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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मराठा

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मराठा भारत पश्चिमी भारत अधिकांश: महाराष्ट्र मराठी कोंकणीThe Tribes and Castes of Bombay, vol.2, by R. E. Enthoven. सनातन धर्म ,हिन्दू मराठा शब्द का उल्लेख ईसा पूर्व 6 में जैन बद्रबाहू ने लिखा ग्रंथ कृतांक सूत्र ईसा पूर्व 3 का विष्णु दत्त राजा का कारले भाजे का पानी की टंकी के उपरका शिलालेख 2300 साल पहले वररुचि का प्राकृत प्रकाश ग्रंथ कात्यायनी के वर्तिकंत में असली वैदिक क्षत्रिय उनके स्थान का वर्णन हैं पाणिनी के ग्रंथों में ईसा 335 के एरण के स्तंभलेख पर वराहमिहिर के बृहतसहिता में नानेघाट , कार्ले, भाजे, कन्हेरी लेख में मराठा शब्द का उल्लेख हैं मराठा क्षत्रिय वैदिक जाती है. 2700 साल पूर्व विंध्य पर्वत, नर्मदा के ओर उसके दक्षिण में क्षत्रियों का विस्थापन हुआ उन्हे महारथी कहते थे उनके कूल के कुलप्रमुख को देशमुख, वर्मन, नृपती, कुलपति,छत्रपति जैसे शब्दों से उल्लेखित थे उत्तर में इन क्षत्रिय के अनेक कूल विदेशी लोगोंको हराने गए उसमे प्रमुख रुप से चालुक्य(सालुंके, चालके), सातवाहन(भोसले, देशमुख, शिरके, वरदे, शीसोदे) के सामंत सेंद्रक (शिंदे, सेन, सैनी), गायकवाड़(जाधव) भोसले(शिलाहार)(प्रतिहार), पवार(परमार), राने (राना), राष्ट्रकूट (देशमुख), निकम, चवहान(चहमान, चौहान), गाढवे (गढ़वाल), डोंगरे (डोगरा), पठारे , घोरपड़े (गोरखा), शंखपाल (सकपाल), पाल (पालवे, सकपाल), पल्लव (पालवे), सालुव (सालवे), नाईक, राव, राय, बांदल(बादल),भोसले (भोज, बैंस, वरदे, भैसल), जेधे (जादो), गुजर (गुर्जर), अहीरराव, अहिरे (अहीर), यादव, जाधव,तावरे (तवर),राऊत (रावत),पाटिल(पटेल), मोरे (मौर्य- मोरेसरिता),भोइटे, काकडे -(काकतीय), मालूसरे (कलचूरी), गावड़े (गौड़), शेलार (शीलाहार), शिसोदे(शिसोदिया) जैसे अनेक कूल उत्तर और दक्षिण में गए उत्तर में गए क्षत्रिय महारथी मराठों को पहले गुर्जर ओर गुर्जर को राजपूत, जाट जैसे नामों से पहचानने लगे जो चालुक्य नृपती के सामंत थे जिन्हें गुजरात में सोलंकी नामसे जानने लगे चव्हान को चौहान, राठोड़ को राठौड़, भोसले को भैंसल, राने को राना, पाटिल को पटेल, अहीरे को अहीर, जाधव को जादौ, राऊत को रावत, गढ़वें को गढ़वाल, शिसोदे को शिसोदिया, शिलाहार को प्रतिहार, शिंदे को सिंध, सेन केहने लगे प्राचीन काल में बोहोत मराठा राजवंशों शासन किया उनमें प्रमुख सातवाहन (भोसले, घोरपड़े, शिसोदे), चालुक्य (चालके, सालुंके), धार के पवार परमार, राष्ट्रकूट-(देशमुख),वकाटक (सेन, सैंद्रक (शिंदे)), शिलाहार (शेलार), कदंब (कदम), होयसल (भोसले), काकती (काकड़े), सालूव (सालवे), पल्लव (पालवे), शंखपाल (सकपाल), पाल (सकपाल, पालवे), गाढवे(गढ़वाल), डोगरे (डोगरा), चव्हान (चौहान), मोरे (मोरेसरिता- मौर्य) जैसे अनेक कुलोने हज़ारों सालों तक देश की रक्षा की। 16 वी सदी में पूरे हिन्दुस्थान पर यवन, तुर्की, क्रूर मुगलो का शासन था तब देश को बर्बर मुगलो से, बेरेहेम सुलतान जैसे आदिलशाह, निज़ाम, सिद्धी, कुतुबशह जैसे सल्तनत को हराया उसके साथ ही विदेशी अंग्रेज़, डच, पोर्तुगीज को विस्तारवाद से रोका। उस काल में पूरे हिंदुस्तान पर पहेली बार विदेशी लोगों का संपूर्ण शासन था । उस परिस्थिति में 1630 में छत्रपति शिवाजी महाराज जी का अवतार हुआ। उन्होंने अनेक युद्ध करके विदेशी यवन लोगोंको हराकर देश को गुलामी से मुक्त किया और अखंड हिंदू स्वराज्य की स्थापना की। आम लोगों का राज्य, जहा किसान, मजदूर राजा थे और राजा जनता का सेवक ऐसे राज्य जिसे रामराज्य की संकल्पना से जोड़ा जाने लगा उस राजा को 'जानता राजा' यानी जनता का राजा केहकर प्रसिद्धि मिली, जिनके राज्य में औरत, बच्चे, बुढ़ोको सबको सुरक्षा थी, "मराठा" शब्द मूल रुप से ९६ कुल के लोगों के लिये प्रयोग किया जाता है। मध्य 1660 के दशक तक, छत्रपती शिवाजी महाराज ने एक स्वतंत्र मराठा राज्य स्थापित किया था। उनकी मृत्यु के बाद, उनके पुत्र छत्रपती संभाजी महाराज  राजा बने और 27 साल के युद्ध में औरंगजेब को पराजित किया। उसमे सरसेनापति संताजी घोरपड़े ओर धनाजी जाधव का योगदान बड़ा हैं , इसे आगे बढ़ाकर पेशवाओं सहित मराठा संघ द्वारा एक विशाल साम्राज्य में विस्तारित किया गया, जो मध्य भारत से दक्षिण में पेशावर (आधुनिक पाकिस्तान में) उत्तर में अफगानिस्तान सीमा पर, और पूर्व में बंगाल के लिए अभियान के साथ। 1 9वीं शताब्दी तक, साम्राज्य मराठा प्रमुखों जैसे कि बड़ौदा के गायकवाड़ , इंदौर के होलकर , ग्वालियर की सिंधियां , धार और देवास के पवार , और नागपुर के भोसले द्वारा नियंत्रित अलग-अलग राज्यों का एक संघाध्यक्ष बन गया था। तीसरा एंग्लो-मराठा युद्ध (1817-1818) में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा अपनी हार तक भारत में कमान संभाली जाने वाली प्रमुख शक्ति बनेगी। महाराष्ट्र की जनसंख्या मे मराठों की आबादी 53% है । इनका सैन्य इतिहास गौरवशाली रहा है। शिवाजी महाराज की सेना मे मराठों की संख्या सर्वाधिक थी। शिवाजी महाराज के सभी सरसेनापति सरनोबत मराठा थे । मराठों की सैन्य सामर्थ्य और रणकुशलता जानकर अंग्रेजों ने मराठों की सैन्य युद्ध टुकड़ी बनाई। छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना से लेकर मराठा साम्राज्य के समय तक और मराठा लाईट इंन्फंट्री से लेकर आज तक मराठा समाज ने देश के लिए सैनिक सेवा दी है और कई युद्धों मे अपनी सैन्य कुशलता का लोहा मनवाया है। सेना के कई मेडल और शौर्य पदक मराठा रेजिमेंट के नाम हैं। उत्पति और इतिहास प्रमुख मराठा संस्थान 1. सातारा रियासत 2. कोल्हापुर रियासत 3.बड़ोदा राज्य 4.ग्वालियर रियासत 5. नागपुर राज्य 6. तंजावर 7. अक्कलकोट 8. सावंतवाड़ी 9. देवास सीनियर 10. देवास जुनियर 11. धार 12. तंजोर 13. जथ 14. मुधोल 15. संदुर 16. कुलाबा. ाजी संभ्भाजी मराठी लोग श्रेणी:भारत की योद्धा जातियाँ