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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

खपरैल और चौके

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right|thumb|खपरैल से निर्मित छत thumb|right|300px|१५वीं सदी के मध्य में किया गया यरुशलम का रॉक का गुम्बद। खपरैल एवं चौके (टाइल) प्रायः छतों, फर्श, एवं दीवारों को ढकने के काम आते हैं। इन्हें किसी सिरैमिक, पत्थर, धातु या कांच जैसी कठिनाई से घिसने वाले पदार्थ से बनाया जाता है। प्रकार right|thumb|तुर्की की नीली टाइलें भारतवर्ष में मिट्टी की पकाई हुई खपरैल तथा चौके तीन प्रकार के बनाए जाते है : 1-छत के लिए विभिन्न प्रकार की खपरैलें तथा चौके 2-फर्श के लिए चौके 3-नाली के लिए नाल तथा अर्धगोल खपरैल इनके अलावा चीनी मिट्टी के ग्लेज किए हुए तथा सीमेंट के चौके फर्श तथा दीवाल पर जड़ने के लिए भी बनाए जाते हैं, जो कई आकृतियाँ तथा रंगों के होते हैं। छत छाने के लिए ऐसबेस्टस तथा अन्य वस्तुओं के भी तरह तरह के चौके अथवा टाइलें भिन्न भिन्न आवश्यकताओं के लिए प्रयोग में आती हैं जैसे संगमर्मर, स्लेट, टेराकोटा इत्यादि के चौके। निर्माण मिट्टी के चौके और खपरैल प्राय: उसी प्रकार बनाई जाती हैं जैसे ईंट; पर इनके बनाने में अधिक मेहनत और ध्यान देना पड़ता है। इन खपरैलों तथा चौकों की तरह तरह की डिजाइनों के लिए फर्मा बहुत सावधानी से तथा सच्चा बनाना पड़ता है और उनके पकाने और निकासी में बहुत सावधानी रखनी पड़ती है। छत छाने के लिए स्थानीय देशी खपरैल से लेकर स्यालकोट, इलाहाबाद, मँगलौर इत्यादि में अच्छे मेल की खपरैल काफी बनती थीं, पर इनका प्रचलन अब धीरे धीरे सीमेंट कंक्रीट तथा प्रबलित ईंटों (reinforecd-bricks) के कारण कम होता जा रहा है। देशी खपरैलों में दो प्रकार की खपरैलें अधिक प्रचलित हैं। एक में दो अधगोली नालीदार खपरैलें एक दूसरे पर औंधाकर रख दी जाती हैं। दूसरे में दो चौकोर चौके, जिनके किनारे, थोड़ा सा ऊपर मुड़े रहते हैं, अगल बगल रखकर उन दोनों के ऊपर एक अधगोली खपरैल उलटकर रख दी जाती है, जिससे दोनों चौकों के बीच की जगह ढक जाए। करीब 1,200 खपरैलें 100 वर्गफुट छत छाने के लिए अपेक्षित होती हैं। मँगलोर चौके चिपटे होते हैं। इनमें आपस में एक दूसरे को फँसाने के लिए खाँचा बना रहता है। करीब 130 दक्षिणी चौके या 100 कानपुरी चौके 100 वर्गफुट छत छाने के लिए आवश्यक होते हैं। इलाहाबादी टाइल से एकहरी या दोहरी छवाई की जाती है। उभरे हुए भाग (ridge), कटि प्रदेश (hip) तथा निम्न भूमि (valley) के लिए विशेष टाइलें बनानी पड़ती हैं। नाली के लिए जो टाइल या चौके बनते हैं, या तो चिपटेबनाकर सुखाने तथा पकाने से पहले लकड़ी के गोल फर्मे पर मोड़ लिए जाते हैं, अथवा आरंभ में ही अधगोले के आकार में मशीन द्वारा ढाल लिए जाते हैं। ग्लेज़ किए हुए चीनी मिट्टी के चौके महँगे होते हैं और स्नानागार अस्पताल तथा अन्य स्थानों पर सौंदर्य तथा सफाई के विचार से फर्श या दीवाल में सीमेंट द्वारा बैठा दिए जाते हैं। अब सीमेंट के मोजे़इक टाइल भी बहुत बनने लगे हैं और इनका प्रचलन दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। ये सब कई डिजाइनों तथा रंगों के बनते हैं और इनसे बने फर्श बहुत सुंदर लगते हैं। इन्हें भी देखें निर्माण सामग्री बाहरी कड़ियाँ Ceramic Tile History श्रेणी:मृत्तिका शिल्प श्रेणी:भवन निर्माण श्रेणी:सिविल अभियान्त्रिकी श्रेणी:कुट्टिम * श्रेणी:छत खपरैल श्रेणी:फ़र्श श्रेणी:छतें श्रेणी:सजावटी कलाएँ श्रेणी:मोज़ेक