Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

मरङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा मुखपृष्ठ मुखपृष्ठ अश्विनी कुमार पंकज विकल्प प्रकाशन, दिल्ली 2015, लायब्रेरी संस्करण हिंदी भारत आदिवासी, साहित्य, झारखंड आंदोलन जीवनी 168 978-93-82695-31-8 जयपाल सिंह मुंडा की एकमात्र जीवनी मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा जयपाल सिंह को नए सिरे से पढ़ने की जरूरत https://www.bhaskar.com/news/JHA-RAN-HMU-MAT-latest-ranchi-news-031522-3438634-NOR.html 9 जुलाई 2017 9 जुलाई 2017 अश्विनी कुमार पंकज द्वारा लिखित भारत में आदिवासी राजनीति के संस्थापक पैरोकार, झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े नेता और भारतीय हॉकी के पहले कप्तान जयपाल सिंह मुंडाhttp://www.stick2hockey.com/Article/Story-of-our-first-Olympic-captain--Jaipal-Singh/10264.html संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2017 https://web.archive.org/web/20170912030234/http://www.stick2hockey.com/Article/Story-of-our-first-Olympic-captain--Jaipal-Singh/10264.html 12 सितंबर 2017 dead की हिंदी में प्रकाशित पहली जीवनी है। 2015 में प्रकाशित यह जीवनी जयपाल सिंह मुंडा के राजनीतिक योगदान और उनके जीवन के विविध पहलुओं को तथ्यगत रूप से सामने रखती है। सारांश कौन थे जयपाल सिंह मुंडा? इनका भारतीय स्वतंत्रता और नये भारत के निर्माण में राजनीतिक-बौद्धिक योगदान क्या था?India After Gandhi: The History of the World's Largest Democracy https://archive.org/details/indiaaftergandhi0000rama_g6k5 Ramachandra Guha 2008 978-006095858-9 वे जिस आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उसकी आकांक्षाएं क्या थीं? इस बारे में आजादी के सत्तर साल बाद भी इतिहास चुप है। एक तरफ गांधी-नेहरू, जिन्ना, अंबेडकर सहित अनके स्वतंत्रता सेनानियों पर सैंकड़ों किताबें हैं, नाटक और फिल्में हैं और अभी भी इन सब पर हर दिन एक नयी पुस्तक लिखी जा रही है, जयपाल सिंह मुंडा पर एक भी किताब नहीं है। वे कौन-से कारण हैं जिनकी वजह से 1928 की ओलंपिक हॉकी में कप्तानी करते हुए पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले, देश के लिए आईसीएस का त्याग करने वाले और आदिवासियों के इस सबसे बड़े नेता की इस कदर उपेक्षा की गयी? http://www.mainstreamweekly.net/article3254.html संग्रहीत प्रति 9 जुलाई 2017 https://web.archive.org/web/20170624220234/http://mainstreamweekly.net/article3254.html 24 जून 2017 dead क्यों झारखंड राज्य की सरकारों द्वारा भी अलग झारखंड राज्य के इस प्रणेता को याद नहीं किया जा रहा है? पहले ओलंपियन को भूल गया झारखंड http://inextlive.jagran.com/unforgettable-hero-201207280044 9 जुलाई 2017 9 जुलाई 2017 यह पुस्तक इन्हीं सब सवालों का विस्तार से और प्रामाणिक ढंग से जवाब देती है। जयपाल सिंह मुंडा (1903-1970) का वास्तविक नाम ईश्वरदास जयपाल सिंह है। जिन्हें आदर से झारखंड के आदिवासी उन्हें ‘मरङ गोमके’ (सर्वोच्च अगुआ/नेता) कहते हैं। यह पुस्तक बताती है कि झारखंड अलग राज्य का सपना भले आंशिक रूप से उनकी मृत्यु के 30 साल बाद पूरा हुआ लेकिन जयपाल सिंह मुंडा ने जिस आदिवासी दर्शन और राजनीति को, झारखंड आंदोलन को अपने वक्तव्यों, सांगठनिक कौशल और रणनीतियों से भारतीय राजनीति और समाज में स्थापित किया, वह भारतीय इतिहास और राजनीति में अप्रतिम है। एक हॉकी खिलाड़ी के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हॉकी में उनके अभूतपूर्व योगदान पर भी यह पुस्तक बखूबी प्रकाश डालती है। संस्करण इस पुस्तक का पहला संस्करण विकल्प प्रकाशन, दिल्ली से 2015 में प्रकाशित हुआ दूसरा संस्करण प्रभात प्रकाशन, दिल्ली से शीघ्र प्रकाश्य इन्हें भी देखें जयपाल सिंह मुंडा अश्विनी कुमार पंकज सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दी साहित्य श्रेणी:आदिवासी साहित्य श्रेणी:पुस्तकें