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शोभाबाजार राजबाड़ी
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शोभाबाजार राजबाड़ी या शोभाबाजार राजमहल, भारत के शहर कोलकाता में स्थित शोभाबाजार राजसी परिवार का महल है।
इतिहास
महाराजा नबकृष्ण देब (1737–97), ने 35 वर्ष की आयु में शोभाबाजार राजबाड़ी का निर्माण कराया था। नबकृष्ण देब ने अपनी शुरुवात एक आम कुलीन व्यक्ति के तौर पर की थी पर ब्रिटिशों से वफादारी के चलते उन्होने काफी संपत्ति अर्जित की, विशेष रूप से जब उन्होने नवाब सिराजुद्दौला के पतन में ब्रिटिशों की सहायता की।
अपने जीवनकाल के दौरान राजा नबकृष्ण देब ने दो घरों का निर्माण किया। राजा नबकृष्ण देब द्वारा बनाई गयी पहली इमारत 35 राजा नबकृष्ण स्ट्रीट के उत्तरी किनारे पर स्थित 'शोभाबाजार राजबाड़ी' या "बाघ तोला बाड़ी" है, जो विरासत में उनके दत्तक पुत्र जो उनके बड़े भाई गोपीमोहन का बेटा था, और उनके स्वयं के पुत्र को मिली।
उनके द्वारा बनवाई गयी दूसरी इमारत 33 राजा नबकृष्ण स्ट्रीट पर स्थित छोटो राजबाड़ी'' है जिसका निर्माण उन्होने उनके स्वयं के पुत्र राजकृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में करवाया था, और जो विरासत में राजकृष्ण और उसके वंशजों को मिली। आज इस भवन में राजा नबकृष्ण देब की दसवीं पीढी के सदस्य सुरोत्तमो कृष्ण देब रहते हैं।
मुख्य घटनाएं
1757 में प्लासी की लड़ाई में अंग्रेजों द्वारा सिराजुद्दौला को हराने के बाद राजा नबकृष्ण देब ने बड़े पैमाने पर दुर्गा पूजा का आयोजन किया था और रॉबर्ट क्लाइव और वारेन हेस्टिंग्स को आमंत्रित किया था।
1897 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद से लौटने पर स्वामी विवेकानंद का पहला नागरिक स्वागत, राजा बिनॉय देब बहादुर द्वारा यहीं पर आयोजित किया गया था।
चित्र दीर्घा
सन्दर्भ