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माता
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300px|thumb|right|सिक्किम की एक माँ अपने बच्चे को पीठ पर बाँधे हुए
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thumb|माता की ममता
thumb|right|चित्रकार विलियम एडल्फ बोगुरे द्वारा बनाया हुआ चित्र- माता की तस्वीर
माता वह है जिसके द्वारा कोई प्राणी जन्म लेता है।
माता का संस्कृत मूल मातृ है। हिन्दी में इस शब्द का प्रयोग प्रायः इष्टदेवी को संबोधित करने के लिए किए जाता है, पर सामान्यरूप से माँ शब्द का प्रयोग ज्यादा होता है।
परिभाषा
इंसानों के परिपेक्ष में माता अपने गर्भ में बच्चे को धारण करती है और भ्रूण के विकास के बाद उसे जन्म देती है। माँ, हर एक के जीवन में महत्वपूर्ण व सर्वश्रेष्ठ होती है क्योंकि इस दुनिया में किसी भी चीज को माँ की ममता https://web.archive.org/web/20210505223605/https://www.dilkibaaten.in/2021/01/maa-par-kavita-in-hindi.html 5 मई 2021 से नहीं तोला जा सकता।
मातृत्व दिवस
अन्तर्राष्ट्रीय मातृत्व दिवस सम्पूर्ण मातृ-शक्ति को समर्पित एक महत्वपूर्ण दिवस है, जिसे मदर्स डे, मातृ दिवस या माताओं का दिन चाहे जिस नाम से पुकारें यह दिन सबके मन में विशेष स्थान लिए हुए है। पूरी जिंदगी भी समर्पित कर दी जाए तो माँ के ऋण से उऋण नहीं हुआ जा सकता है। संतान के लालन-पालन के लिए हर दुख का सामना बिना किसी शिकायत के करने वाली माँ के साथ बिताये दिन सभी के मन में आजीवन सुखद व मधुर स्मृति के रूप में सुरक्षित रहते हैं। भारतीय संस्कृति में माँ के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा रही है, लेकिन आज आधुनिक दौर में जिस तरह से मदर्स डे मनाया जा रहा है, उसका इतिहास भारत में बहुत पुराना नहीं है। इसके बावजूद दो-तीन दशक से भी कम समय में भारत में मदर्स डे काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
मातृपञ्चकम्
मातृपञ्चकम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित पांच पद्यों का समूह है जिसमें माता द्वारा शिशु के जन्म के समय सहे गये कष्टों का वर्णन है।
आस्तां तावदियं प्रसूति समये दुर्वारशूलव्यथा नैरुच्यं तनुशोषणं मलमपि शय्या च सांवत्सरि।
एकस्यापि न गर्भभार-भरण क्लेशस्य यस्याक्षमो दातुं निष्कृतिमुन्नतोऽपि तनयः तस्यै जनन्यै नमः ॥
गुरुकुलमुपसृत्य स्वप्नकालेऽपि तु दृष्ट्वा यतिसमुचितवेषं प्रारुदो मां त्वमुच्चैः।
गुरुकुलमुपसृत्य सर्वं प्रारुदत्ते समक्षम् सपदि चरणयोस्ते मातुरस्तु प्रणामः ॥
न दत्तं मातस्ते मरणसमये तोयमपि वा स्वगावा नो दत्ता मरणदिवसे श्राद्धविधिना ।
न दत्तो मातस्ते मरणसमये तारकमनुः अकाले सम्प्राप्ते मयि कुरु दयां मातः अतुलाम् ॥
मुक्तामणिस्त्वं नयनं नमेति राजेति जीवेति चिरं सुत त्वम् । इति उक्तवत्याः तव वाचि मातः ददाम्यहं तण्डुलमेव शुष्कम् ॥
अम्बेति तातेति शिवेति तस्मिन् प्रसूति काले कियदवोच उच्चैः । कृष्णेति गोविन्देति हरे मुकुन्देति अहो जनन्यै रचितोऽयम् अञ्जलिः ॥मातृपञ्चकम् (अंग्रेजी में अर्थ सहित)
माँ बनने की सही उम्र क्या है
गर्भवती होने के लिए सही उम्र 30 वर्ष से कम होती है क्योंकि 30 वर्ष के बाद महिलाओं के प्रजनन स्तर में कमी आ जाती है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, वैसे ही शरीर में अंडे का उत्पादन घटता है जिससे आप में बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जब आपकी उम्र। 17 से 30 के बीच है, तब वो प्रेग्नेन्सी का सही उम्र समय है। अमेरिकी सोसाइटी ऑफ रिप्रोडक्टिव मेडिसिन के मुताबिक 30 साल की उम्र के बाद हर गुजरते महीने में गर्भवती https://web.archive.org/web/20201205020216/https://drkalyani.in/%E0%A4%B2%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80/ 5 दिसंबर 2020 , लड़की को माँ बनने की सही उम्र क्या है होने की संभावना 20 फीसदी कम हो जाती है, भले ही एक महिला कितनी स्वस्थ क्यों न हो। और एक बार जब आप 35 की उम्र तक पहुँच जाती हैं, तो प्रेग्नेंट होने, गर्भावस्था बनाए रखने और स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की संभावना काफी कम हो जाती है। नोवा मेडिकल सेंटर्स की स्टडी के अनुसार 31 साल या उससे अधिक की आयु की 68% महिलाओं ने फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का विकल्प चुना जबकि लगभग 31 से 35 साल की 36% महिलाओं और 35 साल से अधिक उम्र की 32% महिलाओं ने यह विकल्प चुना।
अगर आप 35 वर्ष के बाद या ज़्यादा उम्र में माँ बनने का सोचती हैं तो आपको सी-सेक्शन ( सीजेरियन आपरेशन) कराना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, देर से गर्भधारण में आपके बच्चे में न्यूरल ट्यूब दोष या डाउन सिंड्रोम जैसी जेनेटिक असमानताएँ विकसित होने की संभावनाएँ अधिक रहती हैं। हालाँकि नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड और एम्नियोसेन्टेसिस टेस्ट (amniocentesis - कुछ खास तरह के जन्मजात दोषों का पता लगाने की लिए टेस्ट) के साथ आप गर्भ में पल रहे बच्चे के समग्र विकास और ग्रोथ पर एक नजर रख सकते हैं।
चर्चित माताएँ
यशोदा
कुन्ती
सीता
पार्वती
मायादेवी
पन्ना धाय
देखें
परिवार
मातृत्व का बंधन
सन्दर्भ
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