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सेला और नूरा
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अप्रैल 2022
सेला और नूरा दो मोनपा लड़कियां है, जो तवांग1962 War: जब भारतीय सेना का तवांग के लोगों ने दिया था साथ, जानें 1962 युद्ध की कहानी https://www.aajtak.in/india/news/video/india-china-1962-war-tawang-arunachal-pradesh-local-people-helped-indian-army-nura-sela-1597376-2022-12-18 27 जून 2023 आज तक hi की रहने वाली दो बहने थी, जिन्होंने 1962 की भारत - चीन युद्ध में बंदूकधारी जसवंत सिंह रावत की मदद करी थी।1962 War: नूरा और सेला, दो बहनें जिन्होंने भारतीय फौज की मदद के लिए लगा दी जान की बाजी https://www.aajtak.in/india/news/video/1962-war-noora-and-sela-sacrificed-their-lives-to-help-indian-army-jaswant-singh-rawat-1595751-2022-12-15 27 जून 2023 आज तक hiBadoni Mohit Sela Nura 2016 Educreation Publishing https://books.google.co.in/books?id=wTl7DQAAQBAJ en नूरानांग की लड़ाई में तीन दिनों में चीनियों के 300 सैनिक मारे गए थे। चीन की सेना की इतनी बड़ी सेना की क्षति का कारण सिर्फ एक सैनिक बना था किन्तु चीनी सेना का अनुमान था कि वह पूरी एक फ़ौज की टुकड़ी का सामना कर रहे है।R Harikrishnan Out of the world https://www.deccanchronicle.com/lifestyle/travel/200619/out-of-the-world.html Deccan Chronicle 20 जून 2019 en
राशन की आपूर्ति करने वाले शख्स को चीनी सैनिको ने पकड़ लिया था। उसी व्यक्ति द्वारा चीनी सैनिको को यह बात पता चली कि जसवंत सिंह रावत केवल अकेले ही चीनी सैनिको के साथ गोलीबारी कर रहे है। जिसके बाद चीनी सैनिको ने १७ नवम्बर, १९६२ को चारो तरफ से जसवंत सिंह रावत को घेर लिया। युद्ध में सेला एक हथगोले हमले में मारी गई जबकि नूरा को चीनी सैनिको ने जिन्दा पकड़ लिया। जब जसवंत सिंह रावत को अहसास हो गया कि उनको पकड़ लिया जाएगा तो उन्होंने युद्धबंदी बनने से बचने के लिए एक गोली खुद को मार ली। चीनी सेना का कमांडर जसवंत सिंह रावत की तबाही से इतना नाराज था कि वो उनका सिर काट कर ले गया। चीनी सेना जसवंत सिंह रावत के पराक्रम से इतनी प्रभावित हुई कि युद्ध के बाद चीनी सेना ने उनके सिर भारतीय सेना को लौटा दिया।एकलौता शहीद जवान जो मौत के बाद भी सरहद पर देता है पहरा, अकेले ही 3 दिन में 300 चीनी सैनिकों को उतारा था मौत के घाट https://www.punjabkesari.in/national/news/jawanswant-singh-rawat-1962-china-india-war-chinese-soldier-1252079 punjabkesari 1 अक्टूबर 2020 चीनी सेना ने उनकी पीतल की बनी प्रतिमा भी भेंट की, जिससे जसवंत सिंह रावत की विशिष्ट बहादुरी को एक पहचान मिली।China Builds Village In Arunachal, The Place That Was Once Saved By Jaswant Singh https://www.indiatimes.com/news/india/the-heroic-story-of-jaswant-singh-the-man-who-saved-arunachal-pradesh-from-the-chinese-army-247929.html IndiaTimes 13 अप्रैल 2016 en-IN कहा जाता है, जसवंत सिंह रावत आज भी जिंदा है।रांगियाल नवीन आज भी जिंदा है 72 घंटे में 300 चीनियों को मौत के घाट उतारने वाला यह भारतीय ‘रायफल मैन’ https://hindi.webdunia.com/indian-brave-soldiers/martyr-jaswant-singh-rawat-120061900038_1.html hindi.webdunia.com hi
सन्दर्भ
श्रेणी:युद्ध में भारतीय महिलाऐं
श्रेणी:भारत-चीन सम्बन्ध
श्रेणी:वीरांगनाएं