआत में खालसा शहीदां मिसल Sikh Studies, Book 7 Singh H.S. 2008 Hemkunt Press 9788170102458 Fifth New Delhi 36 के एक सैनिक और बुद्ध दल के प्रमुख थे। वह सिख खालसा सेना में एक वरिष्ठ सेनापति और सेना के अनियमित निहंग के कमांडर भी थे। उन्होंने अमृतसर में सिख मिसलों को एकजुट करने में भूमिका निभाई। वह अंग्रेजों से नहीं डरते थे अंग्रेजों ने कई बार उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया लेकिन वह कभी सफल नहीं हुए। अपने बाद के वर्षों के दौरान उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह के प्रत्यक्ष सलाहकार के रूप में सिख साम्राज्य के लिए सेवा की। वह नौशेरा की लड़ाई में अपनी शहादत तक कई प्रसिद्ध लड़ाइयों में एक सेनापति बने रहे। उनकी एक बात और खास थी कि वह किसी भी चीज को पंथ के ऊपर नहीं रहने देते थे, उनका इतना खौफ था कि अंग्रेज उनसे थर-थर कांपते थे।Baba Phoola Singh Ji 'Akali' Singh Prem 1926 Lahore Book Shop 81-7647-110-0 4th Ludhiana 36 वे सर्वविदित थे और एक विनम्र अद्वितीय नेता और उच्च चरित्र वाले प्रतिष्ठित योद्धा थे। Temple of Spirituality or Golden Temple of Amritsar Singh Jagjit 1998 Mittal Publications New Delhi 43 Stories from Sikh History: Book-VII Singh Kartar 1975 Hemkunt Press New Delhi 102 वह गुरमत और खालसा पंथ के मूल्यों को बनाए रखने के अपने प्रयास के लिए भी जाने जाते थे। अकाली फूला सिंह अकाल तख़्त के जत्थेदार बुढा दल के जत्थेदार Statue of Akali Phula Singh in Amritsar 26 September 2018.jpg श्री अमृतसर साहिब,पंजाब,भारत मैं अकाली फूला सिंह की प्रतिमा जस्सा सिंह अहलुवालिया अकाली हनुमान सिंह अकाली नैना सिंह अकाली हनुमान सिंह फूला सिंह 1761 01 01 yes गाँव सीहां, संगरूर,दल खालसा(आज पंजाब, भारत) yes 1823 03 14 1761 01 01 पीर सबक, सिख साम्राज्य(आज ख़ैबर पख़्तूनख़्वा, पाकिस्तान) सरदार ईशार सिंह(पिता)बीबी हरि कौर(माता)भाई संत सिंह(भाई) माननीय जत्थेदार साहिब सिख साम्राज्य 1800-1823 जत्थेदार प्रारंभिक जीवन अकाली फूला सिंह का जन्म जनवरी 1761 में सरदार ईशर सिंह के घर हुआ था। उनके पिता एक किसान थे, उनके पिता की मृत्यु के बाद अकाली फूला सिंह जो अभी भी युवा थे और उनके बड़े भाई बाबा संत सिंह की देखभाल महंत बलराम ने की और बाद मैं उनकी माँ की सलाह के तहत उन्हें अकाली बाबा नैना सिंह के पास आनंदपुर साहिब भेज दिया गया। बाबा नैना सिंह से ही उन्होंनें अमृत छका। उन्होंने कम उम्र मैं ही काफी गुरबाणी को याद कर लिया, उन्होंन आस-पास के सिखों को गुरबाणी के अर्थ समझाने शुरु किए, उन्होंन बाबा नैणा सिंह जी की शहीदां मिसल के लिए बहुत सी लड़ाईयां लड़ी। श्री अमृतसर साहिब की देखभाल thumb|श्री अकाल तख़्त साहिब १९वी सदी का अकाली सिखों का केंद्रअकाली नैणा सिंह जी के पास रहते अकाली फूल सिंह को पता लगा की, गुरुनगरी मैं गुरु मर्यादा पूरी तरह से नहीं चल रही, ना वहां का प्रबंध अच्छे तरीके से हो रहा है, तो वह श्री आनन्दपुर साहिब से अमृतसर चले गए। वहां उन्होंने फिर से गुरुमर्यादा को चलाया। उन्होंने वाहा काफी बदलाव किए जैसे: (1) अकाल तख़्त साहिब का हर सेवादार अमृतधारी सिख होना अनिवार्य है। (2) मुग़ल साम्राज्य के काल मैं योद्धाओं की वारें(धार्मिक गीत) सुबह-शाम गाईं जाएंगे। (3) अकाल तख़्त साहिब परिसर मैं किसी का निवास नहीं रहेगा। (4) अकाल तख़्त साहिब का हुक्म अटल हुक्म हुआ करेगा। (5) जो उसको नहीं माना करेगा, उसको या तो सज़ा दी जाएगी या गैर-सिख ऐलान दिया जाएगा।https://books.google.com/books/about/The_Akal_Takht.html?id=0hFDAAAAYAAJ#akali%20phula%20singh%20punish%20maharaja%20ranjit%20singh The Akal Takht Dilagīra Harajindara Siṅgha 1980 Punjabi Book Company en (5) किसी भी सिख(चाहे वो कोई भी हो) की निजी लड़ाई को अकाल तख़्त साहिब पर नहीं सुलझाया जाएगा।http://www.panjabdigilib.org/webuser/searches/downloadPdf.jsp?file=BK-000577.pdf&docid=1742 Akali Phula Singh Jarnail Ankhila 1988 Punjabi digital library अक्तूबर 2026 InternetArchiveBot