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पर्यावरण दर्शन
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पर्यावरण दर्शन (Environmental philosophy) दर्शनशास्त्र की वह शाखा है जो मानव, प्राकृतिक पर्यावरण और अन्य जीवों के बीच संबंधों से जुड़े दार्शनिक प्रश्नों का अध्ययन करती है। इसमें प्रकृति के मूल्य, पर्यावरण के प्रति मानव के नैतिक दायित्व, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग तथा मानव और गैर-मानवीय जगत के संबंधों जैसे विषयों पर विचार किया जाता है। पर्यावरण नीतिशास्त्र इस क्षेत्र की एक प्रमुख शाखा है, जो पर्यावरण और उसके गैर-मानवीय घटकों के नैतिक मूल्य तथा उनके प्रति मानव के नैतिक संबंधों का अध्ययन करती है।Environmental Ethics https://plato.stanford.edu/entries/ethics-environmental/ Stanford Encyclopedia of Philosophy 30 August 2026
प्रमुख दार्शनिक दृष्टिकोण
पर्यावरण दर्शन में प्रकृति और पर्यावरण के मूल्य तथा मानव के साथ उनके संबंधों को समझने के लिए विभिन्न दार्शनिक दृष्टिकोण विकसित हुए हैं।
मानव-केंद्रितता
मानव-केंद्रितता (Anthropocentrism) ऐसा दृष्टिकोण है जिसमें नैतिक मूल्यांकन में मानव हितों और मानव कल्याण को केंद्रीय स्थान दिया जाता है। इसके कुछ रूप पर्यावरण के संरक्षण को मुख्यतः मानव जीवन, स्वास्थ्य और कल्याण की आवश्यकताओं से जोड़ते हैं।Environmental Ethics https://plato.stanford.edu/entries/ethics-environmental/ Stanford Encyclopedia of Philosophy 30 August 2026
जीवन-केंद्रितता
जीवन-केंद्रितता (Biocentrism) के अनुसार गैर-मानवीय जीवों सहित जीवन के अन्य रूपों को भी अपने आप में नैतिक मूल्य प्राप्त हो सकता है। यह दृष्टिकोण मानव को अन्य जीवों से नैतिक रूप से पूर्णतः अलग या श्रेष्ठ मानने की धारणा को चुनौती देता है।Biodiversity Preservation https://plato.stanford.edu/entries/ethics-environmental/biodiversity.html Stanford Encyclopedia of Philosophy 30 August 2026
पारिस्थितिकी-केंद्रितता
पारिस्थितिकी-केंद्रितता (Ecocentrism) में नैतिक विचार का केंद्र केवल व्यक्तिगत जीवों तक सीमित न रहकर पारिस्थितिक तंत्र और उनके पारस्परिक संबंधों तक विस्तारित किया जाता है। इसमें पारिस्थितिक समुदायों, प्राकृतिक प्रक्रियाओं और पारिस्थितिक तंत्रों के मूल्य से संबंधित प्रश्नों पर विचार किया जाता है।
प्रमुख उप-विषय
पर्यावरण नीतिशास्त्र
पर्यावरण नीतिशास्त्र (Environmental ethics) पर्यावरण तथा उसके गैर-मानवीय घटकों के नैतिक मूल्य और उनके प्रति मानव के नैतिक दायित्वों का अध्ययन करता है। इसमें प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण, गैर-मानवीय जीवों के नैतिक दर्जे, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग तथा भावी पीढ़ियों के प्रति दायित्व जैसे प्रश्नों पर विचार किया जाता है।Environmental Ethics https://plato.stanford.edu/entries/ethics-environmental/ Stanford Encyclopedia of Philosophy 30 August 2026
गहन पारिस्थितिकी
गहन पारिस्थितिकी (Deep ecology) पर्यावरण दर्शन से संबंधित एक दार्शनिक दृष्टिकोण है, जिसे नॉर्वेजियन दार्शनिक अर्ने नेस ने विकसित किया। यह मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की आलोचना करता है और प्राकृतिक जगत तथा गैर-मानवीय जीवन के मूल्य से संबंधित प्रश्नों पर बल देता है।
पर्यावरण सौंदर्यशास्त्र
पर्यावरण सौंदर्यशास्त्र प्राकृतिक और निर्मित पर्यावरण के सौंदर्यात्मक अनुभव तथा उसके मूल्य से संबंधित दार्शनिक प्रश्नों का अध्ययन करता है। इसमें यह विचार किया जाता है कि मनुष्य प्राकृतिक परिवेश को किस प्रकार अनुभव और मूल्यांकित करता है।
समकालीन संदर्भ
पर्यावरण दर्शन के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, पर्यावरणीय क्षरण, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और भावी पीढ़ियों के प्रति दायित्व जैसे समकालीन प्रश्नों पर दार्शनिक विचार किया जाता है। पर्यावरणीय प्रश्नों का संबंध संधारणीय विकास और जलवायु नीति से भी जुड़ता है, हालांकि इन नीतिगत ढाँचों को पर्यावरण दर्शन का प्रत्यक्ष परिणाम मानना उचित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के संधारणीय विकास लक्ष्यों में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और सामाजिक-आर्थिक विकास को परस्पर संबंधित उद्देश्यों के रूप में शामिल किया गया है।The Sustainable Development Goals https://www.un.org/sustainabledevelopment/development-goals/ United Nations 30 August 2026
इन्हें भी देखें
दर्शनशास्त्र
पर्यावरण नीतिशास्त्र
पारिस्थितिकी
संधारणीय विकास
जलवायु परिवर्तन
जैव विविधता
संदर्भ
श्रेणी:दर्शन की शाखाएँ