411 REFERENCE · Wikipedia
मज्झिम निकाय के सुत्त
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
मूलपण्णासपाळि
१. मूलपरियायवग्गो
सुत्तविषय १. मूलपरियायसुत्तंत्रिपिटक के सबसे कठिन सूत्रों में से एक। इसमें समझ की चार श्रेणियों के बारे में बताया गया है। २. सब्बासवसुत्तं आस्रव (आसव) को छोड़ने के बारे में बताने वाला सूत्र ३. धम्मदायादसुत्तं मध्यम मार्ग का उपदेश दिया गया है। ४. भयभेरवसुत्तं पहाड़ों में अकेले रहने का डर और उन पर विजय पाने के सूत्र ५. अनङ्गणसुत्तं अङ्गण अथवा पापमय इच्छाओं को छोड़ने का सूत्र ६. आकङ्खेय्यसुत्तं शील पालन ७. वत्थसुत्तं मनुष्य के मन को अच्छे गुणों से शुद्ध करने का सूत्र ८. सल्लेखसुत्तं पाप की अवनति और पुण्य की उन्नति का सूत्र ९. सम्मादिट्ठिसुत्तं सम्यक दृष्टि की व्याख्या१०. सतिपट्ठानसुत्तंस्मृतिप्रस्थान या सचेतनशीलता का महत्त्वपूर्ण सूत्र; कायानुपस्सना, वेदनानुपस्सना, चित्तानुपस्सना, धम्मानुपस्स्ना का वर्णन
२. सीहनादवग्गो
सुत्त विषय १. चूळसीहनादसुत्तं(म.नि. ११) — बुद्ध ने धम्म की श्रेष्ठता बताई, और कहा कि निर्वाण केवल आर्य अष्टांग मार्ग पर चलकर ही पाया जा सकता है। २. महासीहनादसुत्तं(म.नि. १२) — इसमें बुद्ध के जीवन का वर्णन है। बुद्ध अपने आध्यात्मिक विकास के बारे में विस्तार से बताते हैं, जिसमें ज्ञान प्राप्ति से पहले की उनकी कठोर तपस्या भी शामिल है। ३. महादुक्खक्खन्धसुत्तं(म.नि. १३) — बुद्ध ने कामसुख, भौतिक आसक्ति, और अस्तित्व की खोज से होने वाले दुख के स्वभाव की व्याख्या की है। ४. चूळदुक्खक्खन्धसुत्तं(म.नि. १४) — बुद्ध कामसुख की आलोचना करते हैं, और कहते हैं कि इनसे दुःख, कुण्ठा, अधिक लालसा होती है। ५. अनुमानसुत्तं(म.नि. १५) — पूज्य महामोग्गल्लान भिक्षु इस बारे में बात करते हैं कि कोई अपने या दूसरों में बुरे गुणों की उपस्थिति का अनुमान कैसे लगा सकता है तथा आत्मचेतना और आत्मसुधार का महत्व क्या है। ६. चेतोखिलसुत्तं(म.नि. १६) — बुद्ध आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग में आने वाली पाँच मानसिक बाधाओं के बारे में बताते हैं, साथ ही उनसे पार पाने का उपाय भी बताते हैं। ७. वनपत्थसुत्तं(म.नि. १७) — बुद्ध ने (घर से दूर) वन में वास करने का लाभ और उसकी चुनौतियों के बारे में बताया, और भिक्षुओं को आन्तरिक शान्ति व प्रज्ञा के लिए एकान्त में रहने के लिए प्रोत्साहित किया। ८. मधुपिण्डिकसुत्तं(म.नि. १८) — बुद्ध ने सम्क्षेप में बताया है कि धारणा और मानसिक प्रसार दुःख का कारण बनते हैं, यहाँ दुःख के चक्र को तोड़ने के लिए मनशीलता को प्रोत्साहित किया है। ९. द्वेधावितक्कसुत्तं(म.नि.१९) — बुद्ध ने कुशल और अकुशल विचारों में अन्तर करने के विवेक के अपने अनुभव के बारे में बताया, जिससे एकाग्रता बढ़ती है। १०. वितक्कसण्ठानसुत्तं(म.नि. २०) — बुद्ध ने बुरे विचारों से बाहर आने तथा मन को शांत और एकाग्र करने की विधि बतायी।
३. ओपम्मवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. ककचूपमसुत्तं, २. अलगद्दूपमसुत्तं, ३. वम्मिकसुत्तं, ४. रथविनीतसुत्तं, ५. निवापसुत्तं, ६. पासरासिसुत्तं, ७. चूळहत्थिपदोपमसुत्तं, ८. महाहत्थिपदोपमसुत्तं, ९. महासारोपमसुत्तं, १०. चूळसारोपमसुत्तं।
४. महायमकवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. चूळगोसिङ्गसुत्तं, २. महागोसिङ्गसुत्तं, ३. महागोपालकसुत्तं, ४. चूळगोपालकसुत्तं, ५. चूळसच्चकसुत्तं, ६. महासच्चकसुत्तं, ७. चूळतण्हासङ्खयसुत्तं, ८. महातण्हासङ्खयसुत्तं, ९. महाअस्सपुरसुत्तं, १०. चूळअस्सपुरसुत्तं।
५. चूळयमकवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. सालेय्यकसुत्तं, २. वेरञ्जकसुत्तं, ३. महावेदल्लसुत्तं, ४. चूळवेदल्लसुत्तं, ५. चूळधम्मसमादानसुत्तं, ६. महाधम्मसमादानसुत्तं, ७. वीमंसकसुत्तं, ८. कोसम्बियसुत्तं, ९. ब्रह्मनिमन्तनिकसुत्तं, १०. मारतज्जनीयसुत्तं।
मज्झिमपण्णासपाळि
१. गहपतिवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- कन्दरकसुत्तं, अट्ठकनागरसुत्तं, सेखसुत्तं, पोतलियसुत्तं, जीवकसुत्तं, उपालिसुत्तं, कुक्कुरवतिकसुत्तं, अभयराजकुमारसुत्तं, बहुवेदनीयसुत्तं, अपण्णकसुत्तं।
२. भिक्खुवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- अम्बलट्ठिकराहुलोवादसुत्तं, महाराहुलोवादसुत्तं, चूळमालुक्यसुत्तं, महामालुक्यसुत्तं, भद्दालिसुत्तं, लटुकिकोपमसुत्तं, चातुमसुत्तं, नळकपानसुत्तं, गोलियानिसुत्तं, कीटागिरिसुत्तं।
३. परिब्बाजकवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. तेविज्जवच्छसुत्तं, २. अग्गिवच्छसुत्तं, ३. महावच्छसुत्तं, ४. दीघनखसुत्तं, ५. मागण्डियसुत्तं, ६. सन्दकसुत्तं, ७. महासकुलुदायिसुत्तं, ८. समणमुण्डिकसुत्तं, ९. चूळसकुलुदायिसुत्तं, १०. वेखनससुत्तं।
४. राजवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. घटिकारसुत्तं, २. रट्ठपालसुत्तं, ३. मघदेवसुत्तं, ४. मधुरसुत्तं, ५. बोधिराजकुमारसुत्तं, ६. अङ्गुलिमालसुत्तं, ७. पियजातिकसुत्तं, ८. बाहितिकसुत्तं, ९. धम्मचेतियसुत्तं, १०. कण्णकत्थलसुत्तं।
५. ब्राह्मणवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. ब्रह्मायुसुत्तं, २. सेलसुत्तं, ३. अस्सलायनसुत्तं, ४. घोटमुखसुत्तं, ५. चङ्कीसुत्तं, ६. एसुकारीसुत्तं, ७. धनञ्जानिसुत्तं, ८. वासेट्ठसुत्तं, ९. सुभसुत्तं, १०. सङ्गारवसुत्तं।
उपरिपण्णासपाळि
१. देवदहवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. देवदहसुत्तं, २. पञ्चत्तयसुत्तं, ३. किन्तिसुत्तं, ४. सामगामसुत्तं, ५. सुनक्खत्तसुत्तं, ६. आनेञ्जसप्पायसुत्तं, ७. गणकमोग्गल्लानसुत्तं, ८. गोपकमोग्गल्लानसुत्तं, ९. महापुण्णमसुत्तं, १०. चूळपुण्णमसुत्तं।
२. अनुपदवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. अनुपदसुत्तं, २. छब्बिसोधनसुत्तं, ३. सप्पुरिससुत्तं, ४. सेवितब्बासेवितब्बसुत्तं, ५. बहुधातुकसुत्तं, ६. इसिगिलिसुत्तं, ७. महाचत्तारीसकसुत्तं, ८. आनापानस्सतिसुत्तं, ९. कायगतासतिसुत्तं, १०. सङ्खारुपपत्तिसुत्तं।
३. सुञ्ञतवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. चूळसुञ्ञतसुत्तं, २. महासुञ्ञतसुत्तं, ३. अच्छरियअब्भुतसुत्तं, ४. बाकुलसुत्तं, ५. दन्तभूमिसुत्तं, ६. भूमिजसुत्तं, ७. अनुरुद्धसुत्तं, ८. उपक्किलेससुत्तं, ९. बालपण्डितसुत्तं, १०. देवदूतसुत्तं।
४. विभङ्गवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. भद्देकरत्तसुत्तं, २. आनन्दभद्देकरत्तसुत्तं, ३. महाकच्चानभद्देकरत्तसुत्तं, ४. लोमसकङ्गियभद्देकरत्तसुत्तं, ५. चूळकम्मविभङ्गसुत्तं, ६. महाकम्मविभङ्गसुत्तं, ७. सळायतनविभङ्गसुत्तं, ८. उद्देसविभङ्गसुत्तं, ९. अरणविभङ्गसुत्तं, १०. धातुविभङ्गसुत्तं, ११. सच्चविभङ्गसुत्तं, १२. दक्खिणाविभङ्गसुत्तं।
५. सळायतनवग्गो
इस वर्ग के सूत्र ये हैं- १. अनाथपिण्डिकोवादसुत्तं, २. छन्नोवादसुत्तं, ३. पुण्णोवादसुत्तं, ४. नन्दकोवादसुत्तं, ५. चूळराहुलोवादसुत्तं, ६. छछक्कसुत्तं, ७. महासळायतनिकसुत्तं, ८. नगरविन्देय्यसुत्तं, ९. पिण्डपातपारिसुद्धिसुत्तं, १०. इन्द्रियभावनासुत्तं।
इन्हें भी देखें
मज्झिम निकाय