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हल्दी

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right|thumb|300px|हल्दी का पौधा : इसके पत्ते बड़े-बड़े होते हैं। हल्दी (टर्मरिक) भारतीय वनस्पति है। यह अदरक की प्रजाति का ५-६ फुट तक बढ़ने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है। हल्दी को आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही एक चमत्कारिक द्रव्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। औषधि ग्रंथों में इसे हल्दी के अतिरिक्त हरिद्रा, कुरकुमा लौंगा, वरवर्णिनी, गौरी, क्रिमिघ्ना योशितप्रीया, हट्टविलासनी, हरदल, कुमकुम, टर्मरिक नाम दिए गए हैं। आयुर्वेद में हल्‍दी को एक महत्‍वपूर्ण औषधि‍ कहा गया है। भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है और धार्मिक रूप से इसको बहुत शुभ समझा जाता है। विवाह के एक दिन पूर्व वर और वधू दोनों के शरीर पर हल्दी का लेप करने की प्रथा है। लैटि‍न नाम : करकुमा लौंगा (Curcuma longa) अंग्रेजी नाम : टरमरि‍क (Turmeric) पारि‍वारि‍क नाम : जि‍न्‍जि‍बरऐसे हालांकि लंबे समय से आयुर्वेदिक चिकित्सा में इस्तेमाल किया जाता है, जहां इसे हरिद्राhttps://www.worldcat.org/oclc/751123639 Underutilized and underexploited horticultural crops Peter, K. V. 2007 New India Pub. Agency Peter, K. V. 81-89422-69-3 New Delhi 751123639 के रूप में भी जाना जाता है, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसारNelson Kathryn M. Dahlin Jayme L. Bisson Jonathan Graham James Pauli Guido F. Walters Michael A. 2017-01-11 The Essential Medicinal Chemistry of Curcumin http://dx.doi.org/10.1021/acs.jmedchem.6b00975 Journal of Medicinal Chemistry 60 5 1620–1637 10.1021/acs.jmedchem.6b00975 0022-2623https://www.nccih.nih.gov/health/turmeric Turmeric NCCIH en 2020-09-07, किसी भी बीमारी के इलाज के लिए हल्दी या उसके घटक, करक्यूमिन का उपयोग करने के लिए कोई उच्च गुणवत्ता वाला नैदानिक ​​प्रमाण नहीं है। हल्दी एक ऐन्टीसेप्टिक के रूप मे कार्य करती है। डा सुनील बैद जी-- हल्दी ऐक प्लांट मैडिसिन है हल्दी ज़हरीला गुण रखती है । Antibiotic किटाणु मारने की पावर जहर शरीर की क्रियाओं को उत्तेजित करता है। तथा किटाणु भी मारता है।जो उसमें साल्ट हैं।जैसे- कैलसिम,फेरम, पोटेशियम, सोडियम, मैग्नीशियम आदि आदि।नयी सेल का निर्माण करता है। इसी का नाम है आयुर्वेद। आयु को बढ़ाने वाला पूर्ण सत्य विज्ञान पुर्जे को बदलकर ठीक करने वाला विज्ञान।Chung Sang Yong Senapathi Venkatramanan Sekar Selvam Kim Tae Hyung 2018-02-23 Time series analyses of hydrological parameter variations and their correlations at a coastal area in Busan, South Korea https://doi.org/10.1007/s10040-018-1739-9 Hydrogeology Journal 26 6 1875–1885 10.1007/s10040-018-1739-9 1431-2174 हल्दी का पौधा हल्दी का पौधा महत्वपूर्ण और उपयोग पौधा है जो अदरक परिवार (ज़िंगिबेरासी) से संबंधित है। यह एक बारहमासी जड़ी बूटी है जो 60-90 सेमी ऊंचाई तक बढ़ जाती है। पत्तियाँ बहुत बड़ी होती हैं, गुच्छे में 1. 2 मीटर या उससे अधिक लंबी होती हैं, जिसमें पेटीओल भी शामिल है जो ब्लेड जितना लंबा, आयताकार भालाकार, और आधार से पतला होता है। हल्दी के फूल सफ़ेद,पीले होते हैं, जिनकी लंबाई 10- 15 सेंटीमीटर के बीच होती है और वे घने स्पाइक्स में एक साथ समूहित होते हैं, जो वसंत के अंत से मध्य सत्र तक दिखाई देते हैं। हल्दी के पौधे की विशेषता है यह कि इसके पौधे पर फल नहीं लगते।  इनकी जड़ें पीले-भूरे रंग की होती हैं, जिनका आंतरिक भाग नीरस नारंगी होता है जो सूखने के बाद चूर्ण करने पर चमकीले पीले रंग का दिखता है।  ये 2.5-7.0सेमी, और छोटे कंद शाखाओं के साथ 2.5सेमी व्यास के होते हैं। परिचय हल्दी में उड़नशील तेल 5.8%, प्रोटीन 6.3%, द्रव्य 5.1%, खनिज द्रव्य 3.5%, और करबोहाईड्रेट 68.4% के अतिरिक्त कुर्कुमिन नामक पीत रंजक द्रव्य, विटमिन A पाए जाते हैं। हल्दी पाचन तन्त्र की समस्याओं, गठिया, रक्त-प्रवाह की समस्याओं, कैंसर, जीवाणुओं (बेक्टीरिया) के संक्रमण, उच्च रक्तचाप और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की समस्या और शरीर की कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत में लाभकारी है। हल्दी कफ़-वात शामक, पित्त रेचक व पित्त शामक है। रक्त स्तम्भन, मूत्र रोग, गर्भश्य, प्रमेह, त्वचा रोग, वात-पित्त-कफ़ में इसका प्रयोग बहुत लाभकारी है। यकृत की वृद्धि में इसका लेप किया जाता है। नाड़ी शूल के अतिरिक्त पाचन क्रिया के रोगों अरुचि (भूख न लगना) विबंध, कमला, जलोधर व कृमि में भी यह लाभकारी पाई गई है। इसी प्रकार हल्दी की एक किस्म काली हल्दी के रूप में भी होती है। उपचार में काली हल्दी पीली हल्दी के मुक़ाबले अधिक लाभकारी होती है। right|thumb|250px|हल्दी की गांठ thumb|हल्दी चूर्ण हल्दी के औषधीय गुण हल्दी को आयुर्वेदिक पदार्थ माना जाता है।अप्रैल 2022 ऐसा मानने के पीछे इसमें मौजूद औषधीय गुण है। इसके औषधीय गुण कई बीमारियों से बचाएं रखने और उनसे राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा हल्दी को लेकर किए गए रिसर्च के मुताबिक, इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, केलोरेटिक, एंटीमाइक्रोबियल, एंटीसेप्टिक, एंटी कैंसर, एंटीट्यूमर, हेपटोप्रोटेक्टिव (लिवर को सुरक्षित रखने वाला गुण), कार्डियोप्रोटेक्टिव (हृदय को सुरक्षित रखने वाला गुण) और नेफ्रोप्रोटेक्टिव (किडनी को नुकसान से बचाने वाला गुण) गुण होते हैं। उपयोग रसोई की शान होने के साथ-साथ हल्दी कई चामत्कारिक औषधीय गुणों से भरपूर है। आयुर्वेद में तो हल्‍दी को बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि हल्दी गुमचोट के इलाज में तो सहायक है ही साथ ही कफ-खांसी सहित अनेक बीमारियों के इलाज़ में काम आती है। इसके अलावा हल्दी सौन्दर्यवर्धक भी मानी जाती है और प्रचीनकाल से ही इसका उपयोग रूप को निखारने के लिए किया जाता रहा है। वर्तमान समय में हल्दी का प्रयोग उबटन से लेकर विभिन्न तरह की क्रीमों में भी किया जा है। हल्दी और करक्यूमिन (इसके घटकों में से एक) का विभिन्न मानव रोगों और स्थितियों के लिए कई नैदानिक ​​परीक्षणों में अध्ययन किया गया है; बड़े पैमाने पर या दोषपूर्ण तरीके से कमी, किसी ने भी उच्च गुणवत्ता के प्रमाण नहीं दिए हैं।Daily James W. Yang Mini Park Sunmin 2016-08 Efficacy of Turmeric Extracts and Curcumin for Alleviating the Symptoms of Joint Arthritis: A Systematic Review and Meta-Analysis of Randomized Clinical Trials https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/27533649 Journal of Medicinal Food 19 8 717–729 10.1089/jmf.2016.3705 1557-7600 5003001 27533649Vaughn Alexandra R. Branum Amy Sivamani Raja K. 2016-08 Effects of Turmeric (Curcuma longa) on Skin Health: A Systematic Review of the Clinical Evidence https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/27213821 Phytotherapy research: PTR 30 8 1243–1264 10.1002/ptr.5640 1099-1573 27213821 मनुष्यों पर नैदानिक ​​परीक्षणों से कोई उच्च गुणवत्ता का सबूत नहीं है कि कर्कुमिन (2020 तक) सूजन को कम करता है। हल्दी का साग कच्ची हल्दी की सब्जी राजस्थान की परम्परागत सब्जी है जो शादी या अन्य मांगलिक अवसरों पर बनाई जाती है। कच्ची हल्दी की सब्जी सर्दियों के मौसम में बनाई जाती है (कच्ची हल्दी आती ही सर्दियों के मौसम में है)। कच्ची हल्दी पीले रंग की अदरक की तरह गांठे होती हैं। कच्ची हल्दी को देशी घी में तलकर सब्जी बनाते हैं ताकि उसका कड़वा स्वाद खाने में न आये। हल्दी की सब्जी बनाने में घी भी बहुत लगता है। हल्दी की सब्जी सिर्फ कच्ची हल्दी से बनाई जाती है। दूसरे तरीका में हल्दी के साथ सब्जी में मटर, गोभी दोनों, या केवल मटर भी तल कर डाले जा सकते हैं। सन्दर्भ इन्हें भी देखें दारुहरिद्रा बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:मसाले श्रेणी:आयुर्वेद