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सआदत हसन मंटो
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सआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955) उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और चर्चित टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए। कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने बाइस लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह प्रकाशित किए।
कहानियों में अश्लीलता के आरोप की वजह से मंटो को छह बार अदालत जाना पड़ा था, जिसमें से तीन बार पाकिस्तान बनने से पहले और बनने के बाद, लेकिन एक भी बार मामला साबित नहीं हो पाया। इनके कुछ कार्यों का दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है।
नंदिता दास द्वारा बनाई गई मंटो (2018 फ़िल्म) और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत, एक बॉलीवुड फिल्म है जो मंटो के जीवन पर आधारित है।
== मंटो की प्रसिद्ध रचनाएँ ==
टोबा टेकसिंह , लघुकथा
Atishparay (Nuggets of Fire) – 1936
Chugad
मंटो के अफसाने – 1940
धुआँ – 1941
अफसाने और ड्रामे – 1943
लज़्ज़त-ए-संग - -1948
स्याह हाशिए -1948
बादशाहत का खात्मा – 1950
खाली बोतलें – 1950
लाऊड स्पीकर (Sketches)
गंजे फरिश्ते (Sketches)
Manto ke Mazameen
नमरूद की खुदाई – 1950
ठंडा गोश्त – 1950
याज़िद – 1951
पर्दे के पीछे – 1953
सड़क के किनारे – 1953
बग़ैर उनवान के (बिना शीर्षक) – 1954
बग़ैर इजाज़त – 1955
बुर्क़े – 1955
Phunduney (Tassles) – 1955
सरकंडों के पीछे -1955
शैतान – 1955
शिकारी औरतें – 1955
रत्ती, माशा, तोला" -1956
काली सलवार – 1961
मंटो की बेहतरीन कहानियाँ – 1963 [1]
ताहिरा से ताहिर – 1971
== इन्हें भी देखें ==
फ़हमीदा रियाज़
इस्मत चुग़ताई
सआदत हसन मंटो लेख/कहानियाँ/व्यंग्य Archived 2020-10-27 at the वेबैक मशीन