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सोवियत संघ का इतिहास
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सोवियत संघ (यूएसएसआर) का इतिहास (1922–1991) रूसी बोल्शेविक क्रांति के आदर्शों से आरंभ हुआ और आर्थिक पतन तथा राजनीतिक विघटन के बीच इसके अन्त तक पहुँचा। रूसी गृहयुद्ध के पश्चात 1922 में स्थापित यह संघ, कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में शीघ्र ही एकदलीय राज्य में परिवर्तित हो गया। लेनिन के मार्गदर्शन में इसके प्रारंभिक वर्षों में समाजवादी नीतियाँ अपनाई गईं और नई आर्थिक नीति (एनईपी) लागू की गई, जिसने बाजार-उन्मुख सुधारों को प्रोत्साहित किया।
1920 के दशक के उत्तरार्ध में जोसेफ़ स्टालिन के उदय ने गहन केंद्रीकरण और अधिनायकवाद का युग आरंभ किया। स्टालिन के शासनकाल में कृषि का जबरन सामूहिकीकरण, तीव्र औद्योगीकरण और महान शुद्धिकरण अभियान चलाया गया, जिसमें राज्य के कथित शत्रुओं का निष्पादन किया गया। सोवियत संघ उस समय चार प्रमुख मित्र देशों में से एक था, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और चीन शामिल थे।डोएनेके जस्टस डी. स्टोलर मार्क ए. Debating Franklin D. Roosevelt's foreign policies, 1933–1945 https://books.google.com/books?id=xdMF9rX6mX8C&pg=PA62 2005 रोवमैन एंड लिटिलफील्ड. 0-8476-9416-X द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र देशों की विजय में सोवियत संघ ने निर्णायक भूमिका निभाई, किंतु इसके लिए उसे भारी मानवीय क्षति भी उठानी पड़ी, जिसमें लाखों सोवियत नागरिकों की मृत्यु युद्ध में हुई।
शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ विश्व की दो प्रमुख महाशक्तियों में से एक के रूप में उभरा और संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी गुट के विरोध में पूर्वी गुट का नेतृत्व किया। इस काल में सोवियत संघ ने हथियारों की होड़, अंतरिक्ष प्रतियोगिताएँ और विश्वभर में छद्म युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्टालिन के बाद के नेतृत्व, विशेषकर निकिता ख़्रुश्चेव के समय, ने स्टालिनवाद-विरोधी प्रक्रिया आरंभ की, जिससे उदारीकरण और अपेक्षाकृत खुलेपन का युग आया, जिसे ख्रुश्चेव का “थॉ” युग कहा जाता है।
हालाँकि, लियोनिद ब्रेझ़नेव के नेतृत्व में आया बाद का युग, जिसे “ठहराव का युग” कहा गया, आर्थिक मंदी, राजनीतिक भ्रष्टाचार और कठोर केंद्रीकृत शासन से चिह्नित था। महाशक्ति की स्थिति को बनाए रखने के प्रयासों के बावजूद, सोवियत संघ की केंद्रीकृत संरचना, तकनीकी पिछड़ापन और प्रशासनिक अक्षमताएँ अर्थव्यवस्था को लगातार संघर्षरत बनाती रहीं। भारी सैन्य व्यय और पूर्वी गुट के समर्थन का बोझ अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालता रहा।
1980 के दशक में मिखाइल गोर्बाचेव ने ग्लास्नोस्त (खुलेपन) और पेरेस्त्रोइका (पुनर्गठन) की नीतियों के माध्यम से सोवियत व्यवस्था को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, लेकिन इसके विपरीत इन नीतियों ने व्यवस्था के विघटन की गति को तेज़ किया। सोवियत गणराज्यों में राष्ट्रवादी आंदोलनों ने बल पकड़ा और कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण कमजोर पड़ गया। अगस्त 1991 में गोर्बाचेव के खिलाफ कट्टरपंथी कम्युनिस्टों द्वारा किया गया असफल तख्तापलट सोवियत संघ के पतन को आगे बढ़ाने वाला निर्णायक कदम साबित हुआ। इसके परिणामस्वरूप सोवियत संघ औपचारिक रूप से 26 दिसंबर 1991 को भंग हो गया, जिससे लगभग सात दशकों का सोवियत शासन समाप्त हुआ। इसकी कानूनी उत्तराधिकारिता रूसी संघ को प्राप्त हुई।
सोवियत संघ की विरासत जटिल और द्विपक्षीय है। इसमें महत्वपूर्ण औद्योगिक और वैज्ञानिक उपलब्धियाँ, सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक प्रभाव और वैश्विक राजनीति में भूमिका शामिल हैं, वहीं दमन, आर्थिक अक्षमताएँ और राजनीतिक एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का दमन भी इसके इतिहास का अभिन्न हिस्सा हैं।
स्थापना (1917-1927)
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व्लादिमीर लेनिन, सोवियत संघ के संस्थापक और बोल्शेविक पार्टी के नेता।
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लियोन त्रोत्स्की, लाल सेना के संस्थापक और अक्टूबर क्रांति के एक प्रमुख व्यक्ति।
रूसी साम्राज्य में क्रांतिकारी गतिविधियों की शुरुआत 1905 की रूसी क्रांति से हुई। 1905 की क्रांति के परिणामस्वरूप 1906 में संसद, स्टेट ड्यूमा, की स्थापना की गई, किंतु सम्राट निकोलस द्वितीय ने निरंकुश राजशाही से संवैधानिक राजशाही की ओर बढ़ने के प्रयासों का विरोध किया। सामाजिक अशांति जारी रही और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सैन्य पराजय तथा प्रमुख शहरों में खाद्य संकट ने इसे और बढ़ा दिया।
8 मार्च 1917 को पेट्रोग्राड में शांति और रोटी की मांग को लेकर हुए स्वतःस्फूर्त जन प्रदर्शन ने फरवरी क्रांति की राह प्रशस्त की और निकोलस द्वितीय तथा शाही सरकार का पतन सुनिश्चित किया।Mccauley 2014 83 ज़ारशाही निरंकुशता की जगह सामाजिक-लोकतांत्रिक रूसी अंतरिम सरकार ने ले ली, जिसका उद्देश्य रूसी संविधान सभा के चुनाव कराना और प्रथम विश्व युद्ध में एंटेंटे के पक्ष में लड़ना जारी रखना था। उसी समय, रूसी भाषा में 'सोवियत' के नाम से जानी जाने वाली श्रमिक परिषदें पूरे देश में उभर आईं, और उनमें से सबसे प्रभावशाली, पेट्रोग्राड की श्रमिक एवं सैनिक प्रतिनिधियों की सोवियत ने अंतरिम सरकार के साथ सत्ता साझा की।Mccauley 2014 487ड्यूडनी जॉन सी. कॉन्क्वेस्ट रॉबर्ट पाइप्स रिचर्ड ई. मैककौली मार्टिन https://www.britannica.com/place/Soviet-Union Soviet Union एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका 27 दिसंबर 2022
बोल्शेविक पार्टी की सदस्यता फरवरी 1917 में लगभग 24,000 थी, जो सितंबर 1917 तक बढ़कर 200,000 हो गई।स्टीफन कोहेन, Bukharin and the Bolshevik Revolution: A Political Biography 1888–1938 (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस: लंदन, 1980) p. 46. उस समय लगभग 50,000 श्रमिकों ने सोवियत संघ को सत्ता हस्तांतरण की बोल्शेविक मांग के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया था, हेड माइकल Evgeny Pashukanis: A Critical Reappraisal 12 सितंबर 2007 रूटलेज 978-1-135-30787-5 1–288 https://books.google.com/books?id=PYGNAgAAQBAJ&dq=october+revolution+50+000+workers&pg=PT83 enशुकमैन हेरोल्ड The Blackwell Encyclopedia of the Russian Revolution 5 दिसंबर 1994 जॉन विली एंड संस 978-0-631-19525-2 21 https://books.google.com/books?id=ScabEAAAQBAJ&dq=october+revolution+50+000+workers&pg=PA21 en जिससे बोल्शेविक प्रभाव और विस्तार दोनों को बल मिला।
thumb|लेनिन, ट्रॉट्स्की और कामेनेव अक्टूबर क्रांति की दूसरी वर्षगांठ मना रहे हैं।
व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविकों ने सोवियत संघ और सड़कों पर साम्यवादी क्रांति को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया। उन्होंने "सारी सत्ता सोवियत संघ को" का नारा अपनाया और अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।Read 2005 82–85Service 2005 47–49 7 नवंबर 1917 को बोल्शेविक रेड गार्ड्स ने पेट्रोग्राड के विंटर पैलेस पर धावा बोला, अंतरिम सरकार के नेताओं को गिरफ्तार किया और लेनिन ने घोषणा की कि अब सारी सत्ता सोवियत संघ को हस्तांतरित कर दी गई है।The causes of the October Revolution बीबीसी https://www.bbc.co.uk/bitesize/higher/history/russia/october/revision/4 dead 31 दिसंबर 2022 https://web.archive.org/web/20140805155250/http://www.bbc.co.uk/bitesize/higher/history/russia/october/revision/4 5 अगस्त 2014
इस घटना को बाद में सोवियत ग्रंथों में आधिकारिक रूप से "महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति" के रूप में वर्णित किया गया। अनातोली लुनाचार्स्की, मोइसेई उरित्स्की और दिमित्री मनुइल्स्की जैसे प्रमुख बोल्शेविक नेताओं के अनुसार, पार्टी पर लेनिन का प्रभाव अत्यंत निर्णायक था, लेकिन अक्टूबर विद्रोह की योजना वास्तव में लेव ट्रॉट्स्की के मार्गदर्शन और रणनीति के अनुसार तैयार की गई थी, न कि केवल लेनिन के निर्देशन में,ड्यूशर इसहाक The Prophet: The Life of Leon Trotsky 5 जनवरी 2015 वर्सो बुक्स 978-1-78168-721-5 1283 https://books.google.com/books?id=YGznDwAAQBAJ&q=isaac+deutscher+trotsky+the+prophet en और इसमें कई अन्य क्रांतिकारी नेताओं की सक्रिय भागीदारी भी शामिल थी। अक्टूबर क्रांति के प्रारंभिक चरण, जिसमें पेट्रोग्राड पर हमला शामिल था, अपेक्षाकृत कम मानवीय हताहतों के साथ सम्पन्न हुआ।शुकमैन हेरोल्ड The Blackwell Encyclopedia of the Russian Revolution 5 दिसंबर 1994 जॉन विली एंड संस 978-0-631-19525-2 343 https://books.google.com/books?id=ScabEAAAQBAJ&dq=october+revolution+bloodless&pg=PA343 enबर्गमैन जे The French Revolutionary Tradition in Russian and Soviet Politics, Political Thought, and Culture 2019 ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 978-0-19-884270-5 224 https://books.google.com/books?id=5UKjDwAAQBAJ&dq=october+revolution+bloodless&pg=PA224 enमैकमीकिन शॉन The Russian Revolution: A New History 30 मई 2017 बेसिक बुक्स 978-0-465-09497-4 1–496 https://books.google.com/books?id=aXmZDgAAQBAJ&dq=october+revolution+bloodless&pg=PT155 en
सन्दर्भ
श्रेणी:देशानुसार आधुनिक इतिहास