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नागी बांध पक्षी अभयारण्य
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thumb|नागी बांध पक्षी अभयारण्य का परिदृश्य
नागी पक्षी अभयारण्य IV झाझा, बिहार, भारत देवघर 24 49 03 N 86 24 00 E region:AM inline,title 207 ha acre 1984 महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र
नागी पक्षी अभयारण्य दक्षिण बिहार में जमुई ज़िले के झाझा क्षेत्र में झारखंड सीमा के पास स्थित है। इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 18 के तहत 25 फरवरी 1984 को पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया।पांडे सुमित Nagi-Nakti Bird Sanctuary: A Haven for Migratory Birds in Bihar https://saffronsight.com/nagi-nakti-bird-sanctuary-jamui-bihar/ सैफ्रन साइट 31 अगस्त 2026 29 जनवरी 2025 नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य: बिहार में प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना इस अधिनियम की अंतिम अधिसूचना धारा 26अ के तहत 4 सितंबर 2009 को जारी की गई। सन् 2004 में नागी बांध पक्षी अभयारण्य को बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र घोषित किया गया।Nagi Dam and Nakti Dam Bird Sanctuary https://datazone.birdlife.org/site/factsheet/18116-nagi-dam-and-nakti-dam-bird-sanctuary बर्डलाइफ डेटाज़ोन 29 अगस्त 2026 en नागी बांध और नकटी बांध पक्षी अभयारण्य
नागी बांध का निर्माण
योजना आयोग की सिफारिश पर पहली पंचवर्षीय योजना के तहत सिंचाई के उद्देश्य से 1955 और 1956 में बांध का निर्माण शुरू हुआ। सन् 1958 में दूसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ।Nagi Bird Sanctuary https://explorehere.app/markers/kh77smjk1w223m76xh2jvs6g898a7f30/nagi-bird-sanctuary एक्सप्लोरहीयर 29 अगस्त 2026 en नागी पक्षी अभयारण्य नागी बांध का निर्माण लगभग 9850 एकड़ ज़मीन की सिंचाई के लिए किया गया था। बांध के निर्माण के कारण बारिश के मौसम में जलाशयों में पर्याप्त मात्रा में पानी जमा हो जाता है जिसका इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जाता है। यह जलाशय मछली, उभयचर, पक्षी, सरीसृप आदि की कई प्रजातियों का घर है।
जैव विविधता
जैव विविधता की दृष्टि से यह अभयारण्य बहुत समृद्ध है। सर्दियों के मौसम में खासकर अक्टूबर से फरवरी के बीच हज़ारों प्रवासी पक्षी इस जलाशय में इकट्ठा होते हैं। प्रवासी पक्षियों के अलावा गर्मी और मॉनसून के मौसम में भी अभयारण्य और उसके आस-पास बड़ी संख्या में स्थानीय पक्षी पाए जाते हैं। पहले सिंचाई विभाग जलाशय में मछली पकड़ने के अधिकार की नीलामी करता था। हालाँकि पक्षी अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किए जाने के बाद से यहाँ मछली पकड़ने पर रोक लगा दी गई। अभयारण्य में मछलियों की 30 से अधिक प्रजातियाँ हैं जैसे रोहू, कतला, चनारी और बुल्ला।
इन्हें भी देखें
वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान
उदयपुर वन्य अभयारण्य
सन्दर्भ
श्रेणी:अभयारण्य
श्रेणी:बिहार के संरक्षित क्षेत्र
श्रेणी:जमुई जिला
श्रेणी:भारत में रामसर स्थल