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411 समाचार
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हांस जॉर्ज डेहमेल्ट

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हांस जॉर्ज डेहमेल्ट Hans_Dehmelt.jpg 1922 09 09 y गोरलिट्ज़, जर्मनी 2017 03 07 1922 09 09 y सीऐटल, वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका भौतिक शास्त्र वाशिंगटन विश्वविद्यालय ड्यूक विश्वविद्यालय गटिङेन विश्वविद्यालय डेविड वाइनलैंड आयन ट्रैप का विकासइलेक्ट्रॉन जी-फैक्टर का सटीक मापनपेनिंग ट्रैपलेजर कूलिंगडॉप्लर कूलिंगन्यूक्लियर क्वाड्रुपोल रेजोनेंसकॉस्मोनियम नेशनल मेडल ऑफ सांइस (1995)भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1989)रमफोर्ड पुरस्कार (1985)हम्बोल्ट पुरस्कार (1974)डेविसन-जर्मर पुरस्कार (1970) हांस जॉर्ग डेहमेल्ट (9 सितंबर 1922 – 7 मार्च 2017) एक जर्मन-अमेरिकी भौतिक विज्ञानी थे,http://funerals.coop/obituaries/dr-hans-dehmelt.html Dr. Hans Dehmelt's Obituary - The Co-op Funeral Home of People's Memorial dead https://web.archive.org/web/20170318083359/http://funerals.coop/obituaries/dr-hans-dehmelt.html 2017-03-18http://www.sz-online.de/nachrichten/beruehmter-goerlitzer-physiker-ist-tot-3637180.html Berühmter Görlitzer Physiker ist tot de Famous Görlitz Physicist is Dead Sächsische Zeitung Saxony DDV 2017-03-16 2017-03-17 https://www.nytimes.com/2017/04/09/science/hans-dehmelt-dies-nobel-laureate-physics.html Hans Dehmelt, Nobel Laureate for Isolating Electrons, Dies at 94 रिचर्ड सैंडोमिर 9 अप्रैल 2017 दि न्यू यॉर्क टाइम्स जिन्होंने परमाणु और कण भौतिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया। वे विशेष रूप से आवेशित कणों को नियंत्रित और अध्ययन करने के लिए विकसित की गई आयन-पाश तकनीक के सह-विकास के लिए प्रसिद्ध हैं। इस तकनीक का एक प्रमुख रूप पेनिंग पाश है, जिसने एकल इलेक्ट्रॉनों और आयनों के अत्यंत सटीक मापन को संभव बनाया। उनके अनुसंधान ने वैज्ञानिकों को मूलभूत कणों के गुणों का अभूतपूर्व परिशुद्धता के साथ अध्ययन करने का अवसर प्रदान किया। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉन के चुम्बकीय आघूर्ण तथा अन्य सूक्ष्म भौतिक गुणों के मापन में इस तकनीक की निर्णायक भूमिका रही। इन उपलब्धियों ने आधुनिक परमाणु भौतिकी, क्वांटम यांत्रिकी और परिशुद्ध मापन विज्ञान के विकास को नई दिशा दी। इन महत्त्वपूर्ण योगदानों के लिए हांस जॉर्ग डेहमेल्ट को वर्ष 1989 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।http://nobelprize.org/nobel_prizes/physics/laureates/1989/press.html Nobel Prize in Physics 1989. Press release 12 October 1989 रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज 2008-04-08 उन्होंने यह सम्मान वोल्फगैंग पॉल के साथ साझा किया, जिन्हें आयन-पाश तकनीकों के विकास में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया था। उसी वर्ष पुरस्कार का दूसरा आधा भाग नॉर्मन फॉस्टर रैमसे को परमाणु और आणविक स्पेक्ट्रोस्कोपी में अत्यंत उच्च परिशुद्धता वाली तकनीकों के विकास के लिए प्रदान किया गया। डेहमेल्ट का कार्य आज भी उच्च-परिशुद्धता भौतिकी और मूलभूत कणों के अध्ययन का आधार माना जाता है। जीवनी हांस जॉर्ग डेहमेल्ट ने मात्र दस वर्ष की आयु में बर्लिन के प्रतिष्ठित लैटिन विद्यालय बर्लिनिशेस जिम्नेज़ियम त्सुम ग्राउएन क्लोस्टर में प्रवेश प्राप्त किया। उनकी शैक्षणिक प्रतिभा को देखते हुए उन्हें छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई थी।सैंडोमिर Richard Hans Dehmelt, Nobel Laureate for Isolating Electrons, Dies at 94 दि न्यू यॉर्क टाइम्स अप्रैल 9, 2017 https://www.nytimes.com/2017/04/09/science/hans-dehmelt-dies-nobel-laureate-physics.html इस विद्यालय में अध्ययन के दौरान उन्होंने गणित और विज्ञान के प्रति गहरी रुचि विकसित की, जिसने आगे चलकर उनके वैज्ञानिक जीवन की नींव रखी। वर्ष 1940 में विद्यालयी शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने स्वेच्छा से जर्मन सेना में सेवा ग्रहण की। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सेना ने उनकी शैक्षणिक क्षमता को देखते हुए 1943 में उन्हें ब्रेस्लाउ विश्वविद्यालय में भौतिकी का अध्ययन करने के लिए भेजा। वहाँ उन्होंने एक वर्ष तक भौतिकी का अध्ययन किया, किंतु युद्ध की परिस्थितियों के कारण उन्हें पुनः सैन्य सेवा में लौटना पड़ा। युद्ध के अंतिम चरण में वे पश्चिमी मोर्चे पर तैनात रहे और बल्ज़ की लड़ाई के दौरान मित्र राष्ट्रों की सेना द्वारा बंदी बना लिए गए। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, 1946 में अमेरिकी युद्धबंदी शिविर से रिहा होने पर हांस जॉर्ग डेहमेल्ट ने अपने अधूरे शैक्षणिक जीवन को पुनः आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। वे गोटिंगेन विश्वविद्यालय लौटे और भौतिकी के अध्ययन में फिर से जुट गए। युद्धोत्तर जर्मनी की कठिन आर्थिक परिस्थितियों में उन्होंने पुराने रेडियो यंत्रों की मरम्मत और उनके विनिमय से अपनी आजीविका चलाते हुए शिक्षा जारी रखी। उनकी लगन और परिश्रम का परिणाम यह हुआ कि उन्होंने 1948 में अपना परास्नातक शोधकार्य पूरा किया और 1950 में गोटिंगेन विश्वविद्यालय से भौतिकी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी और उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के ड्यूक विश्वविद्यालय में शोधोत्तर सहयोगी के रूप में कार्य करने का निमंत्रण मिला। वर्ष 1952 में वे अमेरिका चले गए और वहीं से उनके वैज्ञानिक जीवन का नया अध्याय आरम्भ हुआ। आगे चलकर डेहमेल्ट 1955 में वाशिंगटन राज्य के सिएटल नगर स्थित वाशिंगटन विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए। उनकी शोध उपलब्धियों और अध्यापन कौशल के कारण 1958 में उन्हें सह-प्राध्यापक तथा 1961 में पूर्ण प्राध्यापक के पद पर पदोन्नत किया गया।उर्टन जेम्स http://www.washington.edu/news/2017/03/21/hans-dehmelt-nobel-laureate-and-uw-professor-emeritus-has-died-at-age-94/ Hans Dehmelt — Nobel laureate and UW professor emeritus — has died at age 94 यूडब्ल्यू टुडे वाशिंगटन विश्वविद्यालय 2017-03-21 इसी विश्वविद्यालय में रहते हुए उन्होंने आयन-पाश तकनीक और उच्च-परिशुद्धता मापन के क्षेत्र में अपने सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अनुसंधान कार्य किए, जिन्होंने उन्हें विश्व के अग्रणी भौतिकविदों की श्रेणी में स्थापित किया। सन्दर्भ श्रेणी:1922 में जन्मे लोग श्रेणी:२०१७ में निधन श्रेणी:नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी