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राजस्थान के लोकदेवता
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यह सूची राजस्थान के लोकदेवताओं की है।
रामदेव जी (पीर)
रामदेव जी (रामदेव पीर) (1352–1385 ईस्वी; विक्रम संवत 1409–1442) एक प्रसिद्ध हिन्दू लोकदेवता हैं, जिनकी पूजा मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में की जाती है। इनका जन्म 14वीं शताब्दी में राजस्थान के पोखरण क्षेत्र के एक राजपूत परिवार में हुआ था।Pilgrims, Patrons, and Place: Localizing Sanctity in Asian Religions UBC Press 2003 9780774810395 illustrated, revised 347 Ramdev (Ramdeo, Ramde) Pir, a semi-legendary Rajput hero of the end of the fourteenth century who became the religious head of the untouchables in Rajasthan...
रामदेव जी को चमत्कारी शक्तियों वाला संत माना जाता है। उन्होंने अपना जीवन समाज के गरीब, वंचित और पीड़ित लोगों की सेवा में बिताया। राजस्थान में विशेष रूप से मेघवाल समुदाय के लोग उन्हें बड़े श्रद्धा-भाव से पूजते हैं। भारत के कई अन्य समुदाय भी उन्हें अपना इष्टदेव मानते हैं।History goes that five Pirs from Mecca came to test his miraculous powers and after being convinced, paid their homage to him. Since then, he has been venerated by Muslims as Ramshahpir or Ramapir. https://web.archive.org/web/20101205152150/http://www.ramapir.org/ramapir_whoisramdevpir.html 5 December 2010 भक्तों की मान्यता है कि रामदेव भगवान कृष्ण के अवतार थे।History goes that five Pirs from Mecca came to test his miraculous powers and after being convinced, paid their homage to him. Since then, he has been venerated by Muslims as Ramshahpir or Ramapir. https://web.archive.org/web/20101205152150/http://www.ramapir.org/ramapir_whoisramdevpir.html 5 December 2010 रामदेव जी के मन्दिर स्थल को देवरा कहा जाता है। राजस्थान में रामदेवरा नामक स्थान पर प्रतिवर्ष रामदेव जंयती पर मेला लगता है।जून 2025
गुसांईजी
गुसांईजी हिन्दुओं के देवता हैं। इनका एक प्रासिद्ध मंदिर नागौर जिले के जुन्जाला गाँव में स्थित है। यद्यपि गुसाईंजी हिन्दुओं के देवता हैं परन्तु मुसलमान भी इनको मानते हैं।https://hindi.webdunia.com/religious-journey-articles/junjala-gusainji-mharaj-in-rajasthan-115070300050_1.html जुंजाला धाम एक चमत्कारिक स्थान, जानकर रह जाएंगे हैरान Junjala Gusainji Mharaj in Rajasthan जोशी 'शतायु' अनिरुद्ध hindi.webdunia.com hi 2022-10-15
गुरु जम्भेश्वर
गुरु जम्भेश्वर का जन्म नागौर जिले के पीपासर ग्राम में विक्रम सम्वत १५०८ में हुआ था।Singh K. S. Rajasthan 1998 Popular Prakashan 9788171547661 https://books.google.co.in/books?id=iKsqzB4P1ioC&pg=PA189&dq=bishnoi&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiIr_bhkvjbAhUMipQKHbR4BHQQ6AEITjAH#v=onepage&q=bishnoi&f=false 29 जून 2018 en
गोगाजी
गोगाजी का जन्म राजस्थान के ददरेवा (चुरू) चौहान वंश के राजपूत शासक जैबर (जेवरसिंह) की पत्नी बाछल के गर्भ से गुरु गोरखनाथ के वरदान से भादो सुदी नवमी को हुआ था।हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है राजस्थान का वीर गोगाजी मंदिर https://hindi.webdunia.com/religious-place/jaharveer-baba-temple-118090300067_1.html 20 मई 2017 एकता व सांप्रदायिक सद़भावना का प्रतीक धार्मिक पर्व गोगामेडी (राजस्थान) में गोगाजी की समाधि स्थल पर मेला लाखों भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। लोकपूज्य देवता गोगाजी (जाहरवीर गोगाजी) को लोग गोगाजी चौहान, गुग्गा, जाहिर वीर, जाहर पीरजानें जाहर पीर के नाम से मुस्लिम समाज क्यों करता है गोगाजी की पूजा, पढ़ें लोकदेवता का पूरा इतिहास https://www.sbprajasthan.com/2020/08/blog-post_13.html 13 अगस्त 2020 मई 2026 InternetArchiveBot व गोगा पीर के नामों से भी पुकारते है।लोकपूज्य देवता गोगाजी के जीवन का संक्षिप्त परिचय https://artandculture.rajasthan.gov.in/content/raj/art-and-culture/en/departments/rajasthan-heritage-protection-promotion-authority/heritage-projects/completed/gogaji-panorama.html rajasthan.gov.in 20 मई 2022
जीणमाता
यह मंदिर जयपुर से करीब 115 किमी दूर सीकर जिले में अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है।इस माता के सामने मुगल बादशाह औरंगजेब भी हो गया चारों खाने चित्त https://www.amarujala.com/jaipur/jeen-mata-in-sikar 29 मार्च 2017 जयपुर बीकानेर मार्ग पर सीकर से 11 कि॰मी॰ दूर गोरिया से जीण माता मंदिर के लिए मार्ग है। सीकर जीण माता की अष्टभुजी प्रतिमा है। जीण माता का वास्तविक नाम जयंती माता बताया जाता है।जीण माता मन्दिर https://www.thedivineindia.com/hi/jeen-mata-temple.html 20 मई 2022 30 जून 2022 https://web.archive.org/web/20220630173838/https://www.thedivineindia.com/hi/jeen-mata-temple.html dead माना जाता है कि माता दुर्गा की अवतार है।अनोखे चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है शेखावाटी का माता का ये मंदिर, यहां से काेर्इ नहीं लाैटता खाली हाथ https://www.patrika.com/jaipur-news/jeen-mata-ka-mandir-jeenmata-temple-jeen-mata-story-2541477/ 24 मार्च 2018 जीणमाता का जन्म धांधू (चूरू) में चौहान राजपूत कुल में हुआ था। जीण और हर्ष भाईं-बहिन थे।जीणमाता – सीकर (राजस्थान) https://www.careertutorial.in/study-material/rajasthan-gk/jeenmata/ 20 मई 2022
शाकम्भरी माता
मां शाकम्भरी का पहला प्रमुख शक्तिपीठ राजस्थान से सीकर जिले में उदयपुर वाटी के पास स्थित है। इसे सकराय माताजी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, महाभारत काल में पांडव पाप (अपने भाईयों और परिजनों के वध) से मुक्ति पाने के लिए कुछ समय के लिए अरावली की पहाड़ियों में रुके थे। इस दौरान युधिष्ठिर ने पूजा-अर्चना के लिए मां शर्करा की स्थापना की थी। इसी को अब शाकम्भरी तीर्थ के नाम से जाना जाता है।यह है माता शाकम्भरी का पहला शक्तिपीठ, जानें इस मंदिर के बारे में https://www.jagran.com/spiritual/mukhye-dharmik-sthal-maa-shakhambari-shkatipeeth-know-about-first-shaktipeeth-of-mata-shakambhari-21310343.html 27 जनवरी 2021मार्कण्डेय पुराण में बताया गया है की 10 जनवरी, शुक्रवार को पौष मास की पूर्णिमा को माँ शाकम्भरी देवी का जन्म दिन मनाया जाता है।शाकम्भरी देवी के 3 शक्तिपीठ https://vachanbaddh.com/%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-3-%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%80/ 19 अक्टूबर 2021 27 मई 2022 https://web.archive.org/web/20220527115100/https://vachanbaddh.com/%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-3-%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%80/ dead देवी शाकम्भरी को शाक सब्जियों और वनस्पतियों की देवी कहा गया है।10 जनवरी से शाकम्भरी उत्सव आरंभ, जानिए कौन हैं मां शाकम्भरी, पूजा विधि और महत्व https://www.amarujala.com/spirituality/festivals/shakambhari-navratri-2022-festival-begins-from-10-january-puja-vidhi-and-importance 8 जनवरी 2022नवरात्रो के समय यहाँ पे बहुत लोग आते हैं।
सीमल माता
सीमल माता या खीमल माता — बसन्तगढ़ (सिरोही)।सिरोही जिला जीके हिंदी में https://www.gkabhi.in/2018/09/10/sirohi-district-gk-in-hindi/ 10 सितंबर 2018 1 फ़रवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190201223031/http://www.gkabhi.in/2018/09/10/sirohi-district-gk-in-hindi/ dead राजस्थान शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख या लिखित प्रमाण खीमल माता का मंदिर (बसंतगढ़, सिरोही) पर उत्कीर्ण शिलालेख में ‘राजस्थानादित्यं’ के रूप में मिलता है यह शिलालेख विक्रम संवत् 682 का है।
हर्षनाथ जी
यह शिव मंदिर, 973 सीई के एक शिलालेख के अनुसार, शिव तपस्वी भवराक्ता द्वारा चहमान राजा विग्रहराज प्रथम के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। यह विभिन्न मंदिरों से घिरा हुआ है जो खंडहर में पड़े हैं।हर्षनाथ मंदिर https://asijaipurcircle.nic.in/Harsh%20-%20Harshnath%20Temple.html# 20 मई 2022 मूल मंदिर को बाद में 1679 में मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा नष्ट कर दिया गया था। 1718 में राव शिवसिंह ने पुराने मंदिर के खंडहरों का उपयोग करके पुराने मंदिर से सटे एक नए मंदिर का निर्माण किया। सन् 1834 ईसवीं में सर्जेंट ई डीन.ने हर्षनाथ के महत्वपूर्ण शिलालेखों का पता लगाया था।हर्षनाथ मंदिर सीकर राजस्थान – जीणमाता मंदिर सीकर राजस्थान https://alvitrips.com/%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D/ 23 अक्टूबर 2019 21 मई 2022 https://web.archive.org/web/20220521181503/https://alvitrips.com/%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D/ dead
केसरिया जी
उदयपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर गांव धूलेव में स्थित प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव का मंदिर केसरियाजी या केसरियानाथ के नाम से भी जाना जाता है।केसरिया जी के ऋषभदेव https://www.jagran.com/spiritual/mukhye-dharmik-sthal-11415.html 4 अप्रैल 2013यहाँ प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ‘आदिनाथ’ या ‘ऋषभदेव’ की काले रंग की प्रतिमा स्थापित है। यहाँ के आदिवासियों के लिए ये केसरियाजी कालिया बाबा के नाम से प्रसिद्ध व पूजित हैं।केसरिया जी राजस्थान {Kesariya ji GK} राजस्थान GK अध्ययन नोट्स https://dsguruji.com/kesariya-ji-gk/ 20 मई 2022
मल्लीनाथ जी
मल्लीनाथ (प्राकृत मल्लीनाथ, "चमेली या आसन के भगवान") जैन धर्म में वर्तमान अवसर्पी युग के 19वें तीर्थंकर "फोर्ड-मेकर" थे। जैन ग्रंथों से संकेत मिलता है कि मल्लिथ का जन्म मिथिला में इक्ष्वाकु वंश में राजा कुंभ और रानी प्रज्ञावती के घर हुआ था। तीर्थंकर मल्लिनाथ 56,000 से अधिक वर्षों तक जीवित रहे, जिनमें से 54,800 साल कम छह दिन, सर्वज्ञता (केवला ज्ञान) के साथ थे।विजय के. जैन Acarya Samantabhadra’s Svayambhustotra: Adoration of The Twenty-four Tirthankara https://books.google.co.in/books?id=xI8HBgAAQBAJ&newbks=0&hl=en&source=newbks_fb&redir_esc=y 1 जनवरी 2015
शिला देवी
शिला देवी दुर्गा की प्रसिद्ध मूर्ति है। उनका मंदिर जयपुर में आमेर किले में स्थित है। मूर्ति को 1604 ईस्वी में जेसोर (अब बांग्लादेश में) से एम्बर के राजा मान सिंह प्रथम द्वारा लाया गया था।नोएल वॉटसन पॉल शेलिंगर Asia and Oceania International Dictionary of Historic Places 1994 टेलर और फ्रांसिस https://www.google.co.in/books/edition/Asia_and_Oceania/voerPYsAB5wC?hl=en 12 नवंबर 2012 शीत नवरात्रि के छठे दिन इस देवी की विशेष पूजा की जाती है। जयपुर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग शिला देवी को प्रसाद चढ़ाने के लिए इकट्ठा होते हैं। शिला माता काली माँ का रूप हैं और कछवाहा राजवंश की कुलदेवी रही हैं और इन्ही के आशीर्वाद से आमेर के राजा मानसिंह ने 80 से अधिक युद्धों में विजय पाई थी।आमेर की शिला माता का इतिहास https://hindihaat.com/2021/09/amer-ki-shila-mata-ki-story-in-hindi.html 20 मई 2022 6 अप्रैल 2023 https://web.archive.org/web/20230406063858/https://hindihaat.com/2021/09/amer-ki-shila-mata-ki-story-in-hindi.html dead
कैला देवी -
करौली- कैलागांव
नदी- कालीसिल नदी
मेला - चैत्र शुक्ल अष्टमी
मेले का उपनाम - लखी मेला
इस देवी के मंदिर के सामने संत बोहरा की छतरी बनी हुई हैं, जहां पुश्तैनी बीमारी का इलाज झाड़ फूंक कर किया जाता है।कुमार प्रवीन देवी सविता देवी कृष्णा . पंकज 2023-02-01 प्रारंभिक काल से मध्य काल तक स्त्रियों की दशा http://dx.doi.org/10.22271/allresearch.2023.v9.i2a.10551 International Journal of Applied Research 9 2 16–20 10.22271/allresearch.2023.v9.i2a.10551 2394-7500
गीत- लांगुरिया, जोगणिया, घुटकण
कुलदेवी- यादव समाज में जादौन शाखा की कुलदेवी
आराध्यदेवी - करौली के मीणाओ
पूजा- नवदुर्गा में अंजनी माता के अवतार के रूप में की जाती हैं।
इस देवी के मंदिर में कोई बलि नहीं दी जाती हैं।
ज्वाला देवी
जोबनेर
कल्ला देवी
सिवाना
तेजा जी
जन्म-खरनाल नागौर इनकी मृत्यू सर्प दंश से सुरसुरा (अजमेर) नामक स्थान पर हुई। परबतसर (नागौर) में भाद्रपद शुक्ल दशमी को इनका मेला लगता है।Kamvara Tejaji : tarja rekat Fulchand Bookseller, 19 https://books.google.co.in/books?id=sEotAQAAIAAJ&q=tejaji&dq=tejaji&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiQiYCXkvjbAhVWbysKHfdKC6oQ6AEILjAB 29 जून 2018 hi
खैरतल जी
अलवर
करणी माता
देशनोक (बीकानेर)
चूहो की देवी
जन्म: 1387 ई. में जोधपुर के सुआप गांव में।
पिता: मेहा जी चारण।
माता: देवल।
पति: देपाजी बीठू।
बचपन का नाम: रिद्धी बाई
मंदिर:
देशनोक, बीकानेर में स्थित है।
मेला:
चैत्र तथा आश्विन के नवरात्रों में लगता है।
कुल देवी:
करणी माता बीकानेर के राठोड़ों की कुल देवी हैं।
अन्य नाम:
इन्हें चूहों की देवी के नाम से भी जाना जाता है।
इनके चूहों को “काबा” कहते हैं और चारण जाति के लोग इन्हें अपना पूर्वज मानते हैं।
पुजारी:
इनके पुजारी को बारिदारजी कहते हैं।
आराध्य देवी:
तेमड़ा जी इनकी आराध्य देवी थीं।
करणी माता के मंदिर के पास तेमड़ा माता का मंदिर भी है।
प्रतिक चिन्ह:
इनका प्रतीक चिन्ह चील पक्षी है।
निर्माण कार्य:
मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव करणी माता ने रखी।
आरती:
इनकी आरती को चिरजा कहते हैं, जो दो प्रकार की होती है:
संघाउ (शांति के समय)
घड़ाउ (विपत्ति के समय)
राव बिका:
राव बिका के करणी माता के आशीर्वाद से जांगल प्रदेश जीते।
मंदिर का निर्माण:
करणी माता के मंदिर का निर्माण कार्य राव बिका ने शुरू किया।
इसके बाद कर्णसिंह और अंत में सूरतसिंह ने इसे पूर्ण किया।
आधुनिक मंदिर का निर्माण महाराजा गंगासिंह ने करवाया।
पहली यात्रा:
करणी माता सर्वप्रथम नेहड़ नामक स्थान पर आई थीं।
151 वर्ष (1538) में धिनेरू की तलाई (बीकानेर) में प्राण त्याग दिए।
सन्दर्भ
33em
श्रेणी:राजस्थान के लोक देवता