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ईडन
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कड़ी=https://en.wikipedia.org/wiki/File:Jan_Brueghel_de_Oude_en_Peter_Paul_Rubens_-_Het_aards_paradijs_met_de_zondeval_van_Adam_en_Eva.jpg|अंगूठाकार|अदन की वाटिका और मानव का पतन, यान ब्रोगल वरिष्ठ और पेटर पाउल रूबंस द्वारा चित्रकला, 1615, जहाँ बाघ, तोते और शुतुरमुर्ग़ जैसे घरेलू और जंगली जानवर
thumb|220px|अदन का एक और चित्रण
अदन की वाटिका (hbo גַּן־עֵדֶן, grc Ἐδέμ) इब्राहीमी धर्मों की मान्यताओं में वह जगह थी जहाँ परमेश्वर ने पहले पुरुष आदम और पहली स्त्री हव्वा की सृष्टि के बाद उन्हें रखा था। इसे इन धर्मों की धर्मकथाओं में एक सौंदर्य और शांति से भरी वाटिका के रूप में दर्शाया जाता है जहाँ यह दोनों निर्दोष और निष्कपट चरित्र से रहते थे। ईसाई मान्यता के अनुसार, अपनी आज्ञा का उल्लंघन करने के लिए इन दोनों को पापी ठहराकर उन्हें परमेश्वर ने इस वाटिका से बाहर निकल दिया था। ईसाई मत की बहुत सी धारणाएँ इस मूल पाप पर आधारित हैं।
अदन से निकाला
अदन की वाटिका में आदम और हव्वा बिलकुल अज्ञान और निर्दोष स्थिति में आनंद से बच्चों की तरह रहते थे। वे पूरी तरह नग्न रहते थे क्योंकि उन्हें यौन संबंधों का कोई ज्ञान नहीं था और कोई शर्म नहीं अनुभव होती थी।Ever since Adam and Eve: The evolution of human sexuality CUP Archive http://books.google.com/books?id=Cgc6AAAAIAAJ ... No sex, no death is central to the myth of the Garden of Eden. Adam and Eve ate of the fruit of the tree of knowledge, became sexual beings and were expelled from Paradise ... इसी वाटिका में एक वृक्ष था जिसे "ज्ञान का वृक्ष" कहा जाता है। उसपर लगे फल का खाना परमेश्वर ने स्पष्ट रूप से आदम को वर्जित किया था। ईसाई मान्यता के अनुसार एक सर्प ने पहले हव्वा को उकसाया और फिर हव्वा ने आदम को ज्ञान का फल खाने के लिए उकसाया। आदम ने आज्ञा-उल्लंघन की और फल खा लिया। इस से उसकी निष्कपटता ख़त्म हो गई और आदम और हव्वा को एक-दूसरे को देखकर शर्म महसूस होने लगी। उन्होंने कुछ अंजीर के पत्तों के छोटे वस्त्र बनाकर अपने कुछ अंग ढकने का प्रयास किया।What Really Happened in the Garden of Eden? Clayton Kendall Vantage Press, Inc, 2007 9780533152919 http://books.google.com/books?id=hTm_XqsCnoUC ... And the eyes of them were both opened, and they knew that they were naked; and they sewed fig leaves together ... जब परमेश्वर उनसे मिलने आये और यह देखा तो वह समझ गए की आदम ने ज्ञान का फल खा लिया है और भयंकर क्रोध में आ गए। उन्होंने आदम और हव्वा को अदन से निकाल दिया। ईसाई मान्यताओं में तब से मानव पापी अवस्था में संसार में भटक रहे हैं।
पतन और मूल पाप की अवधारणाएँ
इस अदन-निकाले को ईसाई धर्म में "मानव का पतन" कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि हर मानव एक जन्मजात पापी है जो मरणोपरांत नरक जाएगा क्योंकि आदम और हव्वा का पाप हर मानव पर लागू होता है।Relativism and the foundations of philosophy Steven D. Hales MIT Press, 2006 9780262083539 http://books.google.com/books?id=sINRmT4rZ5wC ... Thus every human being is inherently sinful—even newborn infants and saints—and all need redemption before God or else face damnation and eternal torment ... इसे "मूल पाप" कहा जाता है। जीव हत्या, अनावश्यक हरे पेड़ों की कटाई, किसी को व्यर्थ आघात पहुँचाना, व्यर्थ जल बहाना आदि पाप है। ईसाई धर्म में माना जाता है कि ईसा मसीह ने अपनी क़ुरबानी देकर उन मानवों को नरक से बचाया जो उन्हें अपना भगवान स्वीकारते हैं। इस मान्यता को लेकर बहुत मतभेद हुआ है। शुद्ध रूप से यह अवधारणा यह कहती है कि यदि कोई नवजात शिशु बिना ईसाईकरण समारोह के मर जाए तो वह नरक जाता है।Essential Moments Antonio L. Carvajal Xlibris Corporation, 2009 9781441505590 http://books.google.com/books?id=-yO4cMoDELQC ... Even newborn babies who died before they were baptized were not worthy of going to heaven ... यह भी तात्पर्य निकलता है कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म के बारे में सुने ही न लेकिन संत का जीवन बसर करे और जीवन भर कोई पाप न करे तो भी वह नरक ही जाएगा क्योंकि वह बिना ईसाई धर्म स्वीकारे वह मूल पाप से लदा हुआ है।The word, the pen, and the pistol: literature and power in Tahiti Robert Nicole SUNY Press, 2001 9780791447390 http://books.google.com/books?id=nfIuLR_o25oC ... Most missionaries believed firmly in Original Sin. For them there was no such thing as pre-Fall noble savages ...
वर्तमान युग में बहुत से ईसाई और ग़ैर-ईसाई लेखकों ने इन मान्यताओं की आलोचना की है। इन आलोचनाओं ने भिन्न रूप लिए हैं: कुछ कहते हैं कि मूल पाप कि अवधारणा से भले लोगों को अकारण ही अपराध-भावना से जीना पड़ता है और उनकी परमेश्वर की प्रति भावना प्रेम की कम और डर की ज़्यादा होती है। यह भी कहा गया है कि इन कथाओं में मानवों की अदन में निर्दोष अवस्था के चित्रण से यौन संबंधों को लेकर अस्वस्थ विचारधाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं, क्योंकि यह एक शक्तिशाली मानवीय भावना है जिसे कुचला तो नहीं जा सकता लेकिन अपराध-भाव से देखने से यह हानिकारक प्रकार से बेढंगी होकर प्रकट होती है।Women in Christianity Hans Kung, Hans Küng, John Stephen Bowden Continuum International Publishing Group, 2005 9780826476906 http://books.google.com/books?id=1tqlt6xrCf8C ... Augustine ... associates this tranmission of 'original sin' with the sexual act ... suppression of sexuality in Western theology and the Western church ...
भारतीय उपमहाद्वीप की लोक-संस्कृति में
भारतीय उपमहाद्वीप में अदन की कहानी इस्लामी स्रोतों से आई। क्योंकि आदम पहला पुरुष माना जाता है इसलिए उन्हें "बाबा आदम" कहा जाने लगा और किसी भी पुरानी कहानी को मुहावरे में "बाबा आदम की कहानी" कहा जाता है। अगर किसी स्थान पर कोई न हो तो कहा जाता है कि वहाँ "न आदम था न आदम की ज़ात"। अदन की कथा में हव्वा ने आदम से ज्ञानफल खाने को कहा था इसलिए अक्सर व्यंग्य में "नारी पुरुष के पतन का कारण है" सुना जाता है। क्षेत्रीय कविता में भी इस कहानी की ओर इशारा किया जाता है। उदाहरण के लिए ग़ालिब की प्रसिद्ध "हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी" नामक ग़ज़ल के इस शेर में एक प्रेमी अपनी चहेती की गली से निकलवाने की बेइज्ज़ती की तुलना आदम के अदन से निकाले जाने से करता है:
निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आये थे लेकिन, बहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकलेMasterpieces of Urdu Ghazal: From the 17th to the 20th Century K. C. Kanda Sterling Publishers Pvt. Ltd, 1992 9788120711952 http://books.google.com/books?id=fUKKvNDYyUEC ... Nikalna khuld se aadam ka sunte aae the lekin ...
अंग्रेज़ी में "अंजीर के पत्ते" (fig leaf, फ़िग लीफ़) को किसी शर्मनाक कार्य को जैसे-तैसे छुपाने के प्रयास के लिए प्रयोग किया जाता है। "It is a big scandal and this report is just a fig-leaf" का अर्थ हुआ "यह बहुत बड़ा काण्ड है और यह रिपोर्ट तो केवल एक अंजीर का पत्ता (छुपाने का प्रयास) है"।
इन्हें भी देखें
ईसाई धर्म
इब्राहीमी धर्म
सन्दर्भ
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श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना
श्रेणी:तौरात के स्थान
श्रेणी:अदन की वाटिका