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खैरा रोग
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खैरा रोग (Khaira disease) धान में लगने वाला एक रोग है। इसमे पत्तियो पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते हैं जो बाद में कत्थई रंग के हो जाते है। पौधा बौना रह जाता है और व्यात कम होती है। प्रभावित पौधो की जडे भी कत्थई रंग की हो जाती है।
यह रोग मिट्टी में जस्ते की कमी के कारण होता है।
यह रोग उत्तर प्रदेश की तराई में धान की खेती के लिए सन् 1955 से ही एक समस्या बना हुआ है। उत्तर भारत के अन्य तराई क्षेत्रों में भी यह बीमारी पाई जाती है। अब यह रोग भारत के प्रदेशो जैसे आन्ध्र प्रदेश, पंजाब, एवं बंगाल आदि में पाया जाता है।
== नियंत्रण ==
इसकी रोकथाम के लिए फसल पर ५ कि०ग्रा० जिंक सल्फेट २.५ कि०ग्रा० बुझे चूने के साथ १००० लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टर (क्रमशः१००ग्राम एवं ५०ग्राम प्रति नाली) छिड़काव करना चाहिए। पौधशाला में उपरोक्त के दो छिड़काव बुवाई के १० तथा २० दिन बाद करने चाहिए। बुझा हुआ चूना उपलब्ध न होने पर २ प्रतिशत यूरिया तथा जिक सल्फेट का छिड़काव करना चाहिए।