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411 समाचार
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मुंबई डब्बावाला

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thumb|'Dabawala's' competing in 'Mumbai Cyclothon-2010' डब्बावाला या डब्बेवाले ऐसे लोगोंॱ का एक समूह है जो भारत मेंॱ ज्यादातर मुंबई शहर मेॱ काम कर रहे सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों को दोपहर का खाना कार्यस्थल पर पहुँचाने का काम करता है। मुंबई डब्बावाला से जुड़ी खास जानकारी 1890 में मुंबई डब्बावाला की शुरुआत 2 लाख लोगों को खाने की सप्लाई तीन घंटे के अंदर खाना घर से लेकर दफ्तर तक पहुंचता है हर रोज 60 से 70 किलोमीटर तक का सफर तय खाने की सप्लाई के लिए 600 रुपये महीना खर्च खाने की सप्लाई में साइकिल और मुंबई की लोकल ट्रेन की मदत होती है काम में जुड़े प्रत्येक कर्मचारी को 9 से 10 हजार रुपये मासिक मिलता है साल में एक महीने का अतिरिक्त वेतन बोनस की तोर पर लेते है. नियम तोड़ने पर एक हजार फाइन लगता है डबेवाले संघटन के जनरल सेक्रेटरी स्व.गंगाराम तलेकर के कार्यकाल मे डबेवाला संघटन को अनेक पुरस्कार मिले. जिसमे सिक्स सिग्मा, आय,एस,ओ,प्रमाणपत्र है. मुंबई डब्बावाला के नियम काम के समय कोई व्यक्ति नशा नहीं करेगा हमेशा सफेद टोपी पहननी होगी बिना पूर्व सूचना दिए कोई छुट्टी नहीं मिलेगी हमेशा अपने साथ आई कार्ड रखना होगाhttp://www.amarujala.com/news/states/punjab/chandigarh/Chandigarh-14857-54/ संग्रहीत प्रति 26 फ़रवरी 2014 https://web.archive.org/web/20140302105905/http://www.amarujala.com/news/states/punjab/chandigarh/Chandigarh-14857-54/ 2 मार्च 2014 live समय की पाबंदी बई में करीब पांच हजार डब्बवाले रोजाना दो लाख टिफिन की डिलीवरी करते हैं। इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत है, समय पर डिलीवरी। डब्बावाले कभी लेट नहीं होते। आप ट्रेन की देरी या फिर किसी वजह से ऑफिस में लेट हो सकते हैं, पर डब्बावाला हमेशा समय पर आपका टिफिन लेकर हाजिर हो जाता है। डब्बावाले हर दिन दो लाख टिफिन की डिलीवरी करते हैं, पर टिफिन की पहचान में कभी कोई गड़बड़ी नहीं होती है। टिफिन पर इस तरह कोडिंग की जाती है कि जिसका टिफिन है, उसे ही मिलता है। डिलीवरी करने वाले डब्बावाले बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, किंतु टिफिन डिलीवरी में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं होती।http://www.livehindustan.com/news/editorial/aapkitaarif/article1-story-57-65-271490.html संग्रहीत प्रति 26 फ़रवरी 2014 https://web.archive.org/web/20140301214555/http://www.livehindustan.com/news/editorial/aapkitaarif/article1-story-57-65-271490.html 1 मार्च 2014 dead अन्ना हज़ारे का समर्थन नूतन डब्बावाला ट्रस्ट के सचिव किरण गवांडे ने कहा कि अगत २०११ के एक शुक्रवार को टिफिन न पहुंचाकर संस्था ने अपनी 120 साल पुरानी परम्परा को पहली बार तोड़ चुकी हैं और इसका कारण यह है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना के प्रयासों और भूक हड़तालों के प्रति समर्थन जताने की छोटी सी कोशिश है।http://hindi.moneycontrol.com/mccode/news/article.php?id=36431मई 2024 InternetArchiveBot सन्दर्भ 4.https://www.outlookindia.com/newsscroll/now-mumbai-dabbawalas-fight-fakes-in-fraternity/1637411 श्रेणी:मुंबई के लोग