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मैमोग्राफी (स्तन चित्रण)
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right|thumb|240px|मैमोग्राफी.
मैमोग्राफी (स्तन चित्रण) मानव स्तन के परीक्षण के लिए कम विस्तारित मात्रा में एक्स-रे (आम तौर पर 0.7 एमएसवी के आसपास) के उपयोग की प्रक्रिया है और इसका उपयोग रोग की पहचान करने और उसका पता लगाने के उपकरण के रूप में िकया जाता है।
स्तन चित्रण का लक्ष्य स्तन कैंसर का शुरूआती दौर में ही पता लगाना है और यह सामान्यत: कुछ खास तरह के पुंजों और/या छोटी कोशिकाओं का पता लगाकर किया जाता है। माना जाता है कि मैमोग्राफी से स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु दर को कम कर सकती है। कम जोखिम वाली किसी अन्य चित्रण तकनीक विकास अब तक नहीं हुआ है, लेकिन स्तन आत्म परीक्षा (बीएसई) और चिकित्सक के परीक्षण को स्तन की नियमित देखभाल के आवश्यक हिस्से माने गये हैं।
कई देशों में स्तन कैंसर की जल्दी पहचान के लिए उम्रदराज महिलाओं की नियमित मैमोग्राफी को एक स्क्रीनिंग पद्धति के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स 50 से 74 आयु वर्ग की महिलाओं के लिए हर 2 साल पर नैदानिक स्तन परीक्षण के साथ या इसके बिना मैमोग्राफी स्क्रीनिंग की सिफारिश करता है।अमेरिका प्रिवेंटिव टास्क फोर्स. स्क्रीनिंग के लिए स्तन कैंसर https://web.archive.org/web/20130623042638/http://www.ahrq.gov/clinic/uspstf/uspsbrca.htm#summary 23 जून 2013 . हेल्थकेयर अनुसंधान और गुणवत्ता के लिए एजेंसी. कुल मिलाकर पाया गया है कि नैदानिक परीक्षणों से स्तन कैंसर से मृत्यु दर में 20% की अपेक्षाकृत कमी आई है, लेकिन उच्चतम गुणवत्ता वाले दो परीक्षणों में मृत्यु दर में कमी का रुख नहीं दिखा.Gøtzsche PC, Nielsen M Screening for breast cancer with mammography Cochrane Database Syst Rev 4 CD001877 2006 17054145 10.1002/14651858.CD001877.pub2 सन् 2000 में, एक अखबार द्वारा उच्चतम गुणवत्ता वाले दो अध्ययनों के परिणामों को प्रकाशित कर उजागर करने के बाद, स्तन चित्र (मैमोग्राम्स) विवादास्पद हो गये।Miller AB Is mammography screening for breast cancer really not justifiable? Recent Results Cancer Res. 163 115–28; discussion 264–6 2003 12903848
अन्य सभी एक्स-रे की तरह स्तन चित्र में चित्र बनाने के लिए विकिरण को आयनित करने की खुराक का उपयोग किया जाता है। फिर रेडियोलॉजिस्ट सभी असामान्य निष्कर्षों का विश्लेषण करता है। हड्डियों की रेडियोग्राफी की तुलना में लंबी और देर तक प्रवाहित की जाने वाली तरंगों वाले एक्स-रे (सामान्यत: एमओ-के) का उपयोग आम है।
इस समय, आरंभिक स्तन कैंसर के रोग अध्ययन के लिए भौतिक स्तन परीक्षण के साथ मैमोग्राफी को भी पसंद किया जाने लगा है अल्ट्रासाउंड, डक्टोग्राफी (एक वाहिनी के जरिये गांठ का पता लगाना), पोजीट्रान इमिशन मैमोग्राफी (पीईएम) और चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग मैमोग्राफी के पूरक हैं। सामान्यत: अल्ट्रासाउंड का उपयोग मैमोग्राफी से प्राप्त या इस प्रक्रिया से नहीं छूने योग्य पुंजों के आगे के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कुछ संस्थान स्तन चित्रण से रोग का पता नहीं लग पाने पर, अब भी डक्टोग्राम का उपयोग चुचुक या निप्पल से खून के रिसाव के लिए करते हैं। संदिग्ध निष्कर्षों के आगे के मूल्यांकन के लिए साथ ही स्तन कैंसर के ज्ञात मरीजों में सर्जरी से पहले के परीक्षण के लिए एमआरआई (चुंबकीय अनुनादी चित्रण) उपयोगी हो सकता है, ताकि उन अतिरिक्त उतकों का पता लगाया जा सके, जो सर्जरी की दिशा बदल सकते हैं, उदाहरण के लिए स्तन से सर्जरी के जरिये गांठ निकाल दिये जाने (लुंपेक्टोमी) से लेकर पूरे स्तन को काटकर निकाल देने (मास्टेक्टोमी) तक. टोमोसिंथेसिस (एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड के जरिये मानव शरीर के विभिन्न हिस्सों को दिखाने जैसी तकनीक) सहित नई प्रक्रियाएं सामान्य जनता में इस्तेमाल के लिए नहीं अभी अनुमोदित नहीं की गई हैं, पर आने वाले सालों में इनसे लाभ हो सकते हैं।
मैमोग्राफी में झूठी नकारात्मक (कैंसर को नहीं पकड़ पाने) दर कम से कम 10 प्रतिशत है। यह आंशिक रूप से इसलिए होता है कि घने ऊतक कैंसर को ढंक लेते हैं, साथ ही यह भी तथ्य है कि स्तन चित्रण पर कैंसर की उपस्थिति सामान्य ऊतकों से आच्छादित हो जाती है।
प्रक्रिया
right|thumb|360px|प्रगति में करानियोकॉडल (CC) मैमोग्राफी के दृश्य
प्रक्रिया के दौरान, स्तन का एक समर्पित मैमोग्राफी यूनिट के जरिये संपीड़न किया जाता है। समानांतर प्लेट संपीड़न से चित्र की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए स्तन के ऊतकों को समतल किया जाता है और ऊतकों की मोटाई कम होने से एक्स-रे भीतर तक पहुंचती हैं और इससे विकरण का बिखराव (बिखराव चित्र की गुणवत्ता खराब करता है) कम होता है। उन प्लेटों के कारण आवश्यक विकिरण मात्रा कम की जा सकती है और स्तन को स्थिर (हिलने के कारण चित्र के धुंधला होने से रोकने के लिए) रखा जाता है। मैमोग्राफी की स्क्रीनिंग में स्तन का सिर से लेकर पैर तक की (कार्नियोकैडुअल, सीसी) छवि और तिरछी छवि दोनों ली जाती हैं। नैदानिक मैमोग्राफी में इनके अलावा आशंका के एक खास क्षेत्र के ज्यामितिय विस्तारित और उस स्थल के संकुचन की छवियों सहित अन्य छवियां शामिल हो सकती हैं। दुर्गंधनाशक, टेलकम पाउडर या लोशन एक्स-रे कैल्शियम स्थल के रूप में दिख सकते हैं, इसलिए परीक्षा के दिन महिलाओं को इनके उपयोग के लिए हतोत्साहित किया जाता है।
जब तक कुछ साल पहले, आम तौर पर मैमोग्राफी स्क्रीन फिल्म कैसेट के साथ प्रदर्शन किया था। अब, मैमोग्राफी डिजिटल डिटेक्टरों के जरिये होने लगी है, जिसे फुल फील्ड डिजिटल मैमोग्राफी (एमएमडीएम) कहा जाता है। पहली एमएमडीएम प्रणाली 2000 में एफडीए द्वारा अमेरिका में अनुमोदित की गई। यह प्रगति सामान्य रेडियोलोजी की तुलना में कुछ वर्ष बाद हुई है। ये कई कारकों के कारण है:
और उच्च स्थानिक विघटक मैमोग्राफी की मांग
उपकरणों की कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि
एफडीए की यह चिंता कि मैमोग्राफी के डिजिटल उपकरण यह दिखाते हैं कि स्तन परीक्षण की मात्रा बढाये बिना और अगली जांच के लिए महिलाओं को बुलाये जाने की संख्या बढ़ाये बिना स्तन कैंसर का पता लगाने में स्क्रीन -फिल्म मैमोग्राफी जितना ही अच्छा है।
1 मार्च 2010 तक संयुक्त राज्य अमेरिका और इसके क्षेत्रों की सुविधाएं प्रदान करनेवाली 62 प्रतिशत एजेंसियों में कम से कम एक एफएफडीएम यूनिट हैं।खाद्य और ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मैमोग्राफी गुणवत्ता स्कोरकार्ड https://web.archive.org/web/20090518172032/http://www.fda.gov/CDRH/MAMMOGRAPHY/scorecard-statistics.html 18 मई 2009 . अद्यतित 1 मार्च 2010. 31 मार्च 2010 को अभिगमित. इस आंकड़े में एफडीए में कंप्यूटरीकृत रेडियोग्राफी ईकाइयां शामिल हैं।रेडियोलॉजी के अमेरिकी कॉलेज से मैमोग्राफी के ऊपर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न https://web.archive.org/web/20120229140738/http://www.acr.org/accreditation/mammography/mammo_faq_mamac.html#8.0.1 29 फ़रवरी 2012 . 8 जनवरी 2007 में संशोधित; 9 अप्रैल 2007 को अभिगमित.
"परीक्षण" प्रक्रिया
पिछले कई वर्षों में "परीक्षण" प्रक्रिया काफी औपचारिक हो गई है। इसमें आमतौर पर स्क्रीनिंग मैमोग्राफी, नैदानिक मैमोग्राफी और जब आवश्यक हो बायोप्सी (जीवोतिपरीक्षा) शामिल है और अक्सर यह स्टीरियो टैक्टिक कोर बायोप्सी या अल्ट्रासाउंड द्वारा निर्देशित को बायोप्सी के माध्यम से संपन्न होता है। एक स्तन चित्र https://web.archive.org/web/20090703073058/http://www.infoforyourhealth.com/Womens%27%20Health/Mammogram.htm 3 जुलाई 2009 की जांच के बाद कुछ महिलाओं के लिए चिंता के विषय हो सकते हैं, जिसे स्तन चित्र की स्क्रीनिंग द्वारा प्राप्त सूचना के जरिये दूर नहीं किया जा सकता है। उन्हें फिर "नैदानिक मैमोग्राम" के लिए वापस बुलाया जाता है। इस वाक्यांश का मतलब अनिवार्यत: समस्या के हल के लिए किया गया मैमोग्राम है। इस सत्र के दौरान रेडियोलॉजिस्ट को हर अतिरिक्त फिल्म की निगरानी करनी होगी, क्योंकि वे एक प्रौद्योगिकीविद द्वारा लिये जाते हैं। खोज की प्रकृति के आधार पर इस बिंदु पर अक्सर साथ-साथ अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल हो सकता है।
आम तौर पर असामान्य उपस्थिति के कारणों का पाया जाना साध्य हो सकता है। अगर पर्याप्त निश्चितता के साथ कारणों का निर्धारण नहीं हो सकता है, तो बायोप्सी की सिफारिश की जाएगी. बायोप्सी प्रक्रिया उस स्थल से वास्तविक ऊतक का पता लगाने के लिए की जाती है, ताकि रोगविज्ञानी उस असामान्यता के सटीक कारण की जांच लिए माइक्रोस्कोप के जरिये पता लगा सके. अतीत में, बायोप्सी स्थानीय या सामान्य एनेस्थेसिया (संज्ञाहरण) के जरिये अक्सर सामान्य सर्जरी के लिए की जाती थी। अब तो बहुसंख्यक लोग यह सुनिश्चित करने के लिए अल्ट्रासाउंड या स्तन चित्र संबंधी मार्गदर्शन का उपयोग करते हैं, कि प्रभावित क्षेत्र की बायोस्पी हो चुकी है। इन मुख्य बायोप्िसयों में केवल स्थानीय संज्ञाहरण की जरूरत होती है, जैसे कि दांत के उपचार की प्रक्रिया में किया जाता है।
एक अध्ययन से पता चलता है कि सूई के जरिये लीवर के कैंसर की बायोप्सी शायद ही कभी कैंसर के प्रसार में वृद्धि करेगा और सूई के जरिये स्तन कैंसर की बायोप्सी के मामले में भी ऐसा ही होता है।http://bmj.bmjjournals.com/cgi/content/full/328/7438/507
परिणाम
thumb|right|सामान्य रूप (बाएं) बनाम कैंसर (दाएं) मैमोग्राफी छवि.
नैदानिक मेम्मोग्राम के लिए वापस बुलाये जाने के बाद अक्सर महिलाएं काफी परेशान हो जाती हैं। इनमें से ज्यादातर में गलत सकारात्मक परिणाम दिखते हैं। ये अनुमानित आंकड़े इस बात की जानकारी में मदद करते हंै: हर 1,000 अमेरिकी महिलाओं, जिनकी स्क्रीनिंग की गई, में करीब 7% (70) वापस नैदानिक सत्र के बुलाई जायेंगी (हालांकि कुछ अध्ययनों में इनकी संख्या अनुमानित रूप से 10% -15% के करीब हो सकती है). इन व्यक्तियों में से 10 को बायोप्सी के लिए भेजा जाएगा, शेष 60 में गैर-नुकसानदेह कारण पाये जाते हैं। बायोप्सी के लिए भेजे गये 10 मामलों में केवल 3.5 प्रतिशत में ही कैंसर पाया जायेगा, जबकि 6.5 प्रतिशत में नहीं. कैंसर से पीड़ित 3.5 प्रतिशत लोगों में से केवल 2 में शुरूआती दौर का कैंसर पाया जायेगा, जो कि अनिवार्य रूप से इलाज के बाद ठीक हो जाएगा. मैमोग्राम के परिणामों को अक्सर बाई-रैड्स एसेसमेंट कैटोगरी में रखा जाता है, जिसे "बाई-रैड्स स्कोर" भी कहा जाता है। ये श्रेणियां 0 (अपूर्ण) से 6 श्रेणी (ज्ञात बायोप्सी-सिद्ध सांघातिकता) के बीच होती हैं। ब्रिटेन में मैमोग्राम को 1-5 के बीच पैमाने पर (1=सामान्य, 2=शुरुआती 3=माध्यमिक स्थिति, 4= सांघातिकता का शक, 5=सांघातिक) मापा जाता है।
हालांकि स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए मैमोग्राफी एकमात्र तरीका है, जिससे जान बचाई जा सकती है, पर यह एकदम सटीक नहीं है। मैमोग्राफी द्वारा पहचान से बच निकले कैंसर रोगियों की संख्या आमतौर पर 10% से 30% है। इसका मतलब यह है कि प्रति 100000 महिलाओं में से जिन 350 महिलाओं में स्तन कैंसर पाया जाता है,जुलाई 2010 उनमें से करीब 35 से 105 में मैमोग्राफी द्वारा कैंसर का पता नहीं लगाया जा सका. कैंसर का पता नहीं लग पाने के कारणों में पर्यवेक्षक की चूक शामिल है, लेकिन एकाधिक बार ऐसा होता है कि स्तन कैंसर स्तन के दूसरे घने ऊतकों में छिप जाता है और मैमोग्राम की पूर्वव्यापी समीक्षा के बाद भी नहीं दिख पाता. इसके अलावा, स्तन कैंसर के एक रूप लॉबुलर (पालिरुप) कैंसर के विकसित होने तरीका ऐसा है, जो मैमोग्राम पर अपनी छाया डाल देता है और जिससे उन्हें स्तन के सामान्य ऊतकों से पृथक करना संभव नहीं होता.
मैमोग्राम से चुक गये कैंसर रोगियों संख्या को कम करने के लिए कम्प्यूटर सहायता प्राप्त निदान (सीएडी) का परीक्षण किया जा रहा है। एक परीक्षण में कंप्यूटर ने 71% मामलों की पहचान की, जिनका पता लगाने में चिकित्सक चुक गये थे। हालांकि, कंप्यूटर ने चिकित्सकों की तुलना में कैंसर रहित पुंजों की ओर दो बार ध्यान आकृष्ट किया। मैमोग्राम के एक बड़े सेट के एक दूसरे अध्ययन में, एक कंप्यूटर ने छह बायोप्सी की सिफारिश की, जबकि चिकित्सकों ने ऐसा नहीं किया था। ये सभी छह मामले कैंसर के निकले, जो नजरअंदाज हो जाते.Destounis SV, DiNitto P, Logan-Young W, Bonaccio E, Zuley ML, Willison KM Can computer-aided detection with double reading of screening mammograms help decrease the false-negative rate? Initial experience https://archive.org/details/sim_radiology_2004-08_232_2/page/578 Radiology 232 2 2004 578–84 15229350 10.1148/radiol.2322030034 सामान्यतया, मैमोग्राफी की स्क्रीनिंग में सीएडी प्रणालियों की विशिष्टता काफी कम है और तुलनात्मक रूप से दोहरे पाठन की क्षमता भी कम है (टेलर पी, चैंपनेस जे, गिवेन विल्सन आर, जॉनस्टॉन के, पॉट्स एच (2005) हालांकि कम्प्यूटर की सहायता से पता लगाने का प्रभाव मैमोग्राफी की स्क्रीनिंग की संवेदनशीलता और विशिष्टता को प्रेरित करता है। स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी आकलन, 9 (6)).
ऐसे आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, जिनसे पता चलता है कि सीएडी कुछ अतिरिक्त क्षेत्रों में कैंसर का पता लगा सकते हैं और इसे इस परिप्रेक्ष्य में रखा जाना चाहिए. अतिरिक्त खोज की दर 20% थी, इस प्रकार 10,000 महिलाओं के समूह, जिनमें 40 को कैंसर है, में से सीएडी अतिरिक्त 8 में से कैंसर का पता लगाने में मदद कर सकते है। कैंसर के ये अतिरिक्त प्रकार प्रारंभिक अवस्था वाले और छोटे हो सकते हैं।अगस्त 2008 2006 तक इस तरह का कोई आंकड़ा नहीं था, जिससे पता चले कि इन अतिरिक्त कैंसरग्रस्त रोगियों का पता लगाने के बाद उनके जीवित रहने की दर पर कोई असर पड़ा. कुछ का मानना है कि इस तरह के कैंसर के अगली स्क्रीनिंग में ही पता लग पाने की संभावना है, अभी भी से निदानयोग्य स्तर पर है और इसलिए यह सिद्ध किया जाना बाकी है कि सीएडी अंततः रोगी के परिणाम पर कोई असर डाल पायेगा.
1 अक्टूबर 2008 को ब्रिटिश शोधकर्ताओं द्वारा जारी अध्ययन से पता चला कि एक चिकित्सक द्वारा एक बार पढ़ने के संयोजन के रूप में सीएडी का उपयोग एक चिकित्सक द्वारा दो बार पढ़ने जितना लाभदायक हो सकता है। 31000 महिलाओं के अध्ययन, जो अब तक का सबसे बड़ा अध्ययन था, से पता चला कि दो चिकित्सकों की तुलना में एक चिकित्सक का सीएडी के साथ रोग का पता लगाने की दर लगभग समान थी।http://www.cnn.com/2008/HEALTH/conditions/10/01/computer.mammogram.help.ap/index.html संग्रहीत प्रति 27 अगस्त 2010 18 दिसंबर 2008 https://web.archive.org/web/20081218020533/http://www.cnn.com/2008/HEALTH/conditions/10/01/computer.mammogram.help.ap/index.html dead जिन 227 कैंसर रोगियों का पता चला, उनमें से दो अलग-अलग चिकित्सकों द्वारा पता लगाये गये कैंसर के 199 मामलों में सीएडी विधि से द्वारा पता लगाये गये रोगियों की संख्या सिर्फ एक (यानी 198) कम थी।
अच्छा
जोखिम
गलत सकारात्मक
किसी भी छानबीन प्रक्रिया का लक्ष्य भारी संख्या में रोगियों की जांच और उनमें से संभावित गंभीर हालत वाले रोगियों का पता लगाना है। इन रोगियों को आगे के आमतौर पर अधिक तीव्रता वाले परीक्षण के लिए भेजा जाता
है। इस प्रकार स्क्रीनिंग परीक्षा का मकसद निर्णायक नहीं है, बल्कि इसका मकसद उच्च संवेदनशीलता है, जिससे किसी कैंसर का पता लगाने में चूक न हो जाये. इस उच्च संवेदनशीलता का परिणाम अपेक्षाकृत बड़ी संख्या में आये परिणामों के रूप में होता है, जिससे रोग के बिना रोगी संदिग्ध के रूप में माना जाता है। यही मैमोग्राफी का सच है। एक जांच सत्र (7 प्रतिशत) के बाद रोगियों को एक आगे के परीक्षण के लिए वापस बुलाया जाता है तो कभी-कभी इसे "गलत सकारात्मक" और एक त्रुटिपूर्ण संकेत कहा जाता है। वास्तव में, यह कई स्वस्थ मरीजों को आगे की जांच के लिए इसलिए बुलाना आवश्यक है, ताकि जितना संभव हो सके कैंसर के रोगियों का पता लगाया सके.
शोध से पता चलताhttp://www.annals.org/cgi/content/abstract/146/7/502 Systematic Review: The Long-Term Effects of False-Positive Mammograms Annals of Internal Medicine Noel T. Brewer, PhD; Talya Salz, BS; and Sarah E. Lillie, MPH (University of North Carolina at Chapel Hill) 146 7 3 अप्रैल 2007 17 फरवरी 2008 17404352 Annals of Internal Medicine 502 कि गलत सकारात्मक स्तन चित्र महिलाओं की खुशहाली और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। गलत सकारात्मक परिणाम प्राप्त कुछ महिलाएं अधिक नियमित स्क्रीनिंग के लिए वापस आ सकती हैं और स्तन की आत्म परीक्षा की दर बढ़ सकती है। हालांकि, गलत सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने वाली कुछ महिलाओं को स्तन
कैंसर होने की आशंका के बारे में चिंता, परेशानी और दुख हो सकता है और ऐसा भाव कई वर्षों तक रह सकता है।
गलत नकारात्मक
इसी समय, स्तन चित्र में ट्यूमर का पता लगाने में चूक या "गलत नकारात्मक" दर भी हो सकती है। नकारात्मक खोज के आंकड़ों का पता लगाना साधारणत: इसलिए मुश्किल है क्योंकि उस हर महिला का मास्टेक्टोमीज (स्तन को काटकर हटाने) नहीं होता है, जिनके पास सही-सही गलत नकारात्मक दर वाली मैमोग्राफी है। गलत नकारात्मक दर का अनुमान कई वर्षों तक भारी संख्या में रोगियों के बारे में आगे की गहन छानबीन पर निर्भर हैं। यह व्यवहार में काफी कठिन है, क्योंकि कई महिलाएं नियमित रूप से मैमोग्राफी के लिए वापस नहीं आतीं, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि उन्हें कैंसर हुआ था या नहीं. डॉ॰ शमूएल एस इप्सटीन ने अपनी पुस्तक द पॉलिटिक्स ऑफ कैंसर में ने दावा किया है कि 40 से 49 वर्ष की महिलाओं में प्रत्येक मैमोग्राफी में चार में से एक महिला में कैंसर का पता लगाने में चूक हुई. शोधकर्ताओं ने पाया है कि युवा महिलाओं में स्तन ऊतक काफी घने होते हैं और गांठ का पता लगाना मुश्किल होता है। इस कारण से, रजोनिवृत्ति से पहले कराये गये स्तन चित्रण (प्रेट) में गलत नकारात्मक रिपोर्ट दो बार तक हो सकती है। यही कारण है कि ब्रिटेन में स्क्रीनिंग कार्यक्रम में 50 वर्ष की उम्र तक महिलाओं को स्क्रीनिंग कार्यक्रम के लिए महिलाओं को बुलाना नहीं शुरू किया जाता.
कैंसर की खोज में हुई चूकों का महत्व स्पष्ट नहीं है, खासकर तब जब अगर औरत हर साल स्तन चित्रण कराती है। संबंधित स्थिति पर किये गये अनुसंधान से पता चलता है कि छोटे कैंसर, जिनपर भले ही तुरंत निदानमूलक काम नहीं शुरू किया गया, लेकिन कई वर्षों की अवधि तक निगरानी रखी गई, उनके अच्छे परिणाम दिखे. 3184 महिलाओं के एक समूह का मैमोग्राम किया गया, जिन्हें औपचारिक रूप से "संभावित रूप से शुरूआती" के रूप में वर्गीकृत किया गया था। रोगियों का यह वर्गीकरण स्पष्ट रूप से सामान्य नहीं हैं, लेकिन इसमें मामूली चिंता के कुछ क्षेत्र शामिल हैं। इन परिणामों में रोिगयों की बायोप्सी नहीं की गई, पर तीन साल के लिए हर छह महीने पर मैमोग्राफी के नतीजों पर नजर रखी गई, ताकि कोई परिवर्तन नहीं होने गारंटी पाई जा सके. इन 3184 महिलाओं में से 17(0.5%) को कैंसर था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब इनका पता लगाया गया तो ये अभी भी 0 या 1 के शुरूआती चरण में थे। पांच साल के उपचार के बाद इन 17 महिलाओं में से किसी में पुनरावृत्ति के सबूत नहीं थे। इस प्रकार, शुरूआती दौर के छोटे कैंसर, जिनका निदान हालांकि तुरंत नहीं शुरू किया गया, पर अभी भी पे पूरी तरह से इलाज योग्य हैं। (सिकेल्स, एजेआर 179:463-468, 1991).
अन्य जोखिम
मैमोग्राफी के साथ जुड़ा विकिरण कुप्रभाव स्क्रीनिंग का एक संभावित खतरा है। इस कुप्रभाव का खतरा सबसे अधिक नवयुवतियों को होता है। मैमोग्राफी से विकिरण कुप्रभाव पर किये गये सबसे बड़े अध्ययन का निष्कर्ष है कि 40 वर्ष या अधिक उम्र की महिलाओं के लिए विकिरण के कारण होने वाला स्तन कैंसर मामूली था, विशेष रूप से मैमोग्राफिक स्क्रीनिंग के संभावित लाभ की तुलना में लाभ से जोखिम अनुपात के साथ एक के मुकाबले 48.5 लोगों को बचाया गया, जिसकी मौत विकिरण के कुप्रभाव से हुई.Feig S, Hendrick R Radiation risk from screening mammography of women aged 40-49 years J Natl Cancer Inst Monogr 22 119–24 1997 9709287 नेशलन कैंसर इंस्टीच्यूट और युनाइटेड स्टेट्स प्रिवेंटिव टास्क फोर्स जैसे संगठन स्क्रीनिंग दिशानिर्देश तैयार करते समय ऐसे जोखिम का ध्यान रखते हैं।स्तन कैंसर के लिए स्क्रीनिंग: सिफारिशें और तर्क https://web.archive.org/web/20130616040709/http://www.ahrq.gov/clinic/3rduspstf/breastcancer/brcanrr.htm 16 जून 2013 . अमेरिका निरोधक कार्यबल से हेल्थकेयर अनुसंधान और गुणवत्ता का एजेंसी के एक भाग. फरवरी 2002 को विमोचन; 9 अप्रैल 2007 को अभिगमित.
बहुसंख्यक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि 35 से कम उम्र की कम जोखिम वाली महिलाओं के लिए स्तन कैंसर का खतरा इतना ज्यादा नहीं है कि उन्हें विकिरण के संभावित कुप्रभाव का खतरा उठाना पड़े. इस कारण से और 35 से कम उम्र की महिलाओं में स्तन की विकिरण संवेदनशीलता संभवतः ज्यादा उम्र की महिलाओं की तुलना में अधिक है, इसलिए ज्यादातर रेडियोलॉजिस्ट 40 से कम उम्र की महिलाओं की मैमोग्राफी नहीं करते. हालांकि, अगर किसी विशेष रोगी में कैंसर का महत्वपूर्ण जोखिम (बीआरसीए सकारात्मक, बहुत सकारात्मक पारिवारिक इतिहास, स्पर्शनीय पुंज) है, तो मैमोग्राफी फिर भी महत्वपूर्ण हो सकती है। अक्सर, रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड या एमआरआई इमेजिंग का उपयोग करके मैमोग्राफी से बचने की कोशिश करते हैं।
मैमोग्राफी और 40 से 55 के बीच उम्र की महिलाओं के बारे में आंकड़े सबसे विवादास्पद रहे हैं। 1992 में कनाडा के राष्ट्रीय स्तन कैंसर अध्ययन से पता चला कि मैमोग्राफी (1980 में की गई) 50 से 60 उम्र की महिलाओं की मृत्यु दर पर सकारात्मक प्रभाव नहीं था।http://www.ncbi.nlm.nih.gov/entrez/query.fcgi?cmd=Retrieve&db=PubMed&dopt=Abstract&list_uids=1423088 यह अध्ययन हालांकि, सिर्फ यह परिणाम हासिल करने के लिए किया गया था। अध्ययन के आलोचकों ने कहा कि इसमें बहुत ही गंभीर प्रकार की खामियां थीं, जिनसे ये परिणाम गलत साबित हुए.
इस बात के भी सबूत हैं, जिनसे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि महिलाओं की जांच के दौरान कैंसर की पहचान के लिए जरूरत से ज्यादा कवायद की गई। इस तरह के कैंसर इन महिलाओं को उनके पूरे जीवनकाल में कभी प्रभावित नहीं करते. जब 2000 महिलाओं को 10 साल की नैदानिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा तो उनमें से 10 में स्तन कैंसर के निदान के लिए जरूरत से ज्यादा नैदानिक प्रक्रिया अपनाई गई और जान बचाने के लिए अनावश्यक चिकित्सा की गई।http://www.cochrane.dk/research/Screening%20for%20breast%20cancer%20with%20mammography%20(Cochrane%20review).pdf संग्रहीत प्रति 27 अगस्त 2010 1 जुलाई 2007 https://web.archive.org/web/20070701010715/http://www.cochrane.dk/research/Screening%20for%20breast%20cancer%20with%20mammography%20(Cochrane%20review).pdf dead
हालांकि 40 और 50 के बीच की महिलाओं की स्क्रीनिंग अब भी विवादास्पद है, सबूतों की संख्या संकेत करती है कि रोग के शुरू में ही पता लगाने संदर्भ में इसके थोड़े लाभ हैं। वर्तमान में, अमेरिकन कैंसर सोसायटी, नेशनल कैंसर इंस्टीच्यूट और अमेरिकन कॉलेज ऑफ रेडियोलॉजी 40 से 49 वर्ष की उम्र की महिलाओं को हर 2 साल पर मेमोग्राफी के लिए प्रोत्साहित करते हैं।राष्ट्रीय कैंसर संस्थान से स्क्रीनिंग मैमोग्राम्स: प्रश्न और उत्तर https://web.archive.org/web/20070415032727/http://www.cancer.gov/cancertopics/factsheet/Detection/screening-mammograms 15 अप्रैल 2007 . मई 2006 को विमोचन; 9 अप्रैल 2007 को अभिगमित. इसके विपरीत, चिकित्सकों के एक बड़े समूह अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजीशियन ने हाल ही में 40 से 49 वर्ष की उम्र की महिलाओं को थोक भाव से हर दो साल पर स्क्रीनिंग कराने के विपरीत व्यक्तिगत स्क्रीनिंग योजनाओं को प्रोत्साहित किया है।अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजीशियन से 40 से 49 साल की महिलाओं के लिए मैमोग्राफी स्क्रीनिंग: एक नैदानिक अभ्यास दिशानिर्देश एसीपी से. अप्रैल 2007 को विमोचन; 11 अप्रैल 2007 को अभिगमित. हाल ही में अमेरिकी प्रिवेंटिव सर्विस टास्क फोर्स ने कहा कि 40 से 50 वर्ष की महिलाओं के लिए नियमित जांच कराना आवश्यक नहीं है। उनकी रिपोर्ट में कहा गया है कि 50 साल की उम्र से पहले जांच के लाभ जोखिम से ज्यादा अहम नहीं हैं। Sammons Mary-Beth http://www.aolhealth.com/bio/mary-beth-sammons New Mammogram Guidelines Spark Controversy AOL Health November 2009 http://www.aolhealth.com/condition-center/breast-cancer/screening-guidelines November 2009 22 नवंबर 2009 https://web.archive.org/web/20091122124020/http://www.aolhealth.com/condition-center/breast-cancer/screening-guidelines dead
मैमोग्राफी स्क्रीनिंग की आलोचना
स्तन कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में ही पता लगाने की जांच के उपकरण के रूप में मैमोग्राफी के उपयोग पर बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कैंसर का पता लगाने के लिए एक बड़ी संख्या में महिलाओं की जांच की आवश्यकता होती है। कोपंस हमें याद दिलाते हंै कि 1990 के बाद से स्तन कैंसर से मौत दर में 30% की गिरावट आई है और स्वीडन तथा नीदरलैंड में किये गये अध्ययनों से पता चलता है कि मैमोग्राफी स्क्रीनिंग के कारण कैंसर से होने वाली मौतों में दो तिहाई की कमी आई है।कोपंस डीबी.: कोपंस: स्क्रीनिंग मैमोग्राफी के आलोचक गलत क्यों हैं https://web.archive.org/web/20120226065457/http://www.diagnosticimaging.com/breast/content/article/113619/1493126 26 फ़रवरी 2012 . नैदानिक इमेजिंग. 2009;31(12):18-24. कीन एंड कीन ने संकेत दिया कि 50 साल की उम्र की शुरूआत से बार-बार की गई मैमोग्राफी से 15 वर्ष तक जांच की गईं 1000 महिलाओं में से 1.8 का जीवन बचाने में कामयाबी मिली.http://www.medscape.com/viewarticle/590535 Nick Mulcahy अप्रैल 2, 2009 Medscape Screening Mammography Benefits and Harms in Spotlight Again यह परिणाम निदान में नकारात्मक त्रुटियों, जरूरत से ज्यादा उपचार और विकिरण के संपर्क के खिलाफ देखा जाना चाहिए. समालोचक तर्क देते हैं कि इसके लाभ अधिक हैं। स्क्रीनिंग के कोचरेन विश्लेषण से संकेत मिलता है कि यह "स्पष्ट नहीं है कि स्क्रीनिंग से नुकसान की तुलना में ज्यादा फायदा होता है।" उनके विश्लेषण के अनुसार 2000 महिलाओं में एक का जीवन स्क्रीनिंग के कारण 10 वर्ष लंबा होगा, तथापि अन्य 10 स्वस्थ महिलाएं अनावश्यक रूप से स्तन कैंसर के इलाज से गुजरेंगी.http://www.cochrane.org/reviews/en/ab001877.html Screening for breast cancer with mammography Gøtzsche PC, Nielsen M अक्टूबर 23, 2001 (updated June 1, 2005) अप्रैल 25, 2009 8 नवंबर 2011 https://web.archive.org/web/20111108065956/http://www2.cochrane.org/reviews/en/ab001877.html dead न्युमैन बताते हैं कि मैमोग्राफी की स्क्रीनिंग कुल मिलाकर मृत्यु दर कम नहीं करती, लेकिन कैंसर का डर पैदा कर उल्लेखनीय नुकसान और अनावश्यक शल्य हस्तक्षेपों का का कारण बनती हैं।David H. Newman Hippocrates' Shadow 2008 https://archive.org/details/hippocratesshado0000newm Scibner (2008) 1-4165-5153-0 193
अंत में, हाल के एक एक महत्वपूर्ण लेख से पता चलता है कि एक सफल स्क्रीनिंग कार्यक्रम का परिणाम स्तन कैंसर की शुरुआती दौर के मामलों की संख्या बढ़नी चाहिए और साथ में बाद की अवस्था के कैंसर की संख्या में कमी आनी चाहिए. हालांकि यह चालू मैमोग्राफी स्क्रीनिंग के साथ नहीं हो रहा है।"स्तन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के ऊपर पुनर्विचार स्क्रीनिंग," जेएएमए (JAMA), 21 अक्टूबर 2009, खंड 302, नं. 15, पृ. 1685-1692
मैमोग्राफी के विकल्प
हालांकि मैमोग्राफी का खर्च अपेक्षाकृत कम है, इसकी संवेदनशीलता आदर्श नहीं है। ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि इसका दायरा स्तन के घनत्व जैसे कारकों के आधार पर 45 प्रतिशत से लगभग 90 प्रतिशत तक होता है। एक्स-रे आधारित प्रौद्योगिकी पूरी तरह से हानिरहित नहीं है, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है। इसलिए वैकल्पिक प्रौद्योगिकी के उपयोग पर काफी अनुसंधान किये जा रहे हैं।
बीटी टेस्ट https://web.archive.org/web/20120716045815/http://www.provistals.com/BTTestOverview.aspx 16 जुलाई 2012 (रक्त आधारित स्क्रीनिंग जांच)
बीसी टैक्टजनवरी 2021 InternetArchiveBot (रक्त आधारित परीक्षण)
स्तन एमआरआई
ब्रेस्टलाइट नाम के एक वाणिज्यिक उपकरण मेंhttp://uk.breastlight.com/ संग्रहीत प्रति 27 अगस्त 2010 4 मार्च 2016 https://web.archive.org/web/20160304135353/http://uk.breastlight.com/ dead एक महिला अंधेरे कमरे में अपने स्तनों के जरिये लाल शक्तिशाली प्रकाश प्रवाहित करती है, जिससे प्रभावित क्षेत्र चिंता के कारण हो सकते हैं। इस उपकरण की नैदानिक परीक्षणों में जांच की गई है।
इन्फ्रारेड मैमोग्राफी
विनियमन
संयुक्त राज्य अमेरिका और इसके क्षेत्रों में (सैन्य ठिकानों सहित) मैमोग्राफी सुविधाएं मैमोग्राफी क्वालिटी स्टैंडर्ड एक्ट (एमक्यूएसए) का विषय हैं। इस अधिनियम के तहत एफडीए की मंजूरी वाले निकाय के माध्यम से वार्षिक निरीक्षण और हर 3 साल पर मान्यता की आवश्यकता होती है। निरीक्षण या मान्यता की प्रक्रिया के दौरान अगर सुविधाओं में कमी पाई गई तो सुधारात्मक कार्रवाई सत्यापित करने तक मैमोग्राम करने से रोका जा सकता है या चरम मामलों में उन्हें अपने पिछले रोगियों को सूचित करना पड़ता है कि उनके परीक्षण स्तरीय नहीं हैं और उनपर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए.
इस समय एमक्यूएसए केवल पारंपरिक मैमोग्राफी पर ही लागू होता है और स्तन के अल्ट्रासाउंड, स्टीरियोटैक्टिक ब्रेस्ट बायोप्सी या स्तन एमआरआई जैसे स्कैन पर नहीं लागू होता.
इन्हें भी देखें
डिजिटल मैमोग्राफी और पीएसीएस (PACS)
जेरोमैमोग्राफी
सन्दर्भ
2
बाहरी कड़ियाँ
Mammography
मैमोग्राफीक छवि विश्लेषण मुखपृष्ठ
मैमोग्राफी रोग अध्ययन पर राष्ट्रीय कैंसर संस्थान वक्तव्य https://web.archive.org/web/20100822185309/http://www.cancer.gov/newscenter/mammstatement31jan02 22 अगस्त 2010
राष्ट्रीय कैंसर संस्थान से स्क्रीनिंग मैमोग्राम्स: प्रश्न और उत्तर https://web.archive.org/web/20070415032727/http://www.cancer.gov/cancertopics/factsheet/Detection/screening-mammograms 15 अप्रैल 2007
अमेरिकन कैंसर सोसायटी: मैमोग्राम्स और अन्य स्तन इमेजिंग प्रक्रिया https://web.archive.org/web/20100401060952/http://www.cancer.org/docroot/PED/content/PED_2_3X_Mammography_and_Other_Breast_Imaging_Procedures.asp 1 अप्रैल 2010
स्क्रीनिंग मैमोग्राफी पर अमेरिका निरोधक कार्यबल की सिफारिशों https://web.archive.org/web/20130623042638/http://www.ahrq.gov/clinic/uspstf/uspsbrca.htm 23 जून 2013
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