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411 समाचार
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हलबर्ड

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हलबर्ड (Halberd) thumb स्विट्जरलैंड 14वीं से 16वीं सदी (युद्ध में सक्रिय) स्विस पैदल सेना, यूरोपीय सेनाएं, वेटिकन स्विस गार्ड 1.5 से 1.8 मीटर (5 से 6 फीट) कुल्हाड़ी का फलक, भाले की नोक, और हुक हलबर्ड (Halberd) मध्यकालीन यूरोप का एक अत्यधिक प्रसिद्ध और बहुउद्देश्यीय पोलआर्म (Polearm - लंबे डंडे वाला हथियार) है। यह हथियार विशेष रूप से 14वीं और 15वीं शताब्दी के दौरान युद्ध के मैदानों में प्रमुखता से उभरा। इसे मूल रूप से एक कुल्हाड़ी और भाले के संयोजन के रूप में डिज़ाइन किया गया था, जो पैदल सेना के सैनिकों को भारी बख्तरबंद घुड़सवारों का सामना करने में सक्षम बनाता था। हथियार का नाम जर्मन शब्द Halm (डंडा या शाफ्ट) और Barte (कुल्हाड़ी) से मिलकर बना है।Oakeshott Ewart European Weapons and Armour: From the Renaissance to the Industrial Revolution Boydell Press 1980 978-0851157894 45-49"Military technology – Britannica Online Encyclopedia" संरचना और डिज़ाइन हलबर्ड को उसकी बहुमुखी मारक क्षमता के लिए जाना जाता था। एक मानक हलबर्ड का शाफ्ट (लकड़ी का डंडा) आमतौर पर 5 से 6 फीट लंबा होता था। इसके धातु वाले शीर्ष को तीन अलग-अलग हिस्सों में बाँटा जा सकता है, जो योद्धा को तीन अलग-अलग प्रकार के हमले करने की सुविधा देते थे: भाले की नोक: शीर्ष पर एक लंबा और नुकीला भाला होता था, जिसका उपयोग सामने से आ रहे दुश्मनों या घोड़ों को दूर से ही छेदने के लिए किया जाता था। कुल्हाड़ी का फलक: हथियार के आगे की ओर एक भारी कुल्हाड़ी होती थी, जो अपने 'कोणीय संवेग' के कारण इतना भयानक आघात उत्पन्न करती थी कि वह हेलमेट और प्लेट आर्मर को भी फाड़ सकती थी। पीछे का कांटा या हुक: कुल्हाड़ी के ठीक विपरीत दिशा में एक मुड़ा हुआ हुक होता था। इसका उपयोग घुड़सवार शूरवीरों को उनके घोड़ों से खींचकर नीचे गिराने या दुश्मन की ढाल को फँसाकर दूर करने के लिए किया जाता था।Waldman John Hafted Weapons in Medieval and Renaissance Europe Brill 2005 978-9004144095 112-118 स्विस पैदल सेना और सामरिक प्रभाव हलबर्ड को ऐतिहासिक रूप से स्विस मर्सिनरीज़ (स्विट्जरलैंड के भाड़े के सैनिक) के साथ सबसे अधिक जोड़ा जाता है। 1315 में 'मोगार्टन की लड़ाई' और 1386 में 'सेम्पाख की लड़ाई' में स्विस पैदल सेना ने हलबर्ड का उपयोग करके ऑस्ट्रियाई हैब्सबर्ग साम्राज्य के भारी बख्तरबंद शूरवीरों को बुरी तरह से पराजित किया था। इन युद्धों ने यह सिद्ध कर दिया कि एक सुगठित पैदल सेना इकाई, यदि हलबर्ड जैसे हथियारों से लैस हो, तो वह तत्कालीन अजेय मानी जाने वाली घुड़सवार सेना को भी हरा सकती है। इससे यूरोपीय युद्ध रणनीतियों में एक बड़ा बदलाव आया और पैदल सेना का महत्व फिर से स्थापित हुआ।DeVries Kelly Infantry Warfare in the Early Fourteenth Century https://archive.org/details/infantrywarfarei0000devr Boydell Press 1996 978-0851155678 65-70"The Early Bronze Age Halberd: A History of Research and a Brief Guide to the Sources" पतन और औपचारिक उपयोग 16वीं शताब्दी के आते-आते, 'पाइक' (एक बहुत लंबा भाला जो 15-18 फीट का होता था) और शुरुआती आग्नेयास्त्रों (आर्किबस) के विकास के कारण हलबर्ड का युद्ध के मैदान में उपयोग कम होने लगा। लंबी पाइक फॉर्मेशन के सामने हलबर्ड की लंबाई कम पड़ जाती थी। अंततः यह केवल सार्जेंट या सैन्य अधिकारियों के पद के प्रतीक के रूप में रह गया।Hale J. R. War and Society in Renaissance Europe, 1450-1620 https://archive.org/details/warsocietyinrena0000hale_v4k6 Fontana History of European War and Society 1985 45-50 हालाँकि, आज भी हलबर्ड का एक अत्यंत प्रसिद्ध औपचारिक उपयोग जीवित है। वेटिकन सिटी की रक्षा करने वाले प्रसिद्ध पोंटिफिकल स्विस गार्ड आज भी अपनी पारंपरिक वर्दी के साथ अपने मुख्य औपचारिक हथियार के रूप में हलबर्ड को धारण करते हैं, जो 500 वर्षों से अधिक के इतिहास का प्रतीक है।https://schweizergarde.ch/ The Pontifical Swiss Guard: Weapons and Armor Vatican City 24 जून 2026 सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ द मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट (Met) - हलबर्ड का इतिहास