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411 समाचार
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महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ कार्यस्थल पर सुरक्षा विधेयक, 2010

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महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ कार्यस्थल पर सुरक्षा विधेयक, 2010 बनाएँ पर 3 अगस्त 2012, सोमवार को मंजूरी दे दी भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में कार्य स्थलों पर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में, चाहे संगठित या असंगठित. उपाय लिंग समानता और सशक्तिकरण को प्राप्त करने में मदद मिलेगी. प्रस्तावित विधेयक, यदि अधिनियमित यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी कार्य स्थलों पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं की रक्षा कर रहे हैं, यह सार्वजनिक या निजी क्षेत्र में. यह उनके लिए शर्तों को हर जगह काम करने में समानता, जीवन और स्वतंत्रता और समानता लिंग का अधिकार की प्राप्ति के लिए योगदान देगा। कार्यस्थल पर सुरक्षा की भावना काम में महिलाओं की भागीदारी में सुधार, उनके आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास में परिणाम होगा। यह कानून क्या करता है? यह क़ानून कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को अवैध करार देता हैl यह क़ानून यौनउत्पीड़न के विभिन्न प्रकारों को चिह्नित करता है, और यह बताता है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की स्थिति में शिकायत किस प्रकार की जा सकती है। यह क़ानून हर उस महिला के लिए बना है जिसका किसी भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ होl इस क़ानून में यह ज़रूरी नहीं है कि जिस कार्यस्थल पर महिला का उत्पीड़न हुआ है,वह वहां नौकरी करती होl कार्यस्थल कोई भी कार्यालय/दफ्तर हो सकता है,चाहे वह निजी संस्थान हो या सरकारीl यौन उत्पीड़न क्या है? इस अधिनियम के तहत निम्नलिखित व्यवहार या कृत्य ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी में आता है: कृत्यउदाहरणइच्छा के खिलाफ छूना या छूने की कोशिश करनायदि एक तैराकी कोच छात्रा को तैराकी सिखाने के लिए स्पर्श करता है तो वह यौन उत्पीड़न नहीं कहलाएगा lपर यदि वह पूल के बाहर, क्लास ख़त्म होने के बाद छात्रा को छूता है और वह असहज महसूस करती है, तो यह यौन उत्पीड़न है lशारीरिक रिश्ता/यौन सम्बन्ध बनाने की मांग करना या उसकी उम्मीद करनायदि विभाग का प्रमुख, किसी जूनियर को प्रमोशन का प्रलोभन दे कर शारीरिक रिश्ता बनाने को कहता है,तो यह यौन उत्पीड़न है lयौन स्वभाव की (अश्लील) बातें करनायदि एक वरिष्ठ संपादक एक युवा प्रशिक्षु /जूनियर पत्रकार को यह कहता है कि वह एक सफल पत्रकार बन सकती है क्योंकि वह शारीरिक रूप से आकर्षक है, तो यह यौन उत्पीड़न हैlअश्लील तसवीरें, फिल्में या अन्य सामग्री दिखानायदि आपका सहकर्मी आपकी इच्छा के खिलाफ आपको अश्लील वीडियो भेजता है, तो यह यौन उत्पीड़न है lकोई अन्यकर्मजो यौन प्रकृति के हों, जो बातचीत द्वारा , लिख कर या छू कर किये गए हों शिकायत किसको की जानी चाहिए ? अगर आपके संगठन/ संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति हैतो उसमें ही शिकायत करनी चाहिए। ऐसे सभी संगठन या संस्थान जिनमें १० से अधिक कर्मचारी हैं,आंतरिक शिकायत समिति गठित करने के लिए बाध्य हैंl अगर संगठन ने आंतरिक शिकायत समिति नहीं गठित की है तो पीड़ित को स्थानीय शिकायत समिति में शिकायत दर्ज करानी होगीl दुर्भाग्य से कई राज्य सरकारों ने इन समितियों को पूरी तरह से स्थापित नहीं किया है और किससे संपर्क किया जाए,यह जानकारी ज्यादातर मामलों में सार्वजनिक नहीं हुई है। क्या पीड़ित की ओर से कोई और शिकायत कर सकता है ? यदि पीड़ित शारीरिक रूप से शिकायत करने में असमर्थ है (उदाहरण के लिए,यदि वह बेहोश है), तो उसके रिश्तेदार या मित्र, उसके सह-कार्यकर्ता, ऐसा कोई भी व्यक्ति जो घटना के बारे में जानता है और जिसने पीड़ित की सहमति ली है, अथवाराष्ट्रीय या राज्य स्तर के महिला आयोग के अधिकारी शिकायत कर सकते हैं l यदि पीड़ित शिकायत दर्ज करने की मानसिक स्थिति में नहीं है, तो उसके रिश्तेदार या मित्र, उसके विशेष शिक्षक, उसके मनोचिकित्सक/मनोवैज्ञानिक, उसके संरक्षक या ऐसा कोई भी व्यक्ति जो उसकी देखभाल कर रहे हैं, शिकायत कर सकते हैं। साथ ही कोई भी व्यक्ति जिसे इस घटना के बारे में पता है,उपरोक्त व्यक्तियों के साथ मिल कर संयुक्त शिकायत कर सकता है l यदि पीड़ित की मृत्यु हो चुकी है, तो कोई भी व्यक्ति जिसे इस घटना के बारे में पता हो, पीड़ित के कानूनी उत्तराधिकारी की सहमति से शिकायत कर सकता है l शिकायत दर्ज करने के बाद क्या होता है? यदि वह महिला चाहती है तो मामले को ‘कंसिलिएशन’/समाधान’ की प्रक्रिया से भी सुलझाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्ष समझौते पर आने की कोशिश करते हैं, परन्तु ऐसे किसी भी समझौते में पैसे के भुगतान द्वारा समझौता नहीं किया जा सकता है l यदि महिला समाधान नहीं चाहती है तो जांच की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे आंतरिक शिकायत समिति को 90 दिन में पूरा करना होगा l यह जांच संस्था/ कंपनी द्वारा तय की गई प्रकिया पर की जा सकती है, यदि संस्था/कंपनी की कोई तय प्रकिया नहीं है तो सामान्य कानून लागू होगा l समिति पीड़ित, आरोपी और गवाहों से पूछ ताछ कर सकती है और मुद्दे से जुड़े दस्तावेज़ भी माँग सकती है lसमिति के सामने वकीलों को पेश होने की अनुमति नहीं है l जाँच के ख़त्म होने पर यदि समिति आरोपी को यौन उत्पीडन का दोषी पाती है तो समिति नियोक्ता (अथवा कम्पनी या संस्था, आरोपी जिसका कर्मचारी है) को आरोपी के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने के लिए सुझाव देगी। नियोक्ता अपने नियमों के अनुसार कार्यवाही कर सकते हैं, नियमों के अभाव में नीचे दिए गए कदम उठाए जा सकते हैं : लिखित माफी चेतावनी पदोन्नति/प्रमोशन या वेतन वृद्धि रोकना परामर्श या सामुदायिक सेवा की व्यवस्था करना नौकरी से निकाल देना झूठी शिकायतों से यह कानून कैसे निपटता है ? यदि आंतरिक समिति को पता चलता है कि किसी महिला ने जान-बूझ कर झूठी शिकायत की है,तो उस पर कार्यवाही की जा सकती है।ऐसी कार्यवाही के तहत महिला को चेतावनी दी जा सकती है, महिला से लिखित माफ़ी माँगी जा सकती है या फिर महिला की पदोन्नति या वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है, या महिला को नौकरी से भी निकाला जा सकता है l हालांकि,सिर्फ इसलिए कि पर्याप्त प्रमाण नहीं है,शिकायत को गलत नहीं ठहराया जा सकता , इसके लिए कुछ ठोस सबूत होना चाहिए (जैसे कि महिला ने किसी मित्र को भेजे इ-मेल में यह स्वीकार किया हो कि शिकायत झूठी है )l शिकायत कैसे की जानी चाहिए ? शिकायत लिखित रूप में की जानी चाहिए। यदि किसी कारणवश पीड़ित लिखित रूप में शिकायत नहीं कर पाती है तो समिति के सदस्यों की ज़िम्मेदारी है कि वे लिखित शिकायत देने में पीड़ित की मदद करेंl उदाहरण के तौर पर, अगर वह महिला पढ़ी लिखी नहीं हैऔर उसके पास लिखित में शिकायत लिखवाने का कोई ज़रिया नहीं है तो वह समिति को इसकी जानकारी दे सकती है, और समिति की ज़िम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे की पीड़ित की शिकायत बारीक़ी से दर्ज़ की जाए l मुख्य विशेषताएँ • विधेयक यौन उत्पीड़न, जो के रूप में राजस्थान के विशाखा बनाम राज्य में माननीय सुप्रीम कोर्ट (1997) [1] द्वारा निर्धारित की एक परिभाषा का प्रस्ताव है। इसके अलावा यह वादा या कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न 'के रूप में एक महिला के रोजगार या शत्रुतापूर्ण कार्य वातावरण के सृजन की संभावनाओं के लिए खतरा पहचानता है और स्पष्ट रूप से इस तरह के कृत्यों को निषेध करने के लिए करना चाहता है। • विधेयक न केवल महिलाओं को जो कार्यरत हैं, लेकिन यह भी किसी भी औरत जो एक ग्राहक, ग्राहक, प्रशिक्षु और दैनिक तनख़्वाहदार मज़दूर के रूप में या तदर्थ क्षमता में कार्यस्थल में प्रवेश करती है के लिए सुरक्षा प्रदान करता है। छात्र, विश्वविद्यालय / कालेजों और अस्पतालों में रोगियों में अनुसंधान विद्वानों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, बिल के असंगठित क्षेत्रों में कार्यस्थलों को कवर करने के लिए करना चाहता है। • नियोक्ता जो प्रस्तावित विधेयक के प्रावधानों के साथ पालन करने में विफल एक ठीक है जो 50,000 का विस्तार कर सकते हैं के साथ दंडनीय होगा। • के बाद से वहाँ एक संभावना है कि जांच के लंबित रहने की अवधि के दौरान महिला खतरे और आक्रमण करने के लिए विषय हो सकता है, वह उसकी खुद की या तो हस्तांतरण या प्रतिवादी के रूप में अंतरिम राहत की तलाश या तलाश के काम से छुट्टी करने का विकल्प दिया गया है। • शिकायत समितियों को 90 दिनों के भीतर जांच की आवश्यकता को पूरा कर रहे हैं और 60 दिनों की एक समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन की अवधि के लिए किया गया है अधिकारी / नियोक्ता जिला दिया। विधेयक को एक प्रभावी शिकायतों और निवारण तंत्र के लिए प्रदान करता है। प्रस्तावित विधेयक के तहत, हर नियोक्ता के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति का गठन करने के लिए आवश्यक है। प्रतिष्ठानों की हमारे देश में एक बड़ी संख्या (41,200,000 41,830,000 की आर्थिक जनगणना के अनुसार, 2005) के बाद से किसके लिए कम से कम 10 कर्मचारियों की है यह करने के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की स्थापना संभव नहीं हो सकता है, बिल प्रदान करता है स्थानीय शिकायतों समिति (एलसीसी) की स्थापना के लिए नामित जिला या उप जिला स्तर पर जिला अधिकारी द्वारा गठित करने की जरूरत पर निर्भर करता है। इस जुड़वां तंत्र यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी कार्यस्थल में महिलाओं को, चाहे इसके आकार या प्रकृति का एक निवारण तंत्र के लिए उपयोग किया है। LCCs यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करने है और नियोक्ता या जिला अधिकारी को कार्रवाई की सिफारिश करेंगे। विधेयक में यौन उत्पीड़न के झूठे या दुर्भावनापूर्ण शिकायत के मामले में निगरानी के लिए प्रदान करता है। हालांकि, मात्र शिकायत को पुष्ट करने या पर्याप्त सबूत उपलब्ध कराने में असमर्थता शिकायतकर्ता सजा के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। श्रेणी:विधि श्रेणी:संविधान श्रेणी:भारत का संविधान श्रेणी:यौनाचार