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बुधिया सिंह
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बुधिया सिंह (जन्म 2002) भारत के ओड़िशा राज्य का एक शिशु मैराथन धावक है। लंबी दौड़ के लिए 'लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाडर्स' में उसका नाम सम्मिलित हो चुका है।उड़ीसा के साढ़े चार साल के मैराथन धावक बुधिया सिंह ने 65 किलोमीटर की दूरी सात घंटे और दो मिनट में तय करके नया रिकॉर्ड बनाया है. बुधिया ने मंगलवार तड़के चार बजे पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से अपनी दौड़ शुरू की और सात घंटे और दो मिनट बाद राजधानी भुवनेश्वर पहुँचे.
बुधिया के कोच बिरंची दास ने बताया कि इस उम्र का कोई भी बच्चा ऐसा रिकॉर्ड नहीं बना पाया है.
उन्होंने बताया कि लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारी भी इस मौक़े पर मौजूद थे जिन्होंने इसकी पुष्टि की है कि बुधिया का नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो जाएगा.
बुधिया ने जब पुरी से अपनी दौड़ शुरू की, तो बड़ी संख्या में लोग वहाँ मौजूद थे. लोगों ने बुधिया का उत्साह बढ़ाया और उसके समर्थन में नारे भी लगाए.
बुधिया के कोच बिरंची दास के मुताबिक़ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) के कम से कम 200 जवान भी बुधिया के नैतिक समर्थन में उसके साथ दौड़ रहे थे.
बिरंची दास का दावा है कि उन्होंने बुधिया की प्रतिभा को सँवारा बड़ी संख्या में मीडिया के लोग भी इस आयोजन को कवर करने के लिए वहाँ मौजूद थे. जिसे सीआरपीएफ़ प्रायोजित कर रहा था.
भुवनेश्वर पहुँचने के बाद बुधिया को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसका परीक्षण किया गया. बुधिया सिंह दिल्ली हाफ़ मैराथन सहित कई दौड़ों में हिस्सा ले चुका है.
बुधिया की प्रतिभा की खोज कैसे हुई, ये कहानी कम रोचक नहीं. घरों में बर्तन माँजने का काम करने वाली उसकी माँ ने ग़रीबी से तंग आकर इस प्रतिभावान धावक को सिर्फ़ 800 रूपए में बेच दिया था.
उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में रहने वाले बुधिया पर जूडो के कोच बिरंची दास की नज़र पड़ी.
बिरंची दास का कहना है कि उन्होंने दूसरे बच्चों को तंग करने के लिए बुधिया को कई बार डाँट लगाई, एक बार नाराज़ होकर उन्होंने बुधिया को दौड़ लगाने की सज़ा दी और कहा कि जब तक मना न किया जाए वह दौड़ता रहे.
बिरंची बताते हैं, "मैं किसी काम में व्यस्त हो गया जब पाँच घंटे बाद मैं लौटा तो दंग रह गया, वह दौड़ता ही जा रहा था."
बिरंची दास का दावा है कि उन्होंने बुधिया की प्रतिभा को और सजाया-सँवारा. लेकिन उन पर बाल शोषण का भी आरोप लगा है और इस मामले में उनके ख़िलाफ़ जाँच भी चल रही है.
बिरंची दास पर आरोप है कि उन्होंने अपने फ़ायदे के लिए बुधिया का इस्तेमाल किया. हालाँकि बिरंची दास इन आरोपों से इनकार करते हैं.
== परिचय ==
वह एक अत्यन्त गरीब परिवार का बेटा है जिसे उसकी माँ मां सुकांति सिंह ने अपने बेटे को मात्र 800 सौ रुपये में एक आदमी को बेच दिया था। बाद में एक स्थानीय खेल के कोच बिरंची दास की नजर बुधिया पर पड़ी। बिरंची दास ने बुधिया को गोद लिया और उनकी देख-रेख में उसने मैराथन दौड़ने का प्रशिक्षण दिया। बिरंची दास की रहस्यमय तरीके से हत्या हो गई थी।
नन्हें बुधिया के चर्चा में आते ही विभिन्न संस्थाओं ने उसके लिए ढेरों कोष बनाने की घोषणाएं की थीं।
बुधिया सिंह के जीवन पर आधारित पर एक फ़िल्म भी आ रही है, बुधिया सिंह – बॉर्न टु रन (Budhia Singh – Born to Run), जिसे अगस्त २०१६ में रिलीज किया जायेगा।
== सन्दर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
Videos on Budhia Singh (3 parts)
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