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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कुन्थुनाथ

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सत्रहवें जैन तीर्थंकर File:श्री कुंथुनाथ तीर्थंकर.jpg कुन्थुनाथ भगवान की प्रतिमा, दमोह, मध्यप्रदेश कुन्थुनाथ जिन शांतिनाथ अहिंसा इक्ष्वाकु राजा शूर रानी श्रीदेवी हस्तिनापुर सम्मेत शिखर स्वर्ण बकरा ३५ धनुष (१०५ मीटर) ९५,००० वर्ष गन्धर्व बाला अरनाथ कुन्थुनाथ जी जैनधर्म के सत्रहवें तीर्थंकर हैं। इनका जन्म हस्तिनापुर में हुआ था। पिता का नाम शूरसेन (सूर्य) और माता का नाम श्रीकांता (श्री देवी) था। बिहार में पारसनाथ पर्वत के सम्मेत शिखर पर इन्होंने मोक्ष प्राप्त किया। प्रभु कुंथुनाथ जी जैन धर्म के 17वें तीर्थंकर हैं। प्रभु कुंथुनाथ जी का जन्म वैशाख कृष्ण प्रतिपदा को हस्तिनापुर में हुआ था। उनके पिता का नाम शूरसेन और माता का नाम श्री कांता था। प्रभु की देह का रंग स्वर्ण के समान था , प्रभु थुनाथ जी का प्रतीक बक कुंरा था । प्रभु शांतीनाथ जी के बाद प्रभु कुंथुनाथ जी दुसरे ऐसे तीर्थंकर थे जो तीर्थंकर होने के साथ - साथ उसी जन्म में चक्र भी प्रभु कुंथुनाथ जी जैन धर्म में वर्णित 12 चक्रवर्तियो में से 6 ठें चक्र थे। प्रभु कुंथुनाथ जी की आयु 95,000 वर्ष थी और प्रभु की देह का आकार 35 धनेश्वर का था। प्रभु कुंथुनाथ जी ने वैशाख शुक्ल प्रतिपदा के दिन दीक्षा ग्रहण की तथा 16 वर्ष तक कठोर साधना की। 16 वर्षों के प्रभु को चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन निर्मल कैवलय ज्ञान की प्राप्ति हो गई, इसके बाद भी प्रभु ने चार तीर्थ की स्थापना और स्वयं तीर्थंकर कहलाये। प्रभु ने सत्य, अहिंसा, आचार्य, अपरिग्रह का चुर्तयाम धर्म का उपदेश दिया। प्रभु का संघ बहुत विशाल था, प्रभु के संघ में 35 गणधर थे जिनमे से स्वयंभू नाम के गणधर प्रथम थे। प्रभु के यक्ष का नाम गन्धर्व तथा यक्षिणी का नाम बाला (जयदेवी) था। प्रभु ने अपनी आयुष पूर्ण कर वैशाख शुक्ल प्रतिपदा के दिन अपने समस्त कर्मों का क्षय कर सम्मेद शिखरजी से निर्वाण प्राप्त किया। von Glasenapp 1999 308Forlong 1897 14Tukol 1980 31 इन्हें भी देखें जैन धर्म में भगवान जैन ब्रह्माण्ड विज्ञान सन्दर्भ श्रेणी:जैन धर्म श्रेणी:तीर्थंकर कुंतुनाथ जैन मंदिर का निर्माण महाराणा कुम्भा द्वारा देलवाड़ा सिरोही राजस्थान में करवाया गया था