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411 समाचार
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धारा १५१

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अनुच्छेद 151 (भारत का संविधान) मार्च 2025 भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-१५१ शांतिभंग की आशंका के लिए उपयोग में लाई जाती है। यदि मारपीट के विषय में चिकित्सीय परीक्षण में गंभीर प्रकृति की चोट या आयुध के प्रयोग की चर्चा होती है तो सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर फिर से गिरफ्तारी होती है। इस धारा का प्रयोग पुलिस जनसामान्य को नियंत्रित करने के दौरान सबसे ज्यादा करती है। कभी-कभी इस धारा के अंतर्गत गांव के गांव मजिस्ट्रेट के सामने भेज दिए जाते हैं। इस धारा के अंतर्गत पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी को थाने से ही जमानत का प्रावधान होता है। यह एक ऐसा मनमाना प्रावधान है, जिसके अंतर्गत अपराध हुआ नहीं और पुलिस के मुताबिक ये कहा जाता है कि 'अपराध किया जा सकता था'। इस प्रावधान के चलते कभी भी, किसी को भी गिरफ्तार करके हवालात में बन्द कर देना पुलिस के बायें हाथ का खेल है। आजादी से पहले यह कानून अंग्रेजों द्वारा उनके विरुद्ध आवाज उठाने वाले भारतीयों को कुचलने के लिये बनाया गया था। वहीं 2010 में संशोधित हुए कानून के माध्यम से यह भी बताया कि धारा 151 में गिरफ्तार आरोपी को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास भेजा जा रहा है। जहां से जेल भेज दिया जाता है। जबकि 151 में किसी भी आरोपी को जेल भेजना अवैधानिक तो है ही जेल संचालक को भी जेल में रखने का अधिकार नहीं है। धारा 151 कहाँ लगायी जाती है- दो पक्षों में मनमोटाव के समय, चुनावी घोषणा के समय जब ये लगे कि हिंसा भड़ सकती है, कहीं भी शांति व्यवस्था भंग करने के समय मारपीट के समय। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ दंड प्रक्रिया संहिता की प्रसिद्ध धारा 151 का व्यावहारिक रूप समझिए श्रेणी:दंड प्रक्रिया संहिता की धाराएँ