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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अन्नपूर्णा

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अन्नपूर्णा देवी भोजन, धान, पोषण, पोषक तत्वों और खाद्य संसाधन की देवी भगवती Goddess_Annapurna_1.jpeg विशालाक्षी,विश्वशक्ति, रेणु, कुमारी,पार्वती देवी श्री अन्नपूर्णेश्वरी माता और महेश्वर भगवान सिंहेश्वर शिव कैलाश, काशी ॐ अन्नपूर्णा सदा पूर्णा शंकर प्राणवल्लभे ज्ञान विज्ञान सिध्यर्थम भिक्षाम देही च पार्वती । सिंहासन शिव अन्नपूर्णा जयंती अक्षय पात्र, करछुल देवी देवी पार्वती 180 right|thumb|upright=1.0|अन्नपूर्णा देवी thumb|upright=1.0|काठमांडू में अन्नपूर्णा मंदिर अन्नपूर्णा देवी हिन्दुओं द्वारा पूजित एक देवी हैं। उनका दूसरा नाम 'अन्नदा' है। वे शक्ति की ही एक रूप हैं। अन्नपूर्णा देवी हिन्दू धर्म में मान्य देवी-देवताओं में विशेष रूप से पूजनीय हैं। इन्हें माँ जगदम्बा का ही एक रूप माना गया है, जिनसे सम्पूर्ण विश्व का संचालन होता है। इन्हीं जगदम्बा के अन्नपूर्णा स्वरूप से संसार का भरण-पोषण होता है। अन्नपूर्णा का शाब्दिक अर्थ है- 'धान्य' (अन्न) की अधिष्ठात्री। सनातन धर्म https://web.archive.org/web/20200610093716/https://www.blackmagicpuja.com/black-magic-specialist.html 10 जून 2020 की मान्यता है कि प्राणियों को भोजन माँ अन्नपूर्णा की कृपा से ही प्राप्त होता है। ये अन्नपूर्णा ही शाकुम्भरी देवी के नाम से विख्यात है जहाँ उत्तर प्रदेश में एक छोर पर माँ अन्नपूर्णा विराजमान है तो वहीं दूसरे छोर पर सहारनपुर जिले में शिवालिक पर्वत पर माँ शाकम्भरी विराजमान है। शिव की अर्धांगनी कलियुग में माता अन्नपूर्णा की पुरी काशी है, किंतु सम्पूर्ण जगत् उनके नियंत्रण में है। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के अन्नपूर्णाजी के आधिपत्य में आने की कथा बडी रोचक है। भगवान शंकर जब पार्वती के संग विवाह करने के पश्चात् उनके पिता के क्षेत्र हिमालय के अन्तर्गत कैलाश पर रहने लगे, तब देवी ने अपने मायके में निवास करने के बजाय अपने पति की नगरी काशी में रहने की इच्छा व्यक्त की। महादेव उन्हें साथ लेकर अपने सनातन गृह अविमुक्त-क्षेत्र (काशी) आ गए। काशी उस समय केवल एक महाश्मशान नगरी थी। माता पार्वती को सामान्य गृहस्थ स्त्री के समान ही अपने घर का मात्र श्मशान होना नहीं भाया। इस पर यह व्यवस्था बनी कि सत्य, त्रेता, और द्वापर, इन तीन युगों में काशी श्मशान रहे और कलियुग में यह अन्नपूर्णा की पुरी होकर बसे। इसी कारण वर्तमान समय में अन्नपूर्णा का मंदिर काशी का प्रधान देवीपीठ हुआ। भक्त वत्सल स्कन्दपुराण के 'काशीखण्ड' में लिखा है कि भगवान विश्वेश्वर गृहस्थ हैं और भवानी उनकी गृहस्थी चलाती हैं। अत: काशीवासियों के योग-क्षेम का भार इन्हीं पर है। 'ब्रह्मवैव‌र्त्तपुराण' के काशी-रहस्य के अनुसार भवानी ही अन्नपूर्णा हैं। परन्तु जनमानस आज भी अन्नपूर्णा को ही भवानी मानता है। श्रद्धालुओं की ऐसी धारणा है कि माँ अन्नपूर्णा की नगरी काशी में कभी कोई भूखा नहीं सोता है। अन्नपूर्णा माता की उपासना से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। ये अपने भक्त की सभी विपत्तियों से रक्षा करती हैं। इनके प्रसन्न हो जाने पर अनेक जन्मों से चली आ रही दरिद्रता का भी निवारण हो जाता है। ये अपने भक्त को सांसारिक सुख प्रदान करने के साथ मोक्ष भी प्रदान करती हैं। तभी तो ऋषि-मुनि इनकी स्तुति करते हुए कहते हैं- https://web.archive.org/web/20240615024053/https://adhisuchanaportal.com/annapurna-rasoi-yojana-rajasthan-2024/ 15 जून 2024 शोषिणीसर्वपापानांमोचनी सकलापदाम्।दारिद्र्यदमनीनित्यंसुख-मोक्ष-प्रदायिनी॥ इन्हें भी देखें अन्नदामंगल अन्नपूर्णा देवी - प्रसिद्ध संगीतकार बाहरी कड़ियाँ श्री अन्नपूर्णा देवी जी की आरती श्रेणी:हिन्दू देवियाँ