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बोनालु
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बोनालु hindu काली माँ का त्यौहार Parikrama.jpg बोनम के साथ परिक्रमा करती हुईं स्त्रियाँ बोनालु तेलंगाना आषाढ़ (जुलाई/अगस्त) 10 July-July 31 on Sundays Offering to the Goddess वार्षिक
बोनालु (तेलुगु: బోనాలు) तेलंगाना की महाकाली हिंदू देवी पर केंद्रित एक पारंपरिक त्योहार है।Telangana state portal Language and Cultureयह त्योहार प्रतिवर्ष जुड़वां शहरों हैदराबाद और सिकंदराबाद में, साथ ही राज्य के अन्य हिस्सों में भी मनाया जाता है।Reddy Suhasini 2019-07-20 BONALU Celebrations started in Telangana State with Gaiety https://www.thehansindia.com/life-style/spiritual/bonalu-celebrations-started-in-telangana-state-with-gaiety-548226 2020-08-07 www.thehansindia.com en यह आषाढ़ मासम के महीने में मनाया जाता है, जो लगभग जुलाई और/या अगस्त के आसपास होता है। उत्सव के पहले और अंतिम दिन येल्लम्मा (महाकाली के कई क्षेत्रीय रूपों में से एक) के लिए विशेष "पूजाएँ" (पूजा/अनुष्ठान) की जाती हैं।http://www.hinduonnet.com/thehindu/lf/2002/08/05/stories/2002080501520200.htm The Hindu : The spirit of 'Bonalu' 24 July 2007 https://web.archive.org/web/20080227014333/http://www.hinduonnet.com/thehindu/lf/2002/08/05/stories/2002080501520200.htm 27 February 2008 usurpedयह त्योहार मन्नतों की पूर्ति के लिए महाकाली के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के रूप में भी माना जाता है।2019-07-29 Bonalu Festival 2019: Vibrant Pictures From the Thanksgiving Festival https://www.news18.com/photogallery/india/bonalu-festival-2019-vibrant-pictures-from-the-thanksgiving-festival-2251583.html 2020-08-07 News18
शब्द ‘Bonam’ शब्द ‘Bhojanam’ का संक्षिप्त रूप है, जो संस्कृत से लिया गया एक उधार शब्द है, जिसका अर्थ तेलुगु भाषा में भोजन या दावत होता है। यह महाकाली को अर्पित किया जाने वाला एक चढ़ावा है। महिलाएँ दूध और गुड़ से पकाए गए चावल को नए पीतल या मिट्टी के बर्तन में तैयार करती हैं, जिसे नीम की पत्तियों, हल्दी और सिंदूर से सजाया जाता है, तथा बर्तन के ऊपर एक जलता हुआ दीपक रखा जाता है। महिलाएँ इन बर्तनों को अपने सिर पर रखकर ले जाती हैं और मंदिरों में महाकाली को ‘Bonam’ के साथ हल्दी-सिंदूर, चूड़ियाँ और साड़ी अर्पित करती हैं।
बोनालू त्योहार की उत्पत्ति
इस त्योहार की उत्पत्ति 18वीं शताब्दी में तत्कालीन हैदराबाद राज्य से जुड़ी मानी जाती है, और इसका संबंध “रेजिमेंटल बाज़ार” तथा हैदराबाद और सिकंदराबाद के जुड़वां शहरों से है। वर्ष 1813 में इन जुड़वां शहरों में प्लेग फैल गया था, और इसने हज़ारों लोगों की जान ले ली। इससे ठीक पहले, हैदराबाद से एक सैन्य बटालियन को उज्जैन में तैनात किया गया था, जहाँ महाकालेश्वर के रूप में शिव का एक मंदिर है। जब हैदराबाद की इस सैन्य बटालियन को यह समाचार मिला कि उनके मूल क्षेत्र में महामारी फैल गई है, तो वे अपने परिवारों के जीवन और सुरक्षा को लेकर भयभीत हो गए। उज्जैनी में तैनात सैनिकों ने उज्जैन, मध्य प्रदेश के महाकाली मंदिर में देवी से प्रार्थना की। कहा जाता है कि बटालियन ने महाकाली से प्लेग को नष्ट करने की प्रार्थना की और यह वचन दिया कि यदि देवी ऐसा करेंगी तो वे घर लौटने पर शहर में महाकाली की एक मूर्ति स्थापित करेंगे। यह माना जाता है कि महाकाली ने रोग को नष्ट कर दिया और महामारी को दूर रखा। जब बटालियन अपने मूल क्षेत्र में लौटी, तो उन्होंने अपने वचन की पूर्ति के रूप में उज्जैनी महाकाली मंदिर का निर्माण किया और देवी की मूर्ति स्थापित की। इसके बाद उन्हें बोनालु अर्पित किया गया। इसके पश्चात यह एक परंपरा बन गई, जिसका पालन तेलंगाना के अधिकांश लोग करते हैं।
thumb|हैदराबाद में बोनाला का एक प्रदर्शन, 2019
पोथुराजू
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पोथाराजू महाकाली का भाई है। जुलूस में उसकी भूमिका एक सशक्त, निर्वस्त्र ऊपरी शरीर वाले पुरुष द्वारा निभाई जाती है, जो एक छोटी, कसकर लिपटी हुई लाल धोती पहनता है, टखनों में घंटियाँ बाँधे रहता है, तथा उसके शरीर पर हल्दी और माथे पर सिंदूर लगाया होता है। वह जुलूस में गूंजते हुए ढोलों की ताल पर नृत्य करता है।http://www.hindu.com/2006/07/24/stories/2006072415410200.htm https://web.archive.org/web/20060923001218/http://www.hindu.com/2006/07/24/stories/2006072415410200.htm dead 2006-09-23 The Hindu 2006-07-24 Archive News
पोथराजू हमेशा पलाहरम बंडी, अर्थात् जुलूस, के सामने नृत्य करता है। उसे उत्सवों का आरंभकर्ता और समुदाय का रक्षक माना जाता है। वह महाकाली के वशीभूत (शिगम के रूप में ज्ञात) महिला नर्तकियों का नेतृत्व करते हुए उन्हें मंदिर तक ले जाता है; उनके हाथों में फटकारने वाले कोड़े होते हैं और उनकी कमर के चारों ओर पन्ना रंग की नीम की पत्तियाँ (मार्गोसा) बंधी होती हैं, तथा उनके साथ तुरहियाँ और ढोल-नगाड़े बजते हैं।http://www.hindu.com/2007/03/28/stories/2007032816230500.htm https://web.archive.org/web/20120711025454/http://www.hindu.com/2007/03/28/stories/2007032816230500.htm dead 2012-07-11 The Hindu 2007-03-28 Archive News
रंगम
‘‘रंगम’’ (या ‘‘दैववाणी का प्रदर्शन’’), उत्सव की अगली सुबह आयोजित किया जाता है। एक महिला मिट्टी के घड़े के ऊपर खड़ी होकर देवी महाकाली का ‘‘आह्वान’’ अपने भीतर करती है और इस परंपरा का पालन करती है। वह भविष्य के बारे में पूछने वाले भक्तों के लिए आने वाले वर्ष की भविष्यवाणी करती है। यह सब जुलूस शुरू होने से पहले होता है।http://www.hindu.com/2004/07/11/stories/2004071113180300.htm https://web.archive.org/web/20040712150457/http://www.hindu.com/2004/07/11/stories/2004071113180300.htm dead 12 July 2004 Government urged to declare holiday tomorrow Our Staff Reporter 7 November 2004 03 The Hindu The Hindu (old)
घटम
घटम एक तांबे का बर्तन है, जिसे माता देवी के स्वरूप में सजाया जाता है। घटम को एक पुजारी द्वारा उठाया जाता है, जो पारंपरिक धोती पहनता है और जिसके शरीर पर हल्दी लगी होती है। घटम को त्योहार के पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक जुलूस में ले जाया जाता है, जब इसका पानी में विसर्जन किया जाता है। घटम के साथ आमतौर पर ढोल-नगाड़ों की थाप होती है।Secunderabad awash in Bonalu colours https://www.newindianexpress.com/states/andhra-pradesh/2009/jul/13/secunderabad-awash-in-bonalu-colours-67598.html The New Indian Express 15 May 2012
उत्सव का समापन ‘‘घटम’’ के विसर्जन के साथ होता है। हरिबोवली के अक्कन्ना मडन्ना मंदिरhttp://www.hindu.com/2006/07/15/stories/2006071522130200.htm https://web.archive.org/web/20070930225245/http://www.hindu.com/2006/07/15/stories/2006071522130200.htm dead 2007-09-30 The Hindu 2006-07-15 Archive Newshttp://akkannamadannatemple.com/history.html New Page 1 5 April 2009 https://web.archive.org/web/20090624040408/http://akkannamadannatemple.com/history.html 24 June 2009 dead का ‘‘घटम’’ जुलूस का नेतृत्व करता है, जिसे एक हाथी के ऊपर रखा जाता है और इसके साथ घुड़सवार घोड़े तथा अक्कन्ना और मडन्ना को दर्शाने वाली झांकियाँ होती हैं।यह शाम को एक चमकदार जुलूस तथा भव्य तामझाम और प्रदर्शन के साथ समाप्त होता है, जिसके बाद नयापुल में ‘घटमों’ का विसर्जन किया जाता है।http://www.hindu.com/2007/08/06/stories/2007080657970200.htm https://web.archive.org/web/20071206053631/http://www.hindu.com/2007/08/06/stories/2007080657970200.htm dead 2007-12-06 The Hindu 2007-08-06 Archive News
गैलरी
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
बोनालु - तेलंगाना का लोक त्यौहार, जो अब विश्व में अपनी पहचान बना रहा है
श्रेणी:हिन्दू त्यौहार