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बांग्लादेश का इतिहास

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बांग्लादेश में सभ्यता का इतिहास काफी पुराना रहा है। आज के भारत का अधिकांश पूर्वी क्षेत्र कभी बंगाल के नाम से जाना जाता था। बौद्ध ग्रंथो के अनुसार इस क्षेत्र में आधुनिक सभ्यता की शुरुआत 700 इसवी ईसा पूर्व में आरंभ हुआ माना जाता है। यहाँ की प्रारंभिक सभ्यता पर बौद्ध और हिन्दू धर्म का प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है। उत्तरी बांग्लादेश में स्थापत्य के ऐसे हजारों अवशेष अभी भी मौज़ूद हैं जिन्हें मंदिर या मठ कहा जा सकता है। बंगाल का इस्लामीकरण मुगल साम्राज्य के व्यापारियों द्वारा 13वीं शताब्दी में शुरु हुआ और १६वीं शताब्दी तक बंगाल एशिया के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र के रूप में उभरा। युरोप के व्यापारियों का आगमन इस क्षेत्र में १५ वीं शताब्दी में हुआ और अंततः १६वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा उनका प्रभाव बढना शुरु हुआ। १८ वीं शताब्दी आते आते इस क्षेत्र का नियंत्रण पूरी तरह उनके हाथों में आ गया जो धीरे धीरे पूरे भारत में फैल गया। जब स्वाधीनता आंदोलन के फलस्वरुप १९४७ में भारत स्वतंत्र हुआ तब राजनैतिक कारणों से भारत को हिन्दू बहुल भारत और मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में विभाजित करना पड़ा। भारत का विभाजन होने के फलस्वरुप बंगाल भी दो हिस्सों में बँट गया। इसका हिन्दू बहुल इलाका भारत के साथ रहा और पश्चिम बंगाल के नाम से जाना गया तथा मुस्लिम बहुल इलाका पूर्वी बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा बना जो पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना गया। जमींदारी प्रथा ने इस क्षेत्र को बुरी तरह झकझोर रखा था जिसके खिलाफ १९५० में एक बड़ा आंदोलन शुरु हुआ और १९५२ के बांग्ला भाषा आंदोलन के साथ जुड़कर यह बांग्लादेशी गणतंत्र की दिशा में एक बड़ा आंदोलन बन गया। इस आंदोलन के फलस्वरुप बांग्ला भाषियों को उनका भाषाई अधिकार मिला। १९५५ में पाकिस्तान सरकार ने पूर्वी बंगाल का नाम बदलकर पूर्वी पाकिस्तान कर दिया। पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान की उपेक्षा और दमन की शुरुआत यहीं से हो गई। और तनाव स्त्तर का दशक आते आते अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया। पाकिस्तानी शासक याहया खाँ द्वारा लोकप्रिय अवामी लीग और उनके नेताओं को प्रताड़ित किया जाने लगा, जिसके फलस्वरुप बंगबंधु शेख मुजीवु्ररहमान की अगुआई में बांग्लादेशा का स्वाधीनता आंदोलन शुरु हुआ। बांग्लादेश में खून की नदियाँ बही, लाखों बंगाली मारे गये तथा १९७१ के खूनी संघर्ष में दस लाख से ज्यादा बांग्लादेशी शरणार्थी को पड़ोसी देश भारत में शरण लेनी पड़ी। भारत इस समस्या से जूझने में उस समय काफी परेशानियों का सामना कर रहा था और भारत को बांग्लादेशियों के अनुरोध पर इस सम्स्या में हस्तक्षेप करना पड़ा जिसके फलस्वरुप १९७१ का भारत पाकिस्तान युद्ध शुरु हुआ। बांग्लादेश में मुक्ति वाहिनी सेना का गठन हुआ जिसके ज्यादातर सदस्य बांग्लादेश का बौद्धिक वर्ग और छात्र समुदाय था, इन्होंने भारतीय सेना की मदद गुप्तचर सूचनायें देकर तथा गुरिल्ला युद्ध पद्धति से की। पाकिस्तानी सेना ने अंतत: १६ दिसम्बर १९७१ को भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, लगभग ९३००० युद्ध बंदी बनाये गये जिन्हें भारत में विभिन्न कैम्पों में रखा गया ताकि वे बांग्लादेशी क्रोध के शिकार न बनें। बांग्लादेश एक आज़ाद मुल्क बना और मुजीबुर्र रहमान इसके प्रथम राष्ट्रपति बने। बांग्लादेश के इतिहास की मुख्य घटनाएँ right|thumb|300px|सोमपुर महाविहार right|thumb|300px|शेख मुजीबुर्र रहमान 1947 - भारत के विभाजन के बाद बंगाल से कटकर पूर्वी पाकिस्तान बना। 1949 - अवामी लीग की स्थापना हुई जिसका उद्देश्य पूर्वी पाकिस्तान को स्वायत्तता दिलाना था। 1966 - छः बिन्दु आन्दोलन की घोषणा 1970 - शेख मुजीब के नेतृत्व में अवामी लीग ने पाकिस्तानी आम चुनाव, १९७० में भारी बहुमत हासिल किया, पाकिस्तान की सरकार ने इन परिणामों को मानने से इनकार कर दिया। पाकिस्तानी सरकार के इस निर्णय के बाद दंगे भड़क उठे. 1971 - शेख़ मुजीब और अवामी लीग ने 26 मार्च को स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। नए देश का नाम रखा गया बांग्लादेश, लड़ाई की मार से बचने के लिए करीब एक करोड़ लोग भारत की सीमा में शरणार्थी बनकर आए। 1972 - शेख़ मुजीब प्रधानमंत्री बने। उन्होनें उद्योगों के राष्ट्रीयकरण का अभियान चलाया लेकिन ज़्यादा कामयाबी नहीं मिली। 1974 - देश में भीषण बाढ़ से पूरी फ़सल तबाह 28,000 लोग की मौत. देश में आपात स्थिति, राजनैतिक गड़बड़ियों की शुरूआत. 1975 - शेख़ मुजीब बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने। अगस्त में हुए सैनिक तख्ता पलट के बाद उनकी हत्या कर दी गई, देश में सैनिक शासन लागू हो गया। 1976 -सैनिक शासन ने ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगाया. 1977 - जनरल ज़िया -उर -रहमान राष्ट्रपति बने। इस्लाम को सांविधानिक मान्यता दी गई। 1979 - देश में चुनाव हुए और सैनिक शासन समाप्त हुआ। जनरल ज़िया -उर -रहमान की बांग्लादेश नेशनल पार्टी ने बहुमत हासिल किया। 1981' - जनरल ज़िया तख़्ता पलट की कोशिश में मारे गए। अब्दुस सत्तार राष्ट्रपति बने। 1982 - एक और तख्ता पलट के बाद जनरल एरशाद सत्ता में आए। संविधान और राजनैतिक दलों की वैधता समाप्त की गई। 1983 - सभी स्कूलों में अरबी और क़ुरान की पढ़ाई के जनरल एरशाद के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू हुए. सीमित राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी गई। एरशाद राष्ट्रपति बने। 1986 - संसद और राष्ट्रपति के लिए चुनाव हुए, एरशाद विजयी रहे। सैनिक शासन हटा और संविधान को बहाल किया गया। 1987 - विपक्ष की हड़ताल के बाद देश में इमरजेंसी लगाई गई। 1988 - एक -तिहाई देश पानी में डूबा, लाखों लोग बेघर हुए. 1990 - भारी जन -विरोध के बाद एरशाद पद से हटे. 1991 - भ्रष्टाचार के आरोप में एरशाद जेल भेजे गए। जनरल ज़िया -उर -रहमान की विधवा ख़ालिदा ज़िया प्रधानमंत्री बनीं। संविधान में परिवर्तन करके राष्ट्रपति के अधिकार सीमित कर दिए गए। चक्रवाती तूफ़ान ने लगभग डेढ़ लाख लोगों की जान ली। 1996 -अवामी लीग सत्ता में लौटी, शेख़ हसीना प्रधानमंत्री बनीं। देश में हड़तालों का दौर शुरू हुआ। 1998 -बाढ़ ने पूरे देश में तबाही मचाई. 1975 के मुजीब हत्याकांड के लिए ज़िम्मेदार 15 पूर्व सैनिक अधिकारियों को मौत की सज़ा सुनाई गई। 2000 -स्वतंत्रता की लड़ाई के बारे में एक पाकिस्तानी राजनयिक के बयान पर विवाद हुआ, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संबंधों में कटुता आई. 2001' -आम चुनाव में शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग हार गई और धार्मिक दलों के समर्थन के साथ जातीय पार्टी सत्ता में आई और बेग़म ख़ालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं। २००८ - भारी बहुमत के बाद शेख़ हसीना फिर से प्रधानमंत्री बनीं। २०१३ - जमात-ए-इस्लामी पार्टी के नेता अब्दुल कादर मुल्ला को 1971 के बंगलादेश मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए युद्ध-अपराधों के लिए फाँसी दी गयी। इन्हें भी देखें बांग्लादेश स्वाधीनता युद्ध बांग्ला भाषा आन्दोलन बांग्लादेश की सेना बाहरी कड़ियाँ बांग्लादेश के युद्ध अपराधी (जनसत्ता) श्रेणी:एशिया के देश श्रेणी:बंगाल श्रेणी:बंगाल का इतिहास श्रेणी:दक्षिण एशिया का इतिहास श्रेणी:भारतीय उपमहाद्वीप का इतिहास श्रेणी:एशिया का इतिहास श्रेणी:बांग्लादेश का इतिहास श्रेणी:बांग्लादेश