Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

चिपको आन्दोलन

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

चिपको आंदोलन पर्यावरण से संबंधित है। चिपको आंदोलन एक पर्यावरण-रक्षा का आन्दोलन था। यह भारत के उत्तराखण्ड राज्य (तब उत्तर प्रदेश का भाग) में किसानो ने अंगू के वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए किया था। वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार जता रहे थे।https://aajtak.intoday.in/education/story/know-about-chipko-movement-history-in-hindi-tedu-1-1070637.html चिपको आंदोलन: जब महिलाओं ने पेड़ से लिपटकर की थी जंगल की रक्षा aajtak.intoday.in hi 2020-06-30 https://web.archive.org/web/20190418085328/https://aajtak.intoday.in/education/story/know-about-chipko-movement-history-in-hindi-tedu-1-1070637.html 18 अप्रैल 2019 live यह आन्दोलन तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली जिले में सन् 1973 में प्रारम्भ हुआ। एक दशक के अन्दर यह पूरे उत्तराखण्ड क्षेत्र में फैल गया था। चिपको आन्दोलन की एक मुख्य बात थी कि इसमें स्त्रियों ने भारी संख्या में भाग लिया था। इस आंदोलन की शुरुवात 1973 में दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल Dasholi Gram Swarajya Mandalके कार्यकर्ताओं द्वारा की गई। https://www.downtoearth.org.in/environment/more-miles-to-go-for-chipko-women-29771 https://thenonviolenceproject.wisc.edu/2022/04/18/the-chipko-movement-treehuggers-of-india/ https://aaspadoos.com/chipko/celebration-in-mandalghati-on-completion-of-50-years-of-chipko/ https://thenonviolenceproject.wisc.edu/2022/04/18/the-chipko-movement-treehuggers-of-india/ चिपको आंदोलन का सूत्रपात 24 अप्रैल 1973 को मंडल घाटी से हुआ था। https://www.downtoearth.org.in/environment/the-chipko-movement-as-it-stands-today-56686 चिपको की पहले एक्शन मंडल घाटी मे चले चिपको आंदोलन मे सक्रिय भूमिका दयाल सिंह, ज्ञानसिंह, मुरारीलाल, चंडी प्रसाद भट्ट ने निभाई। चिपको आंदोलन की यह लहर अप्रैल 1973 में मंडल घाटी के बाद दिसंबर 1973 में फाटा-रामपुर के जंगलों तक पहुँची थी। https://www.downtoearth.org.in/environment/chipko-an-unfinished-mission-30883 केदार सिंह रावत जी ने रामपुर ,फाटा, मैखडा, तथा सेरसी के जंगलो को बचाने के लिए चिपको आंदोलन में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाई। चिपको का तीसरा एक्शन रेणी गांव में हुआ, जहाँ गौरा देवी, गोविन्द सिंह रावत आदि की भूमिका थी। यह भी कहा जाता है कि कामरेड गोविन्द सिंह रावत ही चिपको आन्दोलन के व्यावहारिक पक्ष थे, जब चिपको की मार व्यापक प्रतिबंधों के रूप में स्वयं चिपको की जन्मस्थली की घाटी पर पड़ी तब कामरेड गोविन्द सिंह रावत ने झपटो-छीनो आन्दोलन को दिशा प्रदान की। चिपको आंदोलन वनों का अव्यावहारिक कटान रोकने और वनों पर आश्रित लोगों के वनाधिकारों की रक्षा का आंदोलन था रेणी में 2400 से अधिक पेड़ों को काटा जाना था, इसलिए इस पर वन विभाग और ठेकेदार जान लडाने को तैयार बैठे थे जिसे गौरा देवी जी के नेतृत्व में रेणी गांव की 27 महिलाओं ने प्राणों की बाजी लगाकर असफल कर दिया था।https://www.livehindustan.com/lifestyle/story-what-is-chipko-movement-know-its-history-significance-and-other-major-facts-3108899.html चिपको आंदोलन : पेड़ों को बचाने की मुहिम के आगे ऐसे झुक गई थी सरकार, ग्रामीणों की हिम्मत को आज भी दुनिया करती हैं सलाम livehindustan.com hindi 2020-06-30 https://web.archive.org/web/20200327174431/https://www.livehindustan.com/lifestyle/story-what-is-chipko-movement-know-its-history-significance-and-other-major-facts-3108899.html 27 मार्च 2020 dead 'चिपको आन्दोलन' का घोषवाक्य है-क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार। मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार।सन 1987 में इस आन्दोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार (Right Livelihood Award) से सम्मानित किया गया था।https://www.jagran.com/uttarakhand/nainital-thailands-princess-impressed-by-the-picture-of-chipko-movement-20027810.html चिपको आंदोलन की तस्वीर से प्रभावित बेहद प्रभावित हुईं थाईलैंड की राजकुमारी nainital news Dainik Jagran hi 2020-06-30 https://web.archive.org/web/20200214204825/https://www.jagran.com/uttarakhand/nainital-thailands-princess-impressed-by-the-picture-of-chipko-movement-20027810.html 14 फ़रवरी 2020 live आन्दोलन का प्रभाव इस आंदोलन की मुख्य उपलब्धि ये रही कि इसने केंद्रीय राजनीति के एजेंडे में पर्यावरण को एक सघन मुद्दा बना दिया चिपको के सहभागी तथा कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ.शेखर पाठक के अनुसार, “भारत में 1980 का वन संरक्षण अधिनियम और यहाँ तक कि केंद्र सरकार में पर्यावरण मंत्रालय का गठन भी चिपको की वजह से ही संभव हो पाया।” उत्तर प्रदेश (वर्तमान उत्तराखण्ड) में इस aandolan ने 1980 में तब एक बड़ी जीत हासिल की, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने प्रदेश के हिमालयी वनों में वृक्षों की कटाई पर 15 वर्षों के लिए रोक लगा दी। बाद के वर्षों में यह आन्दोलन पूर्व में बिहार, पश्चिम में राजस्थान, उत्तर में हिमाचल प्रदेश, दक्षिण में कर्नाटक और मध्य भारत में विंध्य तक फैल गया था। उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध के अलावा यह आन्दोलन पश्चिमी घाट और विंध्य पर्वतमाला में वृक्षों की कटाई को रोकने में सफल रहा। साथ ही यह लोगों की आवश्यकताओं और पर्यावरण के प्रति अधिक सचेत प्राकृतिक संसाधन नीति के लिए दबाब बनाने में भी सफल रहा।सुनील कुमार चिपको आन्दोलन https://www.studyfry.com/chipko-andolan स्टडीफ्राई 12 मई 2017 https://web.archive.org/web/20171029174539/https://www.studyfry.com/chipko-andolan 29 अक्तूबर 2017 dead इन्हें भी देखें सुन्दरलाल बहुगुणा गौरा देवी पर्यावरण संरक्षण सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ गौरा देवी : चिपको आन्दोलन की जननी एक थी गौरा देवी : एक माँ के बहाने चिपको आन्दोलन की याद। श्रेणी:उत्तराखण्ड का इतिहास श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना श्रेणी:चमोली जिला श्रेणी:भारत का सामाजिक इतिहास