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जगन्नाथ मन्दिर, पुरी
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Temple-Jagannath.jpg पुरी में जगन्नाथ मंदिर कलिंग राजा अनंतवर्मन् चोडगंग देव जीर्णोद्धारक - 1174 ई. में ओडिआ शासक अनंग भीम देव श्री जगन्नाथ मंदिर 12वीं शताब्दी भगवान जगन्नाथ कलिंग वास्तु पुरी, ओडिशापुरी का श्री जगन्नाथ मन्दिर एक हिन्दू मन्दिर है, जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। वैदिक कॉन्सेप्ट्स https://web.archive.org/web/20080103041038/http://shrifreedom.com/VyasaSJC/lessons1VedicConcepts.htm 3 जनवरी 2008 "संस्कृत में एक उदाहरणार्थ शब्द से जगत का अर्थ ब्रह्माण्ड निकला। An example in Sanskrit is seen with the word Jagat which means universe. In Jaganath, the ‘t’ becomes an ‘n’ to mean lord (nath) of the universe."सिंबल ऑफ नेश्नलिज़्म https://web.archive.org/web/20120214040555/http://www.hvk.org/articles/0802/85.html 14 फ़रवरी 2012 "The fame and popularity of "the Lord of the Universe: Jagannath" both among the foreigners and the Hindu world " इस मन्दिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मन्दिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है।http://www.indhistory.com/hindu-temple/hindu-temple-jagannath-temple.html जगन्नाथ मंदिर 2006-09-12 https://web.archive.org/web/20081025063307/http://www.indhistory.com/hindu-temple/hindu-temple-jagannath-temple.html 25 अक्तूबर 2008 dead इस मन्दिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। इसमें मन्दिर के तीनों मुख्य देवता, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भ्राता बलभद्र और भगिनी सुभद्रा तीनों, तीन अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथों में विराजमान होकर नगर की यात्रा को निकलते हैं। श्री जगन्नथपुरी पहले नील माघव के नाम से पुजे जाते थे। जो भील सरदार विश्वासु के आराध्य देव थे। अब से लगभग हजारों वर्ष पुर्व भील सरदार विष्वासु नील पर्वत की गुफा के अन्दर नील माघव जी की पुजा किया करते थे । मध्य-काल से ही यह उत्सव अतीव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसके साथ ही यह उत्सव भारत के ढेरों वैष्णव कृष्ण मन्दिरों में मनाया जाता है, एवं यात्रा निकाली जाती है। http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,892784,00.html Juggernaut 2006-09-12 https://web.archive.org/web/20080415185919/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,892784,00.html 15 अप्रैल 2008 live यह मंदिर वैष्णव परम्पराओं और सन्त रामानन्द से जुड़ा हुआ है। यह गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के लिये खास महत्व रखता है। इस पन्थ के संस्थापक श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान की ओर आकर्षित हुए थे और कई वर्षों तक पुरी में रहे भी थे।http://vedabase.net/cc/madhya/1/247/en1 भाक्तिवेदांत वेद बेस 2006-09-12 https://web.archive.org/web/20070930180800/http://vedabase.net/cc/madhya/1/247/en1 30 सितंबर 2007 dead
मन्दिर का उद्गम
thumb|मंदिर के शिखर पर स्थित चक्र और ध्वज। चक्र सुदर्शन चक्र का प्रतीक है और लाल ध्वज भगवान जगन्नाथ इस मंदिर के भीतर हैं, इस का प्रतीक है।
गंग वंश के हाल ही में अन्वेषित ताम्र पत्रों से यह ज्ञात हुआ है, कि वर्तमान मन्दिर के निर्माण कार्य को कलिंग राजा अनन्तवर्मन चोडगंग देव ने आरम्भ कराया था।http://www.jagannathpuri.blessingsonthenet.com/ जगन्नाथ मंदिर accessdate 13 अगस्त 2008 https://web.archive.org/web/20070223002840/http://www.jagannathpuri.blessingsonthenet.com/ 23 फ़रवरी 2007 dead । मन्दिर के जगमोहन और विमान भाग इनके शासन काल (१०७८ - ११४८) में बने थे। फिर सन ११९७ में जाकर ओडिआ शासक अनंग भीम देव ने इस मन्दिर को वर्तमान रूप दिया था।http://orissagov.nic.in/e-magazine/Orissareview/may2006/engpdf/33-36.pdf लॉर्ड जगन्नाथ: सिंबल ऑफ युनिटी एण्ड इंटीग्रेशन 2006-05-01 https://web.archive.org/web/20070927212533/http://orissagov.nic.in/e-magazine/Orissareview/may2006/engpdf/33-36.pdf 27 सितंबर 2007 dead .
मन्दिर में जगन्नाथ अर्चना सन १५५८ तक होती रही। इस वर्ष अफगान जनरल काला पहाड़ ने ओडिशा पर हमला किया और मूर्तियां तथा मंदिर के भाग ध्वंस किए और पूजा बन्द करा दी, तथा विग्रहो को गुप्त मे चिलिका झील मे स्थित एक द्वीप मे रखागया। बाद में, रामचन्द्र देब के खुर्दा में स्वतन्त्र राज्य स्थापित करने पर, मन्दिर और इसकी मूर्तियों की पुनर्स्थापना हुई।.
मन्दिर से जुड़ी कथाएँ
इस मन्दिर के उद्गम से जुड़ी परम्परागत कथा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की इन्द्रनील या नीलमणि से निर्मित मूल मूर्ति, एक अगरु वृक्ष के नीचे मिली थी। यह इतनी चकचौंध करने वाली थी, कि धर्म ने इसे पृथ्वी के नीचे छुपाना चाहा। मालवा नरेश इंद्रद्युम्न को स्वप्न में यही मूर्ति दिखाई दी थी। तब उसने कड़ी तपस्या की और तब भगवान विष्णु ने उसे बताया कि वह पुरी के समुद्र तट पर जाये और उसे एक दारु (लकड़ी) का लठ्ठा मिलेगा। उसी लकड़ी से वह मूर्ति का निर्माण कराये। राजा ने ऐसा ही किया और उसे लकड़ी का लठ्ठा मिल भी गया। उसके बाद राजा को विष्णु और विश्वकर्मा बढ़ई कारीगर और मूर्तिकार के रूप में उसके सामने उपस्थित हुए। किन्तु उन्होंने यह शर्त रखी, कि वे एक माह में मूर्ति तैयार कर देंगे, परन्तु तब तक वह एक कमरे में बन्द रहेंगे और राजा या कोई भी उस कमरे के अन्दर नहीं आये। माह के अंतिम दिन जब कई दिनों तक कोई भी आवाज नहीं आयी, तो उत्सुकता वश राजा ने कमरे में झाँका और वह वृद्ध कारीगर द्वार खोलकर बाहर आ गया और राजा से कहा, कि मूर्तियाँ अभी अपूर्ण हैं, उनके हाथ अभी नहीं बने थे। राजा के अफसोस करने पर, मूर्तिकार ने बताया, कि यह सब दैववश हुआ है और यह मूर्तियाँ ऐसे ही स्थापित होकर पूजी जायेंगीं। तब वही तीनों जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ मन्दिर में स्थापित की गयीं।
चारण परम्परा मे माना जाता है की यहाँ पर भगवान द्वारिकाधिश के अध जले शव आये थे जिन्हे प्राचि मे प्रान त्याग के बाद समुद्र किनारे अग्निदाह दिया गया (किशनजी, बल्भद्र और शुभद्रा तिनो को साथ) पर भरती आते ही समुद्र उफान पर होते ही तिनो आधे जले शव को बहाकर ले गया ,वह शव पुरि मे निकले ,पुरि के राजा ने तिनो शव को अलग अलग रथ मे रखा (जिन्दा आये होते तो एक रथ मे होते पर शव थे इसिलिये अलग रथो मे रखा गया)शवो को पुरे नगर मे लोगो ने खुद रथो को खिंच कर घुमया और अंत मे जो दारु का लकडा शवो के साथ तैर कर आयाथा उशि कि पेटि बनवाके उसमे धरति माता को समर्पित किया, आज भी उश परम्परा को नीभाया जाता है पर बहोत कम लोग इस तथ्य को जानते है, ज्यादातर लोग तो इसे भगवान जिन्दा यहाँ पधारे थे एसा ही मानते है, चारण जग्दम्बा सोनल आई के गुरु पुज्य दोलतदान बापु की हस्तप्रतो मे भी यह उल्लेख मिलता है ,
http://www.templenet.com/Orissa/puri.html जगन्नाथ टेम्पल ऐट पुरी 2006-09-12 https://web.archive.org/web/20100102085247/http://templenet.com/Orissa/puri.html 2 जनवरी 2010 dead.
बौद्ध मूल
कुछ इतिहासकारों का विचार है कि इस मन्दिर के स्थान पर पूर्व में एक बौद्ध स्तूप होता था। उस स्तूप में गौतम बुद्ध का एक दाँत रखा था। बाद में इसे इसकी वर्तमान स्थिति, कैंडी, श्रीलंका पहुँचा दिया गया।http://orissagov.nic.in/e-magazine/Orissareview/july2003/englishchpter/OldJagannathTemplePuriBuddhistSomavamsiConnections.pdf ओल्डेस्ट जगन्नाथ टेम्पल ऑफ पुरी- द बुद्धिस्ट एण्द सोमवासी कनेक्शंस 2006-09-12 https://web.archive.org/web/20080229064513/http://orissagov.nic.in/e-magazine/Orissareview/july2003/englishchpter/OldJagannathTemplePuriBuddhistSomavamsiConnections.pdf 29 फ़रवरी 2008 dead इस काल में बौद्ध धर्म को वैष्णव सम्प्रदाय ने आत्मसात कर लिया था और तभी जगन्नाथ अर्चना ने लोकप्रियता पाई। यह दसवीं शताब्दी के लगभग हुआ, जब उड़ीसा में सोमवंशी राज्य चल रहा था।http://www.orissa.gov.in/e-magazine/Orissareview/jul2005/engpdf/jainism_budhism_in_joga-culture.pdf जैनिज़्म ऎण्ड बुद्धज़्मइन जगन्नाथ कल्चर 2003-07-01 https://web.archive.org/web/20080229064513/http://www.orissa.gov.in/e-magazine/Orissareview/jul2005/engpdf/jainism_budhism_in_joga-culture.pdf 29 फ़रवरी 2008 live
महाराजा रणजीत सिंह, महान सिख सम्राट ने इस मन्दिर को प्रचुर मात्रा में स्वर्ण दान किया था, जो कि उनके द्वारा स्वर्ण मंदिर, अमृतसर को दिये गये स्वर्ण से कहीं अधिक था। उन्होंने अपने अन्तिम दिनों में यह वसीयत भी की थी, कि विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा, जो विश्व में अब तक सबसे मूल्यवान और सबसे बड़ा हीरा है, इस मन्दिर को दान कर दिया जाये। लेकिन यह सम्भव ना हो सका, क्योकि उस समय तक, ब्रिटिश ने पंजाब पर अपना अधिकार करके, उनकी सभी शाही सम्पत्ति जब्त कर ली थी। वर्ना कोहिनूर हीरा, भगवान जगन्नाथ के मुकुट की शान होता।कोहिनूर हीरा#सम्राटों के रत्न - आंतरिक कड़ी
मंदिर का ढांचा
thumb|230px| पुरी में रथयात्रा, जेम्स फर्गुसन द्वारा एक चित्र/पेंटिंग
मंदिर का वृहत क्षेत्र 400000 ft2 m2 में फैला है और चहारदीवारी से घिरा है। कलिंग शैली के मंदिर स्थापत्यकला और शिल्प के आश्चर्यजनक प्रयोग से परिपूर्ण, यह मंदिर, भारत के भव्यतम स्मारक स्थलों में से एक है।http://www.odissi.com/orissa/jagannath.htm श्री जगन्नाथ 2006-09-12 https://web.archive.org/web/20080724193307/http://www.odissi.com/orissa/jagannath.htm 24 जुलाई 2008 dead
मुख्य मंदिर वक्ररेखीय आकार का है, जिसके शिखर पर विष्णु का श्री सुदर्शन चक्र (आठ आरों का चक्र) मंडित है। इसे नीलचक्र भी कहते हैं। यह अष्टधातु से निर्मित है और अति पावन और पवित्र माना जाता है। मंदिर का मुख्य ढांचा एक 214 ft m ऊंचे पाषाण चबूतरे पर बना है। इसके भीतर आंतरिक गर्भगृह में मुख्य देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। यह भाग इसे घेरे हुए अन्य भागों की अपेक्षा अधिक वर्चस्व वाला है। इससे लगे घेरदार मंदिर की पिरामिडाकार छत और लगे हुए मण्डप, अट्टालिकारूपी मुख्य मंदिर के निकट होते हुए ऊंचे होते गये हैं। यह एक पर्वत को घेर ेहुए अन्य छोटे पहाड़ियों, फिर छोटे टीलों के समूह रूपी बना है।http://www.cultureholidays.com/Temples/jagannath.htm जगन्नाथ टेम्पल, उड़ीसा 2006-09-20 https://web.archive.org/web/20080517022040/http://www.cultureholidays.com/Temples/jagannath.htm 17 मई 2008 dead
मुख्य मढ़ी (भवन) एक 20 ft m ऊंची दीवार से घिरा हुआ है तथा दूसरी दीवार मुख्य मंदिर को घेरती है। एक भव्य सोलह किनारों वाला एकाश्म स्तंभ, मुख्य द्वार के ठीक सामने स्थित है। इसका द्वार दो सिंहों द्वारा रक्षित हैं।http://www.odissi.com/orissa/jagannath.htm श्री जगन्ना टेम्पल 2006-09-20 https://web.archive.org/web/20080724193307/http://www.odissi.com/orissa/jagannath.htm 24 जुलाई 2008 dead
देवता
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा, इस मंदिर के मुख्य देव हैं। इनकी मूर्तियां, एक रत्न मण्डित पाषाण चबूतरे पर गर्भ गृह में स्थापित हैं। इतिहास अनुसार इन मूर्तियों की अर्चना मंदिर निर्माण से कहीं पहले से की जाती रही है। सम्भव है, कि यह प्राचीन जनजातियों द्वारा भी पूजित रही हो।http://www.kamat.com/kalranga/nindia/orissa/jaganath.htm Juggernaut of Puri 2006-09-20 https://web.archive.org/web/20081025141655/http://www.kamat.com/kalranga/nindia/orissa/jaganath.htm 25 अक्तूबर 2008 dead
उत्सव
यहां विस्तृत दैनिक पूजा-अर्चनाएं होती हैं। यहां कई वार्षिक त्यौहार भी आयोजित होते हैं, जिनमें सहस्रों लोग भाग लेते हैं। इनमें सर्वाधिक महत्व का त्यौहार है, रथ यात्रा, जो आषाढ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को, तदनुसार लगभग जून या जुलाई माह में आयोजित होता है। इस उत्सव में तीनों मूर्तियों को अति भव्य और विशाल रथों में सुसज्जित होकर, यात्रा पर निकालते हैं।http://www.templenet.com/Orissa/puri.html जगन्नाथ टेम्पल ऐट पुरी 2006-09-20 https://web.archive.org/web/20100102085247/http://templenet.com/Orissa/puri.html 2 जनवरी 2010 dead।यह यात्रा ५ किलोमीटर लम्बी होती है। इसको लाखो लोग शरीक होते है।
वर्तमान मंदिर
thumb|200px| थेन्नणगुर का पाण्डुरंग मंदिर, पुरी के जगन्नाथ मंदिर के समान ही बनाया गया है
आधुनिक काल में, यह मंदिर काफी व्यस्त और सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों और प्रकार्यों में व्यस्त है। जगन्नाथ मंदिर का एक बड़ा आकर्षण यहां की रसोई है। यह रसोई भारत की सबसे बड़ी रसोई के रूप में जानी जाती है। इस विशाल रसोई में भगवान को चढाने वाले महाप्रसाद को तैयार करने के लिए ५०० रसोईए तथा उनके ३०० सहयोगी काम करते हैं।
इस मंदिर में प्रविष्टि प्रतिबंधित है। इसमें गैर-हिन्दू लोगों का प्रवेश सर्वथा वर्जित है।http://www.iskcon.com/culture/holy_places/j_puri.html जगन्नाथपुरी 2006-09-12 https://web.archive.org/web/20060715031144/http://www.iskcon.com/culture/holy_places/j_puri.html 15 जुलाई 2006 dead पर्यटकों की प्रविष्टि भी वर्जित है। वे मंदिर के अहाते और अन्य आयोजनों का दृश्य, निकटवर्ती रघुनंदन पुस्तकालय की ऊंची छत से अवलोकन कर सकते हैं। http://www.planetware.com/puri/jagannath-temple-ind-oris-jag.htm पुरी - जगन्नाथ टेम्पल 13 अगस्त 2008 https://web.archive.org/web/20120306041508/http://www.planetware.com/puri/jagannath-temple-ind-oris-jag.htm 6 मार्च 2012 dead इसके कई प्रमाण हैं, कि यह प्रतिबंध, कई विदेशियों द्वारा मंदिर और निकटवर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और श्रेणिगत हमलों के कारण लगाये गये हैं। बौद्ध एवं जैन लोग मंदिर प्रांगण में आ सकते हैं, बशर्ते कि वे अपनी भारतीय वंशावली का प्रमाण, मूल प्रमाण दे पायें।http://www.odissi.com/orissa/jagannath.htm जगन्नाथ टेम्पल 2006-09-12 https://web.archive.org/web/20080724193307/http://www.odissi.com/orissa/jagannath.htm 24 जुलाई 2008 dead मंदिर ने धीरे-धीरे, गैर-भारतीय मूल के लेकिन हिन्दू लोगों का प्रवेश क्षेत्र में स्वीकार करना आरम्भ किया है। एक बार तीन बाली के हिन्दू लोगों को प्रवेश वर्जित कर दिया गया था, जबकि बाली की ९०% जनसंख्या हिन्दू है।पुरी तेम्पल्क ऐट हिन्दूग गैफे https://web.archive.org/web/20160304115618/http://www.telegraphindia.com/1071108/asp/nation/story_8524891.asp 4 मार्च 2016 द टेलीग्राफ़, कलकत्ता- नवंबर ०८, २००७ तब निवेदन करने पर भविष्य के लिए में स्वीकार्य हो गया।
दंतकथाएं
मदला पंजी में दर्ज किंवदंतियों के अनुसार, पहले जगन्नाथ मंदिर का निर्माण राजा इंद्रद्युम्न ने करवाया था, जो महाभारत और पुराणों में बताए गए मालवा के राजा थे।An encyclopaedia of Indian archaeology Ghosh Amalananda 1990 E. J. Brill 978-90-04-09264-8 Leiden
तब इंद्रद्युम्न ने लकड़ी के लट्ठे की खोज की। उन्होंने एक यज्ञ किया, जिसमें से नरसिम्हा प्रकट हुए और निर्देश दिया कि नारायण को चार गुना विस्तार के रूप में प्रकट किया जाए: परमात्मा वासुदेव (कृष्ण) के रूप में, व्यूह संकर्षण (बलभद्र) के रूप में, योगमाया सुभद्रा के रूप में, और विभाव सुदर्शन के रूप में। इसके बाद, विश्वकर्मा एक कारीगर के रूप में प्रकट हुए और पेड़ से जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की छवियां तैयार कीं।Satpathy Chinmayee 2022 RELIGIOUS PRACTICES OF THE TEMPLES IN ANCIENT EGYPT AND PURI SHRI JAGANNATH TEMPLE IN INDIA: COMPARATIVE OVERVIEW https://doi.org/10.47509/mes.2022.v03i01.15 MAN, ENVIRONMENT AND SOCIETY 3 1 211–234 10.47509/mes.2022.v03i01.15 2582-7669
सन्दर्भ
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इन्हें भी देखें
जगन्नाथ
रथ यात्रा
राजा विश्वासु भील
बाहरी कड़ियाँ
जगन्नाथ मंदिर (जगन्नाथटेम्पल्पुरी.कॉम)
पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है।
jagannathpuri temple (जगन्नाथ मन्दिर)
जगन्नाथ धाम, पुरी (आधिकारिक वेबसाइट)
जगन्नाथ रथ यात्रा एवं भगवान जगन्नाथ की कथा(वेद विश्वकोष
श्री जगन्नाथ (ओडिस्सी.कॉम)
जगन्नाथ पुरी (इस्कॉन.कॉम)
पुरी का जगन्नाथ मंदिर (टेम्पल्नेट.कॉम)
जगन्नाथ मंदिर(इण्डहिस्ट्री.कॉम)
उड़ीसा स्थापत्यकला (sscnet.ucla.edu)
भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर- जगन्नाथ धर्म
भगवान जगन्नाथ मंदिर पुरी, उड़ीसा भगवान जगन्नाथ पर उड़िया भाषा में विश्व का प्रथम और एकमात्र आध्यात्मिक पोर्टल.
श्री जगन्नाथ स्वामी रथयात्रा वीडियो
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