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लिंगानुशासन
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लिङ्गानुशासन, पाणिनीय पंचांग व्याकरण का एक भाग है। लोक के अनुसार लिङ्ग (पुँल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) का अनुशासन करने वाला शास्त्र लिङ्गानुशासन कहलाता है। (लिङ्गानाम् अनुशासनं क्रियतेऽनेनेति लिङ्गानुशासनम् । ) पाणिनी प्रणीत इस शास्त्र में संस्कृत भाषा में व्यवहृत शब्दों के लिङ्ग का उपदेश किया गया है ।
यह शास्त्र भी छः अधिकारों में विभक्त है। इस शास्त्र में कुल १९१ सूत्र हैं।
१. स्त्रीलिङ्गाधिकार - ३४ सूत्र
२. पुँल्लिङ्गाधिकार - ८३ सूत्र
३. नपुंसकलिङ्गाधिकार - ५५ सूत्र
४. स्त्रिलिङ्गपुँल्लिङ्गाधिकार - ५ सूत्र
५. पुँल्लिङ्गनपुंसकलिङ्गाधिकार - ७ सूत्र
६. अविशिष्टलिङ्गाधिकार - ७ सूत्र
इसी प्रकार हेमचन्द्राचार्य द्वारा रचित 'सिद्धहेमशब्दानुशासनम्' के भी पाँच भाग हैं- सूत्रपाठ, गणपाठ, धातुपाठ, उणादिसूत्रपाथ और लिङ्गानुशासन ।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
लिङ्गानुशासनम्
श्रेणी:संस्कृत व्याकरण