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राइबोसोम
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thumb|200px|right|थेर्मस थर्मोफाइलस की एक ३०एस उपैकाई का परमाणु ढांचा। प्रोटीन-नीले में एवं एकल सूत्र आर.एन.ए नारंगी रंग में दिखाए गये हैं
राइबोसोम सजीव कोशिका के कोशिका द्रव में स्थित बहुत ही सूक्ष्म कण हैं, जिनकी प्रोटीनों के संश्लेषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। ये आनुवांशिक पदार्थों (डीएनए या आरएनए) के संकेतों को प्रोटीन शृंखला में परिवर्तित करते हैं। ये अन्तर्द्रव्यीय जालिका के ऊपरी सतह पर पाये जाते हैं, इसके अलावा ये सूत्रकणिका तथा हरितलवक में भी पाये जाते हैं। राइबोसोम एक संदेशधारक राईबोस नाभिकीय अम्ल (एमआरएनए) के साथ जुड़े रहता है जिसमें किसी विशेष प्रोटीन के निर्माण के लिए आवश्यक अमीनो अम्ल को सही क्रमानुसार लगाने का संदेश रहता है। अमीनो अम्ल संदेशवाहक आरएनए अणुओं के साथ संलग्न रहते हैं। इस प्रकार राइबोसोम प्रोटीन के संश्लेषण में तो सहायता करता ही है लिपिड के उपापचयी क्रियाओं में भी सहायता करता है।
राइबोसोम की खोज 1955 के दशक में रोमानिया के जीववैज्ञानिक जॉर्ज पेलेड ने की थी। उन्होंने इस खोज के लिए इलैक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का प्रयोग किया था जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। राइबोसोम नाम १९५८ में वैज्ञानिक रिचर्ड बी. रॉबर्ट्स ने प्रस्तावित किया था। राइबोसोम और उसके सहयोगी अणु 20
वीं शताब्दी के मध्य से जीवविज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। उन पर काफी शोध और अनुसंधान भी प्रगति पर हैं। राइबोसोम की दो उप-इकाइयां होती हैं जो एकसाथ मिलकर प्रोटीन के निर्माण में कार्यरत रहती हैं। इन दोनों उप-इकाईयों का आकार एवं गठन प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिकाओं में भिन्न-भिन्न होता है। ७ अक्टूबर, २००९ को भारतीय मूल के वैज्ञानिक वेंकटरमन रामकृष्णन को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।राइबोसोम पर अभी बहुत कुछ जानना बाकी https://web.archive.org/web/20091016224745/http://www.livehindustan.com/news/editorial/subeditorial/57-116-75851.html 16 अक्तूबर 2009 ।। हिन्दुस्तान लाइव।१० अक्टूबर, २००९ उन्हें राइबोसोम की कार्यप्रणाली व संरचना के उत्कृष्ट अध्ययन के लिए यह पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया गया।धरती से जुड़ा माटी का लाल https://web.archive.org/web/20091016223121/http://www.livehindustan.com/news/editorial/subeditorial/57-116-75850.html 16 अक्तूबर 2009 । हिन्दुस्तान लाइव।१० अक्टूबर, २००९ उनके इस शोध-कार्य से कारगर प्रतिजैविकों को विकसित करने में मदद मिलेगी। इसराइली महिला वैज्ञानिक अदा योनोथ और अमरीका के थॉमस स्टीज़ को भी संयुक्त रूप से इस सम्मान के लिए चुना गया।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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