Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

सलीम तृतीय

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

सलीम तृतीयسليم ثالث इस्लाम के ख़लीफ़ाअमीरुल मुमिनीनउस्मानी साम्राज्य के सुल्तानकैसर-ए रूमख़ादिम उल हरमैन अश्शरीफ़ैन Joseph Warnia-Zarzecki - Sultan Selim III - Google Art Project.jpg 28वें उस्मानी सुल्तान (बादशाह) 7 अप्रैल1789 – 29 मई 1807 अब्दुल हमीद द्वितीय मुस्तफ़ा चतुर्थ 24 दिसम्बर 1761 तोपकापी महल, क़ुस्तुंतुनिया, उस्मानिया 1808 7 28 1761 12 24 y तोपकापी महल, क़ुस्तुंतुनिया, उस्मानिया ललेली मस्जिद, इस्तांबुल सफ़ीज़र क़ादन Kadınअयनसफ़ा कादनज़िबिफ़र क़ादनतबसफ़ा क़ादनरफ़त क़ादननूरशम्स क़ादनहुस्नुमाह क़ादन पत्नियाँ उस्मानी शाही ख़ानदान मुस्तफ़ा तृतीय महरशाह सुल्तान तुग़रा सुन्नी इस्लाम Tughra of Selim III.JPG सलीम तृतीय (उस्मानी तुर्कीयाई: سليم ثالث सेलिम-इ सालिस) (24 दिसम्बर 1761 – 28 जुलाई 1808) 1789 से 1807 तक उस्मानी साम्राज्य के सुल्तान रहे। अपने सुधारवादी नीतियों की वजह से यनीचरियों ने उन्हें बंदी बना लिया और अंत में उनकी हुकूमत को तख़्तापलट किया गया था। बाद में यनीचरियों ने उनके चचेरे भाई मुस्तफ़ा चतुर्थ को तख़्त पर बिठा दिया। अनजान हत्यारों द्वारा सलीम की हत्या की गई थी। जीवनी सलीम तृतीय मुस्तफ़ा तृतीय और महरशाह सुल्तान के बेटे थे। उनकी माँ जॉर्जिया में पैदा हुई और वालिदा सुल्तान के ओहदे संभालती हुई वे हुकूमती शालाओं के सुधार आंदोलन में शामिल थीं। सलीम तृतीय के पिता सुल्तान मुस्तफ़ा तृतीय बहुत शिक्षित थे और उनका मानना था कि साम्राज्य में सुधार आंदोलन चलाना निहायत ज़रूरी थी। शिक्षित और क़ाबिल सिपाहियों के साथ उन्होंने एक ताक़तवर सेना बनाने की कोशिश की। उन्होंने सेना पर ज़ोर दिया क्योंकि उनका डर था कि रूसी साम्राज्य की ओर से उस्मानिया पर आक्रमण हो जाएगा। रूसियों और उस्मानियों के 1774 युद्ध के दौरान दिल के दौरे की वजह से उनकी मौत हुई। सुल्तान मुस्तफ़ा जानते थे कि सेना में सुधार लाने की निहायत ज़रूरत थी। उन्होंने नई सैन्य विधियाँ क़ायम की और उन्होंने नई समुद्री और तोपख़ाने अकादमियों की स्थापना की। सुल्तान मुस्तफ़ा पर रहस्यवाद का गहरा असर रहा। उनके भविष्यवक्तों के मुताबिक़ उनके बेटे सलीम जहान पर फ़तेह करेंगे और इसकी ख़ुशी में उन्होंने सात दिनों की शानदार दावत का इंतज़ाम किया। राजमहल में ही सलीम की शिक्षा हुई। सुल्तन मुस्तफ़ा ने सलीम को अपने वलीअहद के तौर पर नियुक्त किया लेकिन मुस्तफ़ा की मौत के बाद सलीम के चाचा अब्दुल हमीद प्रथम तख़्त पर बिठाया गया था। अब्दुल हमीद की मौत के बाद 7 अप्रैल 1789 को, 27 सालों से कम सालों की उम्र में सलीम तख़्त पर आसीन हुए। सलीम तृतीय साहित्य और सुलेखन के प्रेमी थे। उन्होंने कई कविताएँ रची, ख़ासकर क्रीमिया पर रूस की फ़तेह के बारे में। वे एक कवि थे और ललित कलाओं के शौक़ीन थे। सुल्तान सलीम तृतीय एक आधुनिकतावादी और सुधारवादी शासक थे। सन्दर्भ श्रेणी:उस्मानी साम्रज्य के सुल्तान श्रेणी:1761 में जन्मे लोग श्रेणी:1808 में निधन