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रंग पंचमी
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छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र में इस दिन गाँव गाँव मे पकवान बनाये जाते है खूब धूम धाम से इसे बनाया जाता है इस पर्व को होली के पांचवे दिन बनाया जाता है। महाराष्ट्र में होली के बाद पंचमी के दिन रंग खेलने की परंपरा है। यह रंग सामान्य रूप से सूखा गुलाल होता है। विशेष भोजन बनाया जाता है जिसमे पूरनपोली अवश्य होती है। मछुआरों की बस्ती मे इस त्योहार का मतलब नाच, गाना और मस्ती होता है। ये मौसम रिशते (शादी) तय करने के लिये मुआफिक होता है, क्योंकि सारे मछुआरे इस त्योहार पर एक दूसरे के घरों को मिलने जाते है और काफी समय मस्ती मे व्यतीत करते हैं।http://www.jitu.info/merapanna/?p=503?ref=BenimShopum.com होली के रूप अनेक : भाग दो 4 मार्च 2008 एचटीएम मेरा पन्ना https://web.archive.org/web/20181117192926/http://www.jitu.info/merapanna/?p=503%3Fref%3DBenimShopum.com 17 नवंबर 2018 dead राजस्थान में इस अवसर पर विशेष रूप से जैसलमेर के मंदिर महल में लोकनृत्यों में डूबा वातावरण देखते ही बनता है जब कि हवा में लाला नारंगी और फ़िरोज़ी रंग उड़ाए जाते हैं।http://www.indialife.com/Festivals/holi.htm Holi Rangapanchami 4 मार्च 2008 एचटीएम इंडियालाइफ़.कॉम अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20080303194108/http://www.indialife.com/Festivals/holi.htm 3 मार्च 2008 dead मध्यप्रदेश के नगर इंदौर व उज्जैन में इस दिन सड़कों पर रंग मिश्रित सुगंधित जल छिड़का जाता है।http://www.indorecity.net/culture/festivals.html Indore Festivals 4 मार्च 2008 एचटीएमएल इंदौरसिटी.नेट अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20080704065140/http://www.indorecity.net/culture/festivals.html 4 जुलाई 2008 dead लगभग पूरे मालवा प्रदेश में होली पर जलूस निकालने की परंपरा है। जिसे गेर कहते हैं। जलूस में बैंड-बाजे-नाच-गाने सब शामिल होते हैं। नगर निगम के फ़ायर फ़ाइटरों के वाॅटर (पानी) ट्रकों में रंगीन पानी भर कर जुलूस के तमाम रास्ते भर लोगों पर रंग डाला जाता है। जुलूस में हर धर्म के, हर राजनीतिक पार्टी के लोग शामिल होते हैं, प्राय: महापौर (मेयर) ही जुलूस का नेतृत्व करता है। प्राचीनकाल में जब होली का पर्व कई दिनों तक मनाया जाता था तब रंगपंचमी होली का अंतिम दिन होता था और उसके बाद कोई रंग नहीं खेलता था। उज्जैन में रंगपंचमी पर गैर निकालने की सदियों पुरानी परंपरा को पुनः नए रूप में शुरुआत वर्तमान महापौर श्री मुकेश टटवाल के द्वारा 2023 से की गई है जो कि सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
सन्दर्भ
श्रेणी:होली
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