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मेज नदी
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अगस्त 2023
भीलवाड़ा जिले के धनवाड़ा गांव की पहाड़ियों की तलहटी से निकलनेवाली मेज नदी अपने उदगम से लेकर करीब 100 किमी का सफर तय कर लाखेरी के पाली गांव में चंबल नदी में मिल जाती है। बूंदी जिले के आखिरी छोर तक पहुंचने पर नदी ऐसे प्राकृतिक सौंदर्य को जन्म देती है, जो अदभुत है। सखावदा में नदी सर्पाकार रूप धारण कर लेती है। इससे अलग यह नदी अपने उदगम से लेकर अंतिम सफर तक 99 आकर्षक मोड़ लेती है, जो अप्रतिम सौंदर्य को जन्म देती है। नदी चंबल में मिलने तक अविरल धारा के रूप में बहती है। मेज नदी जिले की सबसे लंबी नदी के रूप में जानी जाती है।
जिले में मेज नदी बड़े हिस्से से घूमते हुए गुजरती है। यह जिले में जलस्रोत का एक बड़ा जरिया है, परन्तु इसकी सुंदरता इसके आकर्षक घुमाव हैं। जानकार बताते हैं कि नदी के 99 मोड़ अलग-अलग जगहों पर ऐसी प्राकृतिक छटा बिखरते हैं जो देखते ही बनती है। खासकर नया गांव एनीकट के बाद नदी का लावण्य इन सर्पाकार घुमाव के कारण बढ़ जाता है। सखावदा में आकर तो यह सौंदर्य ऐसी प्राकृतिक छटा बिखेरता है, जिसे देखकर लोग अचंभित हो जाते हैं।
बाजन, कुरान व मांगली इसकी सहायक नदियां है। घोडा पछाड़ नदी मांगली की सहायक नदी है। जो बिजौलिया की झील से निकलकर मांगली नदी में मिलती है।
मांगली नदी पर ही बूंदी जिले में भीमलत जलप्रपात बना हुआ़ है। इस नदी पर बुंदी में गुड्डा बांध बना हुआ हैं।जो नहरों के माध्यम से हिंडोली में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाता है।
श्रेणी:चम्बल नदी
श्रेणी:राजस्थान की नदियाँ