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भारत में पारसी धर्म
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right|thumb|300px|मुम्बई के पारसी, सन १८७३ में
पारसी धर्म (जरथुस्त्र धर्म) विश्व का अत्यन्त प्राचीन धर्म है। इस धर्म की स्थापना सन्त ज़रथुष्ट्र ने की थी।https://navbharattimes.indiatimes.com/world/asian-countries/how-iran-persecutes-its-oldest-religion/articleshow/54211459.cms क्या शिया मुसलमान नहीं पारसी धर्म के अनुयायी हैं? इस्लाम के आने के पूर्व प्राचीन ईरान में ज़रथुष्ट्र धर्म का ही प्रचलन था। सातवीं शताब्दी में अरबों ने ईरान को पराजित कर लिया। तब वहाँ के ज़रथुष्ट्र धर्मावलम्बियों ने इस्लाम की भाईचारा निति और रहन सहन को देखते हुए इस्लाम कुबूल कर लिया था। ऐसी मान्यता है कि कुछ ईरानियों ने इस्लाम नहीं स्वीकार किया और वे एक नाव पर सवार होकर भारत भाग आये और यहाँ गुजरात तट पर नवसारी में आकर बस गये। वर्तमान समय में भारत में उनकी संख्या लगभग एक लाख है, जिसका 70% मुम्बई में रहते हैं।
ईरान और दूसरे देशों में जब पारसी लोग प्रताड़ित किए जा रहे थे, भारत में सबके लिए सद्भाव का माहौल था। यही कारण है कि आज विश्व में पारसियों की सबसे अधिक संख्या भारत में रहती है। इतना ही नहीं, पारसियों ने भी खुलकर भारत की सेवा की और भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन, अर्थव्यवस्था, मनोरंजन, सशस्त्र सेनाओं तथा अन्यान्य क्षेत्रों में सर्वत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत में ये लोग कब आये, इसके आधार पर इन्हें 'पारसी' या 'इरानी' कहते हैं।
कहा जाता है किमुसलमानों के अत्याचार से त्रस्त होकर पारसियों का पहला समूह लगभग ब
766 ईसवी में दीव (दमण और दीव) पहुंचा। दीव से वे गुजरात में बस गए। गुजरात से कुछ लोग मुंबई में बस गए। धार्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से पारसी धर्म व समाज भारतीयों के निकट है। पारसी 9वीं-10वीं सदी में भारत आए, ऐसे ऐतिहासिक प्रमाण हैं। भारत में प्रथम पारसी बस्ती का प्रमाण संजाण (सूरत के निकट) का अग्नि स्तंभ है-जो अग्निपूजक पारसीधर्मियों ने बनाया।अब पूरी दुनिया में पारसियों की कुल आबादी संभवतः 1,00,000 से अधिक नहीं है। ईरान में कुछ हजार पारसियों को छोड़कर लगभग सभी पारसी अब भारत में ही रहते हैं और उनमें से भी अधिकांश अब मुंबई में हैं।
पहले पारसी लोग कृषि में व बाद में व्यापार व उद्योग में लगे। भारतीय जहाज निर्माण को इन्होंने पुनर्जीवित कर योरपियों से भारत को सौंपा। पारसियों द्वारा निर्मित जहाज ब्रिटिश नौसेना खरीदती थी (तब तक भाप के इंजन न थे)। फ्रामजी माणेकजी, माणेकजी बम्मनजी आदि ये पारसी नाम इस संबंध में प्रसिद्ध हैं। अंगरेज शासन के साथ इन्होंने संबंध सामान्य रखे परंतु अपनी भारतीय मान्यताओं व स्वाभिमान को अक्षत रखकर। उन्होंने भारत को अपना देश मानकर भारतीय स्वतंत्रता का समर्थन किया। https://hindi.webdunia.com/religious-article/parsi-religion-115081800013_1.html जानिए पारसी धर्म कैसे आया भारत में... 4 मई 2020 https://web.archive.org/web/20190704121214/http://hindi.webdunia.com/religious-article/parsi-religion-115081800013_1.html 4 जुलाई 2019 dead
इन्हें भी देखें
पारसी धर्म
पारसी
फ़ारस
सन्दर्भ
श्रेणी:भारत के धर्म