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411 समाचार
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ब्याज

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ब्याज एक ऐसा शुल्क है जो उधार ली गयी संपत्ति (ऋण) के लिए किया जाता है। यह उधार लिए गए पैसे के लिए अदा की गयी कीमत है, Sullivan arthur Arthur O' Sullivan Steven M. Sheffrin Economics: Principles in action Prentice Hall 2003 Upper Saddle River, New Jersey 07458 261 https://www.savvas.com/index.cfm?locator=PSZu4y&PMDbSiteId=2781&PMDbSolutionId=6724&PMDbSubSolutionId=&PMDbCategoryId=815&PMDbSubCategoryId=24843&PMDbSubjectAreaId=&PMDbProgramId=23061 0-13-063085-3 12 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20161220014709/http://www.pearsonschool.com/index.cfm?locator=PSZ3R9&PMDbSiteId=2781&PMDbSolutionId=6724&PMDbCategoryId=&PMDbProgramId=12881&level=4 20 दिसंबर 2016 live या, जमा धन से अर्जित किया गया पैसा है। Sullivan arthur Arthur O' Sullivan Steven M. Sheffrin Economics: Principles in action Pearson Prentice Hall 2003 Upper Saddle River, New Jersey 07458 506 http://www.pearsonschool.com/index.cfm?locator=PSZ3R9&PMDbSiteId=2781&PMDbSolutionId=6724&PMDbCategoryId=&PMDbProgramId=12881&level=4 0-13-063085-3 12 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20161220014709/http://www.pearsonschool.com/index.cfm?locator=PSZ3R9&PMDbSiteId=2781&PMDbSolutionId=6724&PMDbCategoryId=&PMDbProgramId=12881&level=4 20 दिसंबर 2016 live जिन संपत्तियों को ब्याज के साथ उधार दिया जाता है उनमें शामिल हैं धन, शेयर, किराए पर खरीद द्वारा उपभोक्ता वस्तुएं, प्रमुख संपत्तियां जैसे विमान और कभी-कभी वित्त पट्टा व्यवस्था पर दिया गया पूरा कारखाना. ब्याज की गणना परिसंपत्तियों के मूल्य पर ठीक उसी प्रकार की जाती है जैसे पैसे पर. ब्याज को "पैसे के किराए" के रूप में भी देखा जा सकता है। जब धन को बैंक में जमा किया जाता है, तो जमाकर्ता को आमतौर पर जमा की गई राशि के एक प्रतिशत के हिसाब से ब्याज का भुगतान किया जाता है; जब पैसा उधार लिया जाता है, तो आमतौर पर ऋणदाता को बकाया राशि के एक प्रतिशत के हिसाब से ब्याज का भुगतान किया जाता है। मूल धन का प्रतिशत जो एक शुल्क के रूप में एक निश्चित अवधि में (आमतौर पर एक महीना या वर्ष) अदा किया जाता है, उसे ब्याज दर कहते हैं। ब्याज, ऋणदाता के लिए एक मुआवजा होता है जो उसे, क) मूल धन के जोखिम के लिए दिया जाता है जिसे ऋण जोखिम कहा जाता है; और ख) अन्य उपयोगी निवेश को छोड़ देने के लिए दिया जाता है जिसे उधार दी गयी संपत्ति द्वारा किया जा सकता था। यह छोड़े गए निवेश अवसर लागत के नाम से जाने जाते हैं। ऋणदाता के स्वयं प्रत्यक्ष रूप से इस संपत्ति का उपयोग करने के बजाए, उसे ऋण लेने वाले को दे दिया जाता है। वह उधारकर्ता तब उस संपत्ति को अर्जित करने के लिए आवश्यक प्रयास से आगे निकलकर उसकी उपयोगिता का आनंद लेता है, जबकि ऋणदाता उस विशेषाधिकार के लिए उधारकर्ता द्वारा भुगतान किए गए शुल्क के लाभ का आनंद लेता है। अर्थशास्त्र में, ब्याज को ऋण का मू ब्याज का इतिहास बाइबिल काल के प्राचीन इज़राइल में, निजी ऋण पर ब्याज लगाना मोसेस के कानून के खिलाफ था।http://scripturetext.com/deuteronomy/23-19.htm ड्यूट्रोनॉमि 23:19 तुम्हें अपने भाई को सूद पर उधार नहीं देना चाहिए; पैसे पर सूदखोरी, अन्न की सूदखोरी, किसी भी वस्तु की सूदखोरी जो सूदखोरी पर दी जाती है: 12 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110716022718/http://scripturetext.com/deuteronomy/23-19.htm 16 जुलाई 2011 dead मध्य काल के दौरान, समय को ईश्वर की संपत्ति माना जाता था। इसलिए, ब्याज की मांग करने को परमेश्वर की संपत्ति के साथ व्यापार करने जैसा माना जाता था। जनवरी 2010 इसके अलावा, सेंट थामस एक्विनास, जो कैथोलिक चर्च के प्रमुख थिओलोजियन थे, ने यह तर्क दिया कि ब्याज की मांग करना गलत है क्योंकि यह "दुगने प्रभार" के बराबर है क्योंकि इसमें वस्तु और उसके इस्तेमाल दोनों के लिए प्रभार लगाया जाता है। चर्च ने इसे सूदखोरी के पाप के रूप में संदर्भित किया; इस नियम का कभी भी सख्ती से पालन नहीं किया गया और धीरे-धीरे यह खत्म होने लगा जोकि औद्योगिक क्रांति के दौरान पूरी तरह से गायब हो गया। जनवरी 2008 सूदखोरी को रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा हमेशा ही नकारात्मक दृष्टि से देखा गया। द्वितीय लैटेरन परिषद ने ऋण में दिए गए मूल धन से अधिक किसी भी अतिरिक्त धन की अदायगी की निंदा की, वियेना परिषद ने स्पष्ट रूप से सूदखोरी को निषिद्ध कर दिया और यह घोषणा की कि सूदखोरी के प्रति सहिष्णु कोई भी कानून विधर्मी होगा और प्रथम बुद्धिजीवियों ने ब्याज लेने को धिक्कारा. मध्ययुगीन अर्थव्यवस्था में ऋण पूरी तरह से आवश्यकताओं का परिणाम हुआ करता था (जैसे खराब फसल, कार्यस्थल में आग) और, इन परिस्थितियों में, ब्याज लेने को नैतिक रूप से बुरा माना जाता था। जनवरी 2009इसे नैतिक रूप से संदिग्ध भी माना जाता था, क्योंकि पैसा उधार दे कर कोई माल उत्पादित नहीं किया जाता था और इसलिए इसका कोई मुआवजा नहीं होना चाहिए, जो अन्य गतिविधियों के विपरीत था जिसमें प्रत्यक्ष शारीरिक परिणाम होते थे जैसे कि लोहार का काम या खेती.http://www.uh.edu/engines/epi2547.htm नम्बर. 2547: ब्याज लेना 12 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110503175913/http://www.uh.edu/engines/epi2547.htm 3 मई 2011 dead जैसा की यहूदी नागरिकों को अधिकांश व्यवसायों से स्थानीय शासकों, चर्च और गिल्ड द्वारा बहिष्कृत किया जाता था, वे सामाजिक दृष्टि से हीन समझे जाने वाले सीमांत व्यवसायों जैसे कर और किराया वसूलना और ऋण देने के लिए विवश हो गए। लेनदारों और देनदारों के बीच प्राकृतिक तनाव सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक उपभेदों के साथ जुड़ गए। यहूदियों का वित्तीय उत्पीड़न उन क्षेत्रों में अधिक हुआ जहां वे सबसे अधिक नापसंद किए जाते थे और अगर यहूदी गैर यहूदियों को ऋण देने पर ध्यान केंद्रित करके प्रतिक्रिया व्यक्त करते, तो उनकी अलोकप्रियता - और साथ ही उनपर दबाव - बढ़ जाता. इस प्रकार यहूदी एक दुष्चक्र का मोहरा बन गए। बाइबिल के नियमों के आधार पर ईसाई ब्याज लेने की पूरी तरह से निंदा करते थे और 1179 से ऐसा करने वालों को बहिष्कृत कर दिया जाता था। कैथोलिक स्वेच्छाचारी शासक अक्सर यहूदियों पर सख्त से सख्त वित्तीय बोझ डाला करते थे। यहूदियों ने प्रतिक्रिया स्वरूप एक ऐसे व्यापार को अपनाया जिसमें ईसाई कानून वास्तव में उनके खिलाफ पक्षपात करता था और उन्होंने ऋण देने के घृणित व्यापार में अपनी पहचान बना ली। इस्लामी सभ्यता में भी प्रायः ब्याज को उन्हीं कारणों से बुरा माना जाता है जिनके कारण कैथोलिक चर्च के द्वारा सूदखोरी को निषिद्ध माना जाता है, अधिकांश विद्वान इस बात से सहमत हैं कि कुरान में ब्याज मांगने की स्पष्टतया मनाही है। इसलिए मध्ययुगीन न्यायविदों ने जिम्मेदारी के साथ ऋण प्रदान को प्रोत्साहित करने के लिए कई वित्तीय साधनों को विकासित किया। right|thumb|200px|सूदखोरी के विषय में, ब्रांट के स्ट्लटीफेरा नेविस (शिप ऑफ़ फूल्स) से; अल्ब्रेक्ट डूरर को वूडकट के लिए श्रेय दिया गया पुनर्जागरण युग में, लोगों की बढ़ती गतिशीलता ने वाणिज्य और उद्यमियों के लिए नए लाभपूर्ण कारोबार को शुरू करने के लिए उपयुक्त परिस्थितियों में वृद्धि को संभव बनाया। यह स्पष्ट हो जाने के बाद कि उधार लिया हुआ पैसा अब केवल पूरी तरह से उपभोग के लिए ना होकर उत्पादन के लिए भी था, ब्याज लेने को अब बुरा नहीं माना जाने लगा। दी स्कूल ऑफ़ सालामानका ने उन विभिन्न कारणों को विस्तृत रूप से समझाया है जो ब्याज लेने को उचित ठहराते है: जो व्यक्ति ऋण प्राप्त करता है उसको लाभ होता है और व्यक्ति भुगतान किए गए ब्याज को एक किस्त के रूप में देख सकता है जो ऋण प्रदाता द्वारा उठाये गए जोखिम के लिए चुकाया जाता है। इसमें एक प्रश्न अवसर लागत का भी था, जिसमें ऋण देने वाला पक्ष उधार दिए गए धन के उपयोग की संभावनाएं खो देता था। अंततः और शायद सबसे मूल रूप में स्वयं पैसे को ही माल के रूप में और किसी के धन के इस्तेमाल को किसी ऐसी वस्तु के रूप में देखा जाने लगा जिसके लिए उसे ब्याज के रूप में लाभ प्राप्त होना चाहिए। मार्टिन डे एज्पिलक्युएटा ने भी समय के प्रभाव को माना. अन्य बातों के समान रहने पर, कोई भी व्यक्ति अपनी दी हुई वस्तु को भविष्य के बजाय अभी प्राप्त करना पसंद करेंगा. यह वरीयता अधिक मूल्यों को इंगित करती है। इस सिद्धांत के तहत, ब्याज, उस अवधि के लिए भुगतान है जिसके दौरान ऋण दाता को अपने धन से वंचित रहना पड़ता है। आर्थिक दृष्टि से, मूल धन के मूल्य को ब्याज दर कहते हैं और यह धन आपूर्ति के आपूर्ति और मांग नियमों पर आधारित होती है। ब्याज दर को धन आपूर्ति में हेरफेर के माध्यम से नियंत्रित करने का सबसे पहला प्रयास 1847 में फ्रेंच सेंट्रल बैंक द्वारा किया गया। ब्याज दरों और समाज पर उनके प्रभावों पर पहला औपचारिक अध्ययन उत्कृष्ट आर्थिक चिंतन के उद्भव के दौरान एडम स्मिथ, जेरेमी बेन्थम और मिराब्यु द्वारा आयोजित किया गया था। जनवरी 2009 20वीं, सदी के पूर्वार्ध में, इरविंग फिशर ने ब्याज दरों के आर्थिक विश्लेषण में उस समय एक प्रमुख सफलता हासिल की जब उन्होंने सांकेतिक ब्याज को वास्तविक ब्याज से अलग किया। तब से ब्याज दरों की प्रकृति और प्रभाव पर कई दृष्टिकोण पैदा हुए हैं। 20वीं सदी के उत्तरार्ध ने ब्याज रहित इस्लामिक बैंकिंग और वित्त का उद्भव देखा, यह एक ऐसा आंदोलन था जो मध्ययुगीन काल में विकसित धार्मिक कानून को आधुनिक अर्थव्यवस्था में लागू करने का प्रयास कर रहा था। ईरान, सूडान और पाकिस्तान, सहित कुछ सम्पूर्ण देशों ने अपनी वित्तीय प्रणाली से ब्याज का पूरी तरह उन्मूलन करने के लिए कदम उठाए. जनवरी 2009ब्याज लगाने के बजाय, ब्याज मुक्त ऋण दाता उधार की सेवा प्रदान करने के लिए एक "शुल्क" लगाता है। जैसा कि इस तरह का शुल्क गणितीय रूप से एक ब्याज लगाने के जैसा ही है, इसलिए "ब्याज मुक्त" बैंकिंग और "ब्याज के लिए" बैंकिंग के बीच का अंतर करीब एक ही बात है। साधारण ब्याज साधारण ब्याज की गणना केवल मूल राशि पर, या मूलधन के उस भाग पर जिसे अभी तक अदा नहीं किया गया हो की जाती है।https://hindi.edudose.com/maths/simple-interest-formulas-tricks/ साधारण ब्याज फार्मूला और ट्रिक उदाहरण सहित - एडुडोज हिन्दी EduDose en-US 2021-01-31 साधारण ब्याज की राशि की गणना निम्नलिखित फ़ॉर्मूले के अनुसार की जाती है: जहां r ब्याज दर अवधि है (I/m) B0 प्रारंभिक शेष राशि है और m पार हो चुकी समयावधि की संख्या है। अवधि ब्याज दर r की गणना करने के लिए, व्यक्ति ब्याज दर को / अवधि संख्या m से विभाजित करता है। उदाहरण के लिए, कल्पना करें कि एक क्रेडिट कार्ड धारक के पास 2500 डॉलर का बकाया जमा है और प्रति वर्ष साधारण ब्याज दर 12.99% है। 3 माह की समाप्ति पर जोड़ा गया ब्याज होगा, और उसे शेष राशि का पूर्ण भुगतान करने के लिए इस समय 2581.19 डॉलर देना होगा। यदि इसके बजाय वह केवल ब्याज का भुगतान करता है तो भुगतान अवधि दर r के अनुसार उन तीन महीने में से प्रत्येक महीने की, ब्याज भुगतान की राशि होगी, 3 महीने के अंत में उसकी शेष राशि फिर भी 2500 डॉलर ही होगी। इस मामले में, पैसे के समय मूल्य को कारक के रूप में नहीं गिना जाता. स्थिर भुगतानों पर अतिरिक्त लागत होती है जिसे ऋण की तुलना करते समय ध्यान में रखना आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए, दिए गए 100 डॉलर की मूल राशि: क्रेडिट कार्ड ऋण जहां $1/दिन शुल्क लिया जाता है: 1/100 =1%/दिन = 7%/हफ्ते = 365%/वर्ष. कॉर्पोरेट बॉन्ड जहां पहले 3 डॉलर छह महीने के बाद देय होते हैं और दूसरे 3 डॉलर साल के अंत में देय होते हैं: (3+3)/100 = 6%/वर्ष. जमा का प्रमाण पत्र (जीआईसी) जहां 6 डॉलर का भुगतान साल के अंत में किया जाता है: 6/100 = 6%/वर्ष. विभिन्न ब्याज युक्त ऑफरों की तुलना करते समय दो जटिलताएं शामिल है। जब दर समान हो लेकिन अवधि भिन्न हो तो एक प्रत्यक्ष तुलना पैसे के समय मूल्य के कारण अयथार्थ रहेगी. हर छह महीने पर 3 डॉलर के भुगतान की लागत, वर्ष के अंत में भुगतान किए गए 6 डॉलर से अधिक होती है इसलिए 6% बोंड 6% जीआईसी के 'बराबर' नहीं हो सकता है। जब ब्याज बकाया हो, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया गया हो, क्या वह 'ब्याज देय' रहता है, जैसे बोंड का छह महीने के बाद 3 डॉलर का भुगतान, या क्या यह देय रकम में जोड़ दिया जाता है? बाद वाले मामले में यह साधारण ब्याज नहीं रह जाता, लेकिन चक्रवृद्धि ब्याज हो जाता है। एक बैंक खाता जो केवल साधारण ब्याज प्रदान करता है, उससे निर्बाध रूप से पैसे निकालना संभावित नहीं होता, क्योंकि उससे पैसे निकलना और फिर तुरंत जमा करना लाभप्रद होता है। चक्रवृद्धि ब्याज Compound interest चक्रवृद्धि ब्याज, साधारण ब्याज के समान होता है, लेकिन समय के साथ इनका अंतर काफी गहरा होता जाता है। यह अंतर इसलिए है क्योंकि बकाया ब्याज को देय बकाया राशि में जोड़ा जाता है। इसे दूसरे तरीके से पेश किया जाए तो, उधारकर्ता पर पिछले ब्याज पर ब्याज लगाया जाता है। यह मानते हुए कि मूल धन या बाद के ब्याज का की किसी भी हिस्से का भुगतान नहीं किया गया है, ऋण निम्नलिखित फोर्मुलों द्वारा परिकलित किया जाता है: जहां Icomp चक्रवृद्धि ब्याज है, B0 प्रारंभिक बकाया राशि है, Bm, m अवधि के बाद की बकाया राशि है (जहां जरूरी नहीं है कि m एक पूर्णांक हो) और r अवधि दर है। उदाहरण के लिए, अगर उपरोक्त क्रेडिट कार्ड धारक कोई भी भुगतान नहीं करने का चुनाव करता है, ब्याज जमा होता रहेगा तो, 3 महीने के अंत में क्रेडिट कार्ड धारक की बकाया राशि 2582.07 डॉलर हो जाएगी और अब उसे आरंभिक बकाया राशि तक वापस लेन के लिए उसे 82.07 डॉलर का भुगतान करना होगा। संक्षिप्त समय अवधि में साधारण ब्याज लगभग चक्रवृद्धि ब्याज के जैसा ही होता है, इसलिए नियमित भुगतान चुकौती की सबसे कम महंगी रणनीति होती हैं। चक्रवृद्धि ब्याज के साथ एक समस्या यह है कि इसके परिणामस्वरूप आने वाले दायित्व की व्याख्या करना मुश्किल है। इस समस्या को आसान बनाने के लिए, अर्थशास्त्र में एक आम नियम है, अवधि को एक वर्ष का मान कर ब्याज दर का खुलासा करना, जिसमें सालाना चक्रवृद्धि प्रभावी ब्याज प्रदायी होता है। हालांकि, ऋण देने में ब्याज दर अक्सर मामूली ब्याज दर के रूप में उद्धृत किया जाता है (यानी, चक्रवृद्ध की बारंबारता के लिए बिना सुधारा हुआ चक्रवृद्धि ब्याज, ब्याज समझौता). जनवरी 2009 ऋण में अक्सर विभिन्न गैर ब्याज शुल्क और फीस भी शामिल होती है। एक उदाहरण है संयुक्त राज्य अमेरिका के बंधक ऋणों पर पॉइंट. जब इस तरह की फीस मौजूद होती है, तो उधारदाताओं को नियमित रूप से वित्त के 'असली' मूल्य के विषय में सूचना देना आवश्यक होता है, जो प्रायः वार्षिक प्रतिशत दर (APR) के रूप में व्यक्त किया जाता है। APR एक ऋण की कुल लागत को अतिरिक्त शुल्क और खर्चों को जोड़ने के बाद एक ब्याज दर के रूप में व्यक्त करने का प्रयास करती है, हालांकि विवरण अधिकार क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। अर्थशास्त्र में, निरंतर चक्रवृद्धि का इस्तेमाल प्रायः गणितीय गुण के कारण किया जाता है। जनवरी 2009 स्थिर और अस्थिर दर वाणिज्यिक ऋण आमतौर पर साधारण ब्याज का प्रयोग करते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि ऋण अवधि की समाप्ति तक उनपर हमेशा एकल ब्याज दर ही लागू हो। ऋण जिसके लिए ब्याज दर नहीं बदलता है उसे निर्धारित दर ऋण कहा जाता है। ऋण की अवधि के दौरान ऋण पर अस्थिर दर हो सकता है जो किसी संदर्भ दर पर आधारित होता है (जैसे LIBOR और Euribor), आमतौर पर एक स्थिर मार्जिन से अधिक (या कम). इन्हें अस्थिर दर (फ्लोटिंग रेट), चर दर या समायोज्य दर के नाम से जाना जाता है। निर्धारित दर और अस्थिर दर ऋण का संयोजन संभव होता है और अक्सर इस्तेमाल किया जाता है। ऋण की अवधि के दौरान ऋणों में विभिन्न ब्याज दर भी लगाया जा सकता है, जहां ब्याज दर में बदलाव एक अंतर्निहित ब्याज दर के अलावा अन्य विशिष्ट मापदंडों के आधार पर नियंत्रित किया जाता है। उदाहरण के लिए एक ऋण जो दरों में विशिष्ट परिवर्तन को अधिदिष्ट करने के लिए एक विशिष्ट समयावधि का प्रयोग करता है, जैसे प्रथम वर्ष में 5% का एक दर, द्वितीय वर्ष में 6% का एक दर, तीसरे वर्ष में 7% का एक दर. जनवरी 2009 ब्याज दरों की संरचना अर्थशास्त्र में, ब्याज को ऋण का मूल्य माना जाता है, इसलिए, यह भी मुद्रास्फीति के कारण विकृतियों के अधीन होता है। मामूली ब्याज दर ही उपभोक्ता को नज़र आती है, (यानी, एक ऋण अनुबंध के साथ जुड़ा हुआ ब्याज, क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, आदि), जो मुद्रास्फीति के लिए समायोजन करने से पहले की कीमत को संदर्भित करता है। मामूली ब्याज अन्य कारकों के बीच वास्तविक ब्याज दर जमा मुद्रास्फीति, से बना हुआ है। एक मामूली ब्याज के लिए एक सरल फ़ॉर्मूला है: जहां i मामूली ब्याज है, r वास्तविक ब्याज है और मुद्रास्फीति है। यह फार्मूला ब्याज के मूल्य को स्थिर क्रय शक्ति के इकाइयों में मापने का प्रयास करता है। हालांकि, अगर यह बयान सही है, तो इसमें कम से कम दो भ्रांत धारणा होगी। पहला, कि एक क्षेत्र के भीतर सभी ब्याज दरें जो कि एक ही मुद्रास्फीति को साझा करती हैं (जैसा की एक ही देश में) एक ही होना चाहिए। दूसरे, कि उधारदाताओं को उस अवधि की मुद्रास्फीति का पता होता है जिस समय वे ऋण देते हैं। कोष बांड अर्जित करने वाले ब्याजों और बंधक ऋण अर्जित करने वाले ब्याजों में असमानता का एक कारण है वह जोखिम जो एक ऋणदाता एक आर्थिक एजेंट को ऋण देने के कारण उठाता है। इस विशेष मामले में, एक व्यक्तिगत नागरिक से अधिक एक सरकार के भुगतान करने की संभावना होती है। इसलिए, एक व्यक्तिगत नागरिक पर प्रभारी ब्याज शुल्क की दर सरकार के लिए लगाए गए ब्याज शुल्क की दर से अधिक होता है। ऊपर उल्लिखित जानकारी विषमता को विचार के अंतर्गत लेने के लिए, मुद्रास्फीति का मूल्य और पैसे की असली कीमत, दोनों को ही उनके अपेक्षित मूल्य में परिवर्तित कर दिया जाता है जिससे निम्नलिखित समीकरण फलित होता है: यहां, ऋण के समय पर न्यूनतम ब्याज था, वास्तविक ब्याज है जो ऋण की अवधि के दौरान अपेक्षित था, मुद्रास्फीति है जो ऋण की अवधि के दौरान अपेक्षित है और संचालन में लगे जोखिम के लिए प्रतिनिधि मूल्य है। संचयी ब्याज या वापसी जनवरी 2009 संचयी ब्याज के लिए गणना है (FV/PV)-1. यह 'प्रति वर्ष' के नियम की अनदेखी करता है और प्रत्येक भुगतान तिथि में धारणा बनाता है। यह आम तौर पर दो लंबी अवधि के अवसर की तुलना करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जनवरी 2009 अन्य नियम और उपयोग अपवाद: अमेरिका और कनाडा के टी-विधेयक (अल्पावधि सरकारी ऋण) की अपनी एक अलग ब्याज की गणना है। उनके ब्याज की गणना (100-P)/P के रूप में की जाती है जहां 'P' भुगतान की हुई राशि है। एक साल के लिए सामान्य करने के बजाए इस ब्याज को दिनों की संख्या 't' (365/t) *100 यथानुपात किया जाता है। (यह भी देखें: दिवस गणना नियम). कुल गणना है ((100-P)/P)*((365/t)*100). यह एक प्रक्रिया द्वारा कीमत की गणना के बराबर होता है जिसे साधारण ब्याज दर पर छुट कहते हैं। कॉर्पोरेट बांड सर्वाधिक बारंबार देय होते हैं, वार्षिक रूप से दो बार. भुगतान किये गए ब्याज की राशि साधारण ब्याज है जिसे दो से भाग देते हैं (ऋण के अंकित मान द्वारा गुणा करके). फ्लैट दर ऋण और 78s का नियम: कुछ उपभोक्ता ऋणों को फ्लैट दर ऋण के रूप में संरचित किया गया है, जिसमें बकाया ऋण का निर्धारण कुल ब्याज को ऋण की अवधि भर आवंटित करने के द्वारा किया जाता है, इसमें "78s का नियम" या "सम ऑफ़ डिजिट्स" विधि के प्रयोग से किया जाता है। 1 से लेकर 12 संख्या का समावेशी योग अठहत्तर है। यह अभ्यास कंप्यूटर के आविष्कार से पहले के दिनों में ब्याज की त्वरित गणना को सक्षम बनाता था। एक ऋण जिसमें 78s के नियम के अनुसार ब्याज परिकलित किया जाता है, उसमें ऋण के जीवन काल पर कुल ब्याज की या तो साधारण या चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में गणना की जाती है और यह उपरोक्त विधियों में से किसी एक के बराबर होता है। ऋण के जीवन काल के दौरान भुगतान स्थिर रहता है; लेकिन भुगतान को उत्तरोत्तर छोटी मात्रा में ब्याज में आवंटित कर दिया जाता है। एक साल के ऋण में, पहले महीने में, ऋण के जीवन काल के दौरान सभी बकाया ब्याज का 12/78 बकाया होता है; दूसरे महीने में, 11/78; और बारहवें महीने तक चल कर सभी ब्याजों का केवल 1/78 ही बकाया रहता है। 78s के नियम का व्यावहारिक प्रभाव यह है कि अवधि ऋणों के भुगतान के समय पूर्व भुगतान को अधिक महंगा बना दिया गया। एक वर्ष के ऋण के लिए, सभी देय भुगतानों का लगभग 3/4 छठे महीने तक एकत्र कर लिया जाता है और तब मूल राशि का पूर्ण भुगतान प्रभावी ब्याज दर को AYP से कहीं अधिक कर देता है जो भुगतान की गणना करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। http://www.bankrate.com/brm/news/auto/20010827a.asp 78 का नियम - इस ऑटो ऋण ट्रिक को देखें 12 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101121064848/http://www.bankrate.com/brm/news/auto/20010827a.asp 21 नवंबर 2010 live 1992 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने "78s के नियम" ब्याज के उपयोग को पांच वर्षों से अधिक की अवधि वाले बंधक पुनर्वित्त और अन्य उपभोक्ता ऋणों के सिलसिले में प्रतिबंधित कर दिया। 15 1615 कुछ अन्य न्यायालयों ने भी कुछ प्रकार के ऋणों में विशेष कर उपभोक्ता ऋण में, 78s के नियम के प्रयोग को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। 72 का नियम: "72 का नियम" यह पता लगाने की एक "त्वरित और गंदी" विधि है कि एक दिए हुए ब्याज दर में धन कितनी जल्दी दोगुना होता है। उदाहरण के लिए, यदि तुम्हारे पास 6% की ब्याज दर है, तब 6% पर संयोजित होकर तुम्हारे पैसे को दोगुना होने के लिए 72/6 या 12 साल का समय लगेगा। यह एक सन्निकटन है जो 10% से अधिक होने पर टूटने लगता है। बाज़ार ब्याज दर जनवरी 2009 निवेश निर्धारित ब्याज दर के लिए बाजार हैं (जिसमें शामिल हैं मुद्रा बाजार, बोंड बाजार और साथ ही साथ खुदरा वित्तीय संस्थान जैसे बैंक) . प्रत्येक विशिष्ट ऋण अपनी ब्याज दर निर्धारित करने में निम्नलिखित कारकों का ध्यान रखता है: अवसर लागत इसमें वे सभी उपयोग शामिल हैं जिसमें उस धन को लगाया जा सकता था, जिसमें शामिल है दूसरों को उधार देना, अन्यत्र निवेश करना, नकद रखना (उदाहरण के लिए, सुरक्षा के लिए) और केवल धन को खर्च करने के लिए। मुद्रास्फीति चूंकि ऋणदाता अपनी खपत को आस्थगित करता जाता है, वह कम से कम यह चाहेगा कि जो धन वह वसूल करता है वह मुद्रास्फीति के कारण वस्तुओं की बढ़ी हुई कीमतों के लिए पर्याप्त हो। चूंकि भविष्य की मुद्रास्फीति अज्ञात होती है, यहां तीन रणनीतियां हैं। X% ब्याज 'धन मुद्रास्फीति' लगाएगा. कई सरकारें 'वास्तविक-प्रतिलाभ' या 'मुद्रास्फीति अनुक्रमित बौंड' जारी करती हैं। मूल राशि या ब्याज भुगतान लगातार मुद्रास्फीति की दर से बढ़ते हैं। वास्तविक ब्याज दर पर चर्चा देखें. 'प्रत्याशित' मुद्रास्फीति दर का निर्णय. यह अभी भी दोनों पक्षों को 'अप्रत्याशित' मुद्रास्फीति के जोखिम के प्रति संवेदंशील बनाता है। ब्याज दर को आवधिक रूप से परिवर्तित करने की अनुमति दें। जबकि एक 'स्थिर ब्याज दर' ऋण के जीवन काल भर एक ही रहता है, 'चर' या 'फ्लोटिंग' दरों को पुनः सेट किया जा सकता है। यह व्युत्पन्न उत्पाद हैं जो दोनों के बीच प्रतिरक्षा और अदला-बदली को सक्षम बनाते हैं। डिफॉल्ट यहां हमेशा ही उधारकर्ता के दिवालिया हो जाने, फरार हो जाने या अन्यथा ऋण पर डिफ़ॉल्ट करने का जोखिम बना रहता है। जोखिम प्रीमियम उधारकर्ता की अखंडता को, उसके उद्यम के सफल होने में जोखिम को और किसी भी संपार्श्विक जिस पर वचन दिया गया हो की सुरक्षा को, मापने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, विकासशील देशों को दिए गए ऋणों अमेरिकी सरकार की तुलना में अधिक उच्च जोखिम प्रीमियम शामिल होता है जो उनके उधार पात्रता में अंतर के कारण होता है। एक कारोबार की परिचालन ऋण सीमा का दर एक बंधक ऋण के दर की तुलना में अधिक होगा। कारोबार की उधार पात्रता को बौंड रेटिंग सर्विसेज़ के द्वारा मापा जाता है और व्यक्तिगत के क्रेडिट स्कोर को ब्यूरो क्रेडिट द्वारा मापा जाता है। एक व्यक्ति के ऋण के जोखिम में बड़े पैमाने पर मानक में परिवर्तन संभव है। ऋणदाता अपने अधिकतम जोखिम को सुरक्षित करना चाहेगा, लेकिन कर्ज के संविभाग वाले उधारदाता जोखिम प्रीमियम को कम कर सकते हैं ताकि केवल सबसे संभावित परिणाम की रक्षा की जा सके। डिफ़ॉल्ट ब्याज डिफ़ॉल्ट ब्याज एक ऐसा ब्याज है जो एक उधारकर्ता ऋण अनुबंध को पूरा ना कर पाने की स्थिति में अदा करता है। डिफ़ॉल्ट ब्याज आमतौर पर मूल ब्याज के मुकाबले काफी अधिक होता है क्योंकि यह उधारकर्ता की वित्तीय जोखिम में अपवृद्धि को दर्शाता है। डिफ़ॉल्ट ब्याज ऋणदाता को अतिरिक्त जोखिम के लिए मुआवजा प्रदान करता है। बैंक, ऋण समझौतों को विभिन्न परिदृश्यों के बीच अलग करने के लिए डिफ़ॉल्ट ब्याज को जोड़ता है। विलम्बित खपत केवल मुद्रास्फीति के बराबर ब्याज की मांग करने से ऋणदाता की क्रय शक्ति वही रह जाएगी, लेकिन वह अपने ही खपत को बाद की तुलना में जल्दी ही पसंद करेगा। देरी के लिए एक ब्याज प्रीमियम होगा। वह उपभोग नहीं करना चाहता होगा, लेकिन इसके बजाय वह एक अन्य उत्पाद में निवेश करेगा। प्रतिस्पर्धा निवेश में जो संभव प्रतिफल वह प्राप्त कर सकता है वह उसपर प्रभारी ब्याज को निर्धारित करता है। समय अवधि लघु अवधियों में डिफ़ॉल्ट और मुद्रास्फीति का कम जोखिम होता है क्योंकि निकट भविष्य में इसका अनुमान लगाना आसान होता है। मोटे तौर पर कहा जाए तो, यदि ब्याज दरों में वृद्धि होती है, तो ऋण की उच्च कीमतों के कारण (बाकी सब कुछ बराबर होने पर) निवेश कम हो जाता है। ब्याज दर आम तौर पर बाजार द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, लेकिन सरकार के हस्तक्षेप - आम तौर पर सेन्ट्रल बैंक द्वारा - अल्पकालिक ब्याज दर पर गहरा प्रभाव डालता है और मौद्रिक नीति के एक मुख्य उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। सेंट्रल बैंक इच्छित दर पर धन की खरीद या बेच का प्रस्ताव पेश करती है और कुछ उपकरणों पर अपने नियंत्रण की वजह से (जैसे, कई देशों में, पैसे मुद्रित करने की क्षमता) वे कुल बाजार ब्याज दरों को प्रभावित कर सकते हैं। ब्याज दरों में बदलाव के परिणामस्वरूप निवेश में त्वरित परिवर्तन हो सकता है, जो राष्ट्रीय आय को प्रभावित करता है और, ओकून सिद्धांत के आधार पर आउटपुट में परिवर्तन बेरोजगारी को प्रभावित करता है।{तथ्य|तिथि=जनवरी 2009} संयुक्त राज्य अमेरिका में मुक्त बाज़ार परिचालन thumb|right|375px|प्रभावी संघीय धन की दर पचास वर्षों से भी अधिक से सनदी. फेडरल रिजर्व (Fed) संघीय निधि दर द्वारा लक्ष्यीकरण करके मौद्रिक नीति को बड़े पैमाने पर लागू करता है। यह वह दर है जो बैंकों द्वारा एक दूसरे पर एक रात के लिए संघीय धन के ऋण के लिए प्रभारी किया जाता है। संघीय धन बैंकों द्वारा फेड में धारण किया हुआ भंडार हैं। मुक्त बाज़ार परिचालन फेडरल रिजर्व द्वारा कम अवधि ब्याज दरों को नियंत्रित करने के लिए लागू मौद्रिक नीति के तहत एक उपकरण है। प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने की ताकत का प्रयोग करते हुए फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क का ओपन मार्केट डेस्क, बाज़ार में टी-नोटों की खरीद द्वारा डॉलरों की आपूर्ति कर सकता है, जिससे वह राष्ट्र की धन आपूर्ति को बढ़ाता है। धन की आपूर्ति या अनुदान की सकल आपूर्ति (ASF) को बढ़ाने से, बैंकों में अतिरिक्त डॉलरों के भंडार के कारण ब्याज दरों में गिरावट आ जाती है। अतिरिक्त भंडार को फेड अनुदान बाज़ार में अन्य बैंकों को ऋण के रूप में प्रदान किया जाता है, जो दरों को कम करते हैं। ब्याज दर और ऋण जोखिम व्यापक रूप से यह माना जाता है कि, व्यवसाय चक्र, ब्याज दर और ऋण जोखिम आपस में बहुत सख्ती से जुड़े हुए हैं। जैरो-टर्नबुल मॉडल पहला ऐसा ऋण जोखिम मॉडल था जिसके मूल में स्पष्टतया यादृच्छिक ब्याज दरें थीं। लैंडो (2004), डैरेल डफ्फी और सिंगलटन (2003) और वैन डेवेंटर और इमाई (2003) ने उस समय के ब्याज दरों पर चर्चा की है जब ब्याज वाली वस्तु का प्रदाता चूक करे. पैसा और मुद्रास्फीति ऋण, बांड और शेयरों में पैसे की कुछ विशेषताएं होती हैं और इन्हें व्यापक धन आपूर्ति में शामिल किया गया है। i*n को स्थापित करने के द्वारा, सरकारी संस्थान बाजारों को जारी कुल ऋण, बांड और शेयरों को बदलने के लिए प्रभावित कर सकता है। सामान्यतया, एक उच्च वास्तविक ब्याज दर व्यापक धन आपूर्ति को कम कर देता है। मुद्रा-परिमाण सिद्धांत के माध्यम से, धन की आपूर्ति में वृद्धि मुद्रास्फीति को जन्म देता है। इसका मतलब यह है कि ब्याज दर भविष्य में मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकता है। जनवरी 2009 गणित में ब्याज यह समझा जाता है कि जेकब बर्नोऊली ने चक्रवृद्धि ब्याज के विषय में एक प्रश्न के बारे में अध्ययन करके गणितीय स्थिरांक e की खोज की। जनवरी 2009 उन्होंने महसूस किया कि यदि 1.00 डॉलर देकर एक खाता खुलवाया जाता है और प्रति वर्ष उसपर 100% ब्याज दिया जाता है, तो वर्ष के अंत में उसका मूल्य 2.00 डॉलर होता है; लेकिन यदि ब्याज की गणना की जाती है और वर्ष में दो बार जोड़ा जाता है, तो वह 1 डॉलर 1.5 से दो बार गुणा किया जाता है और इससे 1.00×1.5² डॉलर = 2.25 डॉलर प्राप्त होता है। त्रैमासिक आधार पर हिसाब लगाने से $ 1.00 × 1.25 = 4 $ 2.4414 ... और इसी तरह आगे भी. बर्नोऊली ने देखा कि इस अनुक्रम को निम्नानुसार तैयार किया जा सकता है: जहां n एक साल में चक्रवृद्धि किए जाने वाले ब्याज की संख्या है। सूत्र नियमित मासिक भुगतान के साथ एक ऋण की बकाया राशि को प्रभारी मासिक ब्याज द्वारा संवर्धित किया जाता है और भुगतान द्वारा कम कर दिया जाता है, इसलिए . जहां, i = ऋण दर/100 = दशमलव के रूप में वार्षिक दर (जैसे 10% = 0.10 ऋण दर वह दर है जिसका उपयोग भुगतान और संतुलन की गणना करने के लिए किया जाता है) r = अवधि दर = i/12 मासिक भुगतान के लिए (सुविधा के लिए प्रथागत उपयोग) B0 = प्रारंभिक बकाया (ऋण मूल धन) Bk = k भुगतान के बाद बकाया राशि k = बकाया सूचकांक p = (मासिक) भुगतान अवधि पुनरावृत्त प्रतिस्थापन द्वारा व्यक्ति Bk के लिए अभिव्यक्ति प्राप्त कर सकता है, जो रैखिक रूप से B0 और p के लिए आनुपातिक हैं और एक ज्यामितीय श्रृंखला के एक आंशिक योग फ़ॉर्मूला का उपयोग निम्न को परिणामित करता है, B0 और Bn के संदर्भ में p के लिए इस अभिव्यक्ति का एक समाधान निम्न तक कम होता है, n भुगतानों में ऋण को पूरी तरह से अदा करने के लिए भुगतान राशि का पता लगाने के लिए व्यक्ति Bn = 0 सेट करता है। जो पीएमटी (PMT) कार्य स्प्रेडशीट प्रोग्राम्स में में पाया जाता है वे एक ऋण के मासिक भुगतान की गणना करने में उपयोग किए जा सकते हैं: वर्तमान बकाया राशि पर एक केवल ब्याज भुगतान निम्न होगा, ऋण पर कुल ब्याज, IT भुगतान निम्न होगा, एक नियमित बचत कार्यक्रम के लिए सूत्र समान हैं, लेकिन भुगतानों को बकाया राशि से घटाने के बजाये उसमें जोड़ा जाता है और भुगतान के लिए सूत्र उपरोक्त से नकारात्मक है। ये सूत्र केवल अनुमानित हैं क्योंकि वास्तविक बकाया ऋण राउंडिंग से प्रभावित होते हैं। ऋण के अंत में अल्प भुगतान करने से बचने के लिए भुगतान को अगले सेंट तक बढ़ाना चाहिए। ऐसी स्थति में अंतिम भुगतान (1+r)Bn-1 होना चाहिए एक समान ऋण पर विचार करें, लेकिन उपरोक्त सवाल के समय अवधि के k के बराबर एक नई अवधि के साथ. यदि rk और pk नए दर और भुगतान हैं, अब हमारे पास है, Bk के साथ इस अभिव्यक्ति की तुलना करने से हमे पता चलता है, पिछला समीकरण हमें दोनों समस्याओं के लिए एक ही स्थिर को परिभाषित करने का अवसर देता है, और Bk लिखा जा सकता है, rk के लिए सुलझाते हुए हमे rk के लिए एक फ़ॉर्मूला प्राप्त होता है जिसमें शामिल होता है ज्ञात मात्रा और Bk, जो k अवधि के बाद बकाया धन होता है, जैसा की B0 ऋण का कोई भी बकाया राशि हो सकता है, यह फार्मूला k अवधि द्वारा विभाजित किए गए कोई भी दो बकाया राशियों को अलग करता है और सालाना ब्याज दर के लिए मूल्य की गणना करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। B* एक अपरिवर्तनीय पैमाना है क्योंकि यह अवधि की लंबाई में परिवर्तन के साथ परिवर्तित नहीं होती. B* के लिए समीकरण का उलटफेर करने पर व्यक्ति को एक परिवर्तन गुणांक प्राप्त होता है (पैमाने कारक), (द्विपद प्रमेय देखने) और हम यह देखते हैं कि r और p एक ही तरीके से बदलते हैं, बकाया राशि में इसी तरह परिवर्तन होता है, जो उपरोक्त फोर्मुलों में पाए जाने वाले कुछ गुणांकों के अर्थ में एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। वार्षिक दर, r12, केवल एक भुगतान प्रति वर्ष को ही मानता है और यह मासिक भुगतान के लिए एक "प्रभावी दर" नहीं है। मासिक भुगतान द्वारा मासिक ब्याज का भुगतान प्रत्येक भुगतान में से किया जाता है और इसलिए चक्रावृद्ध नहीं किया जाना चाहिए और 12.r की एक वार्षिक दर अधिक उचित है। यदि कोई व्यक्ति केवल ब्याज भुगतान करता है वर्ष भर के लिए किये गए भुगतान की राशि 12.r.B0। pk = rk B* को Bk के लिए समीकरण में स्थानापन्न करने पर हमे मिलता है, Bn = 0 के बाद हम B* के लिए भी हल कर सकते हैं, Bk के लिए फ़ॉर्मूला में वापस स्थानापन्न करना यह दर्शाता है कि यह एक rk रैखिक कार्य है और इसलिए λk, यह बकाया राशि का आकलन करने का सबसे आसान तरीका है यदि λk ज्ञात हो। उपरोक्त Bk के लिए पहले फोर्मुले में स्थानापन्न करके और λk+1 लिए हल ढूंढने पर हम पाते हैं, ऊपर दिए गए λk फ़ॉर्मूला का प्रयोग करके या λ0 = 0 से λn तक से बारी बारी λk की गणना करके, λ0 और λn को पाया जा सकता है। जबकि p = rB* भुगतान के लिए फार्मूल निम्नलिखित तक कम हो जाता है, और ऋण की अवधि में औसत ब्याज दर है, जो r से कम होता है अगर n>1 है। इन्हें भी देखें बीमांकिक अंकन प्रतिज्ञापत्र प्रतिफल दर नकद संचय समीकरण चक्रवृद्धि ब्याज क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रेडिट कार्ड का ब्याज छूट फिशर समीकरण किराया खरीद ब्याज व्यय ब्याज दर पट्टा मौद्रिक नीति बंधक ऋण जोखिम मुक्त ब्याज दर उपज वक्र पैसे का समय मूल्य साधारण ब्याज धर्म सूदखोरी रिबा सन्दर्भ जनवरी 2009 विशिष्ट संदर्भ सामान्य संबद्ध Duffie, Darrell and Kenneth J. Singleton Credit Risk: Pricing, Measurement, and Management https://archive.org/details/creditriskpricin0000duff 2003 Princeton University Press 13 978-0691090467 Kellison, Stephen G. The Theory of Interest 1970 Richard D. Irwin, Inc. Library of Congress Catalog Card No. 79-98251 Lando, David Credit Risk Modeling: Theory and Applications https://archive.org/details/creditriskmodeli0000land 2004 Princeton University Press 13 978-0691089294 van Deventer, Donald R. and Kenji Imai Credit Risk Models and the Basel Accords https://archive.org/details/creditriskmodels0000deve 2003 John Wiley & Sons 13 978-0470820919 दीपक तिवारी (रिज़वी कॉलेज) BBI छात्र बाहरी कड़ियाँ साधारण ब्याज परिकलन-यंत्र चक्रवृद्धि ब्याज परिकलन-यंत्र बंधक भुगतान परिकलन-यंत्र बंधक संबंधी समाचार और जानकारी श्वेत पत्र: गणित से ज्यादा, ब्याज गणना की लुप्त कला चुकता बंधक वित्तीय सेवा प्राधिकरण (यू के) एकाधिक क्रेडिट और डेबिट के लिए साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज परिकलन-यंत्र अगस्त 2026 InternetArchiveBot ओईसीडी (OECD) ब्याज दर के आंकड़े आप इन साइटों पर मौजूदा ब्याज दरों की एक सूची देख सकते हैं: विश्व ब्याज दरें फोरेक्स मोशन "विच वे टू पे" श्रेणी:ऋण श्रेणी:ब्याज