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वास्तु शास्त्र
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वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान और कला है, जो भवनों, घरों, मंदिरों और अन्य संरचनाओं के डिज़ाइन, निर्माण और स्थान को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए दिशा-निर्देश देता है। इसका उद्देश्य सकारात्मक ऊर्जा (प्रकृति की शक्तियों) को बढ़ाना और नकारात्मक ऊर्जा को कम करना है, ताकि वहाँ रहने वाले लोगों को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त हो।
thumb|200px|वास्तु पुरुष की अवधारणा
संस्कृत में कहा गया है कि... गृहस्थस्य क्रियास्सर्वा न सिद्धयन्ति गृहं विना। http://slbsrsv.ac.in/vastuh.asp?dep=vastuh वास्तुशास्त्र विभाग, संस्कृत विद्यापीठ , नई दिल्ली 12 अगस्त 2017 https://web.archive.org/web/20170812140645/http://slbsrsv.ac.in/vastuh.asp?dep=vastuh 12 अगस्त 2017 dead
वास्तु शास्त्र घर, प्रासाद, भवन अथवा मन्दिर निर्माण करने का प्राचीन भारतीय विज्ञान है जिसे आधुनिक समय के विज्ञान आर्किटेक्चर का प्राचीन स्वरुप माना जा सकता है। जीवन में जिन वस्तुओं का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होता है उन वस्तुओं को किस प्रकार से रखा जाए वह भी वास्तु है वस्तु शब्द से वास्तु का निर्माण हुआ है
डिजाइन दिशात्मक संरेखण के आधार पर कर रहे हैं। यह हिंदू वास्तुकला में लागू किया जाता है, हिंदू मंदिरों के लिये और वाहनों सहित, बर्तन, फर्नीचर, मूर्तिकला, चित्रों, आदि।
दक्षिण भारत में वास्तु का नींव परंपरागत महान साधु मायन को जिम्मेदार माना जाता है और उत्तर भारत में विश्वकर्मा को जिम्मेदार माना जाता है।
इतिहास
45 देवता महाग्रंथ में लिखित कथा अनुसार भगवान शिव के पसीने से वास्तु पुरुष की उत्पत्ति हुई है। भगवान शिव का पसीना धरती पर गिरा तो उससे ही वास्तु पुरुष उत्पन्न होकर जमीन पर गिरा। वास्तु पुरुष को प्रसन्न करने के लिए वास्तु शास्त्र की रचना की गई। वास्तु पुरुष का असर सभी दिशाओं में रहता है। इसके बाद वास्तु पुरुष के कहने पर ब्रह्मा जी ने वास्तु शास्त्र के नियम बनाए। जिनके अनुसार कोई भी मकान या इमारत बनाई जाती है। इसके बाद भूमि पूजन से गृह प्रवेश तक हर मौके पर वास्तु पुरुष की पूजा का महत्व है। https://www.bhaskar.com/jeevan-mantra/jyotish/news/vastu-shastra-know-what-is-origin-of-lord-shiva-according-to-matsya-purana-127540033.html#:~:text=To%20Matsya%20Purana-,%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81%20%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%3A%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%87,%E0%A4%A5%E0%A5%80%20%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81%20%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B7%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&text=%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81%20%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B7%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88,%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%97%E0%A4%88%E0%A5%A4 वास्तु शास्त्र:मत्स्य पुराण के अनुसार भगवान शिव के पसीने से हुई थी वास्तु पुरुष की उत्पत्ति
वास्तुशास्त्र एवं दिशाएं
उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम ये चार मूल दिशाएं हैं। वास्तु विज्ञान में इन चार दिशाओं के अलावा 4 विदिशाएं हैं। आकाश और पाताल को भी इसमें दिशा स्वरूप शामिल किया गया है। इस प्रकार चार दिशा, चार विदिशा और आकाश पाताल को जोड़कर इस विज्ञान में दिशाओं की संख्या कुल दस माना गया है। मूल दिशाओं के मध्य की दिशा ईशान, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य को विदिशा कहा गया है। वैदिक वास्तुकला के नियमों और निर्देशों का पालन करके, वास्तुकला के कार्यक्रम में आपूर्ति और आयाम की स्थापना की जाती है, जो एक सुखी और समृद्ध आवास का सृजन करते हैं।https://vedogram.blogspot.com/2023/06/blog-post_25.html The architecture are more often changed in compare to ancient times and are very nearly to attract the negativity Vedogram Vedicgyan 26.06.2023 VedicGyan - Get the knowledge of all vedas and purans
वास्तुशास्त्र में पूर्व दिशा
वास्तुशास्त्र में यह दिशा बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है क्योंकि यह सूर्य के उदय होने की दिशा है। इस दिशा के स्वामी देवता इन्द्र हैं। भवन बनाते समय इस दिशा को सबसे अधिक खुला रखना चाहिए। यह सुख और समृद्धि कारक होता है। इस दिशा में वास्तुदोष होने पर घर भवन में रहने वाले लोग बीमार रहते हैं। परेशानी और चिन्ता बनी रहती हैं। उन्नति के मार्ग में भी बाधा आति है।
वास्तुशास्त्र में आग्नेय दिशा
पूर्व और दक्षिण के मध्य की दिशा को आग्नेय दिशा कहते हैं। अग्निदेव इस दिशा के स्वामी हैं। इस दिशा में वास्तुदोष होने पर घर का वातावरण अशांत और तनावपूर्ण रहता है। धन की हानि होती है। मानसिक परेशानी और चिन्ता बनी रहती है। यह दिशा शुभ होने पर भवन में रहने वाले उर्जावान और स्वास्थ रहते हैं। इस दिशा में रसोईघर का निर्माण वास्तु की दृष्टि से श्रेष्ठ होता है। अग्नि से सम्बन्धित सभी कार्य के लिए यह दिशा शुभ होता है।
वास्तुशास्त्र में दक्षिण दिशा
इस दिशा के स्वामी यम देव हैं। यह दिशा वास्तुशास्त्र में सुख और समृद्धि का प्रतीक होता है। इस दिशा को खाली नहीं रखना चाहिए। दक्षिण दिशा में वास्तु दोष होने पर मान सम्मान में कमी एवं रोजी रोजगार में परेशानी का सामना करना होता है। गृहस्वामी के निवास के लिए यह दिशा सर्वाधिक उपयुक्त होता है।
वास्तुशास्त्र में नैऋत्य दिशा
दक्षिण और पश्चिम के मध्य की दिशा को नैऋत्य दिशा कहते हैं। इस दिशा का वास्तुदोष दुर्घटना, रोग एवं मानसिक अशांति देता है। यह आचरण एवं व्यवहार को भी दूषित करता है। भवन निर्माण करते समय इस दिशा को भारी रखना चाहिए। इस दिशा का स्वामी राक्षस है। यह दिशा वास्तु दोष से मुक्त होने पर भवन में रहने वाला व्यक्ति सेहतमंद रहता है एवं उसके मान सम्मान में भी वृद्धि होती है।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
वास्तुकला (आर्किटेक्चर)
शिल्पशास्त्र
भारतीय स्थापत्यकला
बाहरी कड़ियाँ
स्थापत्य वेद - यहाँ सभी प्रमुख स्थापत्य वेद देवनागरी में उपलब्ध हैं।
वास्तुविद्या के अनुसार भवन में कक्षों में का उपयुक्त स्थान (अखण्ड ज्योति १९९९)
रूपमण्डनम् (वास्तुशास्त्र का संस्कृत ग्रंथ) (गूगल पुस्तक ; व्याख्याता - बलराम श्रीवास्तव)
क्या है वास्तु ? (पंजाबकेसरी)
आपके घर की वास्तु विशेषताएं
आपके सपनों के घर में वास्तु की भूमिका
घर के लिए वास्तु https://web.archive.org/web/20200114050111/https://vizsign.in/vastu-for-home/ 14 जनवरी 2020
वास्तु अनुसार टॉयलेट टिप्स और उपाय https://web.archive.org/web/20200612032439/https://www.evavaastu.com/2020/06/toilet-vastu-vastu-for-toilet-in-hindi.html 12 जून 2020
श्रेणी:हिन्दू मन्दिर वास्तुकला
श्रेणी:भारतीय स्थापत्य कला
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