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शिलाहार राजवंश
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शिलाहार राजवंश, राष्ट्रकूट काल के दौरान उत्तरी और दक्षिणी कोंकण (वर्तमान मुंबई और दक्षिणी महाराष्ट्र) में स्थापित एक शाही राजवंश था। यह राजवंश तीन शाखाओं में विभाजित था - एक शाखा ने उत्तरी कोंकण पर शासन किया, दूसरी शाखा ने दक्षिणी कोंकण पर शासन किया, और तीसरी शाखा ने 940 और 1215 के बीच कोल्हापुर, सतारा और बेलगाम के आधुनिक जिले पर शासन किया। इसके बाद इनपर चालुक्य वंश ने अधिकार कर लिया।http://www.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/nasik/005%20History/001%20AncientPeriod.htm Nasik History - Ancient Period State Government of Maharashtra 2006-10-14 https://web.archive.org/web/20070927220913/http://www.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/nasik/005%20History/001%20AncientPeriod.htm 27 सितंबर 2007 live
अपरादित्य प्रथम या अपरार्क 1170 - 1197 ई तक उत्तरी कोंकण शाखा का एक शिलाहार शासक था। वह याज्ञवल्क्य स्मृति के प्रसिद्ध टीकाकारों में से एक था। अपरार्कपारा याज्ञवल्क्य स्मृति पर एक व्यापक भाष्य है।
यह राजवंश दक्खिन के पठार पर राज्य करते राष्ट्रकूट राजवंश के अधीन जागीरदार और सामंत हुआ करते थे। यह ८वीं -१०वीं शताब्दी की बात है। गोविंद द्वितीय, राष्ट्रकूट शासक ने उत्तरी कोंकण का राज्य (वर्तमान ठाणे, मुंबई और रायगढ़) कपर्दिन प्रथम, सिल्हारा वंश के संस्थापक को ८०० ई. में दिया। तबसे उत्तरी कोंकण को कपर्दी द्वीप या कवदिद्वीप कहा जाने लगा। इस राज्य की राजधानी पुरी हुई, जो वर्तमान राजापुर या रायगढ़ है। इस वंश को टगर-पुराधीश्वर की उपाधि मिली, जिसका अर्थ था टगर (वर्तमान टेर, ओस्मानाबाद जिला) का स्वामी। १३४३ के लगभग, साल्सेट द्वीप और पूरा द्वीपसमूह मुज़फ्फर वंश को चला गया।
सिल्हारा वंश, दक्श्निण महाराष्ट्र जो कोल्हापुर में थे, इन तीनों में से एक थे। इस वंश की स्थापना राष्ट्रकूट वंश के पतन के बाद हुयी थी।
निर्माण कार्य
मुंबई के अनेक दर्शनीय स्थल, इस वंश की ही देन हैं:
बाल्केश्वर मंदिर अवें बाणगंगा सरोवर, इस वंश के राजा चित्तराज ने बनवाये थे।http://www.gsbkonkani.net/TEMPLES/BANGANGA%20SHRI%20WALKESHWAR.htm बाणगंगा, बाल्केश्वर का इतिहास 24 अगस्त 2009 https://web.archive.org/web/20081006200643/http://www.gsbkonkani.net/TEMPLES/BANGANGA%20SHRI%20WALKESHWAR.htm 6 अक्तूबर 2008 dead .
अंबरनाथ मंदिर, निकट मुंबई भी चित्तराज ने ही १०६० में बनवाया था।
सन्दर्भ
श्रेणी:मुंबई का इतिहास
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