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हरिदास केसरिया
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हरिदास केसरिया (निधन मार्च 1527), अथवा हरिदास महियारिया, 16 वीं शताब्दी के मेवाड़ सरदार, राजस्थान के योद्धा और कवि थे । 1519 में गागरोन के युद्ध में, उन्होंने राणा सांगा के नेतृत्व में मेवाड़ सेना के साथ लड़े और मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय को पकड़ कर कैद कर लिया। वह राणा सांगा के घनिष्ठ मित्र थे, जिन्होंने मेवाड़ साम्राज्य की कई लड़ाइयों और अभियानों में भाग लिया था।
वंश और परिवार
स्रोत: https://books.google.co.in/books?id=Ma0NAAAAIAAJ&newbks=0&hl=en&redir_esc=y Mahiyāriyā satasaī: eka anuśīlana Jośī Vandanā 1986 Sāhitya Saṃsthāna, Rājasthāna Vidyāpīṭha hi https://books.google.co.in/books?id=A85EAQAAIAAJ&newbks=0&hl=en&redir_esc=y Cāraṇa sāhitya kā itihāsa: Rājasthāna ke prācīna evaṃ Madhyakālīna 275 cāraṇa kaviyoṃ, unake kāvya ke vibhinna rūpoṃ tathā pravr̥ttiyoṃ kā Jīvanacaritra sahita aitihāsika evaṃ ālocanātmaka anuśīlana Jijñāsu Mohanalāla 1968 Ujvala Cāraṇa-Sabhā hi
केसरिया वंशीय चारण मूलतः गुजरात के पाटन क्षेत्र से थे, वंश का नाम उनके पूर्वज केसरियाजी के नाम पर पड़ा। केसरियाजी सिद्धराज जयसिंह के शासन में पाटन में रहते थे, जिन्हें जयसिंह ने गेणासरा सहित 6 गांवों की जागीर से सम्मानित किया। कालांतर में केसरियाजी के वंशज मांडणजी केसरिया, गेणासरा को छोड़ मेवाड़ आ गए, जहाँ महाराणा ने उनकी प्रतिभा और ज्ञान से प्रसन्न होकर उन्हें महियारी सहित 6 गाँवों की जागीर प्रदान की। इसी जागीर के बाद से केसरिया वंश को महियारिया के नाम से जाना जाने लगा।
हरिदास का जन्म मेवाड़ में मांडणजी केसरिया के यहाँ हुआ था। स्वयं हरिदास के चार पुत्र हुए; जिनमें से तीन के नाम हैं:
उदयभानजी
केशवदासजी
हरिभगतजी
केशवदास और हरिभगत का वंश नहीं चला। उदयभान के पुत्र और हरिदास के पौत्र, देवीदास महियारिया एक प्रसिद्ध और कुशल योद्धा हुए। ये महाराणा जगतसिंह के शासन काल में मेवाड़ छोड़कर चले गए । यहाँ से जाने का कारण यह था कि देवीदासजी ने महाराणा के महल में चौपड़ खेलते - खेलते दिल्ली के बादशाह के भेजे हुए व्यक्ति द्वारा इन्हें कुछ अपशब्द कहे जाने पर उसको तलवार से मार डाला । इससे आतंकित हो महाराणा ने देवीदासजी को कुछ समय के लिए मेवाड़ से चले जाने का कहा ।
मेवाड़ से निकलकर देवीदास जी महाराज गोकुलदास जी शक्तावत के सामंतों में सम्मिलित हो गए । महाराज गोकुलदास जी बादशाह शाहजहाँ की तरफ से बनारस की लड़ाई में सेनानायक नियुक्त हुए । उक्त लड़ाई में गोकुलदास जी एवं देवीदास जी दास जी वीरता से लड़े और उन्होंने विजय प्राप्त की । बादशाह ने प्रसन्न होकर गोकुलदासजी को सावर का इलाका जागीर में दिया । देवीदासजी गोकुलदासजी के मुख्य सामंत थे । देवीदासजी के पराक्रम से प्रसन्न हो गोकुलदासजी ने इन्हें महरु गांव के साथ 26 गांव जागीर में दिये।
हरिदास ने मादड़ी गाँव ( राजसमंद ) में महियारिया वंश की कुलदेवी श्री सुंदरबाई का मंदिर निर्माण करवाया। इसी देवी का एक और मंदिर भीलडी ( जहजपुर ) गांव में बनवाया गया था, जो आज भी वहाँ मौजूद है।
उपाख्यान
हरिदास के बारे में कई किस्से प्रचलित हैं। एक किवदंती है कि एक बार राणा साँगा अपने साथियों के साथ शिकार करने गया, तो उसका एक हाथी जो पास में बंधा हुआ था, चिढ़ाने के बाद इतना क्रोधित हो गया कि वह जंजीर तोड़कर उनके पीछे भागा। अन्य भाग गए लेकिन हरिदास ने सांगा का साथ नहीं छोड़ा। जब बचने का कोई रास्ता नहीं था, तो सांगा ने हरिदास से कहा कि तुम अपनी कुलदेवियों की स्तुति गाते हो, रक्षा के लिए आज तुम उन्हें क्यों नहीं बुलाते? इस पर हरिदास ने अपनी आराध्यशक्ति श्री सुंदरबाई को स्मरण करते हुए एक दोहा कहा-आण दबाया गज अठे, और न हेक उपाय। ‘सुन्दर’ मां सज आवजे, सांगा तणी सहाय।।और तुरंत उन्होंने देखा कि उग्र हाथी एक अदृश्य बल द्वारा रुक गया और शांत हो गया, जिससे सांगा और हरिदास को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
गागरोन का युद्ध (1519)
गागरोन का युद्ध
स्रोत: https://books.google.co.in/books?id=Ma0NAAAAIAAJ&newbks=0&hl=en&redir_esc=y Mahiyāriyā satasaī: eka anuśīlana Jośī Vandanā 1986 Sāhitya Saṃsthāna, Rājasthāna Vidyāpīṭha hiJośī, Vandanā (1986). Mahiyāriyā satasaī: eka anuśīlana (in Hindi). Sāhitya Saṃsthāna, Rājasthāna Vidyāpīṭha.
श्रेणी:CS1 Hindi-language sources (hi) https://books.google.co.in/books?id=_7INAAAAIAAJ&newbks=0&hl=en&redir_esc=y Kavi mata maṇḍaṇa: vistr̥ta jīvanī aura anya ajñāta racanāoṃ sahita Bāṅkidāsa 1983 Jaina Brādarsa hi राणा सांगा ने तो अपना दस करोड़ को आय वाला चित्तौड़-राज्य ही महियारिया शाखा के चारण हरिदास को प्रदान कर दिया था। https://books.google.co.in/books?id=c6djAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en&redir_esc=y Maru-Bhāratī 1987 Biṛlā Ejyūkeśana Ṭrasṭa. hi युद्धवीर साँगा हम्मीर की तरह दानवीर भी थे। हरिदास केसरिया को चित्तौड़ ही दान कर दिया था पर उसने मांडू-विजय की खुशी में प्राप्त चित्तौड़ लोटा दिया।
यह युद्ध मेवाड़ साम्राज्य और गुजरात सल्तनत द्वारा सहायता प्राप्त मालवा सल्तनत के बीच लड़ा गया था। मेवाड़ की सेना को मेड़ता के राठौड़ों ने सुदृढ़ किया। सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय ने सल्तनत सेना का नेतृत्व किया और थोरुग गागरोन पर चढ़ाई की, जहां उनका सामना राणा सांगा की एक बड़ी सेना से हुआ। आगामी लड़ाई में, मेवाड़ सेना ने बहादुरी से युद्ध किया और हरिदास ने सुल्तान को कैद कर उसे सांगा के सामने पेश किया। https://books.google.com/books?id=Xi3cAAAAMAAJ A Military History of Medieval India Sandhu Gurcharn Singh Vision Books 2003 9788170945253 386
इस जीत के उपलक्ष्य में राणा सांगा ने हरिदास की वीरता और साहस से प्रसन्न होकर उन्हें चित्तौड़ का किला प्रदान किया। हालाँकि, हरिदास ने विनम्रतापूर्वक किले को वापस महाराणा को लौटा दिया और बारह गाँवों की एक जागीर स्वीकार की। जागीर में मादड़ी, बेरी, पांचली आदि गाँव शामिल थे। पांचली आधुनिक काल तक हरिदास के वंशजों के नियंत्रण में रहा। https://books.google.co.in/books?id=V0NuAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en&redir_esc=y Shivaji, Bhakha Sources and Nationalism Singh Mahendra Pratap 2001 Books India International en Rana publicly announced that he would give away his whole kingdom of Mewar to Charan Haridas of the Mahiyaria clan. Haridas humbly refused the offer and accepted only twelve villages . One of those villages was still kept in the possession of Charan's descendants, when Kavi Raja Shyamaldan wrote his book in the closing decades of the 19th century.
खानवा ( भरतपुर ) में बने राणा सांगा पैनोरमा में, गागरोन की लड़ाई में सांगा की जीत और पराजित सुल्तान के प्रति उनके उदार व्यवहार को खुद हरिदास द्वारा लिखित ऐतिहासिक डिंगल छंदों में प्रदर्शित किया गया है: https://books.google.co.in/books?id=hRBDAAAAYAAJ&newbks=0&hl=en&redir_esc=y Maharana Sāngā, the Hindupat: The Last Great Leader of the Rajput Race Sarda Har Bilas 1970 Kumar Bros. en https://artandculture.rajasthan.gov.in/content/raj/art-and-culture/en/departments/rajasthan-heritage-protection-promotion-authority/heritage-projects/completed/rana-sanga-panorama.html राणा सांगा पैनोरमा, खनुआ, भरतपुर Government of Rajasthan: Art and Culture Portal
डिंगल अनुवादमांडव गढ़ गर्जर ग्रह मुके,
रैणवां दीघ चत्रगढ़ राण। हे राणा! तुमने मांडू और गुजरात के राजाओं को घर लौटने की अनुमति दी और चित्तौड़ का किला रेणवा चारण को प्रदान किया।
मृत्यु - खानवा का युद्ध (1527)
खानवा का युद्ध
अपने पूरे जीवन में, हरिदास मेवाड़ दरबार के एक महत्वपूर्ण सदस्य थे और उन्होंने कई लड़ाइयाँ लड़ीं। मार्च 1527 में, मुगल शासक बाबर के खिलाफ खानवा के युद्ध में सांगा के साथ बहादुरी से लड़ते हुए हरिदास वीरगति को प्राप्त हुए। https://books.google.co.in/books?id=7X23AAAAIAAJ&newbks=0&hl=en&redir_esc=y Mahārāṇā Pratāpa ke pramukha sahayogī 1997 Rājasthānī Granthāgāra hi सांगा ने हरिदास महियारिया को चित्तौड़ का राज्य देकर प्रथम राष्ट्र कवि के पद पर आसीन किया । हरिदास ने खानवा प्रथम स्वाधीनता के निर्णायक युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी।
कृतियाँ
हरिदास एक अच्छे कवि थे और राणा सांगा पर डिंगल गीत सहित उनकी कुछ विविध रचनाएँ मिलती हैं। https://jainelibrary.org/book-detail/?srno=012043 मेवाड़ प्रदेशके प्राचीन डिंगल कवि कोठारी देव श्री अगरचंद नाहटा अभिनन्दन-प्रन्थ प्रकाशन समित्ति 1977
मोज समंद मालवत महाबलू
धन सांगा हात हमीर कलोधर
संदर्भ
श्रेणी:भारतीय हिन्दू
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श्रेणी:दक्षिण एशिया का इतिहास
श्रेणी:चारण
श्रेणी:उदयपुर का इतिहास