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नियोग
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नियोग प्राचीन काल में प्रयुक्त होने वाली एक हिन्दू परम्परा थी। ये परम्परा संतान रहित विधवाओं या उन महिलाओं के लिए अनुमत थी जो अपने जीवनसाथी से संतान नहीं प्राप्त कर सकती। इस परम्परा में अनुमत महिला किसी योग्य पुरुष से जैसे साधु, ऋषि, हिंदू धार्मिक योग करने वाले से संतान पैदा कर सकती थी।थॉमस पी॰ 21 http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.66072 Kama Kalpa Or The Hindu Ritual Of Love काम कल्प या प्यार की हिन्दू अनुष्ठान 1924 enबेंजामिन वाल्कर Hindu World: An Encyclopedic Survey of Hinduism हिन्दू दुनिया: हिन्दू धर्म का एक विश्वकोशीय सर्वेक्षण 1 2019 टेलर & फ़्रांसीस 978-0-429-62465-0 592 https://books.google.com/books?id=6zj3DwAAQBAJ&pg=PA592 The levirate system of the ancient Jews was almost identical with the Hindu custom of niyoga, 'injunction', legalized by Manu मिश्रा वी॰बी॰ 1977 The Practice of Niyoga in Ancient Literature of India: A Sociological Study भारत के प्राचीन साहित्य में नियोग का प्रचलन: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन https://www.jstor.org/stable/41691747 ऐन्नल्स ऑफ़ भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट 58/59 773–776 0378-1143 en नियोग का मूल उद्देश्य संतान रहित विधवा के वित्तीय एवं सामाजिक अनिश्चितता को कम करना और पारिवारिक वंशावली को आगे बढ़ना है।ब्रिक डेविड Widow Remarriage and Niyoga विधवा पुनर्विवाह और नियोग 2023-04-07 https://academic.oup.com/book/45654/chapter/398017839 15–101 1 ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस en 10.1093/oso/9780197664544.003.0002 978-0-19-766454-4 2024-11-06 कलियुग में बृहस्पति और अन्य स्मृति लेखकों के अनुसार नियोग निषिद्ध है।“ Pg.29 : Niyoga forbidden in the Kali age by Brhaspati and other smrti writers. “ 29 http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.24397 History Of Dharmasastra Vol. 2, Part. 1 केन पांडुरंग केन 1941 en यह माना गया है कि नियोग का बहुपतित्व से कोई संबंध नहीं है।“ Pg. 78 : It has been held that ‘ niyoga ’ has nothing to do with polyandry. “78 http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.175584 Some Aspects Of The Earliest Social History Of India एस॰सी॰ सरकार 1928
मनुस्मृति
मनुस्मृति में नियोग का वर्णन अध्याय ९ के श्लोक ५९-६३में किया गया है तथा श्लोक ६४–६८ में इसकी अनुमति दी गई है। श्लोक १६७ में नियोग से उत्पन्न संतान को क्षेत्रज (पत्नी से उत्पन्न संतान) कहा गया है।
नियोग के नियम
नियोग प्रथा के धर्मशास्त्र अनुसार नियम:-
कोई भी महिला इस प्रथा का पालन केवल संतान प्राप्ति के लिये करेगी न कि आनंद के लिए।https://sacred-texts.com/hin/manu/manu09.htm The Laws of Manu IX sacred-texts.com 2024-11-06
नियोग में शामिल पुरुष केवल धर्म के पालन के लिये इसका प्रयोग करेगा। उसका धर्म यही होगा कि वह उस महिला को संतान प्राप्ति करने में मदद कर रहा है।
इस प्रथा से जन्मा बच्चा वैध होगा और विधिवत रूप से बच्चा पति-पत्नी का होगा, नियुक्त व्यक्ति का नहीं।
नियोग में शामिल पुरुष उस बच्चे के पिता होने का अधिकार नहीं मांगेगा और भविष्य में बच्चे से कोई सम्बन्ध नहीं रखेगा।
इस प्रथा का दुरुपयोग न हो, इसलिए पुरुष अपने जीवन काल में केवल तीन बार नियोग का पालन कर सकता है।
इस कर्म को धर्म का पालन समझा जायेगा और इस कर्म को करते समय नियुक्त पुरुष और पत्नी के मन में केवल धर्म ही होना चाहिए, नियुक्त पुरुष धर्म और भगवान के नाम पर यह कर्म करेगा और पत्नी इसका पालन केवल अपने और अपने पति के लिए संतान पाने के लिए करेगी।
सम्भोग से पूर्व क्रिया और ऊपरी अंगों का सम्पर्क इसमें नहीं होगा। नियोग से पूर्व नियोगी पुरुष और महिला के शरीर पर घृत लगाया जाता है। नियोगी पुरुष या तो नेत्र बंद करके काम करता है या दोनों के मध्य एक आवरण या विभाजक रखा जाता है जिससे वो एक-दूसरे को नहीं देख सकें।
प्रक्रिया या कार्यविधि
नियोग के माध्यम से उत्तराधिकार या इसी प्रकार के अन्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किसी पत्नी या विधवा को विवश नहीं किया जाना चाहिए।
बौधायन और वसिष्ठ के अनुसार महिला को माँस, मधु आदि से दूर रहना चाहिए और कुछ अवधि (एक वर्ष से कम) के लिए धरती पर सोना चाहिए। पति के निधन और अंतिम संस्कार के छः माह बाद पति के भाई या पिता अथवा सम्बंधियों और पारिवारिक गुरुओं की सहमति के बाद महिला उस व्यक्ति का चुनाव कर सकती है जिससे संतान प्राप्त करनी है। चरित्रहीन, पागल, रोगग्रस्औत और वृद्धावस्था वाली महिला नियोग के लिए वैध नहीं नहीं मानी जाती। परिपक्वता के बाद सोलह वर्ष नियोग के लिए उचित समय है। इस प्रयोजन के लिए किसी रोगी व्यक्ति से दूर रहना चाहिए। महिला का नियोग में शामिल पुरुष से आर्थिक रूप से कोई सम्बंध नहीं होना चाहिए। नियोग के लिए और बाद में आवश्यक सभी खर्चे, भोजन, लेप इत्यादि महिला को स्वयं से अथवा अपने पति की सम्पति से वहन करने होंगे।“ Pg.150 : A wife or a widow must not, however, be forced to have recourse to Niyoga for inheritance or similar purposes. Baudhāyana and Vasistha say that a widow desiring Niyoga should avoid meat, honey etc. and sleep on the ground for a short period not exceeding one year. After six months of the death of her husband, she offers a funeral oblation to her husband and with the approval and aid of her brother or father, and relatives of her husband, and also in consultation with the Gurus of her family, she chooses the man to have an issue by her. A characterless, mad, diseased or very aged widow is not entitled to Niyoga. Sixteen years after maturity is the proper time for Niyoga. A sickly person is to be avoided for the purpose. She must be economically independent of the person whom she appoints for Niyoga and provide for the necessary ex-penses for food, unguents, etc. herself i.e. from the estate of her husband.”http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.284009 Women In Vedic Ritual Jatindra Bimal Chaudhuri 1945 150
बाइबिल में नियोग
यहूदा ने ओनान से कहा- अपनी (विधवा) भौजाई के पास जा और उसके साथ देवर का धर्म पूरा करके अपने भाई के लिए संतान जन्मा। बाइबिल, उत्पत्ति 38:8https://www.bibleref.com/Genesis/38/Genesis-38-8.html What does Genesis 38:8 mean? BibleRef.com en 2023-12-14https://www.bible.com/hi/bible/819/GEN.38.HHBD उत्पत्ति 38 HHBD बाइबिल का अनुवाद YouVersion hi
जब कई भाई संग रहते हों और उनमें से एक निपुत्र मर जाए तो उसकी स्त्री का ब्याह पर गोत्री से न किया जाय। उसके पति का भाई उसके पास जाकर उसे अपनी स्त्री कर ले। बाइबिल, व्यवस्था विवरण 25:5https://www.bible.com/hi/bible/1682/DEU.25.HINCLBSI व्यवस्था-विवरण 25 HINCLBSI बाइबिल का अनुवाद YouVersion hihttps://hindi-bible.el-elupath-elu.in//5/Deuteronomy/25/ व्यवस्थाविवरण 25 : - पवित्र बाइबिल : hindi Bible online - Deuteronomy Book, chapter 25, verse All Leemeek hindi-bible.el-elupath-elu.in hi 2023-12-14 14 दिसंबर 2023 https://web.archive.org/web/20231214113524/https://hindi-bible.el-elupath-elu.in//5/Deuteronomy/25/ dead
नियोग से इंकार करने पर सजा
बाईबल के अनुसार यदि देवर नियोग से इंकार करे तो भाई की पत्नी उन वृद्ध लोगों के सामने उसके मूंह पर थूके और जूते उसके पाव से उतारे:
7 यदि उस स्त्री के पति के भाई को उसे ब्याहना न भाए, तो वह स्त्री नगर के फाटक पर वृद्ध लोगों के पास जा कर कहे, कि मेरे पति के भाई ने अपने भाई का नाम इस्त्राएल में बनाए रखने से नकार दिया है, और मुझ से पति के भाई का धर्म पालन करना नहीं चाहता।8 तब उस नगर के वृद्ध उस पुरूष को बुलवाकर उसे समझाएं; और यदि वह अपनी बात पर अड़ा रहे, और कहे, कि मुझे इस को ब्याहना नहीं भावता,9 तो उसके भाई की पत्नी उन वृद्ध लोगों के साम्हने उसके पास जा कर उसके पांव से जूती उतारे, और उसके मूंह पर थूक दे; और कहे, जो पुरूष अपने भाई के वंश को चलाना न चाहे उस से इसी प्रकार व्यवहार किया जाएगा।10 तब इस्राएल में उस पुरूष का यह नाम पड़ेगा, अर्थात जूती उतारे हुए पुरूष का घराना॥ बाइबिल, व्यवस्थाविवरण 25:7-10https://www.bible.com/hi/bible/819/DEU.25.HHBD व्यवस्थाविवरण : किताब 25 : आयत 7,8,9,10 HHBD बाइबिल का अनुवाद YouVersion hihttps://hindi-bible.el-elupath-elu.in//5/Deuteronomy/25/7/%E0%A4%AE%E0%A5%87 व्यवस्थाविवरण 25 : 7 - पवित्र बाइबिल : hindi Bible online - Deuteronomy Book, chapter 25, verse 7 Leemeek hindi-bible.el-elupath-elu.in hi 2023-12-14 14 दिसंबर 2023 https://web.archive.org/web/20231214114310/https://hindi-bible.el-elupath-elu.in//5/Deuteronomy/25/7/%E0%A4%AE%E0%A5%87 dead
ऐतिहासिक उदाहरण
हिन्दू महाकाव्य महाभारत में धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर नियोग से पैदा हुए थे जिसमे ऋषि वेद व्यास नियुक्त पुरुष थे। बाद में, पाण्डु संतान देने में असमर्थ होने के कारण, पाँचों पांडव नियोग से पैदा हुए थे जिसमे प्रत्येक नियुक्त पुरुष अलग-अलग देवता थे।https://navbharattimes.indiatimes.com/astro/photogallery/niyog-pratha-or-vidhi-with-this-dhritarashtra-pandu-and-vidura-took-birth/photoshow/msid-91072002,picid-91072016.cms क्या है नियोग विधि? जिससे पैदा हुए थे पांडव, जानें इस विधि से जुड़े महाभारत कालीन नियम नवभारत टाइम्स hi 2024-11-06 हैहया (कलचुरी) राजा राज सिंह (लगभग 1789–1712) ने अपने ब्राह्मण सलाहकारों की सलाह पर नियोग से बच्चा पैदा किया था।Mishra P. L. 1969 Mohansingh (the Last Kalachuri King) https://www.jstor.org/stable/44138363 Proceedings of the Indian History Congress 31 207–213 2249-1937
लोकप्रिय संस्कृति में
अमोल पालेकर निर्देशित मराठी फ़िल्म अनाहत में नियोग को मुख्य विषय के रूप में दिखाया है। इस सन् 2003 में भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया।https://www.rediff.com/movies/2003/sep/26amol.htm Anaahat: Delving deep into human psyche उपाध्याय पंकज 26 नवम्बर 2003 रीडिफ डॉट कॉम en अनाहत: मानव मानस की गहराई में उतरना 2024-11-06 सन् 2007 में जारी हिन्दी फ़िल्म एकलव्य: द रॉयल गार्ड का मुख्य बिन्दू नियोग है। इसमें अमिताभ बच्चन ने नियोगी पुरुष का अभिनय किया है और नियोग से जन्मे पुत्र का अभिनय सैफ़ अली ख़ान ने किया है। इसमें नियोगी पुरुष कैसे भावनाओं पर काबू रखना और अपने कर्तव्यों का सभी कठिनाइयों के साथ पालन करते हुये दिखाया गया है।https://www.bbc.co.uk/films/2007/02/16/eklavya_2007_review.shtml BBC - Movies - review - Eklavya (The Royal Guard) www.bbc.co.uk 2024-11-06 सन् 1989 में जारी हिन्दी फ़िल्म ऊँच नीच बीच में कुलभूषण खरबंदा ने एक संन्यासी का अभिनय किया है उन्हें नियोग का आदेश दिया जाता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:हिन्दू धर्म