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भारत के चार धाम
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भारतीय धर्मग्रंथों में बद्रीनाथ, द्वारिका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम की चर्चा चार धाम के रूप में की गई है।https://khabar.ndtv.com/news/faith/where-is-original-char-dham-in-india-know-why-devotees-visits-char-dham-1647200 कहां है असली चार धाम तीर्थ, जानिए क्यों करते हैं श्रद्धालु इन स्थानों की यात्रा 16 जुलाई 2017 22 अगस्त 2019 https://web.archive.org/web/20190822085705/https://khabar.ndtv.com/news/faith/where-is-original-char-dham-in-india-know-why-devotees-visits-char-dham-1647200 deadIndia 300 right चार धामों के स्थान India 19.48 85.49 Font Awesome 5 solid vihara.svg
जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा) right
India 9.28 79.31 Font Awesome 5 solid vihara.svg रामेश्वरम (तमिलनाडु) bottom
India 22.23 68.97 Font Awesome 5 solid vihara.svg द्वारिकापुरी (गुजरात) bottom
India 30.744729 79.4907558 Font Awesome 5 solid vihara.svg बद्रीनाथ top
बद्रीनाथ (उत्तराखंड)
द्वारिकापुरी (गुजरात)
जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा)
रामेश्वरम (तमिलनाडु)
शंकराचार्य के चार मठ
हिंदू परंपरा में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख मठों को अद्वैत वेदांत परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में माना जाता है। इन मठों का संबंध शंकराचार्य परंपरा से जोड़ा जाता है और इन्हें दार्शनिक तथा धार्मिक शिक्षाओं के प्रसार में प्रभावशाली माना गया है।
गुरु-शिष्य परंपरा के संदर्भ में यह मान्यता भी प्रचलित है कि इन मठों के माध्यम से वेदांत परंपरा का संरक्षण और प्रसार हुआ। हालांकि, हिंदू धर्म में विभिन्न संप्रदायों और परंपराओं के अंतर्गत अन्य गुरु-परंपराएँ भी विद्यमान हैं।
शंकराचार्य जी ने इन मठों की स्थापना के साथ-साथ उनके मठाधीशों की भी नियुक्ति की, जो बाद में स्वयं शंकराचार्य कहलाए। जो व्यक्ति किसी भी मठ के अंतर्गत संन्यास लेता हैं वह दसनामी संप्रदाय में से किसी एक सम्प्रदाय पद्धति की साधना करता है। ये चार मठ निम्न हैं:-
श्रृंगेरी शरदा मठ
श्रृंगेरी शारदा मठ भारत के दक्षिण में कर्नाटक में स्थित है। श्रृंगेरी शारदा मठ के अन्तर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद सरस्वती, भारती तथा पुरी सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। इस मठ का तीर्थ रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग है।
इस मठ का महावाक्य 'अहं ब्रह्मास्मि' है तथा मठ के अन्तर्गत 'यजुर्वेद' को रखा गया है। इस मठ के प्रथम मठाधीश आचार्य सुरेश्वरजी थे, जिनका पूर्व में नाम मण्डन मिश्र था। इस मठ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामीश्री भारती तीर्थ जी महाराज है। ये बहुत बड़े संस्कृत के विद्वान एवं वेद वेदांगो में निपुण है,उनके उत्तराधिकारी स्वामी श्री विधुशेखर भारती जी है।
गोवर्धन मठ
गोवर्धन मठ भारत के पूर्वी भाग में उड़ीसा राज्य के जगन्नाथ पुरी में स्थित है। गोवर्धन मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'आरण्य' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है।
इस मठ का महावाक्य है 'प्रज्ञानं ब्रह्म' तथा इस मठ के अंतर्गत 'ऋग्वेद' को रखा गया है। इस मठ के प्रथम मठाधीश आदि शंकराचार्य के प्रथम शिष्य पद्मपाद हुए। वर्तमान मे इस पीठ के आचार्य श्री शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज जी महाभाग है। ये बडे तपस्वी एवं दिव्य युग पुरुष है।।
शारदा मठ
शारदा (कालिका) मठ गुजरात में द्वारकाधाम में स्थित है। शारदा मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'तीर्थ' और 'आश्रम' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। इस मठ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी हैं यह बहुत ज्ञानी और सरल स्वभाव के है।
इस मठ का महावाक्य है 'तत्त्वमसि' तथा इसके अंतर्गत 'सामवेद' को रखा गया है। शारदा मठ के प्रथम मठाधीश हस्तामलक (पृथ्वीधर) थे। हस्तामलक शंकराचार्य जी के प्रमुख चार शिष्यों में से एक थे।
ज्योतिर्मठ
उत्तरांचल के बद्रीनाथ में स्थित है ज्योतिर्मठ। ज्योतिर्मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद 'गिरि', 'पर्वत' एवं ‘सागर’ सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है जिससे उन्हें उक्त संप्रदाय का संन्यासी माना जाता है। इस मठ का महावाक्य 'अयमात्मा ब्रह्म' है। इस मठ के अंतर्गत अथर्ववेद को रखा गया है। ज्योतिर्मठ के प्रथम मठाधीश आचार्य तोटक बनाए गए थे। इस मठ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी है जो कि धर्म और गौ माता की रक्षा के लिए बहुत ही संघर्ष कर रहे है,इनका स्वभाव धार्मिक क्षेत्र में कठोर ,जन सामान्य के लिए सरल और शास्त्रों के बहुत बड़े ज्ञानी है,इन्होंने राम जन्मभूमि के केश में गवाही दी जिससे यह सिद्ध हो पाया कि राम जन्मभूमि वही था।
आदि शंकरचार्य ने केवल चार मठों का ही निर्माण किया था भारत के चार दिशाओं में, चार वेदों के अनुसार मठों का निर्माण किया था, अन्य उक्त मठों का प्रणाम नहीं मिलता है।https://www.gnttv.com/religion/story/who-are-the-4-shankaracharyas-the-heads-of-which-monasteries-are-given-this-title-know-here-shringeri-govardhan-jyotirmath-sharda-math-747136-2024-01-13 Ayodhya Ram Mandir: कौन हैं 4 शंकराचार्य, किन मठों के मठाधीश को दी जाती है यह उपाधि, जानिए राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान क्यों हो रही चर्चा? Good News Today hi 2026-03-03
उक्त चार मठों के अलावा तमिलनाडु में स्थित काँची मठ को भी शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया हुआ माना जाता है किंतु यह विवादित माना गया है। वर्तमान में इस मठ के मठाधीश स्वामी जयेंद्र सरस्वती है।
उक्त मठों तथा इनके अधीन उपमठों के अंतर्गत संन्यस्त संतों को गुरु बनाना या उनसे दीक्षा लेना ही हिंदू धर्म के अंतर्गत माना जाता है। यही हिंदुओं की संत धारा मानी गई है।
सन्दर्भ
श्रेणी:हिन्दू धर्म के चार धाम