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डायनेमो
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thumb|"डायनेमो इलेक्ट्रिक मशीन" (अंतिम दृश्य, आंशिक रूप से भाग, [1])
एक डायनेमो (ग्रीक शब्द डायनामिस से व्युत्पन्न हुआ है; इसका अर्थ है पावर या शक्ति), मूल रूप से विद्युत जनरेटर का दूसरा नाम है। आमतौर पर इसका तात्पर्य एक जनरेटर या जनित्र से होता है जो कम्यूटेटर के उपयोग से दिष्ट धारा (direct current) उत्पन्न करता है। डायनेमो पहले विद्युत जनरेटर थे जो उद्योग के लिए विद्युत शक्ति के उत्पादन में सक्षम थे। डायनेमो के सिद्धांत के आधार पर ही बाद में कई अन्य विद्युत उत्पादन करने वाले रूपांतरक उपकरणों का विकास हुआ, जिसमें विद्युत मोटर, प्रत्यावर्ती धारा जनित्र और रोटरी कन्वर्टर शामिल हैं।
वर्तमान समय में विद्युत उत्पादन के लिए इनका उपयोग कभी कभी ही किया जाता है, क्योंकि आज प्रत्यावर्ती धारा का प्रभुत्व बढ़ गया है, कम्यूटेटर उतना लाभकारी नहीं रहा और ठोस अवस्था विधियों का उपयोग करके प्रत्यावर्ती धारा (alternating current) को आसानी से दिष्ट धारा में रूपान्तरित किया जा सकता है।
आज भी किसी-किसी स्थिति में 'डायनेमो' शब्द का उपयोग जनरेटर के लिए कई स्थानों पर किया जाता है। एक छोटा विद्युत जनरेटर, जिसे रोशनी पैदा करने के लिए साइकल के पहिये के हब में बनाया जाता है, 'हब डायनेमो' कहलाता है, हालांकि ये हमेशा प्रत्यावर्ती धारा उपकरण होते हैं।
परिचय
दिष्टधारा विद्युतजनित्र
डायनेमो में घूर्णन करती हुई तारों की कुंडली और चुम्बकीय क्षेत्र का उपयोग करके यांत्रिक घूर्णन की ऊर्जा को फैराडे के नियम के अनुसार दिष्ट विद्युत धारा में रूपान्तरित किया जाता है।
डायनेमो में एक स्थिर सरंचना होती है, जिसे 'स्टेटर' कहा जाता है, जो एक स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र उपलब्ध कराती है। तथा घूर्णन करती हुई वाइनडिंग्स का एक सेट होता है, जो आर्मेचर कहलाता है, यह चुम्बकीय क्षेत्र में तेजी से घूमता है। चुंबकीय क्षेत्र में तार की गति के कारण धातु में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों पर बल उत्पन्न होता है, जिससे तार में विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
छोटी मशीनों में स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र को एक या अधिक स्थायी चुम्बकों के द्वारा उपलब्ध कराया जा सकता है; बड़ी मशीनों में स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र एक या अधिक विद्युत चुम्बकों के द्वारा उपलब्ध कराया जाता है, जिसे आमतौर पर क्षेत्र कुंडली (field coils) कहा जाता है।
कम्यूटेटर की आवश्यकता दिष्ट धारा के उत्पादन के लिए हुई। जब तार का एक लूप एक चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णन करता है, इसमें उत्पन्न प्रेरित विभव प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद उलट जाता है, जिसके परिणामस्वरूप प्रत्यावर्ती धारा का उत्पादन होता है। हालांकि, विद्युतीय प्रयोगों के प्रारम्भिक दिनों में, प्रत्यावर्ती धारा का कोई ज्ञात उपयोग नहीं था। विद्युत के कुछ उपयोगों जैसे विद्युत लेपन में, तरल बैटरियों की सहायता से दिष्ट धारा का उपयोग किया जाता था।
डायनेमो का आविष्कार बैटरी के प्रतिस्थापन के रूप में किया गया। कम्यूटेटर मोटे तौर पर एक रोटरी स्विच होता है। इसमें मशीन के शाफ्ट पर चढ़ाये गए संपर्कों का एक सेट होता है, जिन्हें ग्रेफाइट-ब्लॉक के स्टेशनरी (स्थिर) संपर्कों के साथ संयोजित किया जाता है, जो "ब्रश" कहलाते हैं, क्योंकि सबसे पहले लगाये गए इस प्रकार के संपर्क धातु के ब्रश थे। जब विभव उलटता है, कम्यूटेटर बाह्य परिपथ के लिए वाइनडिंग्स कनेक्शन को उलट देता है, इसलिए प्रत्यावर्ती धारा के बजाय, निरंतर एक दिष्ट धारा का उत्पादन होता है।
ऐतिहासिक मील के पत्थर
thumb|फैराडे की डिस्क
पहले इलेक्ट्रिक जनरेटर का आविष्कार 1831 में माइकल फैराडे के द्वारा किया गया, इसमें ताम्बे की एक डिस्क को चुम्बक के ध्रुवों के बीच घुमाया गया था।
यह डायनेमो नहीं था क्योंकि इसमें कम्यूटेटर का उपयोग नहीं किया गया था। बहरहाल, फैराडे की डिस्क बहुत कम वोल्टेज उत्पन्न करती थी क्योंकि चुम्बकीय क्षेत्र में विद्युत धारा का केवल एक ही पथ प्रवाहित हो रहा था। फैराडे और अन्य लोगों ने पाया कि अगर तार को कई बार घुमाकर कुंडली बना दी जाये तो यह वाइनडिंग, उच्च और अधिक उपयोगी वोल्टेज उत्पन्न कर सकती है।
तार की वाइनडिंग्स में घेरों की संख्या को बदल कर कोई भी वांछित वोल्टेज आसानी से प्राप्त की जा सकती है। इसलिए इसी विशेषता का उपयोग बाद के जनरेटर के सभी डिजाइनों में किया गया, बस दिष्ट धारा के उत्पादन के लिए कम्यूटेटर के आविष्कार की आवश्यकता थी।
जेडिक का डायनेमो
thumb|पिक्सी का डायनेमो.कम्यूटेटर घूमती हुई चुम्बक के नीचे शाफ्ट पर स्थित है।
1827 में, हंगरी के एन्योस जेडिक ने विद्युत चुम्बकीय घूर्णक उपकरणों के साथ प्रयोग करने शुरू किये, जिन्हें उन्होंने विद्युत चुम्बकीय स्व-रोटर (electromagnetic self-rotors) कहा.
एक ध्रुव के विद्युत स्टार्टर के प्रोटोटाइप में, स्थिर और घूर्णन करने वाले दोनों भाग विद्युत चुम्बकीय थे। उन्होंने डायनेमो की अवधारणा सीमेन्स और व्हीटस्टोन से लगभग छह साल पहले दी थी, लेकिन उन्होंने इसे पेटेंट नहीं कराया क्योंकि उन्होंने सोचा कि वे ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं।
उनके डायनेमो में स्थायी चुम्बकों के बजाय, एक दुसरे के विपरीत दो विद्युत चुम्बकों का उपयोग किया गया था, जो रोटर के चारों और चुम्बकीय क्षेत्र प्रेरित करती थीं।Andrew L. Simon Made in Hungary: Hungarian contributions to universal culture Simon Publications 1998 0966573420 Simon, 1998 207 https://archive.org/details/madeinhungaryhun0000simo/page/207http://www.mszh.hu/English/feltalalok/jedlik.html Ányos Jedlik biography Hungarian Patent Office 10 मई 2009 https://web.archive.org/web/20100304082159/http://www.mszh.hu/English/feltalalok/jedlik.html 4 मार्च 2010 dead
यह डायनेमो स्व-प्रेरण की सिद्धांत की खोज भी थी। Nature Anianus Jedlik Augustus Heller Norman Lockyer April 2, 1896 53 1379 516 http://books.google.com/books?id=nWojdmTmch0C&pg=PA516&dq=jedlik+dynamo+1827&lr=&as_brr=3&ei=12p_SvDFGZv8lASZxbDOAQ#v=onepage&q=jedlik%20dynamo%201827&f=false 29 मार्च 2011 https://web.archive.org/web/20120627000542/http://books.google.com/books?id=nWojdmTmch0C&pg=PA516&dq=jedlik+dynamo+1827&lr=&as_brr=3&ei=12p_SvDFGZv8lASZxbDOAQ#v=onepage&q=jedlik%20dynamo%201827&f=false 27 जून 2012 live
पिक्सी का डायनेमो
फैराडे के सिद्धांत पर आधारित पहले डायनेमो का निर्माण 1832 में एक फ़्रांसिसी उपकरण निर्माता हिप्पोलाईट पिक्सी के द्वारा किया गया।
इसमें एक स्थायी चुंबक का उपयोग किया गया था जो एक क्रैंक के द्वारा घूर्णन करती थी।
घूमते हुए चुम्बक को इस प्रकार से रखा गया था कि विद्युतरोधी तार में लपेटा गया लोहे का एक टुकड़ा इसके उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच में से होकर गुजरता था।
पिक्सी ने पाया कि हर बार जब ध्रुव और कुंडली एक दूसरे के पास से होकर गुजरते हैं, तार में विद्युत धारा का आवेग उत्पन्न होता है। हालांकि, चुम्बक के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव विपरीत दिशाओं में धारा को प्रेरित करते हैं।
प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में रूपान्तरित करने के लिए, पिक्सी ने कम्यूटेटर की खोज की, यह शाफ्ट पर एक विभाजित धातु का बेलन था, जिसमें धातु के दो स्प्रिंग संपर्क शाफ्ट के दोनों और थे।
पेसिनोटी का डायनेमो
thumb|left|पेसिनोटी का डायनेमो, 1860
इन प्रारंभिक डिजाइनों में एक समस्या थी: इनके द्वारा उत्पन्न विद्युत धारा में धारा के "आवेगों" की एक श्रृंखला होती थी, जो एक दूसरे से बिलकुल अलग नहीं होते थे, जिसके परिणामस्वरूप औसत शक्ति का उत्पादन कम होता था। इसी तरह से उस समय की विद्युत मोटर में, डिजाइनर चुम्बकीय परिपथ में बड़े वायु अंतराल के गंभीर हानिकारक प्रभाव को पूरी तरह से समझ नहीं पाए.
भौतिकी के एक इतालवी प्रोफ़ेसर, एंटोनियो पेसिनोटी ने 1860 के दशक में इस समस्या का समाधान किया। इसके लिए उन्होंने घूर्णन करती हुई द्वि-ध्रुवी अक्षीय कुंडली को बहु-ध्रुवी टोरोइड कुंडली से प्रतिस्थापित कर दिया। टोरोइड बनाने के लिए उन्होंने लोहे की एक रिंग पर लगातार वाइनडिंग्स लपेटीं और रिंग के चारों तरफ बराबर दूरी के बिन्दुओं पर इसे कम्यूटेटर से जोड़ दिया; इससे कम्यूटेटर कई खण्डों में विभाजित हो गया।
इसका अर्थ यह था कि कुंडली का कुछ हिस्सा लगातार चुम्बक में से होकर गुजर रहा था, जिससे धारा निरंतर हो गयी।
सीमेन्स और व्हीटस्टोन के डायनेमो (1867)
डायनेमो के पहले व्यावहारिक डिजाइनों की घोषणा अलग अलग और एक साथ डॉ॰ वार्नर सीमेन्स और चार्ल्स व्हीटस्टोन के द्वारा की गयी। 17 जनवरी 1867 को, सीमेन्स ने बर्लिन अकादमी में "डायनेमो-इलेक्ट्रिक मशीन" (पहली बार उपयोग में लिया गया शब्द) की घोषणा की, जिसमें स्टेटर क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए स्थायी चुम्बकों के बजाय स्वयं पावर उत्पन्न करने वाले विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र कुंडलियों का उपयोग किया गया था।Berliner Berichte जनवरी 1867
उसी दिन चार्ल्स व्हीटस्टोन ने रोयल सोसाइटी में एक पेपर पढ़ते हुए इसी तरह के एक डिजाइन की घोषणा की, इनमें अंतर यह था की सीमेन्स के डिजाइन में स्टेटर विद्युत चुम्बक रोटर के साथ श्रृंखला में थे, जबकि व्हीटस्टोन के डिजाइन में ये सामानांतर थे।Proc. Royal Society फ़रवरी 14, 1867
स्थायी चुंबक के बजाय विद्युत चुम्बक का उपयोग एक डायनेमो की शक्ति उत्पदान की दर को अत्यधिक बढ़ा देता है और इस तरह से पहली बार उच्च उर्जा का उत्पादन किया गया।
इस आविष्कार का उपयोग सीधे बड़े स्तर पर विद्युत के बड़े औद्योगिक उत्पादन के लिए किया गया।
उदाहरण के लिए, 1870 के दशक में सीमेन्स ने धातु और अन्य सामग्री के उत्पादन के लिए विद्युत आर्क फर्नेन्स (भट्टी) को उर्जा देने के लिए विद्युत चुम्बकीय डायनेमो का उपयोग किया गया।
ग्राम रिंग डायनेमो
thumb|ग्राम का छोटा डायनेमो, 1878 के आसपास
thumb|एक निरंतर आउट पुट तरंगरूप के उत्पादन के लिए ग्राम का डायनेमो कैसे कार्य करता है।
ज़ेनोबे ग्राम ने 1871 में पहले व्यवसायिक पावर प्लांट का डिजाइन बनाते समय पेसिनोटी के डिजाइन को फिर से खोजा, जिसे 1870 के दशक में पेरिस में संचालित किया गया।
ग्राम के डिजाइन का एक और फायदा यह था कि इसमें चुम्बकीय फ्लक्स के लिए एक बेहतर फ्लक्स का उपयोग किया गया था, इसके लिए चुम्बकीय क्षेत्र वाले स्थान को भारी लौह कोर से भर दिया गया और स्टेशनरी एवं घूर्णन करने वाले भागों के बीच वायु अंतराल को न्यूनतम कर दिया गया।
ग्राम का डायनेमो पहली मशीन थी जो उद्योग के लिए व्यावसायिक मात्रा में विद्युत शक्ति का उत्पादन कर सकती थी।
बाद में ग्राम रिंग पर सुधार किये गए, लेकिन तार के घूमते हुए अंतहीन लूप की मूल अवधारणा को सभी आधुनिक डायनेमो में बनाये रखा गया है।
ब्रश डायनेमो
चार्ल्स एफ ब्रश ने 1876 में अपना पहला डायनेमो संकलित किया, जिसमें घोड़े के द्वारा खींची जाने वाली ट्रेडमिल का उपयोग शक्ति उत्पादन के लिए किया जाता था।
अमेरिकी पेटेंट#189997 "इम्प्रूवमेंट इन मेग्नेटिक इलेक्ट्रो मशीन्स" को 24 अप्रैल 1877 में जारी किया गया।
ब्रश ने ग्राम के मूल डिजाइन से शुरुआत की, जिसमें तारें साइड में थीं और रिंग का आंतरिक भाग क्षेत्र के प्रभावी ज़ोन से बाहर था और अत्यधिक उष्मा को बरकरार रखा गया।
इस डिजाइन में सुधार करने के लिए, उसकी रिंग आर्मेचर की आकृति को एक डिस्क के रूप में बनाया गया जबकि ग्राम का आर्मेचर बेलनाकार था।
क्षेत्र विद्युत चुम्बकों को परिधि के चारों ओर रखने के बजाय आर्मेचर डिस्क के पार्श्व में रखा गया।
इसमें चार विद्युत चुम्बकों का उपयोग किया गया था, दो उत्तरी ध्रुव वाले और दो दक्षिणी ध्रुव वाले।
सामान ध्रुव एक दुसरे के विपरीत रखे गए, इन्हें डिस्क आर्मेचर के प्रत्येक साइड पर रखा गया।http://www.lafavre.us/brush/dynamo.htm The Brush Dynamo Jeffrey La Favre 29 मार्च 2011 https://web.archive.org/web/20110907085942/http://www.lafavre.us/brush/dynamo.htm 7 सितंबर 2011 dead 1881 में ब्रश इलेक्ट्रिक कम्पनी के एक डायनेमो को; 89 इंच लंबा, 28 इंच चौड़ा और 36 इंच उंचा दर्ज दिया गया, इसका वजन 4800 पौंड था और यह लगभग 700 घूर्णन प्रति मिनट की गति से चलता था। इस उस समय दुनिया का सबसे बड़ा डायनेमो माना गया।
इसमें 40 आर्क लाइटों का उपयोग होता था और इसके लिए 36 होर्स पावर की आवश्यकता होती थी।http://www.machine-history.com/Brush%20Electric%20Company The Brush Electric Light Scientific American 2 अप्रैल 1881 29 मार्च 2011 https://web.archive.org/web/20110111040515/http://www.machine-history.com/Brush%20Electric%20Company 11 जनवरी 2011 dead
विद्युत मोटर के सिद्धांतों की खोज
हालांकि मूल रूप से इसे उद्देश्य के लिए डिजाइन नहीं किया गया था, यह पाया गया कि एक डायनेमो विद्युत मोटर का काम कर सकता है जब इसे बैटरी या किसी दूसरे डायनेमो से दिष्ट धरा की आपूर्ति की जाये.
1873 में वियना में एक औद्योगिक प्रदर्शनी में, ग्राम ने पाया कि उसके डायनेमो का शाफ्ट घूमने लगा जब इसके टर्मिनल को गलती से विद्युत उत्पादन करने वाले एक दूसरे डायनेमो से जोड़ दिया गया।
हालांकि यह एक विद्युत मोटर का पहला प्रदर्शन नहीं था, लेकिन यह पहला व्यावहारिक प्रदर्शन था।
यह पाया गया कि डिजाइन में एक ही तरह की विशेषताएं जो डायनेमो को प्रभावी बनाती हैं, वे मोटर को भी प्रभावी बनाती हैं, ग्राम का प्रभावी डिजाइन, जिसमें छोटे चुम्बकीय वायु अंतराल थे और तार की कई कुंडलियों को कई-विभाजित कम्यूटेटर से जोड़ा गया था, वह सभी व्यवहारिक दिष्ट धारा मोटरों के डिजाइन का आधार बन गया।
दिष्ट धारा उत्पन्न करने वाले बड़े डायनेमो उन स्थितियों में समस्याजनक होते थे जहां दो या अधिक डायनेमो एक साथ काम कर रहे होते हैं और एक का इंजन दूसरे की तुलना में कम पावर पर चल रहा होता है। कम क्षमता के इंजन के घूर्णन के बजाय, अधिक क्षमता के इंजन वाला डायनेमो कम क्षमता के इंजन वाले डायनेमो को चलाने लगता है जैसे यह मोटर हो। ऐसी रिवर्स ड्राइविंग से डायनेमो का इंजन चलने लगता है और कम क्षमता वाले डायनेमो में खतरनाक रिवर्स स्पिनिंग की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
अंत में यह पाया गया कि जब कई डायनेमो को एक साथ इसी तरह की पावर के स्रोत से जोड़ा जाता है, तो वे सभी इंजनों को जोड़ने वाले जैकशाफ्ट का उपयोग करते हुए एक साथ चलने लगते हैं और रोटर में ये असंतुलन उत्पन्न हो जाते हैं।
कम्युटेटर से युक्त दिष्ट धारा जनरेटर के रूप में डायनेमो
एसी (प्रत्यावर्ती धारा) जनरेटर की खोज के बाद, जब वास्तव में प्रत्यावर्ती धारा का उपयोग किसी भी स्थान पर किया जा सकता था, शब्द डायनेमो का उपयोग विशेष रूप से कम्युटेटर से युक्त दिष्ट धारा विद्युत जनरेटर से सम्बन्धित हो गया, जबकि प्रत्यावर्ती धारा जनरेटर में स्लिप रिंग या रोटर चुम्बक का इस्तेमाल किया जाने लगा, जिसे आल्टरनेटर कहा जाने लगा।
एसी विद्युत मोटर जिसमें स्लिप रिंग या रोटर चुम्बक का उपयोग किया जाता था, उसे तुल्यकालिक मोटर (synchronous motor) कहा जाने लगा और कम्युटेटर से युक्त दिष्ट धारा मोटर को विद्युत मोटर भी कहा जाने लगा, हालांकि यह बात समझी जा चुकी थी कि यह जनरेटर की तरह के सिद्धांत पर ही काम करती है।
रोटरी कनवर्टर का विकास
जब डायनेमो और मोटर आसानी से यांत्रिक और विद्युत उर्जा को एक दूसरे में रूपांतरित करने लगे, इन्हें रोटरी कन्वर्टर नामक उपकरण में संयुक्त रूप से काम में लिया गया, यह एक घूर्णन करने वाली मशीन होती है, जिसका उद्देश्य विद्युत शक्ति का उत्पादन करना नहीं होता। बल्कि यह एक प्रकार की विद्युत धारा को दूसरे प्रकार में रूपांतरित करती है, उदाहरण के लिए प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में. ये बहु क्षेत्रीय एक रोटर वाले उपकरण थे, जिनमें घूमने वाले संपर्कों के दो या अधिक सेट होते थे (आवश्यकता के अनुसार कम्युटेटर या स्लिप रिंग), इनमें से एक उपकरण को घुमाने के लिए आर्मेचर वाइनडिंग के एक सेट को शक्ति प्रदान करता था और एक या अधिक को आउटपुट धारा के उत्पादन के लिए अन्य वाइनडिंग्स से जोड़ा जाता था।
रोटरी कनवर्टर सीधे, आंतरिक रूप से, किसी भी प्रकार के शक्ति को दूसरे प्रकार में रूपांतरित कर सकता है। इसमें प्रत्यावर्ती धारा और दिष्ट धारा के बीच रूपांतरण, तीन फेस और एक फेस की शक्ति के बीच रूपांतरण, 25 Hz AC और 60 Hz AC, या एक ही समय पर कई अन्य भिन्न आउटपुट वोल्टेज के बीच रूपांतरण शामिल है। रोटर का आकार और भार बड़ा था ताकि रोटर एक फ्लाईव्हील का काम कर सके और आपूर्ति की जा रही शक्ति में अचानक परिवर्तन आने पर भी निरंतर शक्ति प्रदान कर सके।
प्रारूपिक रोटरी कन्वर्टर्स का उपयोग आज भी मैनहट्टन में वेस्ट इड आईआरटी सबवे में किया जाता है।
1960 के दशक के अंत में और संभवतः कुछ साल बाद.इन्हें 25 हर्ट्ज एसी के द्वारा संचालित किया जाता था और ये ट्रेनों के लिए 600 वो
ल्ट की दिष्ट धारा उपलब्ध कराते थे।
रोटरी कन्वर्टर्स की प्रौद्योगिकी को 20 वीं सदी के प्रारम्भ में मरकरी-वेपर रेक्टिफायर के द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया, जो छोटे थे, कम्पन और शोर उत्पन्न नहीं करते थे और इन्हें कम रखरखाव की आवश्यकता होती थी। इसी प्रकार का रूपांतरण कार्य वर्तमान में ठोस अवस्था पावर अर्धचालक उपकरणों के द्वारा किया जाता है।
आधुनिक उपयोग
डायनेमो का उपयोग आज भी कम क्षमता के उत्पादन में किया जाता है, विशेष रूप से जहां कम वोल्टेज की दिष्ट धारा की आवश्यकता होती है, चूंकि इन अनुप्रयोगों में एक अर्धचालक रेक्टिफायर से युक्त आल्टरनेटर अप्रभावी होता है।
हाथ के क्रैंक वाले डायनेमो का उपयोग क्लोकवर्क रेडियो, हाथ से चलने वाली फ्लैश लाईट, मोबाइल फोन रीचार्जर और बैटरियों को रिचार्ज करने के लिए अन्य मानव संचालित उपकरणों में किया जाता है।
इन्हें भी देखें
Energy
दिष्टधारा विद्युतजनित्र
अल्टरनेटर
बोतल डायनेमो
क्रैंक
विद्युत जनरेटर
हेनरी ब्रूक्स एडम्स
हेनरी वाइल्ड
हब डायनेमो
रेडियो आइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर
सौर सेल
थर्मो जनरेटर
वेल्डिंग सेट
पवन टरबाइन
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Dynamos
श्रेणी:विद्युत जनरेटर
श्रेणी:हंगरी के आविष्कार