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411 समाचार
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रेहुआ रियासत

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रेहुआ राजघराना / ताल्लुका रेहुआ रियासत (Rehwa Estate) रेहुआ रियासत / ताल्लुका (अवध के अंतर्गत) मध्यकाल से आधुनिक काल बेड़नापुर (तजवापुर, बहराइच जिला) राजशाही रैकवार राजपूत राजवंश राजवंश रेहुआ रियासत (अंग्रेज़ी: Rehwa Estate या Rahua Estate) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिले के अंतर्गत महसी क्षेत्र की एक अत्यंत ऐतिहासिक, प्राचीन और प्रतिष्ठित रैकवार राजपूत रियासत थी। इस रियासत का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, स्थानीय लोक संस्कृति, अवध के सामंतों और जन-कल्याण के कार्यों से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। क्षेत्रीय स्तर पर इस घराने को आज भी बड़े सम्मान से 'राजा रेहुआ' के नाम से संबोधित किया जाता है। इतिहास एवं स्थापना रेहुआ रियासत का उद्भव और विकास बहराइच के गौरवशाली रैकवार राजपूत राजवंश की एक महत्वपूर्ण शाखा के रूप में हुआ। रैकवार वंश का इस पूरे क्षेत्र (जैसे बौंडी और रामनगर धमेरी) के इतिहास पर गहरा प्रभाव रहा है। राजधानी और ऐतिहासिक किला: इस रियासत का मुख्य प्रशासनिक केंद्र और राजधानी बेड़नापुर (वरनापुर) में स्थित रही है। यहाँ पवित्र सरयू नदी के सुरम्य किनारे पर इस रियासत का प्राचीन और भव्य किला (वरनापुर किला) निर्मित है। सरयू नदी के तट पर स्थित यह किला आज भी राजघराने के ऐतिहासिक वैभव, स्थापत्य कला और शक्ति का जीवंत प्रतीक बनकर खड़ा है। प्रथम शासक: स्थानीय ऐतिहासिक दस्तावेजों और जनश्रुतियों के अनुसार, इस स्वतंत्र जागीर की नींव राजा गजपति सिंह ने रखी थी, जिन्होंने बेड़नापुर को केंद्र बनाकर इस क्षेत्र की व्यवस्था संभाली। 1857 की क्रांति में ऐतिहासिक भूमिका भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857 के गदर) में रेहुआ रियासत ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बेहद आक्रामक और साहसिक भूमिका निभाई थी।Gazetteer of the Province of Oudh: Vol. I 1877 Oudh Government Press 112-115 तत्कालीन शासक राजा रघुनाथ सिंह एक देशभक्त और वीर योद्धा थे। जब ब्रिटिश सेना के दमन चक्र के कारण लखनऊ का पतन हुआ, तब अवध की शासिका बेगम हज़रत महल अपने वफादार सैनिकों और क्रांतिकारियों के साथ नेपाल की ओर बढ़ रही थीं। उस कठिन समय में राजा रघुनाथ सिंह ने अंग्रेजों के भारी विरोध और अपनी रियासत छिन जाने के खतरे की परवाह न करते हुए बेगम हज़रत महल और उनके सैनिकों को बेड़नापुर के महलों और घने जंगलों में सुरक्षित शरण दी थी। राजा रघुनाथ सिंह ने न केवल उन्हें आश्रय दिया, बल्कि स्वतंत्रता के इस महायज्ञ में क्रांतिकारियों को बड़ी आर्थिक सहायता और सैन्य बल भी उपलब्ध कराया था। सांस्कृतिक विरासत, रामलीला मैदान और मेटरिया मेला रेहुआ रियासत केवल अपनी वीरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अद्वितीय लोक-सांस्कृतिक और जन-कल्याणकारी परंपराओं के लिए भी पूरे बहराइच जिले में विख्यात है। ऐतिहासिक रामलीला मैदान: बेड़नापुर किले के ठीक बगल में एक विशाल और प्राचीन रामलीला मैदान स्थित है। यह मैदान सदियों से क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है। मेटरिया मेला: इस मैदान पर प्रतिवर्ष एक भव्य तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जिसे स्थानीय जनता और दूर-दराज के क्षेत्रों में "मेटरिया मेला" के नाम से जाना जाता है। इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण हिस्सा लेते हैं। निःशुल्क चिकित्सा (फ्री दवा वितरण): इस मेले की सबसे अनूठी और महान परंपरा यह है कि यहाँ राजपरिवार (राजा साहब) की तरफ से मेले में आने वाले सभी गरीब, जरूरतमंद श्रद्धालुओं और आम जनता के लिए पूरी तरह से **निःशुल्क (फ्री) दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं** उपलब्ध कराई जाती हैं। जनकल्याण की यह गौरवशाली परंपरा पीढ़ियों से आज भी अनवरत जारी है। प्रमुख शासकों की सूची रेहुआ रियासत के 350 वर्षों से अधिक के दीर्घकालिक इतिहास में कई राजाओं ने शासन किया, परंतु स्थानीय राजस्व अभिलेखों, ब्रिटिश गजेटियरों और उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के आधार पर केवल प्रमुख शासकों का ही कालक्रम स्पष्ट रूप से मिल पाया है, जो इस प्रकार है:Nevill H. R. Bahraich: A Gazetteer, District Gazetteers of the United Provinces 1903 Government Press क्रम राजा / शासक का नाम मुख्य योगदान एवं ऐतिहासिक विवरण 1 राजा गजपति सिंह रियासत के आदि पुरुष और संस्थापक, बेड़नापुर को राजधानी बनाया। 2 राजा मकरंद सिंह रियासत की सीमाओं का विस्तार किया और कृषि व सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया। ... अन्य शासक (ऐतिहासिक अभिलेखों में पूर्ण नाम और कालक्रम अप्राप्त) 3 राजा रघुनाथ सिंह 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, बेगम हज़रत महल के परम सहयोगी। 4 राजा नारायण सिंह ब्रिटिश काल के दौरान रियासत का कुशल प्रशासनिक और राजस्व प्रबंधन किया। 5 राजा रुद्र प्रताप नारायण सिंह कला, संस्कृति और जनहित कार्यों के संरक्षक; क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा दिया। 6 महाराज विजय प्रताप सिंह रेहुआ रियासत के अंतिम वैधानिक शासक (1947)। इन्होंने आज़ादी के समय भारत संघ में रियासत के विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। स्वतंत्रता के पश्चात और आधुनिक काल सन 1947 में भारत की आज़ादी के बाद रेहुआ रियासत का पूर्ण विलय भारत गणराज्य में हो गया। इसके बाद सन 1971 में भारत सरकार द्वारा प्रिवी पर्स (Privy Purse) और राजकीय उपाधियों को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया, परंतु स्थानीय समाज में इस राजघराने के प्रति सम्मान और श्रद्धा आज भी वैसी ही बनी हुई है। राजमाता किरण सिंह: महाराज विजय प्रताप सिंह के गोलोकवास के बाद इस ऐतिहासिक राजघराने, पुश्तैनी संपत्तियों और धार्मिक परंपराओं की बागडोर उनकी धर्मपत्नी राजमाता किरण सिंह ने संभाली। राजमाता किरण सिंह मूल रूप से बिहार के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक दलीपुर राजघराने से ताल्लुक रखती हैं, जो महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह का वंशज परिवार है। राजकुमारी देविना सिंह: वर्तमान समय में राजमाता किरण सिंह की सुपुत्री राजकुमारी देविना सिंह इस गौरवशाली राजघराने की समृद्ध विरासत को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। वे महसी और बहराइच क्षेत्र के सामाजिक विकास, सांस्कृतिक आयोजनों, जन-कल्याणकारी कार्यों और स्थानीय समस्याओं को सुलझाने में बेहद सक्रिय भूमिका निभाती हैं। स्थानीय जनता में उनकी गहरी पैठ है। इन्हें भी देखें बहराइच ज़िला महसी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र रैकवार तजवापुर संदर्भ बाहरी कड़ियाँ बहराइच जिले की आधिकारिक वेबसाइट