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मनुष्यालय चन्द्रिका
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दाएँ|अंगूठाकार|चौखम्बा कृष्णदास अकादमी, वाराणसी द्वारा प्रकाशित मनुष्यालय चंद्रिका का मुखपृष्ठ।
मनुष्यालयचंद्रिका सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में संस्कृत में लिखा गया एक ग्रंथ है जो गृह की वास्तुकला से संबंधित है। इस ग्रन्थ के लेखक तिरुमंगलत नीलकंठन मुसत हैं। यह ग्रन्थ भारत के उस क्षेत्र में प्रचलित घरेलू वास्तुकला के मूल सिद्धांतों का सार है जिसे अब केरल राज्य के नाम से जाना जाता है। http://www.keralahistory.ac.in/keralaarchitecture.htm Kerala Architecture Balagopal T. S .Prabhu Kerala Council for Historical Research https://web.archive.org/web/20110721082519/http://www.keralahistory.ac.in/keralaarchitecture.htm 21 July 2011 28 August 2016 केरल की पारंपरिक वास्तुकला के मूल संदर्भग्रन्थ के रूप में इस ग्रंथ की लोकप्रियता अब तक बनी हुई है। इस ग्रंथ के आरंभिक प्रवचन में त्रिप्रंगोड, त्रिक्कंदियूर, अलातियूर आदि के मंदिरों में विराजमान देवताओं के उल्लेख से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इसके लेखक इन मंदिरों के निकट किसी स्थान के निवासी रहे होंगे। इसके लेखक के जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी है, केवल इतना ज्ञात है कि उन्होंने हाथियों के अध्ययन पर मतंगलीला नामक एक ग्रन्थ की भी रचना की है। http://www.indulekha.com/mathangaleela-%20animal-husbandry%20-tirumangalath-neelakantan?author_id= Mathangaleela indulekha.com indulekha.com, Kerala's Online Bookstore https://web.archive.org/web/20160913053429/http://www.indulekha.com/mathangaleela-%20animal-husbandry%20-tirumangalath-neelakantan?author_id= 13 September 2016 29 August 2016
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय वास्तुशास्त्र