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कूलिंग टॉवर
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thumb|300px|डिडकोट पॉवर स्टेशन, ब्रिटेन पर प्राकृतिक ड्राफ्ट वेट कूलिंग हाइपरबोलिक टॉवर्स
thumb|300px|right|यांत्रिक रूप से प्रेरित ड्राफ्ट कूलिंग टॉवर
कूलिंग टॉवर्स ऊष्मा निष्कासन के वे उपकरण हैं जिनका उपयोग संसाधित अपशिष्ट ऊष्मा को वातावरण में छोड़ने के लिए किया जाता है। कूलिंग टॉवर्स में संसाधित उष्मा को निकालने के लिए पानी के वाष्पीकरण के लिए या तो वेट-बल्ब वाले वायु तापमान के समीप क्रियाशील तरल को ठंडा करने के लिए उपयोग किया जाता है या फिर ड्राई-बल्ब वाले वायु तापमान के समीप क्रियाशील तरल को ठंडा करने के लिए पूरी तरह से वायु पर निर्भर रहना पड़ता है। सामान्य अनुप्रयोगों में तेल शोधक कारखाने, रासायनिक संयंत्र, ऊर्जा संयंत्रों और इमारत को ठंडा करने में प्रयुक्त किया जाने वाला प्रवाहित होने वाले पानी को ठंडा करना शामिल है। टॉवर्स छोटी छत से लेकर बड़ी छत वाली बहुत बड़ी अंडाकार संचरनाएं(छवि 1 में दिखाएनुसार) हो सकती हैं जिनकी ऊंचाई लगभग 200 मीटर तक ऊंची और चौड़ाई 100 मीटर तक या आयतकार संरचना (चित्र 2 में दिखाएनुसार) के समान हो सकती हैं जिनकी उंचाई 40 मीटर तक और लंबाई 80 मीटर तक हो सकती है। छोटे टॉवर सामान्यतः फैक्ट्री में बनते हैं, जबकि बड़ों का निर्माण साइट पर ही किया जाता है। उन्हें आमतौर पर परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से जोड़ कर देखा जाता है।
अंडाकार कूलिंग टॉवर का पेटेंट फ्रेडरिक वैन इटैरसन और जेरार्ड क्युपर्स द्वारा 1918 में किया गया।http://v3.espacenet.com/publicationDetails/biblio?KC=A&date=19180411&NR=108863A&DB=EPODOC&locale=en_V3&CC=GB&FT=D ब्रिटेन पेटेंट नं. 108,863 16 जून 2020 https://web.archive.org/web/20090205201218/http://v3.espacenet.com/publicationDetails/biblio?KC=A&date=19180411&NR=108863A&DB=EPODOC&locale=en_V3&CC=GB&FT=D 5 फ़रवरी 2009 live
उपयोग के अनुसार वर्गीकरण
कूलिंग टॉवर्स का वर्गीकरण आमतौर पर HVAC (एयर कंडीशनिंग) या औद्योगिक ड्यूटी के रूप में रेंटेल, रोजेलीटो और स्ट्रोंगहोल्ड, अप्रैल द्वारा अपनी पुस्तक द मिस्ट्री ऑफ टॉवर्स अनफोल्डेड (The Mystery of Cooling Towers Unfolded) में बताया गया है, के अनुसार किया जा सकता है।
HVAC
एक HVAC कूलिंग टॉवर चिलर से ऊष्मा छोड़ने वाली उपश्रेणी है। पानी से ठंडे होने वाले चिलर में आमतौर पर वेट-बल्ब के तापमान पर या उसके समीप टॉवर के पानी में ऊष्मा को छोड़ने के कारण हवा द्वारा ठंडे होने वाले चिलर की तुलना में ऊर्जा की खपत कम होती है। वायु द्वारा ठंडे होने वाले चिलर को ऊष्मा ड्राई-बल्ब के तापमान पर छोड़नी चाहिए और इस तरह से न्यूनतम औसत के प्रतिपक्षीय-कार्नोट वाली चक्राकार प्रभाविकता होती है। बड़े-बड़े कार्यालय वाली इमारतों, अस्पतालों और विशेष रूप से स्कूलों में लगाए जाने वाले एयर कंडीशनिंग सिस्टम के रूप में एक या एक से अधिक कूलिंग टॉवर्स का उपयोग किया जाता है। आमतौर पर, औद्योगिक कूलिंग टॉवर्स HVAC टॉवर्स की तुलना में अधिक बड़े होते हैं।
HVAC में प्रयुक्त होने वाले कूलिंग टॉवर्स में कूलिंग टॉवर के साथ-साथ पानी द्वारा ठंडे होने वाले चिलर या पानी द्वारा ठंडे होने वाले कंडेंसर्स का उपयोग होता है। एक टन का एयर-कंडीशनिंग 12,000 बीटीयू/घंटा (3517 W) निकालता है। वास्तव में, कूलिंग टॉवर की सतह पर समतुल्य टन ऊर्जा की ऊष्मा-समतुल्यता के कारण लगभग 15,000 बीटीयू/घंटा (4396 W) निकालने के लिए चिलर कंप्रेशर को चलाने की जरूरत होती है। यह समतुल्य टन को पानी 10 °F (5.56 °C) के कूलिंग 3 अमरीकी गैलन/मिनट (1,500 पाउंड/घंटे) में ऊष्मा निकालने के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो लगभग 15000 बीटीयू/घंटा या 4.0 के कोअफिशन्ट ऑफ पर्फॉर्मन्स (COP) है। यह COP ऊर्जा कार्यक्षमता अनुपात (EER) 13.65 के समतुल्य है।
औद्योगिक कूलिंग टॉवर्स
औद्योगिक कूलिंग टॉवर्स का उपयोग विभिन्न स्रोतों जैसे मशीनरी या गर्म प्रक्रिया वाली सामग्री के रूप में ऊष्मा निकालने के लिए किया जा सकता है। बड़े औद्योगिक कूलिंग टॉवर्स का मूल उपयोग बिजली संयत्रों, पेट्रोलियम शोधशालाओं, पेट्रोकेमिकल संयत्रों, प्राकृतिक गैस संसाधन संयंत्रों, भोजन संसाधन संयंत्रों, सेमी-कंटक्टर संयत्रों और अन्य औद्योगिक सुविधाओं वाले परिसंचारी ठंडे पानी में अवशोषित ऊष्मा निकालने के लिए किया जाता है।Profile of the Fossil Fuel Electric Power Generation Industry http://www.epa.gov/compliance/resources/publications/assistance/sectors/notebooks/fossil.html U.S. Environmental Protection Agency (EPA). 1997 Washington, D.C https://web.archive.org/web/20110203095518/http://www.epa.gov/compliance/resources/publications/assistance/sectors/notebooks/fossilsn.pdf 3 फ़रवरी 2011 live https://web.archive.org/web/20110405122613/http://www.epa.gov/compliance/resources/publications/assistance/sectors/notebooks/fossil.html 5 अप्रैल 2011 दस्तावेज़ नं. EPA/310-R-97-007. पृष्ठ 79. कोई विशिष्ट 700 MW कोयला आधारित बिजली संयंत्र में ठन्डे पानी को प्रवाहित करने की दर किसी कूलिंग टॉवर की लगभग 71,600 क्यूबिक मीटर प्रति घंटे (315,000 अमरीकी गैलन प्रति मिनट) होती है और प्रवाहित होने वाले पानी के लिए शायद 5 प्रतिशत (जैसे 3,600 क्यूबिक मीटर प्रति घंटे) के हिसाब से पानी की आपूर्ति करने की आवश्यकता होती है।
यदि उस संयंत्र में कूलिंग टॉवर नहीं है और लगातार ठंडा होने वाले पानी का उपयोग किया जाता है, तो इसके लिए लगभग 100,000 क्यूबिक मीटर प्रति घंटे पानी की आवश्यकता होगी और इस पानी मात्रा को निरंतर रूप से महासागर, झील या नदी में पहुंचाना पड़ेगा जहां से यह आया था इसकी आपूर्ति पुन: संयंत्र को करनी पड़ेगी.थॉमस जे. फीले, III, लिंडसे ग्रीन, जेम्स टी. मर्फी, जेफरी हॉफमैन और बारबरा ए. कारने (2005). "ऊर्जा विभाग के कार्यालय/ फॉसिल एनार्जिस पॉवर प्लांट वॉटर मैनेजमेंट R&D प्रोग्राम का कार्यालय." https://web.archive.org/web/20070927104349/http://204.154.137.14/technologies/coalpower/ewr/pubs/IEP_Power_Plant_Water_R%26D_Final_1.pdf 27 सितंबर 2007 अमेरिका के ऊर्जा विभाग, जुलाई 2005. इसके अतिरिक्त, नदी या झील के ताप में बड़ी मात्रा में छोड़े गए गर्म पानी के कारण उसके तापमान में वृद्धि हो सकती है जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्तर के असहनीय हो सकता है। पानी के तापमान बढ़ने के कारण मछली और अन्य जलीय जीव मर सकते हैं। (थर्मल प्रदूषण देखें.) इसके बजाय कूलिंग टॉवर ऊष्मा को पर्यावरण एवं हवा में छोड़ता है और वायु प्रसार उष्मा को गर्म पानी की तुलना अधिक बड़े क्षेत्र पर फैला देता है जिसके कारण उष्मा जल स्रोतों में विभाजित हो जाती है।
तटीय क्षेत्रों में स्थापित कुछ कोयला आधारित और परमाणु आधारित ऊर्जा संयंत्रों में महासागर के पानी का सतत् उपयोग होता है। लेकिन फिर भी, वातावरणीय समस्याओं से बचने के लिए ऑफ़शोर डिस्चार्ज वाटर आउटलेट के लिए अत्यधिक सावधानीपूर्वक डिज़ाइन तैयार करने की आवश्यकता होती है।
पेट्रोलियम शोधशालाओं में भी बहुत बड़े-बड़े कूलिंग टॉवर सिस्टम होते हैं। किसी विशिष्ट बड़ी शोधशाला जिसमें 40,000 मीट्रिक टन क्रूड ऑयल प्रतिदिन (प्रतिदिन 300,000 बैरल) परिसंचारित होता है उसके कूलिंग टॉवर के लिए लगभग 80,000 घन मीटर पानी प्रति घंटे की आवश्यकता होती है।
विश्व का सबसे अधिक ऊंचाई वाला कूलिंग टॉवर नीदरयूसेम पॉवर स्टेशन है जिसकी ऊंचाई 200 मीटर है।
ऊष्मा छोड़ने की विधियां
thumb|240px|HVAC एप्लीकेशन में प्रयोग किए जाने वाले यांत्रिक ड्राफ्ट क्रॉसफ्लो कूलिंग
ऊष्मा छोड़ने के लिए लगायी गयी प्रक्रियाएं मुख्यत: तीन प्रकार की होती हैं:
वाष्पीकरण के सिद्धांत पर आधार पर संचालित होने वाले वेट कूलिंग टॉवर्स या केवल कूलिंग टॉवर्स . कार्यशील एवं वाष्पीकृत तरल (आमतौर पर H2O) एक एवं समान होते हैं।
ड्राई कूलर्स सतह पर ऊष्मा छोड़ने के माध्यम से संचालित होते हैं जो परिवेशी वायु को कार्यशील तरल से अलग करते हैं जैसेकि किसी ऊष्मा एक्सचेंजर में ऊष्मा छोड़ने के लिए संचारण का उपयोग करना। उनमें वाष्पीकरण का उपयोग नहीं होता।
द्रव पदार्थ वाले कूलर्स हाइब्रिड हैं जिनमें कार्यशील द्रव ट्यूब के समूह से होकर गुजरता है जिनके ऊपर साफ पानी का छिड़काव किया जाता है और पंखे द्वारा उतप्रेरित ड्राफ्ट को लगाया जाता है। जिससे उत्पन्न होने वाला ऊष्मा स्थानांतरण प्रदर्शन पर्यावरण में छोड़े जाने वाले कार्यशील तरल की रक्षा के लिए ड्राई कूलर द्वारा प्रदान लाभ के साथ-साथ वेट कूलिंग टॉवर के लगभग समान होता है।
किसी वेट कूलिंग टॉवर में, गर्म पानी को परिवेशी वायु वाले ड्राई-बल्ब के तापमान की तुलना में कम तापमान पर ठंडा किया जा सकता है, यदि वायु अपेक्षाकृत शुष्क है। (इसे देखें: ओस बिंदु और साइक्रोमेट्रिक्स). एमबीयन्ट वायु को पानी के साथ छोड़े जाने पर वाष्पीकरण होता है। वाष्पीकरण संतृप्त एयर कंडीशंस के परिणामस्वरूप होता है, जिसके कारण पानी का तापमान वेट बल्ब के वायु के तापमान की तुलना में कम हो जाता है, जो एमबीयन्ट ड्राई बल्ब वायु तापमान से कम होता है, इसका निर्धारण एमबीयन्ट वायु की आर्दता के द्वारा किया जाता है।
बेहतर प्रदर्शन (अधिक ठंडा करने के लिए) प्राप्त करने के लिए, वायु एवं पानी के प्रवाह के बीच सतह को बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले माध्यम फिल कहलाता है। स्पलैश फिल (Splash fill) में वह सामग्री होती है जो स्पलैश के कारण पानी के प्रवाह को अवरूद्ध करती है। फिल्म फिल (Film fill) सामग्री की पतली परतों से बनी होती है जिसके ऊपर से होकर पानी बहता है। दोनों विधियों से सतह के क्षेत्र में वृद्धि होती है।
वायु प्रवाह उत्पन्न करने वाली विधियां
thumb|200px|right|एक जबदस्त ड्राफ्ट टॉवर कूलिंग
टॉवर के माध्यम से हवा को खींचने के संबंध में तीन प्रकार के कूलिंग टॉवर्स हैं:
प्राकृतिक ड्राफ्ट (Natural draft), जिसमें उंची चिमनी के द्वारा प्लवनशीलता का उपयोग करता है। गर्म, नम वायु असंबद्ध ड्राई कूलर के घनत्व में अंतर के कारण प्राकृतिक रूप से ऊपर उठ जाती है। गर्म आर्द वायु का घनत्व समान दबाव पर शुष्क हवा से कम होता है। यह आर्द वायु प्लवनशीलता टॉवर के माध्यम से वायु की धारा उत्पन्न करती है।
मकैनिकल ड्राफ्ट (Mechanical draft), जिनमें टॉवर के माध्यम से वायु को निकालने या खींचने के लिए बिजली चालित पंखे वाली मोटरों का उपयोग होता है।
उत्प्रेरित ड्राफ्ट (Induced draft) : पंखे वाले मकैनिक ड्राफ्ट टॉवर, टॉवर के माध्यम से खींची जाने वाली वायु को निकालता है। पंखा खींची गयी गर्म आर्द हवा को निकालता है। यह हवा को न्यून वेग के साथ अंदर खींचता है और तेज वेग के साथ बाहर निकाल देता है, जिससे पुनःपरिसंचरण की संभावना कम हो जाती है जो छोड़े जाने वाली हवा को वापस खींच लेता है। इस फैन/फिन व्यवस्था को खींची जाने वाली हवा (draw-through) के नाम से भी जाना जाता है। (छवि 2, 3 देखें)
फोर्स्ड ड्राफ्ट (Forced draft): यांत्रिक ड्राफ्ट टॉवर ब्लोअर फैन हवा को भीतर खींचता है। पंखा वायु के मौजूदा वेग की उच्च प्रविष्टि और निम्न निकास बनाते हुए वायु को टॉवर में खींचता है। मौजूदा न्यून वेग पुन:परिसंचरण के लिए अधिक ग्रहणशील होता है। पंखे द्वारा खींची गयी वायु से, पंखा जमने वाली जटिलताओं के प्रति अधिक ग्रहणशील है। इसका दूसरा नुकसान यह भी है कि फोर्स्ड ड्राफ्ट डिज़ाइन में समतुल्य इन्ड्यूस्ड ड्राफ्ट डिज़ाइन की तुलना में अधिक हॉर्सपॉवर वाली मोटर की आवश्यकता होती है। फोर्स्ड ड्राफ्ट लाभ उच्च स्थैतिक दाब के साथ इसके काम करने की क्षमता है। वे अधिक सीमित स्थान पर या आंतरिक स्थानों पर स्थापित किए जा सकते हैं। इस फैन/फिन ज्यामिति को ब्लो-थ्रो (blow-through) के नाम से भी जाना जाता है। (4 छवि देखें)
पंखा प्राकृतिक ड्राफ्ट में मदद करता है। प्राकृतिक ड्राफ्ट के समान दिखाई देने वाले ड्राफ्ट की मदद पंखे के प्रवाह द्वारा की जाती है।
अंडाकार (जिसे हायपरबोलिक के रूप में भी जाना जाता है) कूलिंग टॉवर (छवि 1) सभी प्राकृतिक कूलिंग टॉवर्स उनकी संरचनात्मक मज़बूती और सामग्री के न्यूनतम उपयोग के कारण मानक डिज़ाइन बने गए हैं। गोलाकार आकृति ठंडा करने की कार्यक्षमता में सुधार करने हेतु ऊर्ध्वगामी संवहनी वायु प्रवाह के गतिवर्धन में सहायता भी करता है। वे खासतौर पर परमाणु बिजली संयंत्रों से संबद्ध होते हैं। हालांकि, यह संबंध गलत है क्योंकि इस प्रकार के कूलिंग टॉवर्स का उपयोग कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्रों में भी होता है। उसी तरह से, सभी परमाणु संयंत्रों में कूलिंग टॉवर्स नहीं होते बल्कि वे अपने उष्मा प्रवाहकों को झील, नदी या महासागर के पानी से ठंडा करते हैं।
हवा से पानी के प्रवाह द्वारा वर्गीकरण
क्रॉसफ़्लो (Crossflow)
क्रॉसफ़्लो (Crossflow) एक ऐसा डिज़ाइन है जिसमें वायु का प्रवाह पानी के प्रवाह की लंबवत दिशा में होता है (नीचे आकृति देखें). वायु का प्रवाह कूलिंग टॉवर में सामग्री को भरने के लिए एक या एक से अधिक लंबवत सतह से होकर प्रविष्ट होती है। पानी गुरुत्व द्वारा फिल से होकर बहता (वायु की लंबवत दिशा में) है। हवा लगातार फिल से होकर गुजरती रहती है और इस प्रकार से पानी खुले निकाय वाले क्षेत्र से होकर प्रवाहित होता है। किसी गहरे तल वाले वितरण या गर्म पानी के बेसिन जिसके तल में छेद या नॉजेल (nozzles) होते हैं का उपयोग क्रॉसफ़्लो (Crossflow) टॉवर में किया है। गुरुत्व भरी सामग्री को नॉजेल के माध्यम से पानी को समान रूप से फैला देता है।
चित्र:Crossflow diagram.PNG
काउंटरफ़्लो (Counterflow)
एक काउंटरफ़्लो (Counterflow) डिज़ाइन में वायु प्रवाह पानी की बिल्कुल विपरीत दिशा में प्रवाहित होता है (नीचे दिया रेखाचित्र देखें). प्रवाहित होने वाली वायु सबसे पहले
फिल मीडिया के नीचे खुले क्षेत्र में प्रविष्ट होती है और तब लंबवत रूप में प्रवाहित की जाती है। पानी का छिड़काव तेज दबाव वाली नॉजेल से किया जाता है और फिल से होकर, वायु प्रवाह की विपरीत दिशा में नीचे की दिशा में प्रवाहित होता है।
चित्र:Counterflow diagram.PNG
दोनों डिज़ाइन के लिए समान:
वायु और पानी के प्रवाह की पारस्परिक क्रिया से पानी की आंशिक समतुल्यता और वाष्पीकरण होता है।
पानी वाली वाष्प से संतृप्त वायु को कूलिंग टॉवर से छोड़ा जाता है।
संचित या ठंडे पानी वाले बेसिन को पानी प्रवाह के साथ पारस्परिक क्रिया के बाद पानी के भंडारण के लिए किया जाता है।
दोनों क्रॉसफ़्लो और काउंटफ़्लो डिज़ाइनों का उपयोग प्राकृतिक ड्राफ्ट और यांत्रिक ड्राफ्ट कूलिंग टॉवर्स में किया जा सकता है।
फ्लू गैस स्टैक के रूप में कूलिंग टॉवर
फ्लू गैस शोधन से लैस कुछ आधुनिक ऊर्जा संयंत्र जैसे पॉवर स्टेशन स्टाडिंगर ग्रासक्रोटेनबर्ग और पॉवर स्टेशन रॉसटोक में कूलिंग टॉवर का उपयोग फ्लू गैस स्टैक (औद्योगिक चिमनी) के रूप में किया जाता है। फ्लू गैस शोधन रहित संयंत्रों में जंग संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
thumb|गिरते पानी के साथ कूलिंग टॉवर का आधार
वेट कूलिंग टॉवर सामग्री संतुलन
परिणाम के तौर पर, वेट कूलिंग टॉवर के चारो ओर सामग्री संतुलन, वाष्पीकरण कूलिंग टॉवर सिस्टम को प्रतिपूर्ति प्रवाह दर के कार्यात्मक चर, वाष्पीकरण और वायु घर्षण क्षरण, प्रवाह की दर और सान्द्रता चक्र को चलाया जाता है:Beychok, Milton R. Aqueous Wastes from Petroleum and Petrochemical Plants 1st Edition John Wiley and Sons 1967 LCCN 67019834(कई विश्वविद्यालय पुस्तकालयों में उपलब्ध)
चित्र:CoolingTower.png
M = m³/घंटा पानी प्रतिपूर्ति C = m³/घंटा प्रवाहित होने वाले पानी D = m³/ घंटा में निकाला गया पानी E = m³/घंटा वाष्पीकृत पानी W = m³ पानी की वायु घर्षण क्षरण X = ppmw में सान्द्रता (पूरी तरह से घुलनशील लवण ... आमतौर पर क्लोराइड) XM मिश्रित पानी (M)क्लोराइड की सान्द्रता, ppmw में XC प्रवाहित होने वाले पानी में (C) में क्लोराइड की सांद्रता, ppmw में चक्र सांद्रता चक्र = XC / XM (आयामहीन) ppmw = भार प्रति मिलियन
उपरोक्त रेखाचित्र में, निचले बेसिन से छोड़ा गया पानी ठंडा पानी किसी औद्योगिक सुविधा में कूलर्स और कंटेंसर्स प्रक्रिया के रास्ते पानी को ठंडा करता है। ठंडा पानी ऊष्मा को गर्म प्रक्रिया वाली धारा से ऊष्मा को सोख लेता है जिसे ठंडा या संघनित करने की आवश्यकता होती है और अवशोषित ऊष्मा प्रवाहित होने वाले पानी (C) को गर्म कर देती है। गर्म पानी कूलिंग टॉवर के शीर्ष की तरफ लौट जाता है और टॉवर में भरी सामग्री पर नीचे की ओर टपकता है। जैसे-जैसे यह नीचे की तरफ टपकता है, तो यह टॉवर में बड़े-बड़े पंखों का उपयोग करके प्राकृतिक या फोर्स्ड ड्राफ्ट द्वारा टॉवर से उठने वाली वायु के संपर्क में आता है। उसके संपर्क के कारण कुछ पानी वायु घर्षण (W) के रूप में विलीन हो जाता है और कुछ पानी (E) का वाष्पीकरण हो जाता है। पानी के वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा को पानी से पूरा किया जाता है जो पानी को वापस मूल बेसिन वाले पानी के समान तापमान पर ठंडा करता है और पानी फिर से पुन:परिचारित करने के लिए तैयार हो जाता है। पानी के वाष्पीकरण के कारण घुले हुए लवण बाकी पानी में रह जाते हैं जो वाष्पीकृत नहीं होता, इस प्रकार से परिसंचारी ठंडे पानी में लवण सान्द्रता में वृद्धि होती है। पानी में लवण सान्द्रता की मात्रा को बढ़ने से रोकथाम के लिए इसमें पानी के कुछ मात्रा छोड़ी (D) जाती है। तब वाष्पीकृत पानी की क्षतिपूर्ति के लिए टॉवर के बेसिन में संचित ताजे पानी की आपूर्ति की जाती है।
संपूर्ण सिस्टम में शेष पानी:
M = E + D + W
चूंकि वाष्पीकृत पानी (E) में कोई लवण नहीं होते, तो सिस्टम में क्लोराइड की मात्रा लगभग होगी:
M (XM) = D (XC) + W (XC) = XC (D + W)
और इसलिए:
XC / XM = सांद्रता चक्र = M ÷ (D + W) = M ÷ (M – E) = 1 + [E ÷ (D + W)]
कूलिंग टॉवर के चारो ओर किसी सरल ऊष्मा संतुलन से:
E = C · ΔT · cp ÷ HV
जहां पर: HV पानी के वाष्पीकरण की निहित ऊष्मा = ca. 2260 kJ / kg ΔT = टॉवर के शीर्ष से लेकर टॉवर के तल तक पानी के तापमान का अंतर, °C में cp = पानी की विशिष्ट ऊष्मा = ca. 4.184 kJ / (kg\cdot°C)
बड़े पैमाने वाले औद्योगिक कूलिंग टॉवर्स से घर्षण (या ड्राफ्ट) क्षतियां (W), विनिर्माण डेटा की अनुपस्थिति में इस प्रकार से माने जा सकते हैं:
W = घर्षण ड्राफ्ट इलिमनेटर्स के बिना किसी प्राकृतिक कूलिंग टॉवर के लिए C का 0.3 से 1.0 प्रतिशत
W घर्षण ड्राफ्ट इलिमनेटर्स के बिना किसी प्रेरित ड्राफ्ट के लिए C का 0.1 से 0.3 प्रतिशत
W = C (या कम) का लगभग 0.005 प्रतिशत यदि कूलिंग टॉवर में घर्षण ड्रिफ्ट इलिमनेटर्स होते हैं
सान्द्रता चक्र पुन: परिसंचारी ठंडे पानी में घुले खनिजों के संचयन को दर्शाता है। इन खनिजों के संचय को नियंत्रित करने के लिए सैद्धान्तिक रूप से निकालने (या खींचने) का उपयोग किया जाता है।
संचित पानी के रासायनिक गुण जैसे घुले खनिजों की मात्रा में काफी अंतर हो सकता है। घुले पानी में संचित पानी जैसे वे जिनसे पानी की आपूर्ति धरातलीय पानी (झील, नदियां आदि) से कठोर धातुओं (संक्षारक) में की जाती है। जमीन के संचित पानी (कुएं) जिसमें आमतौर से खनिजों की मात्रा अधिक होती है और उन्हें (जमा खनिज) से अलग करना चाहिए। चक्र द्वारा पानी को पाइपों में बहने के लिए मौजूद खनिजों की मात्रा को बढ़ाकर पानी की लवणता को कम किया जा सकता है हालांकि खनिजों की अधिकता के कारण उन्हें अलग करने की समस्या हो सकती है।
चूंकि सान्द्रता चक्र का पानी को बढ़ाना से पानी में घुले खनिजों को निकालन पाना संभव नहीं है। जब इन खनिजों की विलयता बढ़ जाती है तो वे उन्हें ठोस खनिजों के रूप में बाहर निकाल सकते हैं और जिनके कारण कूलिंग टॉवर या ऊष्मा एक्सचेंजर्स में ऊष्मा प्रतिस्थापना में दूषण और उष्मा परिवर्तन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसका निर्धारण पुनःपरिसंचरण पानी का ताप, पाइप और उष्मा धरातल को परिवर्तित करते हैं और खनिज पुन: परिसंचारित पानी में कहां पर घनीभूत किए जा सकते हैं। आमतौर पर एक पेशेवर पानी उपचार सलाहकार संचित पानी के उपचार करेगा और कूलिंग टॉवर की क्रियान्वित दशाएं और सांद्रता चक्र के लिए उचित सुझाव देगा। पानी शोधन रसायन, पूर्व-शोधन जैसे पानी को मृदुल बनाना, pH समायोजन और अन्य तकनीकें सांद्रता चक्र की स्वीकारीय संख्या को प्रभावित कर सकते हैं।
अधिकांश कूलिंग टॉवर्स में सांद्रता चक्रों की संख्या आमतौर पर 3 से लेकर 7 तक हो सकती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में अधिकतर स्वच्छ पानी की आपूर्ति होती है और उसमें एक विशिष्ट मात्रा में ठोस तत्व घुले होते हैं। दूसरी तरफ, न्यूयार्क सिटी में सबसे अधिक पानी की आपूर्ति किए जाने से धरातल पर खनिजों की मात्रा का स्तर काफी कम हो गया है और उस शहर में सांद्रता के 7 या उससे अधिक चक्रों की सांद्रता किए जाने की अनुमति है।
बड़े-बड़े औद्योगिक टॉवर सिस्टम में सफाई और दूषण को कम करने के लिए परिसंचारी ठंडे पानी का उपचार करने के अलावा पानी को फिल्टर किया जाना चाहिए और पानी के सतत प्रवाह में हस्तक्षेप को रोकने के लिए बायोसाइड और एलेगसाइड्स की उचित मात्रा दी जानी चाहिए। बंद लूप वाले वाष्पशील टॉवर्स के लिए, संक्षारण प्रतिरोधकों का उपयोग किया जा सकता है लेकिन स्थानीय पर्यावरण संबंधी नियामकों को पूरा करना चाहिए क्योंकि कुछ प्रतिरोधकों में क्रोमेट्स का उपयोग होता है।
आस पास की स्थितियां पानी वाष्प की क्षमता के कारण किसी टॉवर की कार्यक्षमता की व्याख्या करती हैं तो वायु उसे अवशोषित या सोख लेती है जिसका निर्धारण मनोमितीय चार्ट पर किया जा सकता है।
कूलिंग टॉवर्स और लेजीनेयर्स की बीमारी
thumb|कूलिंग टॉवर और एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र से पानी का निष्काषन
Legionellosis and Legionella
कूलिंग टॉवर्स में बायोसाइड्स के उपयोग के लिए अन्य सबसे महत्वपूर्ण कारण लीजोनेला जैसी प्रजातियों की वृद्धि को रोकना है, जैसे वे प्रजातियां जिनके कारण लीजोनेलॉयसिस का सबसे मुख्य लेजीनेयर्स नामक रोग'' एल. नियमॉर्फिला है।Ryan K.J.; Ray C.G. (editors) Sherris Medical Microbiology https://archive.org/details/sherrismedicalmi0000unse_q1i3 4th Edition McGraw Hill 2004 0-8385-8529-9 विभिन्न लीजोनेला प्रजातियां मानव में लीजोनेयर्स नामक रोग होता है और इसका संचारण एयरोसोल-बैक्टीरिया वाले धूल के छोटे-छोटे कणों को सांस के साथ शरीर में जाने से होता है। लीजोनेला के आम स्रोतों में कूलिंग टॉवर्स शामिल हैं जिनका उपयोग खुले पुन:परिसंचरण वाष्पीकृत ठंडे पानी वाले सिस्टम, घरेलू पानी के सिस्टम, फव्वारे और इसी के समान डिसेमीनेटर्स में होता है जिससे सावर्जनिक पानी की आपूर्ति की जाती है। प्राकृतिक स्रोतों में ताज़े पानी वाले तालाब और छोटी नदियां शामिल हैं।
फ्रांस के शोधकर्ताओं ने पाया कि लीजोनेला पास-डे-केलेइस (Pas-de-Calais), फ्रांस के पेट्रोकेमिकल संयंत्र में किसी विशालकाय दूषित कूलिंग टॉवर से लगभग छ: किलोमीटर की दूरी तक वायु के द्वारा फैलता है। इसके फैलने कारण 86 में से 21 लोगों की मौत हो गई जिसके संक्रमण पुष्टि प्रयोगशाला में की गयी।एयरबोर्न लीजोनेला कई किलोमीटर यात्रा कर सकती है(पंजीकरण की मुफ्त में आवश्यकता) https://web.archive.org/web/20080922134426/http://www.medscape.com/viewarticle/521680 22 सितंबर 2008
ड्रिफ्ट (या घर्षण) प्रवाह प्रक्रिया की छोटी-छोटी बूंदों के लिए वह अवधि है जिसका उपयोग कूलिंग टॉवर से छोड़े जाने वाले पानी से बचाव के लिए किया जाता है। ड्रिफ्ट इलिमनेटर्स का उपयोग ड्रिफ्ट दर, विशेष रूप से प्रवाह दर को 0,001% से -0.005% तक बनाए रखने के लिए किया जाता है। विशेष ड्रिफ्ट इलिमनेटर पानी की बूंदों से बचाव के दौरान वायु प्रवाह के एकाधिक दिशात्मक परिवर्तन प्रदान करता है। अच्छी तरह से तैयार डिज़ाइन और अच्छी तरह से फिट ड्रिफ्ट इलिमनेटर लीजोनेला या अन्य रसायनिक प्रदर्शन के लिए पानी की कमी या संभावना को विशेष तौर से कम कर सकते हैं।
कई सरकारी एजेंसियों, कूलिंग टॉवर निर्माता और औद्योगिक व्यापार संगठनों ने इसकी रोकथाम या नियंत्रण (नियोसेन्स FS सेंसर का उपयोग कर) जैसे कूलिंग टॉवर में लीजोनेला'' के विकास के लिए डिज़ाइन और रखरखाव दिशानिर्देश तैयार किए हैं। नीचे ऐसे दिशानिर्देश स्रोतों की सूची दी गई है:
Centers for Disease Control and Prevention 1.35 MB - कूलिंग टॉवर्स और संबंधित उपकरण की साफ-सफाई करने की प्रक्रिया (पृष्ठ 239 और 249 का 240)
Cooling Technology Institute 240 KB - लीजोनेला नियंत्रण के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां, जुलाई, 2006
Association of Water Technologies 964 KB - लीजोनेला 2003
California Energy Commission 194 KB - ऊर्जा संयंत्रों में वेट और हाइब्रिड कूलिंग टॉवर्स हेतु पानी को ठंडा पानी के प्रबंध संबंधी प्रोग्राम दिशानिर्देश
SPX Cooling Technologies 119 KB - कूलिंग टॉवर्स रखरखाव प्रक्रिया
SPX Cooling Technologies 789 KB - ASHRAE दिशानिर्देश 12-2000 - लिजोनेलोसिस के जोखिम कम करना
SPX Cooling Technologies 83.1 KB - कूलिंग टॉवर निरीक्षण युक्तियां (विशेष रूप से पृष्ठ 7 का 3)
Tower Tech Modular Cooling Towers 109 KB - लीजोनेला नियंत्रण
GE Infrastructure Water & Process Technologies Betz Dearborn 195 KB - खुले पुन:परिसंचारी ठंडे पानी वाले सिस्टम में लीजोनेला से संबंधित जोखिमों को न्यूनतम करने के लिए रासायनिक पानी उपचार संबंधी सिफारिशें
कूलिंग टॉवर धुंध
कुछ विशेष परिवेशी परिस्थितियों के अंतर्गत, जल वाष्प (धुंध) को किसी कूलिंग टॉवर (छवि 1 देखें) से निकलने वाले पानी से धुंध को देखा जा सकता है और आग से निकलने वाले धुएं के रूप में गलती हो सकती है। यदि बाहरी हवा में संतृप्त या उसके समान है और टॉवर वायु में अधिक पानी को बढाते हैं, तो तरल पानी की संतृप्त बूंदों को वायु में छोड़ा जा सकता है - जिसे धुंध के रूप में देखा जा सकता है। यह घटना विशिष्टतौर पर ठंडे, आर्द दिनों में होती है, लेकिन सभी मौसमों में संभव नहीं है।
ठंडे मौसम में कूलिंग टॉवर परिचालन
ठीक से काम नहीं करने वाले कूलिंग टॉवर्स बहुत ठंडे मौसम में जम सकते हैं। विशिष्ट तौर पर, कम या ऊष्मा भार न होने की स्थिति में किसी कूलिंग टॉवर का ठंडा उसके कोने से आरंभ होता है। बढ़ती ठंड वाली स्थितियों के कारण बर्फ के आयतन में वृद्धि संभव है, जिसके परिणामस्वरूप संरचनात्मक भार बढ़ सकता है। सर्दियों के दिनों में, कुछ स्थानों पर टॉवर से पानी छोड़ने के साथ-साथ 40 °F °C on वे लगातार चलाए जाते हैं। बेसिन हीटर, टॉवर ड्रेनडाउन और अन्य चिलर संरक्षण विधियों को अक्सर ठंडी जलवायु में लगाया जाता है।
टॉवर को उपेक्षित स्थिति में संचालित न करें।
ऊष्मा भार के बिना टॉवर को न चलाएं. इसमें बेसिन हीटर और ऊष्मा निशान शामिल किए जा सकते हैं। बेसिन हीटर टॉवर के तल में पानी के तापमान को स्वीकारीय स्तर पर बनाए रखना पड़ता है। ऊष्मा निशान एक प्रतिरोधक तत्व है जो ठंडा होने को रोकने के लिए ठंडी जलवायु में लगाए गए पानी के पाइपों के साथ चलाता है।
फिल पर डिज़ाइन पानी प्रवाह की दर बनाए रखें.
पानी के तापमान को बनाए रखने के लिए चिलर निशान के ऊपर वायु के प्रवाह को संचालित करें। SPX Cooling Technologies: Operating Cooling Towers in Freezing Weather 1.45 MB
कूलिंग टॉवर उद्योग में उपयोग किए जाने वाले कुछ सामान्य शब्द
ड्रिफ्ट (Drift) - पानी की बूंदें जो निकलने वाली हवा के साथ कूलिंग टॉवर से बाहर निकलती हैं। ड्रिफ्ट बूंदें में गंदगी की सांद्रता टॉवर में प्रविष्ट होने पानी के समान होती हैं। ड्रिफ्ट दर को विशिष्ट तौर से बाधक के समान उपकरणों को लगाकर कम किया जाता है, जो ड्रिफ्ट एलिमनेटर्स कहलाते हैं, जिनसे होकर वायु टॉवर की फिल और छिड़काव जोन से होते हुए गुजरनी चाहिए।
ब्लो-आउट (Blow-out) - पानी की बूंदें समान्यतौर पर खुलने वाले वायु इनलेट से हवा के साथ-साथ कूलिंग टॉवर से निकलती हैं। छिड़काव या धुंध के कारण हवा नहीं होने की स्थिति में पानी भी समाप्त हो सकता है। उपकरण जैसे हवा स्क्रीन, लूवर्स, स्प्लैश डिफ्लेक्टर्स और पानी डाइवर्टर्स का उपयोग इन क्षतियों को सीमित करने के लिए किया जाता है।
प्लुम (Plume) - संतृप्त वायु की धारा कूलिंग टॉवर से निकलती है। जल वाष्प के समय प्लुम दिखाई पड़ता है जिसमें कूलर परिवेशी हवा के संपर्क में संघनित होते हैं जैसे किसी ठंडे दिन में किसी व्यक्ति के मुंह से निकलने वाली संतृप्त वायु. कुछ परिस्थितियों के अंतर्गत कूलिंग टॉवर प्लुम उसके चारों ओर धुंध या बर्फ वाला खतरा उत्पन्न हो सकता है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि चिलर प्रक्रिया में वाष्पीकृत पानी "शुद्ध" पानी ड्रिफ्ट बूंदों या हवा वाले इनलेट से निकलने वाले पानी की तुलना में उसका प्रतिशत बहुत कम होता है।
ब्लो-डाउन (Blow-down) - प्रवाहित होने वाले पानी का वह भाग जिसे मिश्रित पानी वाले ठोसों की मात्रा और अन्य अशुद्धियों को स्वीकारीय स्तर पर बनाए रखने के लिए हटाया जाता है यह बात ध्यान देने योग्य है कि विलयन में सांद्रता उच्च टीडीएस (कुल घुले ठोस) के कारण कूलिंग टॉवर के ठंडा होने की कार्यक्षमता अधिक हो जाएगी. हालांकि टीडीएस सांद्रता जितनी अधिक होगी, तो कटाव, जैविक वृद्धि और क्षय का खतरा उतना ही अधिक बढ़ जाएगा.
लीचिंग (Leaching) लकड़ी की संचरना वाले कूलिंग टॉवर से होकर पानी को साफ करने की प्रक्रिया द्वारा लकड़ी रक्षात्मक रसायनों की क्षति.
ध्वनि - कूलिंग टॉवर से निकलने वाली ध्वनि को निर्धारित दूरी और दिशा में सुना (रिकॉर्ड किया गया) की गयी। ध्वनि गिरते वाले पानी, पंखों द्वारा हवा के चलने, आकृति में पंखें द्वारा हवा को चलाने और मोटर्स गियरबॉक्स या ड्राइव बेल्ट्स के प्रभाव के कारण उत्पन्न होती है।
उपागम - यह उपागम ठंडे पानी के तापमान और प्रविष्ट होने वाली हवा वेट बल्प तापमान (twb) के बीच तापमान में अंतर में अंतर है। चूंकि कूलिंग टॉवर्स बाष्पीकरण ठंड के सिद्धांत पर आधारित होते हैं, तो कूलिंग टॉवर की अधिकतम कार्यक्षमता वायु के वेट बल्ब तापमान पर निर्भर करती है। वेट बल्ब तापमान एक प्रकार से तापमान मापने का एक तरीका है जो किसी गैस और किसी वाष्प के मिश्रण के साथ किसी सिस्टम के भौतिक गुणधर्मों को दर्शाता है, आमतौर पर वायु और पानी वाष्प को।
सीमा - सीमा से पानी प्रविष्टि और पानी निकास के बीच तापमान के बीच का अंतर है।
फिल (Fill) - टॉवर में, वायु और पानी को संपर्क सतह और संपर्क समय को बढ़ाने के लिए जोड़ा जाता है। इस प्रकार से वे बेहतर उष्मा छोड़ते हैं। टॉवर की क्षमता भी उन पर निर्भर करती है। इस प्रकार से उपयोग किए जा सकने वाले दो प्रकार के फिल होते हैं:
फिल्म टाइप फिल (Film type fill) पानी को पतली फिल्म में फैलाता है।
स्प्लैश टाइप फिल (Splash type fill) (पानी को तोड़ता है और इसको लंबवत प्रसार को रोकता है)
आग से खतरे
कूलिंग टॉवर्स जिनका निर्माण पूर्ण या आंशिक रूप से दहनशील सामग्री के आधार पर किया जाता है वे भीतरी आग फैलाने में सहायक हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप पर्याप्त रूप से घातक हो सकता है जिसके लिए संपूर्ण दीवार या टॉवर की संरचना को प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती है। इस कारण से, कुछ कोड और मानकराष्ट्रीय फायर संरक्षण संघ (NFPA). NFPA 214, स्टैण्डर्ड ऑन वॉटर-कूलिंग टॉवर्स https://web.archive.org/web/20100617095816/http://www.nfpa.org/aboutthecodes/AboutTheCodes.asp?DocNum=214 17 जून 2010. जिनके लिए दहनशील कूलिंग टॉवर्स की आवश्यकता होगी उनके लिए स्वचालित अग्निशामक सिस्टम उपलब्ध कराए जाएंगे. टॉवर रखरखाव के दौरान टॉवर संरचना में आग भड़क सकती है जब सेल प्रयोग में (जैसे रखरखाव या निर्माण के समय) नहीं हो और विशेष रूप से उत्प्रेरित-ड्राफ्ट प्रकार जिसके कारण टॉवर में अपेक्षाकृत सूखा स्थान मौजूदा रहता है।NFPA 214, स्टैण्डर्ड ऑन वॉटर-कूलिंग टॉवर्स https://web.archive.org/web/20100617095816/http://www.nfpa.org/aboutthecodes/AboutTheCodes.asp?DocNum=214 17 जून 2010 . सेक्शन A1.1
स्थिरता
thumb|right|250px|फेरीब्राइड पॉवर स्टेशन
बहुत बड़ी संरचनाओं होने के नाते, वे वायु क्षति के प्रति अतिसंवेदनशील हैं और अतीत में ऐसी बहुत सी असाधारण विफलताओं का सामना करना पड़ा है। फेरीब्राइड पॉवर स्टेशन (Ferrybridge power station) में, 1 नवम्बर 1965 को स्टेशन वाले स्थान पर मुख्य संरचनात्मक विफलता का सामना करना पड़ा जब कूलिंग टॉवर्स 85मी प्रति घंटे तेज हवाओं के कंपने के कारण नष्ट हो गए। हालांकि कूलिंग टावर्स की संरचनाओं का निर्माण तेज गति से चलने वाली हवाओं का सामना करने के उद्देश्य के लिए किया गया था, जिससे कीको पश्चिमी हवाएं चक्र बनाती हुए टॉवर्स से होती हुई कीपाकार में गुजर सकें. मूल आठ कूलिंग टॉवर्स में तीन टॉवर्स नष्ट हो गए और बाकी पांच बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। आठों टॉवरों का पुनर्निर्माण किया गया और सभी आठों कूलिंग टॉवर्स का निर्माण मौसम प्रतिकूल स्थितियों को सहन करने के लिए मजबूती के साथ किया गया था। उन्नत संरचनात्मक सुधार शामिल करने के लिए इमारत कोड में संशोधन किए गए और संरचनाओं और विन्यास की जांच के लिए हवादार सुरंग परीक्षण लागू किए गए।
इन्हें भी देखें
वास्तुशिल्पीय इंजीनियरी
ठंडा पानी
गहरी झील का ठंडा पानी
वाष्पीकरणीय कूलर
जीवाश्म ईंधन वाला ऊर्जा संयंत्र
HVAC (ऊष्मा, हवादार और एयर कंडीशनिंग)
अंडाकार (गोलाकार) संरचना
यांत्रिकी इंजीनियरी
ऊर्जा स्टेशन
विलो आइसलैंड आपदा
सन्दर्भ
बाह्या लिंक
कूलिंग टॉवर्स: डिजाइन और ऑपरेशन संबंधी
कूलिंग टॉवर क्या है? - कूलिंग टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट
"कूलिंग टॉवर्स" - में आकृतियां शामिल हैं - वर्चुअल न्यूक्लियर टूरिस्ट
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