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411 समाचार
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हेमू कालाणी

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हेमू कालाणी Hemu Kalani 1983 stamp of India.jpg १९८३ में जारी एक टिकट पर हेमू कालाणी 1923 03 23 yes सुक्कर , सिन्ध, ब्रिटिश राज (अब पाकिस्तान में ) 1943 01 21 1923 03 23 yes सुक्कूर, सिन्ध, ब्रिटिश राज (अब पाकिस्तान में ) भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन language क्रान्तिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, राजनैतिक कार्यकर्ता हेमू कालाणी (२३ मार्च १९२३ - २१ जनवरी १९४३) भारत के एक क्रान्तिकारी एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे जिन्हें अंग्रेजी शासन ने मात्र १९ वर्ष की आयु में फांसी पर लटका दिया था।https://eparlib.nic.in/bitstream/123456789/58672/1/Eminent_Parliamentarians_Series_Shahed_Hemu_Kalani.pdf १९४२ में भारत छोड़ो आन्दोलन में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया था। २००३ में भारत के संसद परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गयी। आरम्भिक जीवन हेमू कालाणी का जन्म २३ मार्च सन् १९२३ को सख्खर (Sukkur) में हुआ था जो अब पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में आता है। उनके पिताजी का नाम पेसूमल कालाणी एवं उनकी माँ का नाम जेठी बाई था।نادر سولنگي سنڌ جو ڀڳت سنگهه شهيد هيمون ڪالاڻي http://www.onlineindusnews.com/2016/01/%D8%B3%D9%86%DA%8C-%D8%AC%D9%88-%DA%80%DA%B3%D8%AA-%D8%B3%D9%86%DA%AF%D9%87%D9%87-%D8%B4%D9%87%D9%8A%D8%AF-%D9%87%D9%8A%D9%85%D9%88%D9%86-%DA%AA%D8%A7%D9%84%D8%A7%DA%BB%D9%8A/ 23 January 2016 Online indus News 20 January 2016 dead https://web.archive.org/web/20160129085717/http://www.onlineindusnews.com/2016/01/%D8%B3%D9%86%DA%8C-%D8%AC%D9%88-%DA%80%DA%B3%D8%AA-%D8%B3%D9%86%DA%AF%D9%87%D9%87-%D8%B4%D9%87%D9%8A%D8%AF-%D9%87%D9%8A%D9%85%D9%88%D9%86-%DA%AA%D8%A7%D9%84%D8%A7%DA%BB%D9%8A/ 29 January 2016 हेमू बचपन से ही बड़े साहसी थे। स्कूल जाने के साथ ही वह क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय हो गए थे। जब वह मात्र सात वर्ष के थे, तभी तिरंगा लेकर अंग्रेजों की बस्ती में चले जाते थे और अपने मित्रों के साथ निर्भीक होकर सभाएं करते थे। वह पढ़ाई-लिखाई में अच्छे होने के अलावा अच्छे तैराक तथा धावक भी थे। वह तैराकी में कई बार पुरस्कृत हुए थे। जब वे किशोर वयस्‍क थे तब उन्होंने अपने साथियों के साथ विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और लोगों से स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने का आग्रह किया। स्वतन्त्रता संग्राम thumb|हेमू कलानी का अंतिम संस्कार, 21 जनवरी 1943 को किया गया सन् १९४२ में भारत छोड़ो आन्दोलन चला। सिंध प्रांत में जब यह आंदोलन तीव्र हुआ तो किशोरों व नवयुवकों के साथ हेमू कालाणी भी 'स्वराज सेना' के जरिए मुख्य भूमिका में इससे जुड़ गए। गोपनीय सूत्रों से सिंध के क्रांतिकारियों को जानकारी मिली कि बलूचिस्तान में चल रहे उग्र आंदोलन को कुचलने के लिए 23 अक्टूबर,1942 की रात अंग्रेज सैनिकों, हथियारों व बारूद से भरी रेलगाड़ी सिंध के रोहिणी स्टेशन से रवाना होकर सक्खर शहर से गुजरती हुई बलूचिस्तान के क्वेटा नगर जाएगी। यह समाचार सुनकर सक्खर के 19 वर्षीय छात्र हेमू कालाणी ने रेलगाड़ी को गिराने का दायित्व अपने ऊपर लिया,जिसमें उनके साथ दो सहयोगी नंद और किशन भी थे। रेलगाड़ी गुजरने से पहले ही तीनों नवयुवक एक सुनसान स्थल पर पहुंचे। हेमू कालाणी ने रिंच और हथौड़े की सहायता से रेल की पटरियों की फिशप्लेटों को उखाड़ना शुरू कर दिया। अन्य दो साथी निगरानी कर रहे थे। रात की निस्तब्धता में हथौड़ा चलाने की आवाजें दूर तक जा रही थीं। उसे सुनकर दूर गश्त कर रहे सिपाही दौड़कर आए। नंद और किशन तो वहां से भाग कर छिप गए,मगर हेमू कालाणी को उन्होंने पकड़ लिया। देश के वीर सपूत : हेमू कालाणी ने 19 साल की उम्र में देश के लिए किया प्राणोत्सर्ग जेल में लाकर उन पर कोड़े बरसाए गए और उनसे दो सहयोगियों का नाम पूछा गया। हेमू का हर बार यही उत्तर होता था, 'मेरे दो साथी थे—रिंच और हथौड़ा।' सक्खर की सैन्य अदालत ने देशद्रोह के अपराध में 19 वर्ष कुछ माह होने के कारण हेमू कालाणी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अनुमोदन के लिए निर्णय हैदराबाद (सिंध) स्थित सेना मुख्यालय के प्रमुख अधिकारी कर्नल रिचर्डसन के पास भेजा गया। ब्रिटिशराज का खतरनाक शत्रु करार देते हुए कर्नल रिचर्डसन ने हेमू कालाणी की सजा को फांसी में बदल दिया। 21 जनवरी, 1943 को प्रातः सात बजकर 55 मिनट पर हेमू कालाणी को फांसी पर लटकाया गया। उस समय के सिंध के गणमान्य लोगों ने एक पेटीशन दायर की और वायसराय से उनको फांसी की सजा ना देने की अपील की। वायसराय ने इस शर्त पर यह स्वीकार किया कि हेमू कालाणी अपने साथियों का नाम और पता बताये पर हेमू कालाणी ने यह शर्त अस्वीकार कर दी। २१ जनवरी १९४३ को उन्हें फांसी की सजा दी गई। जब फांसी से पहले उनसे आखरी इच्छा पूछी गई तो उन्होंने भारतवर्ष में फिर से जन्म लेने की इच्छा जाहिर की। इन्कलाब जिंदाबाद और भारत माता की जय की घोषणा के साथ उन्होंने फांसी को स्वीकार कियाhttps://eparlib.nic.in/bitstream/123456789/58672/1/Eminent_Parliamentarians_Series_Shahed_Hemu_Kalani.pdf १९४७ में भारत के विभाजन पर सिन्ध में हुए धार्मिक उन्माद के कारण हेमू की माँ भारत आ गयीं। हेमू की स्मृति में २००३ में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमन्त्रित्व काल में भारत के संसद के परिसर में इस अमर बलिदानी की प्रतिमा लगायी गयी। भारत सरकार ने १९८३ में उनकी स्मृति में डाकटिकट जारी किया। पाली शहर में सिन्धी कोलोनी में शहीद हेमू कालाणी के बलिदान दिवस पर प्रतिमा लगाई गई । इंदौर में उज्जैन मार्ग पर शहीद हेमू कालानी नगर नाम से एक कॉलोनी भी विकसित है। इंदौर में एक चौक का नामकरण हेमू कालाणी के नाम पर करके उनकी प्रतिमा लगाई गई है। फैजाबाद शहर में एक राजकीय पार्क है जिसका नाम हेमू कालाणी पार्क है तथा बीच मे एक 15 फुट की प्रतिमा है जो अयोध्या मार्ग पर है। एक प्रतिमा संसद-भवन प्रांगण में डिप्टी स्पीकर के आफि़स के सामने लगाई गई है। चेम्बूर, मुम्बई के एक उपनगर में जहां सिन्धी जनसंख्या अधिक है, में मार्ग का नाम हेमू कालाणी मार्ग रखा गया है। उल्हासनगर जो सिन्धुनगर भी कहलाता है, में भी एक प्रतिमा चौक पर लगाई गई है। जोधपुर (राजस्थान) शहर में एक चौक का नामकरण हेमू कालाणी के नाम पर करके उनकी प्रतिमा लगाई गई है। अजमेर (राजस्थान) में दिग्गी बाजार चौक में शहीद हेमू कालाणी की प्रतिमा लगाई गई है। अजमेर शहर (राजस्थान) में एक स्थान लखन कोठरी हेमू कालाणी मोहल्ला कहलाती है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शहीद हेमू कालाणी की प्रतिमा, शहर के हृदय स्थल कचहरी चौक पर स्थापित की गयी है, उस चौक का तथा उस वार्ड का नाम शहीद हेमुकलानी वार्ड रखा गया है, रायपुर में स्थानीय नगर निगम द्वारा, शहीद हेमू कालाणी की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष कार्यक्रम आयोजित किया जाता हैं। छत्तीसगढ़ के तिल्दा नेवरा में 'हेमू कालानी चौक' है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव में 'हेमू कालानी मार्ग' है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में हेमू कालानी प्रतिमा है। thumb|छत्तीसगढ़ के दुर्ग में हेमू कालाणी प्रतिमा बीकानेर शहर राजस्थान के जय नारायण व्यास काॅलोनी में हेमू कालानी सर्कल व वीर सपूत समाधी स्थल है। जयपुर के आदर्श नगर (सिन्‍धी कॉलोनी) स्थित हेमू कालानी पार्क का नामकरण हेमू कालानी के नाम से मूर्ति स्‍थापित की गई। ग्वालियर के महाराज बाड़े पर हेमू कलानी की प्रतिमा स्थापित है। बिलासपुर छत्तीसगढ़ के राजेन्द्र नगर चौक के पास पार्क में शहीद स्व हेमू कालानी जी की प्रतिमा स्थापित है दिल्ली के लाजपत नगर में एक पायलट स्कूल का नाम शहीद हेमू कालानी सर्वोदय बाल विद्यालय है। और वहां पर हेमू कालानी की प्रतिमा भी लगाई गई है और साथ ही उस विद्यालय के प्रधानाचार्य के कक्ष मैं हेमू कालानी की तस्वीर भी लगी है। गुजरात के भावनगर शहर में सिंधुनगर के गोपाल पार्क में एक रोड स्क्वायर है, जिसमें 21 जनवरी 2020 को हेमू कालानी सर्कल के नाम से सड़क (चौक) के क्रॉसिंग पर अमर शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा लगाई गई है। नवापारा नगर जिला रायपुर (छत्तीसगढ़ )में गंज रोड नगर पालिका के पास अमर शहीद हेमू कालाणी चौक पर शहीद हेमू कालाणी की प्रतिमा स्थापित की गई है । अहमदाबाद के कुबेरनगर में राजवीर चौक पर हेमू कालाणी की प्रतिमा लगाई गई है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भादरा शहर मे हेमू कालाणी जी की प्रतिमा जो की हेमू कालाणी चौक पर स्थापित की गई है। वाराणसी नगर के मालवीय मार्केट में अग्रसेन कन्या इंटर कालेज के ठीक सामने हेमू कालानी जी की प्रतिमा स्थापित की गई है। सन्दर्भ इन्हें भी देखें खुदीराम बोस बाहरी कड़ियाँ सिन्ध के भगत सिंह 'हेमू कलानी' को 19 की उम्र में अंग्रेजों ने चढ़ाई फांसी! श्रेणी:1923 में जन्मे लोग श्रेणी:भारतीय क्रांतिकारी श्रेणी:१९४३ में निधन श्रेणी:सिंंध के लोग