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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

शबलाश्व

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ब्रह्मा जी के मानस पुत्र दक्ष ने सृष्टि बढाने के लिए वीरण प्रजापति की कन्या वीरिणी से विवाह करके मैथुनजनित सृष्टि प्रारम्भ की थी। कथा जब दक्ष की बनाई मानस सृष्टि में वृद्धि नही हुई तो ब्रह्म जी ने उन्हें मैथुनजनित सृष्टि की रचना करने की प्रेरणा दी। इस प्रकार दक्ष ने असिक्नी से विवाह किया। असिक्नी के गर्भ से दस हजार पुत्र उत्पन्न हुए जो हर्यश्व कहलाए। परंतु नारद ने उन्हें भिक्षुओं के मार्ग पर चला दिया। पुनः दक्ष ने असिक्नी के गर्भ से एक सहस्त्र पुत्र उत्पन्न किए जो शबलाश्व कहलाए। वे भी अपने पूर्व भाइयों के अनुसार नारायण सरोवर तट पर सृष्टि बढाने के लिए तपस्या करने लगे। परन्तु इस बार फिर नारद ने उन्हें भिक्षुओं के मार्ग पर धकेल दिया। इससे दक्ष नारद पर क्रोधित हुए और उन्हें जगह जगह फिरने का व एक ठिकाना ना होने का श्राप दे डाला। प्रसंग उक्त प्रसंग का शिवपुराण के पृष्ठ संख्या 175 पर वर्णन है। यह रुद्र संहिता दूसरे भाग के अध्याय 13 में वर्णित है। यह भी देखो 1 यज्ञदत्त 2 असिक्नी संदर्भ 1 "संक्षिप्त शिवपुराण" , गीताप्रेस गोरखपुर श्रेणी:पौराणिक पात्र श्रेणी:शिवपुराण